Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: जयंत साहू

छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता रिस्ता के भरोसा, दाग लगते म दफन हो जाथे।। नियाव म नित नइये, नर से होय त भोरहा कहाथे। नारी आय त पापिन, कुटुम बर कुलछनीन हो जाथे।। भरमाहा होगे नर तन…. परके नियत झांक, खरबइता अपने नियत डोलाथे। अपन चरितर ढांक, पर बर दांत खिसोरन हो जाथे।। भरमाहा होगे नर तन…. बेटी बहिनी महतारी, मानत काबर जियान पर जाथे। देहे देंह रूप चरित्तर, माया बर काया हरन हो जाथे।। भरमाहा होगे नर तन…. तिरिया मांस देखे, ऊंचहा नाक घलो कटा जाथे। मरहा खुरहा बुढ़वा, मौका पाके दुसासन हो जाथे। भरमाहा होगे नर तन…. कइसे बचाववं मान, सरी भसम कर जाए के मन करथे। मैं तो जननी आवं, इही सोच के सराप बरदान हो जाथे।। भरमाहा होगे नर तन…. लहू के कतरा जमोय, कोख म नौ महिना जतनथे। जीव होम बियाथे, पीरा सोच जयंत नमन हो जाथे।। भरमाहा होगे … आघू पढ़व

(होरी गीत)फागुन फगुनाई

(होरी गीत)फागुन फगुनाई

मन झुमरे लागे संगी मोर, परसाही अमराई म। मऊहा म लगे कोवा के फर, फागुन फगुनाई म।। रूख राई नवा रूप धरे, सुखाय डारा पाना ल झराय। कोंवर पीका फोकियाय परे, ठुढ़गा के दिन बहुराय। कर ले मनभर के सिंगार, … आघू पढ़व

लोक कथा म ‘दसमत कइना’ के किस्सा

छत्तीसगढ़ म लोक कथा के अनेक रूप देखे ल मिलथे। जेमा प्रेम प्रधान, विरह के वेदना म फिजे लोक कथा, आध्यात्मिक लोक कथा, वीर रस के लोक कथा एकरे संगे संग जनजातीय आधार म घलो कथा के प्रचलन हाबे। अंचल … आघू पढ़व

नाचे नागिन रेडियो-रेडियो

मैं ओ रेडियो वाला ल पूछेंव- कइसे जी ये रेडियो म का चलत हे अउ ऐला इहां काबर मड़ाय हस। तब रेडियो वाला किथे- ते नइ जानस गा, ये रेडियो में नागिन वाला गाना चलत हे। सांप मन इही गाना … आघू पढ़व

यहू नारी ये

यहू नारी ये फेर येकर समाज म कोनो सुनाई होवे। कोन जांच कराही की येकर कोख कइसे हरियागे। नारी सही दिखत ये पगली संग कोन अपन तन के गरमी जुड़ाइस। हादसा होही या बरपेली। का समझौता घलो हो सकथे? मन … आघू पढ़व

परतितहा मन पासत हे : बियंग

परतितहा मन पासत हे : बियंग

मानुख ल अपन मन के आस्था ल प्रकट करे बर कोनो से पुछे के जरूरत नइये। जइसन मन म आवथे तइसन रकम ले अपन सरधा ल भगवान म अरपन करव। काबर की भक्ति ह साधन करे ले मिलथे। सिरिफ इही … आघू पढ़व

माटी के कुरिया

सुख कब पाहू दु घड़ी -दू मंजिला महल भीतर म।थीरा लवं का दाई थोकुन,माटी के कुरिया अउ खदर म।। जाड़ म कपासी मरथवं,घाम म पछनाय परथवं।भिंसरहा के भटकत संझौती आवं,रतिहा चंदैनी के अंजोरी नई पावं।कोनजनी कब का हो जही -निंद … आघू पढ़व