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आनी बानी : 14 भाषा के कविता के छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद

Ani Bani1

संगें संग इहू ल देखव —छत्‍तीसगढ़ी कथा कंथली : ईर, बीर, दाउ अउ मैं छत्तीसगढ़ी गज़ल के कुशल शिल्पी: मुकुन्द कौशल तीन छत्तीसगढ़ी गज़ल जानबा : दादूलाल जोशी ‘फरहद’ चना के दार राजा, चना के दार रानी

दादूलाल जोशी ‘फरहद’ के छै ठन कविता

Dadulal Joshi

दू डांड़ के बोली ठोली 1. हिरदे म घात मया , आंखी म रीस हे । फागुन के महिना म, जस फूले सीरिस है।। 2. सुघ्घर – सुघ्घर दिखथे , जस मंजूर के पांखी । कपाट के ओधा ले ,

कोन जनी कब मिलही..?

जुग-जुग ले आंखी म आंसू, अउ हिरदे म घाव। कोन जनी कब मिलही तिरिया, जग म तोला नियाव।। होइस कभू तोर अंचरा दगहा, कभू मिलिस बनवास, तइहा जुग ले देवत परीक्षा, जिवरा होगे हदास। कोनो हारथे खेलत पासा, तोला लगाके

छत्तीसगढ़ी कविता मा लोक जागरन के सुर

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के महाधिवेशन दिनाँक 23/24 फरवरी 2013 म पढ़े गए आलेख डॉ.दादूलाल जोशी ‘फरहद’ साहित्त के बिसय मा जुन्ना गियानी लेखक मन हा अघात काम करें हें । साहित्त के कतना किसिम के अंग होथे ,उंकर सरूप अउ