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खजरी असनान – गुड़ी के गोठ
असनान तो वइसे कई किसम के होथे जइसे घुरघुरहा असनान, पानी छींचे असनान, साबुन असनान, झुक्खा असनान, गंगा असनान, शाही असनान, कुंभ असनान, चिभोरा असनान फेर Read More » -
युग प्रवर्तक हीरालाल काव्योपाध्याय
छत्तीसगढ़ी भासा के पुन-परताप ल उजागर करे बर धनी धरमदास जी, लोचनप्रसाद पाण्डे, सुन्दरलाल शर्मा जइसे अऊ कतकोन कलमकार अऊ साहित्यकार मन के योगदान हे। अइसने Read More » -
मया बर हर दिन ‘वेलेन्टाइन डे’ होथे
अपन मया ल देखाय बर एक तिहार मनाये जाथे। जेन ल ‘वेलेन्टाइन डे’ कहे जाथे। येला आज जम्मो दुनिया के मन मनाथे। आज मया खतम होगे Read More » -
लोक रंजनी लोक नाट्य : नाचा
कोनो भी प्रदेश के लोक नाट्य म हमर बीच के बोली अउ अपन बीच के कलाकार संग सिंगार के सहजता अउ सामाजिक संदेस होथे, जेखर भीतरी Read More »
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आपके पंदोली
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संजीव तिवारी: आदरणीय कुबेर जी, धन्यवाद. आपकी टिप्पणी नें मुझे »
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Ajay Sahu "Amritanshu ": किशोर भाई आपके बसंत के गीत अडबड सुघ्घर हवय ,भिलाई »
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Ajay Sahu "Amritanshu ": बड दिन बाद बढिया छत्तीसगढी बियंग गद्य म पढे ल मिलि »
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गुरतुर गोठ बर संगी मन के छत्तीसगढी रचना, आडियो, वीडियो के अगोरा हावय, आप अपन रचना के सीडी हमला भेज सकत हावव, सीडी ला आप हमला मेल घलव कर सकत हावव.
बुधराम यादव वरिष्ठ संपादक
संजीव तिवारी संपादक
संपादकीय कार्यालय :
सूर्योदय नगर, खण्डेलवाल कालोनी
दुर्ग, छत्तीसगढ 491001
रचना भेजे के पहिली चिटिकन ये कड़ी ला पढ़ लेवव -
हमर उदीम मेकराजाला म छत्तीसगढी भाखा के रचना मन ला धरनहा राख के एके जघा सकेले के हावय. हमर छत्तीसगढ के रहइया मन ला तो हमर भाखा के साहित्य के भंडार ल झांके बर मिल जाथे, फेर इहां ले बाहिर रहइया हमर भाखा के परेमी मन बर अपन महतारी भाखा ला पढे अउ सुने के ये ह सुघ्घर साधन आय. गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम कइसे लागिस हमला बताहू.