गीत : मोर गाँव म संगी
मोर गाँव म संगी बसंत हा आगे हे , मोर गाँव म !! पाना पिंवरा ला धरती दाई अपन कोरा म झोंकय नावा पाना लहर – लहर के खांदा म मेछरावय एखर छाँव म संगी मति छरिया गे हे मोर गाँव म!! फागुन म मौहा के फूल हा गोरी ला रिझावय चिकन-चाकन लुगरा पोलका सजधज के सिंगारय गवां पठौनी के बेर आगे मन म कुलकावय मोर गाँव म!! शकुंतला तरार








