Category: गीत

धान कटोरा रीता होगे

धान कटोरा रीता होगे कहां होही थिरबांह है।
छत्तीसगढ़ के पावन भूइया बनगे चारागाह है।

बाहिर ले गोल्लर मन के आके, ओइल गइन छत्तीसगढ़ मा।
रौंद रौंद के गौंदन कर दिस, भूकरत हे छत्तीसगढ़ मा।
खेत उजरगे जमीन बेचागे खुलिस मिल कारख़ाना हे।
छत्तीसगढ़ के किस्मत मा दर दर ठोकर खाना हे ।
हमर खनिज ला चोरा चोरा के डोहारत हे चोरहा मन।
जंगल ल सब कांट काटके भरे तिजोरी ढोरहा मन।
इंहा के पइसा हा बंट जाथे दिल्ली अउ भोपाल हे।
जुर मिलके सब निछत हावै छतीसगढ़ के खाल हे।
शोसन के चक्की ह निस दिन चालत हे बारो मास हे |
छतीसगढ़ के पावन भुईया बनगे चारागाह हे |

कहां उड़ागे सोन चिरइया, कहां गे धान कटोरा हे
गांव गांव म होत पलायन, परे पेट मा फ़ोरा हे।
छत्तीसगढ़ मा लूट मचे हे, हमर उजरगे कुंदरा हे।
अपने धरती में हम होगेन कइसे आज बसुंधरा हे।
शोसन साहत कनिहा टूगगे फटे पाव बेवाई हे।
पेट चटक पोचवा परगे चेहरा परगे झाई हे।
सरे आम हमरे इज्जत के होवत हवै नीलामी हे।
छत्तीसगढ़ ह भोगत हावै अइसन घोर गुलामी हे।
छत्तीसगढ़ महतारी के अब करे कौन परवाह हे।
छत्तीसगढ़ के पावन भुइंया बनगे चारागाह हे।

सुशील यदु

छत्तीसगढ़ी बाल गीत

सपना

कहाँ-कहाँ ले आथे सपना।
झुलना घलो झुलाथे सपना।

छीन म ओ ह पहाड़ चढ़ाथे,
नदिया मा तँऊराथे सपना।

जंगल -झाड़ी म किंजारथे,
परी देस ले जा जाथे सपना।

नाता-रिस्ता के घर ले जा के,
सब संग भेंट करथे सपना।

कभू हँसाथे बात-बात मा,
कभू – कभू रोवाथे सपना।

कभू ये हर नइ होवै सच,
बस, हमला भरमाथे सपन।

-बलदाऊ राम साहू

छत्तीसगढ़ी नवगीत : पछतावत हन

ओ मन आगू-आगू होगे
हमन तो पछवावत हन
हाँस-हाँस के ओ मन खावय
हमन तो पछतावत हन।
इही  सोंच मा हमन ह बिरझू
अब्बड़ जुगत लखायेन
काँटा-खूँटी ल चतवार के
हम रद्दा नवा बनायेन।
भूख ल हमन मितान बनाके
रतिहा ल हम गावत हन।
मालिक अउ सरकार उही मन
हमन तो भूमिहार बनेन
ओ मन सब खरतरिहा बनगे
हमन तो गरियार बनेन।
ढोकर-ढोकर के पाँव परेन
मुड़ी घलो नवावत हन।
उनकर हावै महल अँटारी
टूटहा हमर घर हे
उनकर छाती जब्बर हे चाकर
देह हमर दुब्बर हे।
ओ मन खावय भूँकर भूँकर के
हमन तो मिमियावत हन।
बलदाऊ राम साहू 
94507650458

बिन बरसे झन जाबे बादर

हमर देस के सान तिरंगा, आगे संगी बरखा रानी, बिन बरसे झन जाबे बादर, जेठ महीना म, गीत खुसी के गाबे पंछी, मोर पतंग, झरना गाए गीत, जम्मो संग करौ मितानी, खोरवा बेंदरा, रहिगे ओकर कहानी, बुढवा हाथी, चलो बनाबो, एक चिरई, बडे़ बिहिनिया, कुकरा बोलिस, उजियारी के गीत, सुरुज नवा, इन्द्रधनुस, नवा सुरुज हर आगे, अनुसासन में रहना..

