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जुन्ना सोच लहुटगे हमर रंग बहुरगे
सर्दी के मौसम के जाती अउ गरमी के आती के बेरा एक संधिकाल आय। ये संधिकाल के मौसम के ‘काय कहना?’ ठंड के सिकुड़े देह मौसम Read More » -
सुधा वर्मा के गोठ बात : नवरात म सक्ति के संचार
नवरात्र के शुरूवात घट इसथापना ले होथे घट म पानी भर के आमा पत्ता ले सजा के ऊपर म अनाज रखे जाथे। प्रकृति ले जुरे तिहार Read More » -
महतारी के मया
मातृत्व दिवस के बात आइस त मोला बचपन म देखे एकठन नाचा के गम्मत हर सुरता आगे। ओ गम्मत के भाव रहिस कि माँ हर बेटा Read More » -
मंगल कामना के दिन आय अक्ती
ठाकुर देवता के देरौठी म तो धान बोय के पूरा प्रक्रिया चलथे। ये दिन परसा पाना के महत्व बाढ़ जथे। परसा पाना के दोना बना के Read More »
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आपके पंदोली
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संजीव तिवारी: आदरणीय कुबेर जी, धन्यवाद. आपकी टिप्पणी नें मुझे »
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Ajay Sahu "Amritanshu ": किशोर भाई आपके बसंत के गीत अडबड सुघ्घर हवय ,भिलाई »
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Ajay Sahu "Amritanshu ": बड दिन बाद बढिया छत्तीसगढी बियंग गद्य म पढे ल मिलि »
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गुरतुर गोठ बर संगी मन के छत्तीसगढी रचना, आडियो, वीडियो के अगोरा हावय, आप अपन रचना के सीडी हमला भेज सकत हावव, सीडी ला आप हमला मेल घलव कर सकत हावव.
बुधराम यादव वरिष्ठ संपादक
संजीव तिवारी संपादक
संपादकीय कार्यालय :
सूर्योदय नगर, खण्डेलवाल कालोनी
दुर्ग, छत्तीसगढ 491001
रचना भेजे के पहिली चिटिकन ये कड़ी ला पढ़ लेवव -
हमर उदीम मेकराजाला म छत्तीसगढी भाखा के रचना मन ला धरनहा राख के एके जघा सकेले के हावय. हमर छत्तीसगढ के रहइया मन ला तो हमर भाखा के साहित्य के भंडार ल झांके बर मिल जाथे, फेर इहां ले बाहिर रहइया हमर भाखा के परेमी मन बर अपन महतारी भाखा ला पढे अउ सुने के ये ह सुघ्घर साधन आय. गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम कइसे लागिस हमला बताहू.