बियंग : आन के तान
तुम आन के तान समझ गेव। मेंहा कांही अनीत नई कहे हंव। तहुं मन तो बिगर सोचे-समझे अपरेसन कराय बर बोल देव। न नर देखेव न मादा। भइगे तुंहर मुंहु ले फट ले निकलथे- ऑपरेशन कराव। तुंहर करा एके इलाज हे अपरेसन। सं गी हो! आजकाल मोला एक ठिक जबड़ भारी रोग हो गे हे। रोग का होय हे, मोर जीव के काल हो गे हे। रोग ये हे के मैं हर, आन कहत-कहत तान कहि पारथां, कोनो आन कहिथें त मैं हर तान समझ पारथों। पाछू, आठ महीना ले मोर कनिहा मा पीरा ऊचे लग गे। सोचेंव लापरवाही बने नोहय। कोनो डॉक्टर ला देखई देत हों। एक झिक कोन्टा-छाप डॉक्टर करा गेंव। देखथों ओकर नाक हर आलूगुण्डा कस फूले रहय। मैं सोंचेव जब ये हर अपने ‘नाक’ नई ओसका सकत हे त मोर कनिहा ला का मढ़ाही? ओला तुरते छोड़ेंव अऊ आने डॉक्टर करा गेंव। मे केहेंव- ‘जोहार ले … आघू पढ़व