हमर देस के सान तिरंगा
फहर-फहर फहरावन हम ।
एकर मान-सनमान करे बर
महिमा मिल-जुल गावन हम।

देस के खातिर वीर शहीद मन
अपन कटाए हें

तन, मन, धन ल अरपित करके
लहू अपन बोहाए हें।

अपन बिरान के भेद करन झन
सब ला गला लगावन हम।
हमर देस के सान तिरंगा
फहर-फहर फहरावन हम।
सुम्मत मा सब के बन जाथे
बिम्मत मा अधियाथे जी

आपस मा जब लड़थन-मरथन
दूसर लाभ कमाथे जी।

बोली -भाखा, जात के
झगरा सबो मिटावन हम।
हमर देस के सान तिरंगा
फहर-फहर फहरावन हम।

घानी मुनी घोर दे : रविशंकर शुक्ल

घानी मुनी घोर दे
पानी .. दमोर हे
हमर भारत देसल भइया, दही दूध मां बोर दे
गली गांव घाटी घाटी
महर महर महके माटी
चल रे संगी खेत डंहर, नागर बइला जोर दे
दुगुना तिगुना उपजय धान
बाढ़े खेत अउर खलिहान
देस मां फइले भूख मरी ला, संगी तंय झकझोर दे
देस मां एको झन संगी
भूखन मरे नहीं पावे
आने देस मां कोनो झन
मांगे खतिर झन जावे
बाढे देस के करजा ला, जल्दी जल्दी टोर दे।

– रविशंकर शुक्ल
चंदैनी गोदा के लोकप्रिय और प्रसिद्ध गीत

बंदौ भारत माता तुमला : कांग्रेस आल्हा

खरोरा निवासी पुरुषोत्तम लाल ह छत्तीसगढ़ी म प्रचार साहित्य जादा लिखे हे। सन 1930 म आप मन ह कांग्रेस के प्रचार बर, ‘कांग्रेस आल्हा’ नाम केे पुस्तक लिखेे रहेव। ये मां कांग्रेस के सिद्धांत अऊ गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम के सरल छत्तीसगढ़ी म वरनन करे गए हे। कांग्रेस आल्हा के उदाहरन प्रस्तृत हे –

वंदे मातरम्
बंदौ भारत माता तुमला, पैंया लागौं नवा के शीश।
जन्म भूमि माता मोर देबी, देहु दास ला प्रेम असीस।।

विद्या तुम हौ धरम करम हौ, हौ सरीर औ तुम हौ प्रान।
भक्ति शक्ति तुम ही हौ माता, सुखदाता तुम हौ भगवान।।

नइ जानन हम देबी देवता, तुम हौ पूजा के आधार।
कमल सिहांसन में तुम बइठे, हमला देवत हो आहार।।

तुम्हर गोद मां है मां दुर्गे, सब पूतन के है कल्यान।।
करजा तुम्हर चुकाये खातिर, हो बो मोका में बलिदान।।

जैसन हमला पोसे पाले, वैसन आबो एक दिन काम।
बन्धन ले मुक्ता के तुमला, करबो कोटि बार परनाम।।

हमर देस
जौन देस में रहिथन भैया, ये ला कहिथन भारत देस।
मति अनुसार सुनावौं तुमला, येकर कछु सुंदर सन्देस।।

उत्ती बाजू जगन्नाथ हैं, बुढती में दुवारिका नाथ।
बदरी धाम भंडार बिराजे, मुकुट हिमालय जेकर माथ।।

सोझे सागर पांव धोत हैं, रकसहूं रामेश्वर तीर।
बंजर झाड़ी फूल चड़ावें, कोयल बिनय करे गंभीर।।

जो ये देह हमार बने है, त्यारे अन्न इहें के जान।
लंह हमार इहें के पानी, हवा इहें के प्रान समान।।

रोंवा रोंवा पोर पोर ले, कहं तक कहाँ बात समझाय।
थोरेको नइये हमर कहेबर, सब्बों ये भारत के आय।।

धुर्रा माटी खेल खेलके, हम सब बने भुसुन्डाण्वान।
बुढ़वा होके मरजाबों तो, हमला देहैं यें असथान।।

