कबिता : नवा तरक्की कब आवे हमर दुवारी
अरे गरीब के घपटे अंधियारगांव ले कब तक जाबे,जम्मो सुख ला चगल-चगल केरूपिया तैं कब तक पगुराबे?हमर जवानी के ताकत लाबेकारी तैं कब तक खाबे?ये सुराज के नवा तरक्कीहमर दुवारी कब तक आबे?हमर कमाए खड़े फसल लगरकट्टा मन कब तक चरहीं?कब रचबो अपनों कोठार मसुख-सुविधा के सुग्घर खरही?कब हमरो किस्मत के अंगनासुख के सावन घलो मा कब तकउप्पर ले खाल्हे मा कब तकनवा सुरूज ह घलो उतरही?हमर भुखमरी एहवाती हेहमर गरीबी हे लइकोरी।जिनगी के रद्दा मा ठाढ़ेदु:ख, पीरा मन ओरी-ओरीदेख हमर दु:ख पीरा कोनोबड़का-बड़का बात बघारै।कागज के डोंगा म कोनोबाढ़ पूरा पार उतारै।नानुक कुर्सी, थोरिक पइसाअपरिध्दा के अक्कल मारै।सूपा हर बोलय तो बोलयचलनी तक मन टेस बघारै।चितकबरा हे दीन दयालूसंकट मोचन हे मतलबियाऊप्पर ले दगदग ले दीखैअउ भितरी ले बिरबिट करिया।झूठ-मूठ तो सच्ची लागैसही बात हर लगय लबारी।दुनिया म बहिरूपिया मन केअड़बड़ कुसकिल हवै चिन्हारी।दुखिया के आंसू सकेल केदुखीराम काला गोहरावै?वोट, नोट के जादूगर तोकिसम-किसम के खेल देखावै।हमर पसीना भाग … आघू पढ़व


