Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: दिनेश चौहान

कबिता : बेटी मन अगुवागे

जमाना बदलगे झन करौ संगीबेटा-बेटी म भेद,बेटी मन अगुवागे चारों खुंटबेटा के रद्दा ल छेंक। पढ़ई-लिखई म अव्वल आथे,बेटा- मस्ती म समै बिताथेबेटी घरो के काम बुता म,सुग्घर दाई के हाथ बंटाथे। तभो ले तुंहर आंखी नइ उघरिस,बेटा के हावेच टेक। बेटी मन…॥बेटा के आस मा जे परवार बढ़ाहीमहंगाई वोला रोजे रोवाही,बहू के आए ले का हे गारंटी,बेटा तोला नइ ठेंगवा देखाही। आफिस, कछेरी अउ फौज पुलिस माकहूं डाहर तैं देख।बेटी मन अगुवा गे चारों खुंटबेटा के रद्दा ल छेंक॥ दिनेश चौहान शीतलापारानवापारा राजिम

छत्तीसगढ़ के कर्जादार

आज छत्तीसगढ़ी ह राजभाषा बनगे हावय। राजधानी ले अतेक अकन अखबार निकलथे के अंगरी म गिनना मुसकिल हे। फेर एक ठन छत्तीसगढ़ी अखबार आज ले नई निकल पाइस। ये निमगा छत्तीसगढ़ अखबार निकाले म घाटा दिखथे। एक कालम तो होना … आघू पढ़व

चिल्हर के रोना

आज के समे अइसन उपाय तो चिल्हर के रोना बर करे नी जा सकय। काबर के चिल्हर के रोना एक, दू अउ पांच रुपिया के जादा रथे अउ एकर नोट छपना बंद हो गे हे। अरे बंद नी होय होही … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ी में मुहावरा के परयोग

ये ह गोठ बात के बेरा म ओला परभावशाली अउ वजनदार बनाथे। ये गोठ बात ल पूरा करे के साथे -साथ सही समे अउ इस्थान में परयोग करे ले बोलइया-लिखइया के भाखा में परगट करथे। हमर छत्तीसगढ़ी घलो ह एक … आघू पढ़व

कहिनी : ईरखा अउ घंमड के फल

- भगवान कृष्ण मंझनिया के आराम करत राहय। घमण्ड से चूर दुरयोधन भगवान के मुड़सरिया कोती बइठ के कृष्ण के नींद खुले के इंतजार करे लगथे। ओतके बेर अर्जुन घलो मदद के नाम से पहुंचथे। ओला देख के दुरयोधन के … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ी में मुहावरा के परयोग

लोक जीवन में बोलचाल में मुहावरा के बड़ महत्व हे। ये भाखा अउ बोली के सिंगार होथे। ये ह गोठ बात के बेरा म ओला परभावशाली अउ वजनदार बनाथे। ये गोठ बात ल पूरा करे के साथे -साथ सही समे … आघू पढ़व