दसरथ, हरिसचंद, युधिष्ठिर, सतधारी थे राजाराम।
जोगेश्वर, श्रीकृष्ण, जनक थे, अर्जुन भीष्म कर्ण बलधाम।।

धुरुव, प्रहलाद, लव, कुश, अभिमन्यु ऐसन बालक इहें रहिन,
सीता, गौरी औ अनुसूया, पतिव्रत के कष्ट सहिन।।

गौतम वशिष्ट नारद कनाद, शुक्र, व्यास, कपिल मुनिराज।
इही देश के हैं सब जनमें, इनकर हुए धरम के काज॥

कीरति पताका फर हावत है, धन धन गावत सकल जहान।
इनकर रस्ता, इनकर करनी, पढ़ सुन चलथे लोग पुरान ।।

मनखे डउकी जुमला मिलके, हम होथन करौड़ चौतीस,
बड़ भागी अन हम सब लोगन, देइस जन्म इहां जगदीश।।

हमर देस है हम ला प्यारा, करबोन कोटि कोटि परनाम।
काम करैं तन मन धन देके, रह जावे भारत के नाम।।

पुरुषोत्तम लाल

उरमाल म मयारू तोर मुंह ल पोंछव उरमाल म

उरमाल म मयारू (गजामूंग) तोर मुंह ल पोंछव उरमाल म,
उरमाल म ग बईहा तोर मुंह ल पोछवं उरमाल म।

अमली फरे कोका-कोका जामुन फरे करिया ओ
चल दूनो झन संगे जाबो तरिया।
उरमाल म …

आम गाँव जामगांव तेंदू के बठेना
तोर बर लानेंव मय चना-फूटेना ।
उरमाल म …

हाट गेंव बजार गेव उहाँ ले लानेव तारा,
पूछत पूछत, आबे बही तैं हा टिकरीपारा ।
उरमाल म …

खीरा खाले केकरी खाले अऊ खाले जोंधरा,
चल बही दूनों देखबो दूधमोंगरा।
उरमाल म …

बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमरे

बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमरेे,
डोंगरी के पाके चार ले जा लान दे बे ।

मया के बोली भरोसा भारी रे
कहूँ दगा देबे राजा लगा लेहूँ फाँसी ।
बखरी के तुमा नार …

हम तैं आगू जमाना पाछू रे
कोनो पावे नहीं बांध ले मया म काहू रे ।
डोंगरी के पाके चार …

तोर मोर जोडी गढ लागे भगवान,
गोरी बइंहा म गोदना गोदाहूँ तेरा नाम ।
बखरी के तुमा नार …

मऊहा के झरती कोवा के फरती …
फागुन लगती राजा आ जाबे जल्दी ।
बखरी के तुमा नार …

लक्ष्मण मस्तुरिहा, रायपुर

कोइली के गुरतुरबोली मैना के मीठी बोली जीवरा ल बान मारे रेे

कोइली के गुरतुरबोली मैना के मीठी बोली
जीवरा ल बान मारे रेे …

गिरे ल पानी चूहे ल ओइरछा,
तोर मया म मयारू मारथे मूरछा ।
जीवरा ल बान मारे रै …

गोंदा के फूल बूंभर कांटा रे
तोर सुख-दुख म हे मोरो बांटा रे।
जीवरा ल बान मारे रे …

पीरा के ओर न पीरा के छोर
तोर दरस बर संगी मन कल्पथे मोर
जीवरा ल बान मारे रे … ।

दुखिया बाई, टिकरी पारा (गंडई ) राजनादगाव से प्राप्त।

ददरिया : तिरछी नजरिया भंवा के मारे

ये भंवा के मारे रे मोर रसिया
तिरछी नजरिया भंवा के मारे ।

सिरपुर मंदिर म भरे ल मेला
तोला फोर के खबवाहूँ नरियर भेला ।
ये भवा के मारे … ।

आये ल सावन छाये ल बादर,
तोर सुरता के लगायेंव आंखी म काजर ।
ये भवा के मारे … । :

धान के कंसी गहूँ के बाली,
मोर मांग में लगा दे पीरित लाली ।
ये भवा के मारे … ।