Category Archives: गीत

मन मोर गावे दीदी तपत कुरु तपत कुरु

sandeep

जब मयं अमरेवं गाँव के मुहाटी लईका खेलत रिहिन भँवरा बांटी पीपर खांदा मा कूदत रिहिन बेंदरा सईंतत गोबर मोल दिखिस मंटोरा जान गयेंव इहीच मोर गाँव ए मन मोर गावे दीदी तपत कुरु तपत कुरु मन मोर गावे दीदी

तोर मया

जड़कल्ला म गोरसी आगी कस, पंडवानी के रंगधरी रागी कस जोर जुलूम में बिदरोही-बागी कस, बडे-बुजुरूग में नेवत पै लागी कस, रुस-रुस लागथे तोर मया॥ धपकाला म करसी पानी कस, चन्दा के ओग्गर जवानी कस, सुघ्घर राज के रजधानी कस

बोरे-बासी के दिन आगे..

दही-मही संग बोरे-बासी के लगिन धरागे रे गोंदली संग सुघ्घर झड़के के दिन आगे रे………. http://mayarumati.blogspot.in/2013/03/blog-post_29.html संगें संग इहू ल देखव —ये भोले तोर बिना…. बसंत गीत : सुशील भोले छत्तीसगढ़ी : कामकाज अउ लेखन के रूप : सुशील भोले

किशोर तिवारी के सस्‍वर गीत

फागुन गीत- वसंत म बिरह- हिन्‍दी ओज गीत- संगें संग इहू ल देखव —बसंत म बिरह – छत्तीसगढी कविता आडियो