बेटी दमाद के करनी : नान्हे कहिनी
”बरतिया किथे कईसे गउंटिया जानत हस, हमन राउत हाथ के पानी नी पीयन तेला। हमन बड़े कबीरहा हरन। हमन नई खान तोर जेवन ल। हमन छोटे नई होवन। गउंटिया हा हाथ जोर के खड़ा होगे। फेर बराती मन टस के मस नी होईन। लगिन के बेरा हा निकलत रिहिस। दमाद बाबू बराती मन ल किथे हमन धरम के रखवारी करइया कबीरपंथी हरन। फेर कबीर के बताय रद्दा ल नी जानेन।” सहर के तीर म लगे एक ठन गाय बरहापुर रहाय। जिहां खेती किसानी ले भरपूर एक झन किसान रहाय। कतको गाड़ा के धनहा रहाय वोकर। तेकर सेती वोला गउंटिया कहाय। वोकर तिहारू नाव रहाय। जेकर दु झन बाबू अउ एक झन नोनी रहाय। नोनी अनिता ह सहर जाके अब्बड़ पढ़-लिख डरिस। येकर भाई बड़े रहाय तेकर सेती उंकर बर बिहाव होगे रहाय। नोनी भर एके झन बांचे रहाय। नोनी ह गउंटिया के दुलौरिन हरे। अतेक पढ़े-लिखे के बाद घलो अपन … आघू पढ़व


