Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: टीकेश्वर सिन्हा ‘गब्दीवाला’

बियंग : टुरी देखइया सगा

हमर गांव-देहात म लुवई-टोरई, मिंजई-कुटई के निपटे ले लोगन के खोड़रा कस मुंह ले मंगनी-बरनी, बर-बिहाव के गोठ ह चिरई चिरगुन कस फुरूर-फुरूर उड़ावत रइथे। कालिच मंगलू हल्बा के नतनीन ल देखे बर डेंगरापार के सगा आय रिहिस। चार झन रिहिन। दू झन सियनहा अउ दू झन नवछरहा टुरा। ठेला करा मोला पूछिस- ‘कस भइया, इहां हल्बा नोनी हावय बर-बिहाव करे के लइक।’ कहेंव- हव, कइसन ढंग के लड़की चाही आप मन ला। एक झन मोट्ठा सगा ह अंटियावत दांत निपोरीस- ‘कुंआरी।’ ओखर हांथी खिसा दांत ल देख के एक हुद्दा लगातेंव तइसे लागत राहे पर का करबे गांव-घर म आये सगा ए, सगा हर सगा होथे अउ लडक़ी देखइया ए काबर के गांव-घर के सबो के बेटी अपने बेटी होथे। सोंचके मन ल मुसेटेंव- ‘हाव सगा हो, चलव लेग देथंव। आगू-आगू मंय, पाछू मं भेंड़ कस मुंडी गड़ियाय सगा मन चलिन। मंगलू हल्बा घर पहुंचेंन।’ बोधन भइया हावय का … आघू पढ़व

तीजा जावत

तीजा जावत अपन बाई ल देख के मोला मनेमन अड़बड़ हाँसी लागेईमान से महापरसाद आज मोला अड़बड़ अलकरहा लागेसुत उठ के तरिया ले साबुन म नहा के आगेमइके जाय के सुध मंसाबुन डब्बा ल भुलागेलाटिया गुर डारे बरा मंगहूं पिसान … आघू पढ़व

सुरता अइस

सावन के महिना ह गन-गन-गन अइसअंधियारी पाख के निकलतउगोना ह सट ले निकलतउगोना ह सट ले अइसपरोसिन नोनी हरमोला भइया कहिके चिल्लइसमोला अपनबहिनी के सुरता अइसभादो के महिना मंतीजा ह लकट्ठइससेठ हर मोला आजलुगरा देखात अंखिअइसपोरा के बिहान दिनमोर मन … आघू पढ़व

पातर पान बंभुर के, केरा पान दलगीर

राऊत नाचा ह महाभारत काल के संस्कृति, कृसि, संस्कृति अउ भारत के लोक संस्कृति ले जुरे हावय। राऊत नाच राऊत मन के संस्कृति आय फेर ये ह भारतीय संस्कृति के पोषक घलो हे। भारत के संस्कृति कृसि प्रधान हे। ये … आघू पढ़व

मोला कभू पति झन मिलय – कहिनी

धान कोचिया राधे हर हुत करात अइस- सदानंद ठेलहा हस का रे? चल खातुगोदाम मेर मेटाडोर खड़े हे। विसउहा तेली के धान ल भरना हे। कइसे सुस्त दिखत हस रे। अल्लर- अल्लर। चल जल्दी। सुरगी म मार लेबे एकाध पउवा। … आघू पढ़व

घासीदास जी के अमर संदेश-पंथी गीत

सत ल जाने बर घासीदास सन्यासी होगे। सत असन अनमोल जिनीस ल पाए बर वाजिब साधना के जरूरत परिस। बर-पीपर सांही पवित्र वृक्ष ल छोड़के ये औंरा-धौंरा असन साधारन पेड़ के खाल्हे तपस्या म लीन होगे। ये घासीदास के निम्न … आघू पढ़व