Chhattisgarhi

Category Archives: कबिता

चौमास : कबिता

जब करिया बादर बरसे, सब तन मन ह हरषे।चम-चम बिजुरी ह चमके, घड़-घड़ बदरा ह गरजे॥तब आये संगी चौमास रे…1. रुमझूमहा बरसे पानी, चुहे ले परवा छानी।पानी ले हे जिनगानी, हांस रे जम्मो परानी॥जिनगी के इही आस रे…2. गली-गली चिखला माते, नान्हे लइका मन नाचेचिरई चिरगुन ह नाचे, माटी हर महमाए।भुइंया के बुझाए पियास रे…3. भीजे ले धरती के कोरा, नाचे मंजूर मन मोरा।जब आए आंधी बरोड़ा, टूट जाए कतको डेरा॥झन होहू संगी उदास रे…4. तरिया डबरी छलकाए नरवा-नदिया उफनाए।कोरा भुइंया के हरियाए, दादुर राम मल्हार गाए॥तब बदरा ह आये पास रे…5. जब बेरा के घाम पाए, रूख-राई लहलाएकिसान के मन हरषाए, तब जांगर टोर कमाए॥दु:ख पीरा के करे नास रे… नेमीचंद हिरवानीमगरलोड, धमतरी

मंहू पढ़े बर जाहूं : कबिता

ये ददा गा, ये दाई वो, महूं पढ़े बर जाहूं।पढ़-लिख के हुसियार बनहूं, तूंहर मान बढ़ाहूं॥भाई मन ला स्कूल जावत देखथौं,मन मोरो ललचाथे।दिनभर घर के बुता करथौं,रतिहा उंघासी आथे।भाई संग मोला स्कूल भेजव, दुरपुतरी बन जाहूं।ये ददा गा, ये दाई … आघू पढ़व

तीजा लेहे बर आहूं

बड़ मयारू हच मोर बहिनीतोला तीजा लेहे बर आहू आं,सावन म तोर घर म जाकेराखी मैं बंधवाहूं ओभादो म तिहारिन बहिनीभाई के घर म आबेससरार के जम्मो सुख-दुख लमइके म गोठियाबेदाई के मया के मोटराधर के तोर बर लाहू ओ,बड़ … आघू पढ़व

तीजा जावत

तीजा जावत अपन बाई ल देख के मोला मनेमन अड़बड़ हाँसी लागेईमान से महापरसाद आज मोला अड़बड़ अलकरहा लागेसुत उठ के तरिया ले साबुन म नहा के आगेमइके जाय के सुध मंसाबुन डब्बा ल भुलागेलाटिया गुर डारे बरा मंगहूं पिसान … आघू पढ़व

सुरता अइस

सावन के महिना ह गन-गन-गन अइसअंधियारी पाख के निकलतउगोना ह सट ले निकलतउगोना ह सट ले अइसपरोसिन नोनी हरमोला भइया कहिके चिल्लइसमोला अपनबहिनी के सुरता अइसभादो के महिना मंतीजा ह लकट्ठइससेठ हर मोला आजलुगरा देखात अंखिअइसपोरा के बिहान दिनमोर मन … आघू पढ़व

कबिता : बेटी मन अगुवागे

जमाना बदलगे झन करौ संगीबेटा-बेटी म भेद,बेटी मन अगुवागे चारों खुंटबेटा के रद्दा ल छेंक। पढ़ई-लिखई म अव्वल आथे,बेटा- मस्ती म समै बिताथेबेटी घरो के काम बुता म,सुग्घर दाई के हाथ बंटाथे। तभो ले तुंहर आंखी नइ उघरिस,बेटा के हावेच … आघू पढ़व

कबिता : नवा तरक्की कब आवे हमर दुवारी

अरे गरीब के घपटे अंधियारगांव ले कब तक जाबे,जम्मो सुख ला चगल-चगल केरूपिया तैं कब तक पगुराबे?हमर जवानी के ताकत लाबेकारी तैं कब तक खाबे?ये सुराज के नवा तरक्कीहमर दुवारी कब तक आबे?हमर कमाए खड़े फसल लगरकट्टा मन कब तक … आघू पढ़व

कबिता : सिध्दिविनायक मुसवा म काबर चढ़थे

सिध्दिविनायक मुसुवा म काबर चढ़थे?मुसुवा निकल सकथे बघवा के पिंजरा ले,मुसुवा निकाल घलो सकथे बघवा ल पिंजरा लेमुसुवा ह पाथे सबले पहिली धान-पान, जइसे सबले आगू पाथे, गनेस भगवान,मुसुवाये म चढ़केलम्बोदर अगुवागेनम्बर वन बनगेयेखरे सेति गजानन मुसुवा म चढ़थे। लम्बोदर … आघू पढ़व

कबिता : ये देस कइसे-कइसे होवत हे

ये देस म कइसे-कइसे होवत हे।जिहां बोहावय मया-पिरीत के गंगा, लहरावय जिहां लहर-लहर तिरंगातिहां मनखे-मनखे मन के हिरदे रोवत हे॥अती होगे गोला बारूद केरोज होवत हे गोली बारी।अतलंगहा मन अलगाव वाद के बोवत हे बम के बखरी बारी।मोर हरियर बाग … आघू पढ़व

कबिता : चोरी ऊपर ले सीना जोरी

मध्यान्ह भोजन के टेम रीहिसखाना पकईया ह मोलासरकारी परसाद ल दे के कहिसथोर कीन चीख तो गुरूजीचीखत-चीखत मे हअतका खा गेंवकि ऊही करा कुरसी मासुत गेंव।अचानक बीईओ साहब हस्कूल आईसमोला पढाये के बदला मा सूते पाईसओकर गुस्सा ह पांवतरी ल … आघू पढ़व

कबिता : कइसे रोकंव बैरी मन ल

पांखी लगाके उड़ा जाथे जी, कइसे रोकंव बैरी मन ला।छरिया जाथे मोर मति जी, घुनहा कर दीस ये तन ला।उत्ती-बूड़ती, रक्सहूं-भंडार, चारो मुड़ा घूम आथे।जब भी जेती मन लागथे, ये हा उड़ा जाथे॥मन ह मन नई रहिगे, हो गे हे … आघू पढ़व

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