Chhattisgarhi
मन के धन ला छीन पराईस
टूटिस पलक के सीप
उझर गे पसरा ओखर
बांचे हे दू चार
कि अखिंयन मोती ले लो ।
आस बंता गे आज दिया सपना दिखता हे
सुन्ना परगे राज जीव अंगरा सेंकत हे
सुख के ननपन में समान दुख पाने हावै
चारो खुंट अधियार के निंदिया जागे हावै
काजर कंगलू हर करियायिस
जम चौदस के रात
बारिस इरखा आगी में
बेंचै राख सिगार
सहज सुरहोती ले लो ।
कि अंखिंयन मोती ले लो ।
नारायण लाल परमार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Protected by WP Anti Spam