Category: कविता

तीजा तिहार

रद्दा जोहत हे बहिनी मन,
हमरो लेवइया आवत होही।
मोटरा मा धरके ठेठरी खुरमी,
तीजा के रोटी लावत होही।।

भाई आही तीजा लेगे बर,
पारा भर मा रोटी बाँटबोन।
सब ला बताबो आरा पारा,
हम तो अब तीजा जाबोन।।

घुम-घुम के पारा परोस में,
करू भात ला खाबोन।
उपास रहिबो पति उमर बर,
सुग्घर आसिस पाबोन।।

फरहार करबो ठेठरी खुरमी,
कतरा पकवान बनाके।।
मया के गोठियाबोन गोठ,
जम्मों बहिनी जुरियाके।

रंग बिरंगी तीजा के लुगरा,
भाई मन कर लेवाबोन।
अइसन सुग्घर ढ़ंग ले संगी,
तीजा तिहार ला मनाबोन।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

तीजा पोरा

तीजा पोरा के दिन ह आगे , सबो बहिनी सकलावत हे।
भीतरी में खुसर के संगी , ठेठरी खुरमी बनावत हे।।

अब्बड़ दिन म मिले हन कहिके, हास हास के गोठियावत हे।
संगी साथी सबो झन,  अपन अपन किस्सा सुनावत हे।।

भाई बहिनी सबो मिलके , घुमे के प्लान बनावत हे।
पिक्चर देखे ला जाबो कहिके, लईका मन चिल्लावत हे।।

नवा नवा लुगरा ला , सबोझन लेवावत हे ।
हाँस हाँस के सबोझन,  एक दूसर ल देखावत हे।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़

सुमिरव तोर जवानी ल

पहिली सुमिरव मोर घर के मइयां,
माथ नवावव धन धन मोर भुइयां I
नदियाँ, नरवा, तरिया ल सुमिरव,
मैना के गुरतुर बोली हे I
मिश्री कस तोर हँसी ठिठोली ल,
महर महर माहकत निक बोली हे I
डीह,डोगरी,पहार ल सुमिरव,
गावव करमा ददरिया I
सुवा,पंथी सन ताल मिलालव,
जुर मिर के सबो खरतरिहा I
जंगल झाड़ी बन ल सुमिरव,
पंछी परेवना के मन ल सुमिरव I
पुरखा के बनाय रद्दा मा चलबो
नवा नवा फेर कहानी ल गढ़बो I
पानी ल सुमिरव, दानी ल सुमिरव,
बलिदानी तोर कहानी ल सुमिरव
माटी के मान बढ़ईया
अन्नदाता तोर जवानी ल सुमिरव I

विजेन्द्र वर्मा अनजान
नगरगाँव(जिला –रायपुर)

बरखा रानी

बहुत दिन ले नइ आए हस,
काबर मॅुह फुलाए हस?
ओ बरखा रानी!
तोला कइसे मनावौंव?

चीला चढ़ावौंव,
धन भोलेनाथ मं जल चढ़ावौंव,
गॉव के देवी-देवता मेर गोहरावौंव,
धन कागज मं करोड़ों पेड़ लगावौंव।
ओ बरखा रानी……?

मॅुह फारे धरती,
कलपत बिरवा,
अल्लावत धान,
सोरियावतन नदिया-नरवा,
कल्लावत किसान…
देख,का ल देखावौंव?
ओ बरखा रानी…..?

मैं कोन औं
जेन तोला वोतका दूरिहा ले बलावत हौं?
मानुस,पसु,पक्छी,
पेड़-पउधा…
वो जीव-निरजीव,
जेखर जीवन,जरूरत,
सुघरई अउ सार तैं,
मैं तोर वोही दास आवौंव।
ओ बरखा रानी!
तोला कइसे मनावौंव?

केजवा राम साहू ‘तेजनाथ‘
बरदुली,कबीरधाम (छ.ग.)

शिव शंकर

शिव शंकर ला मान लव , महिमा एकर जान लव ।
सबके दुख ला टार थे , जेहा येला मान थे ।।

काँवर धर के जाव जी  , बम बम बोल लगाव जी ।
किरपा ओकर पाव जी  , पानी खूब चढ़ाव जी ।।

तिरशुल धर थे हाथ में  , चंदा चमके माथ में ।
श्रद्धा रखथे नाथ में  , गौरी ओकर साथ में ।।

सावन महिना खास हे , भोले के उपवास हे ।
जेहर जाथे द्वार जी  , होथे बेड़ा पार जी ।।

महेन्द्र देवांगन “माटी”  (शिक्षक)
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

कविता: कुल्हड़ म चाय

जबले फैसन के जमाना के धुंध लगिस हे
कसम से चाय के सुवारद ह बिगडिस हे
अब डिजिटल होगे रे जमाना
चिट्ठी के पढोईया नंदागे
गांव ह घलो बिगड़ गे
जेती देखबे ओती डिस्पोजल ह छागे
कुनहुन गोरस के पियैया
“साहिल” घलो दारू म भुलागे
आम अमचूर बोरे बासी ह नंदागे
तीज तिहार म अब फैसन ह आगे
पड़ोसी ह घलो डीजे म मोहागे
का कहिबे मन के बात ल
अब अपन संगवारी ह घलो मीठ लबरा होगे
जेती देखबे ओती
मोबाईल ह छागे
घर म खुसर फुसुर
अउ खोल म खुलखुल हे
जबले डिपोजल आये हे
कुल्हड़ म चाय गिंगियावत हे
गांव म घलो
फैसन ह रंग जमावत हे
पड़ोसी बिहिनिया ले
मोबाईल म खुस फुसावत हे
घेरी बेरी अपन फोटो ल अपनेच ह
खींच खींच के मुस्कुरावत हे

