Chhattisgarhi

Category Archives: गीत

गीत : मोर गाँव म संगी

मोर गाँव म संगी बसंत हा आगे हे , मोर गाँव म !! पाना पिंवरा ला धरती दाई अपन कोरा म झोंकय नावा पाना लहर – लहर के खांदा म मेछरावय एखर छाँव म संगी मति छरिया गे हे मोर गाँव म!! फागुन म मौहा के फूल हा गोरी ला रिझावय चिकन-चाकन लुगरा पोलका सजधज के सिंगारय गवां पठौनी के बेर आगे मन म कुलकावय मोर गाँव म!! शकुंतला तरार

मया के डोर बाँध ले न जी

मया के डोर बाँध ले न जी

छिन भर मा संग छूट जाही. मया के डोर बाँध ले न जी तोर हमर मया रही जाही, मया के डोर बाँध ले न जी मया के डोर बाँध ले न संगी मया के डोर बाँध ले न जी. छिन … आघू पढ़व

पं.द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ के गीत

तोला देखे रेहेंव गा, तोला देखे रेहेंव गा । धमनी के घाट मा बोईर तरी रे ।। लकर धकर आये जोही, आंखी ला मटकाये गा, कईसे जादू करे मोला, सुख्खा म रिझाये गा । चूंदी मा तैं चोंगी खोचे, झूलूप … आघू पढ़व

चैत-नवरात म छत्तीसगढ़ी दोहा 6 : अरुण कुमार निगम

मात-पिता के मान हो, गुरु के हो सम्मान।मनखे बन मनखे जीये, सद्बुद्धि दे दान।। ओ मईया …… लोभ मोह हिंसा हटे, काम क्रोध मिट जाय।सतजुग आये लहुट के, अइसन कर तयं उपाय।। ओ मईया …… अनपूरना के वास हो, खेत … आघू पढ़व

अरुण कुमार निगम के गीत : नइ भूलय मिट्ठू तपत कुरु ….

अरुण कुमार निगम के गीत : नइ भूलय मिट्ठू तपत कुरु ….

आई लव यू………आई लव यू….तयं बोल रे मिट्ठू , आई लव यू….तपत कुरु के गये जमानाबोल रे मिट्ठू – आई लव यू….. राम-राम के बेरा -मा, भेंट होही तो गुड मार्निंग कहिबेए जी,ओ जी झन कहिबे,कहिबे तो हाय डार्लिंग कहिबेसबो … आघू पढ़व

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु बोल रे मिट्ठु तपत कुरु बडे बिहनिया तपत कुरु सरी मँझनिया तपत कुरु फ़ुले-फ़ुले चना सिरागे बाँचे हावय ढुरु-ढुरु ॥ चुरी बाजय खनन-खनन झुमका बाजय झनन-झनन गजब कमैलिन छोटे पटेलीन भाजी टोरय सनन-सनन केंवची-केंवची पाँव … आघू पढ़व

होले तिहार

होले तिहार

होले तिहार बड़ निक लागेसबके मन -मा उमंग जागे.समधिन मारे पिचकारी,समधी ला बड़ सुख-सुख लागे. आमा मऊँरिन,परसा मन, पहिरिन केसरिया हारजाड़-घाम दुन्नो चल देइन अपन-अपन ससुरार.का बस्ती, का वन-उपवन, कण -कण मा खुशिहाली छागे. नंदू नंगत नगाड़ा पीटय, फगुवा गावै … आघू पढ़व

कान्हा के होली ( छत्‍तीसगढ़ी फाग गीत )

रंग बगरे हे बिरिज धाम मा कान्हा  खेले रे होली  वृन्दावन ले आये हवे  गोली ग्वाल के टोली  कनिहा में खोचे बंसी  मोर मुकुट लगाये  यही यशोदा मैया के  किशन कन्हैया आए आघू आघू कान्हा रेंगे  पाछु ग्वाल गोपाल  हाथ … आघू पढ़व

होली गीत

होली गीत

होगे फ़ागुन हा सर पे सवार ‘ जोहार ले जोहार ले जोहार। नरवा खलखल हांसत हे, नवा नवा फ़ूटत हे धार।(जोहार ले – – -  – बरदी के सुत गे गोसैया, सन्सो में हवय खेत खार।  जोहार ले – – … आघू पढ़व

नारायण लाल परमार के कबिता

मन के धन ला छीन पराईस टूटिस पलक के सीप उझर गे पसरा ओखर बांचे हे दू चार कि अखिंयन मोती ले लो । आस बंता गे आज दिया सपना दिखता हे सुन्ना परगे राज जीव अंगरा सेंकत हे सुख … आघू पढ़व

गीत : सारी

मोर सारी परम पियारी गा र‍इपुरहिन अलग चिन्हारी गा कातिक मा ज‍इसे सियारी गा फ़ागुन मा ज‍इसे ओन्हारी गा हाँसय त झर-झर फ़ुल झरय रोवय त मोती लबारी गा ॥ एक सरीं देह अब्बड दुब्बर झेलनाही सोंहारी जस पातर मछरी … आघू पढ़व