Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: रघुबीर अग्रवाल ‘पथिक’

कबिता : नवा तरक्की कब आवे हमर दुवारी

अरे गरीब के घपटे अंधियारगांव ले कब तक जाबे,जम्मो सुख ला चगल-चगल केरूपिया तैं कब तक पगुराबे?हमर जवानी के ताकत लाबेकारी तैं कब तक खाबे?ये सुराज के नवा तरक्कीहमर दुवारी कब तक आबे?हमर कमाए खड़े फसल लगरकट्टा मन कब तक चरहीं?कब रचबो अपनों कोठार मसुख-सुविधा के सुग्घर खरही?कब हमरो किस्मत के अंगनासुख के सावन घलो मा कब तकउप्पर ले खाल्हे मा कब तकनवा सुरूज ह घलो उतरही?हमर भुखमरी एहवाती हेहमर गरीबी हे लइकोरी।जिनगी के रद्दा मा ठाढ़ेदु:ख, पीरा मन ओरी-ओरीदेख हमर दु:ख पीरा कोनोबड़का-बड़का बात बघारै।कागज के डोंगा म कोनोबाढ़ पूरा पार उतारै।नानुक कुर्सी, थोरिक पइसाअपरिध्दा के अक्कल मारै।सूपा हर बोलय तो बोलयचलनी तक मन टेस बघारै।चितकबरा हे दीन दयालूसंकट मोचन हे मतलबियाऊप्पर ले दगदग ले दीखैअउ भितरी ले बिरबिट करिया।झूठ-मूठ तो सच्ची लागैसही बात हर लगय लबारी।दुनिया म बहिरूपिया मन केअड़बड़ कुसकिल हवै चिन्हारी।दुखिया के आंसू सकेल केदुखीराम काला गोहरावै?वोट, नोट के जादूगर तोकिसम-किसम के खेल देखावै।हमर पसीना भाग … आघू पढ़व

चरगोड़िया : रघुबीर अग्रवाल ‘पथिक’

चारों खुंट अंधेर अघात। पापी मन पनपै दिन रात। भरय तिजौरी भ्रस्टाचार आरुग मन बर सुक्खा भात॥ रिसवत लेवत पकड़ागे तौ रिसवत देके छूट। किसम-किसम के इहां घोटाला, बगरे चारों खूंट। कुरसी हे अऊ अक्कल हे, अउ हावय नीयत चोर … आघू पढ़व

रघुबीर अग्रवाल पथिक के छत्तीसगढ़ी मुक्तक : चरगोड़िया

छत्तीसगढ़ के माटी मा, मैं जनम पाय हौं।अड़बड़ एकर धुर्रा के चंदन लगाय हौं॥खेले हौं ये भुँइया मा, भँवरा अउ बाँटी।मोर मेयारूक मइया, छत्तीसगढ़ के माटी॥ छत्तीसगढ़ मा हवै सोन, लोहा अउ हीरा।हवैं सुर, तुलसी, गुरु घासीदास, कबीरा॥हे मनखे पन, … आघू पढ़व