सरग असन मोर गांव
”लोक कला ल बिगाड़ने वाला कलाकार मन छत्तीसगढ़ जइसे सुंदर राज भारी कलंक आए। फेर कहीथें न कि ”टिटही के पेले ले पहार ह नई पेलाय।” अइसने हे हमर लोककला ल बिगाड़-बिगाड़ के देखाने वाला कलाकार मन अपन जिनगी म जादा सफल नई हो सकय। जल्दी नाम दाम कमाए के चककर म जउन कलाकार परही तेहर ओतक जल्दी नंदा घलो जाही।” गांव में सबले जादा अगर कोनो गारी खाय ओहा करमु सेठ रहीसे। अउ जेकर बिना गांव के कोनो काम नई होवय उहुच हा करमु सेठ रहीस। मरनी-हरनी, छट्ठी-बरही, बर-बिहाव, गांव के तीज-तिहार कोनो काम सेठ के बिना नई निपटय। गांव के चिट्ठी-पतरी, मनीआर्डर सबों सेठ के पता में आवय। कोनो ला गांव में पइसा के जरूरत पड़ जाय तो सेठ के दुकान ले ओहा पइसा उठा लय। अउ काकरो मेर उपरहा पइसा हो जाए अउ ओला चोरी-हारी के डर सताय बर धर लय तो ओहा सेठ जगा अपन पइसा … आघू पढ़व


