Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: शेरसिंह गोड़िया

घाम घरी आगे – कबिता

घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे। तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे॥का बतावंव संगी,घाम के कहर।गांव-गांव, शहर-शहरहोवत हे हाहाकार॥भूख-पियास म मनखे के मुंहु चोपियागे।घाम घरी आगे, रूख-राई अइलागे।धू-धू जरत हवय,धरती दाई के कोरा।आगी अंगरा बरोबर घाम बरसावत हवय बेरा॥कोन जनि काबर इंद्र देवता रिसागे।घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे॥सब जीव-जन्तु,हवय बड़ परसान रे।अपन परान ल हम,कइसे? बचान रे॥पानी-पानी सब गोहराथें, बइसन बिपत आगे?घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे।तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे। शेरसिंह गोडियामुकाम- कोलियारी, पो.-गैंदाटोलातह. छुरिया, जिला-राजनांदगांव

मनखे बन के बता : कबिता

नगरा लुच्चा बनना सरल हे, तंय मनखे बन के बता।मनखे-मनखे एक समान कोनहो गरीब ल झन सता॥धन अऊ बल रावन जइसे के घलो काम नई आइस,तंय अलोक्खन ले बहिर, अपन आप ल झन जता।भारत साधु, संत, रिसि, मुनि, संस्कार के … आघू पढ़व