कहिनी : सिद्धू चोर
सब झन एती ओती माल-टाल टमरत राहंय। सिध्दू गोमहा कस ठाढ़े रिहिस। एती ओती झांकिस त देखथे चुल्हा म तसमई चूरत राहय। उही मेर कोठी म पीठ टेकाय डोकरी अउंघात राहय। सिध्दू गीस, अउ माली म तसमई हेर के खाय धर लीस। थोरिक बेरा म डोकरी ल जमहासी आईस। मुहुं फार के आऽऽऽ करके हथौरी ला मुंहु मेर लेगिस। सिध्दू ओरखिस डोकरी दाई इसारा करत हे मुहुं म तसमई डार। एक साहर राहय जी, साहर के ओप्पार गांव गोहड़ा राहय जी। कोरई ढेखरा अऊ खदर मसर टेकनी झिपारी के घर कुरिया, छेरी, गोधनी, कुकरी गोड़ा, कुकुर, कोनहा, मऊहा पास बर कोलकी वाला गांव नांव के हे ले बोइर गांव। तरिया, नरवा, कुंआ, बखरी, उत्ती-बुड़ती ए पार ले ओ पार, पीपर अऊ बर वाला गांव। जिहां कुरिया मन ले जादा रूख-राई अऊ मनखे ले जादा गाय-गरू, छेरी-पठरू तसने कोरी खैरखा चिरई-चिरगुन राहय जी। भियां अऊ बादर आकाश दाई-बाप बरोबर राहय। सल्लो … आघू पढ़व