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
कोसीर सारंगढ जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़

कविता : वा रे मनखे

वा रे मनखे
रूख रई नदिया नरवा
सबो ल खा डरे
रूपिया- पैसा
धन-दोगानी, चांदी-सोना
सबो ल पा डरे
जीव-जंतु, कीरा-मकोरा
सब के हक ल मारत हस
आंखी नटेरे घेरी बेरी
ऊपर कोती ल ताकत हस
पानी नी गीरत हे
त तोला जियानत हे
फेर ए दुनिया के सबो परानी
ऊपरवाला के अमानत हे
तोर बिसवास म
पूरा पिरथी ल तोला दे दिस
अउ तें बनगे कैराहा-कपटी, लालची
अब भुगत
अपन करनी के सजा
ऊपरवाला ल लेवन दे मजा!!

रीझे यादव
टेंगनाबासा (छुरा)

उत्‍ती के बेरा

कविता, झन ले ये गाँव के नाव, ठलहा बर गोठ, हद करथे बिलई, बिजली, चटकारा, बस्तरिहा, अंतस के पीरा, संस्कृति, तोला छत्तीसगढी, आथे!, फेसन, कतका सुग्घर बिदा, गणेश मढाओ योजना, बेटा के बलवा, बाई के मया, रिंगी-चिंगी, अंतस के भरभरी, बिदेशी चोचला, ममादाई ह रोवय, छत्तीसगढिया हिन्दी, सवनाही मेचका, चिखला, महूँ खडे हँव, जस चिल-चिल, कुकुरवाधिकार, पइसा, तोर मन, होही भरती, छ.ग. के छाव, उत्ती के बेरा, हरेली, दूज के चंदा, अकादशी, निसैनी, प्रहलाद, राजनीति, नवा बछर, गुन के देख, चाकर, बिचार, श्रृंगार अउ पीरा, जीव के छुटौनी, पसार दिये तैं

मनोज कुमार श्रीवास्त, शंकरनगर नवागढ, जिला – बेमेतरा, छ.ग., मो. 8878922092, 9406249242, 7000193831
हरेली

सखी मितान अउ सहेली,
मिल-जुल के बरपेली,
खाबों बरा-चिला अउ,
फोड्बो नरियर भेली,
आज कखरो नई सुनन संगी,
मनाबो तिहार हरेली

हरेली तिहार आवत हे

हरियर-हरियर खेत खार,
सुग्घर अब लहरावत हे।
किसान के मन मा खुशी छागे,
अब हरेली तिहार आवत हे।।

खेत खार हा झुमत गावत,
सुग्घर पुरवाही चलावत हे।
छलकत हावे तरीया डबरी,
नदिया नरवा कलकलावत हे।।

रंग बिरंग के फूल फुलवारी,
अब सुग्घर डुहूँरु सजावत हे।
कोइली पँड़की सुवा परेवना,
प्रेम संदेशा सुनावत हे।।

नर-नारी अउ जम्मो किसान,
किसानी के औजार ला धोवत हे।
किसानी के काम पुरा होगे,
अब चिला चघाय बर जोहत हे।।

लइका मन भारी उत्साह,
बाँस के गेड़ी बनवावत हे।
चउँर के चिला सुग्घर खाबो,
अब हरेली तिहार आवत हे।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम (घटारानी)
जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

तयं काबर रिसाये रे बादर

तयं काबर रिसाये रे बादर
तरसत हे हरियाली सूखत हे धरती,
अब नई दिखे कमरा,खुमरी, बरसाती I
नदियाँ, नरवा, तरिया सुक्खा सुक्खा,
खेत परे दनगरा मेंड़ हे जुच्छा I
गाँव के गली परगे सुन्ना सुन्ना,
नई दिखे अब मेचका जुन्ना जुन्नाI
करिया बादर आत हे जात हे,
मोर ह अब नाचे बर थररात हेI
बिजली भर चमकत हे गड़गड़ गड़गड़,
बादर भागत हे सौ कोस हड़बड़ हड़बड़ I
सुरुज ह देखौ आगी बरसात हे,
अबके सावन ल जेठ बनात हे I
कुआँ अऊ बऊली लाहकत लाहकत,
चुल्लू भर पानी म कोकड़ा ह झाकत I
बुलकगे आसाढ़ ढूलकगे सावन,
ठलहा बईठे हे बियासी के रावनI
तोर अगोरा म टकटकी लगाये,
संसो म सबो परानी दुख पाये I
अन्न पानी अब कुछु नई सुहावय,
देख किसान के तरुवा ठननायेI
अब गिरही तब गिरही कीके आस लगाये,
पड़की, परेवना तोरेच गीत गायेI
छिन छिन जिंनगी घटत बढ़त हे,
हंसी ठिठोली अब कोनों नई करत हे I
रुख राई जीव जंतु के अरथी उठत हे,
बूंद बूंद पानी बर जिनगानी तरसत हे I
मसमोटीयाँ तयं ह रिसाये काबर,
अब तो बरस जा रे निरदयी बादर I

विजेन्द्र वर्मा अनजान
नगरगाँव(धरसीवां) जिला-रायपुर
मो.9424106787