Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: किसान दीवान

कहिनी : सिद्धू चोर

सब झन एती ओती माल-टाल टमरत राहंय। सिध्दू गोमहा कस ठाढ़े रिहिस। एती ओती झांकिस त देखथे चुल्हा म तसमई चूरत राहय। उही मेर कोठी म पीठ टेकाय डोकरी अउंघात राहय। सिध्दू गीस, अउ माली म तसमई हेर के खाय धर लीस। थोरिक बेरा म डोकरी ल जमहासी आईस। मुहुं फार के आऽऽऽ करके हथौरी ला मुंहु मेर लेगिस। सिध्दू ओरखिस डोकरी दाई इसारा करत हे मुहुं म तसमई डार। एक साहर राहय जी, साहर के ओप्पार गांव गोहड़ा राहय जी। कोरई ढेखरा अऊ खदर मसर टेकनी झिपारी के घर कुरिया, छेरी, गोधनी, कुकरी गोड़ा, कुकुर, कोनहा, मऊहा पास बर कोलकी वाला गांव नांव के हे ले बोइर गांव। तरिया, नरवा, कुंआ, बखरी, उत्ती-बुड़ती ए पार ले ओ पार, पीपर अऊ बर वाला गांव। जिहां कुरिया मन ले जादा रूख-राई अऊ मनखे ले जादा गाय-गरू, छेरी-पठरू तसने कोरी खैरखा चिरई-चिरगुन राहय जी। भियां अऊ बादर आकाश दाई-बाप बरोबर राहय। सल्लो … आघू पढ़व

लोक कहिनी : ठोली बोली

छकड़ा भर खार पीये के जिनिस देख के सबे गांव वाला मन पनछाय धर लिन कब चूरय त कब सपेटन। ए क ठन गांव म नाऊ राहय। बड़ चतुरा अऊ चड़बांक। तइहा पइंत के कंथ ली आय। जाने ले तुंहरेच … आघू पढ़व

बाल कहिनी : अइसे धरिन चोर गोहड़ी

बाल कहिनी सबो चोरी ओतके बेर होथे, जतका बेर मनखे घर ले बाहिर रथे। ओहर घातेच बिचारिस त सुध आईस, जमे चोरी मं कोनो अवइया-जवइया नइते अइसे मनखे के हात हे, जेहर घर वाला मन के अवई-जवई ला जानथे। तहांले … आघू पढ़व

सरग सुख : कहिनी

मुकुल के जीव फनफनागे। अल्थी-कल्थी लेवत सोचिस, अलकरहा फांदा म फंदागेंव रे बबा। न मुनिया संग मेंछरई न दई -ददा के दुलार। ये सरग लोक घला भुगतउल हे। ओला लागिस कुछ बुता करतेंव, नांव कमातेंव, पढ़-गुन के हुसियार बनतेंव। वोहा … आघू पढ़व

सरग सुख

मुकुल के जीव फनफनागे। अल्थी-कल्थी लेवत सोचिस, अलकरहा फांदा म फंदागेंव रे बबा। न मुनिया संग मेंछरई न दई -ददा के दुलार। ये सरग लोक घला भुगतउल हे। ओला लागिस कुछ बुता करतेंव, नांव कमातेंव, पढ़-गुन के हुसियार बनतेंव। वोहा … आघू पढ़व