दारू बंदी के रद्दा अब चातर होवत हे
हमर प्रदेस मा चारो मुड़ा कारखाना उपर कारखाना लगत हावय, धान के कटोरा छत्तीसगढ़ मा किसानी जोंत के रकबा दिनो-दिन घटत जावत हावय। सहर ले लगे गांव-खेत मन ला बिल्डिंग हा लीलत हावय अउ जंगल-ड़ोंगरी के जमीन मन ला कारखाना हा लीलत हावय। बांचे खोंचे किसानी के जमीन हा कारखाना के चिमनी ले उड़ात करिया राखड़ अउ प्रदूसन ले पटर्रा भांठा होवत जावत हे। कारखाना वाले मन पइसा के बल मा सइघो नदिया अउ बांधा जईसे ला बिसा के पानी के प्राकृतिक संसाधन ला सिरवात हावंय। कारखाना बर सरकार अउ बेपारी किसान के जमीन बिसावत हावय, जमीन बेंचई मा छोटे-बडे़ किसान मेर सामरथ ले जियादा, बेसमय, अंधेर पईसा आ गे हे। पइसा के गरमी ला अंधेर किसान मन पचा नई पात हें। मुआवजा ले मिले पईसा ले चना मुर्रा कस फटफटी बिसावत हावय अउ फटफटी के पाछू भूतपूर्व किसान लिखवा के पईसा ला दारू म उड़ावत हावय। दारू के निसा … आघू पढ़व





