Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: यशपाल जंघेल

कहिनी : दूध भात

डोकरा काहत रिहिस दूध भात खाहूं कहिके। उही पाय के लोटा ल धर के दूध मांगे बर आए हंव। होही ते दे देतेस? अतका म बिसवन्तीन किहिस- काला बतांव डोकरी। मेहा तो ए रोगही बिलई के मारे मर गेंव। ते नइ पतियाबे, मंझनिया बेरा अंधियारी के बेंस ला लगाए बर भूला गेंव अऊ नाहे बर चल देंव। आवत ले बिलई ह जम्मो कसेली भर दूध ला पी डरिस। नदिया के तीर मां नानकून गांव- ‘जामगांव’। जामगांव के बड़े गंउटिया बेलास ह संझउती बेरा अंगना म बिछे खटिया मां बइठे रिहिस अउ तीर म पीड़हा मां बइठे रिहिस खम्मन ह। दूनो झन चाहा पीयत रिहिस। खम्मन पहिली बइला कोचिया रिहिस। गांव-गांव जाके बइला-भंइसा बेचय। फेर अब जुग बदलगे। किसानी करे के तरीका बदलगे। नांगर, बइला, गाड़ा नंदागे। ट्रेक्टर आगे। ओकरे सेती खम्मन के धंधा घलो चउपट होगे। खम्मन सोचिस अब का करे जाय? खम्मन देखिस आजकल साहर अउ गांव मां नावा … आघू पढ़व

कहिनी : चटकन

‘ओ खाली परिया जमीन म न मंदिर बनाए जाय न मस्जिद बनाए जाय। ओमा एक अइसे आसरम बनाए जाए जेमा बेसहारा डोकरा, डोकरी, बइहा कस किंजरइया मनखे, अनाथ लोग लइका राहय। संग म गांव के अइसे मनखे जेखर गुंजाइस के … आघू पढ़व

कहिनी : धुरंधर महाराज

कपड़ा के नांव म कनिहा म नानकुन कपड़ा लटके के रिहिस। चुंदी छरियाय रिहिस। तन बिरबिट करिया। दांत निकले। जाड़ म लुद-लुद-लुद-लुद कांपत रिहिस। बही ह टक लगाके आगी तपइया सबो झन ल देखत रिहिस कांही नइ काहत रिहिस। फेर … आघू पढ़व

कहिनी : दहेज के विरोध

आज के ये दहेज प्रथा ह सुरसा रक्सिन कस मुंहुं ल उलाके हमर सइघो समाज ल लीलत हवय। ये दहेज रूपी सुरसा ले कोनो नी बांचत हे। फेर रामलाल सरपंच ह बजरंग बली कस दहेज रूपी सुरसा रक्सिन ले बांचे … आघू पढ़व

सतनाम सार हे

झन काहा तोर मोर, मतलभिया संसार हे। भज ले रे सतनाम। इहां सतनाम सार हे॥ झन बिसराव ठीहा ल, जब तक हवे सांस ह। सत के रद्दा म रेंगव, कहि गे हे घासीदास ह॥ जे देखाथे रद्दा सबला ऊंखरे जय … आघू पढ़व

कहिनी : हिरावन

‘हिरावन बारवीं म मेरिट म पास होईस। फेर नेमसिंग, हिरावन ल आगू नई पढ़इस। सोचिस ‘जादा पढ़े-लिखे ले मनखे अलाल हो जाथे। नउकरी त मिलना नइ हे।’ ईतवारी, हिरावन ल पढ़ाए बर नेमसिंग ल फेर किहिस। फेर नेमसिंग उहू ल … आघू पढ़व