अक्षय तृतीया
(बैसाख अंजोरी पाख तीज) भविष्य पुराण म लिखे हे के आज के दिन त्रेतायुग प्रारंभ होय रहिस हे। आजे के दिन भगवान परसुराम के घला अवतार होय रहिस हे। तेखरे सेती अक्ति के दिन ल अबूझ मुहुरत माने गे हे अउ एमा बर बिहाव मंगल कारज ल बिन मुहुरूत देखे करथें। बैसाख अंजोरी पाख के तीज के दिन ये तिहार ल मनाय जाथे। अक्ती तिहार ह बसंत ऋतु अउ ग्रीष्म ऋतु के संधिकाल आय। नारद पुराण, भविष्य पुराण म एकर बिसद विवरन पढ़े बर मिलथे। आज के दिन करे दान पुन्न ह अक्षय फल देथे। ‘अक्षय’ के अरथ हे जेकर कभू नास नइ होवय। नास वोकरे नई होवय जेन सदा सत्य हे अउ सत्य सिरिफ परमात्मा हे। तेखरे सेती वोकर प्रसन्नता खातिर दान-पुन्न करे जाथे, तेखर अनन्त फल मिलथे। ‘स्नात्वा छुत्वा च दत्वा च जप्त्वानन्त फलं लभेत’ -भविष्य पुराण तेखरे सेती एकर नांव अक्षय परिस। भविष्य पुराण म लिखे हे … आघू पढ़व



