Chhattisgarhi
  • सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

    ग्राम सुराज

    फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी

    ''पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप आघू पढव...

    छत्तीसगढ़ी कव्वाली- भरमाहा होगे नर तन

    भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता आघू पढव...

    ''अमरइया म ना''

    चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल आघू पढव...

    तोर मेहनत के लागा ल.....

    तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार आघू पढव...

    माटी के मँदरी

     माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल आघू पढव...

    सोन चिरई

    ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला आघू पढव...

    मई दिवस

    अइसन होथे काबर..... अइसन होथे काबर संसार म मेहनत आघू पढव...

    आईपीएल के बुखार

    स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार आघू पढव...

Category Archives: हरखराम पेंदरिया ‘देहाती’

कबिता : चोरी ऊपर ले सीना जोरी

मध्यान्ह भोजन के टेम रीहिसखाना पकईया ह मोलासरकारी परसाद ल दे के कहिसथोर कीन चीख तो गुरूजीचीखत-चीखत मे हअतका खा गेंवकि ऊही करा कुरसी मासुत गेंव।अचानक बीईओ साहब हस्कूल आईसमोला पढाये के बदला मा सूते पाईसओकर गुस्सा ह पांवतरी ल छोड़ माथा मा चढ़गीसमोला झंझकोर के जगाईस अऊ कहीसकक्छा मा तोलाथोरको सरम नई आईसमें ह थोरकिन उसनींदा रहेंवतभो ले साहब ल कहेंवसाहब तें ह मोला गलत झन समझमें ह लइका मन लासमझावत रेहें हवकुंभकरणी नींद कईसे होथेकुंभकरणी नींद मा आदमीमोरे कस सोथे! हरखराम पेंदरिया ‘देहाती’ श्रीराम मंदिर रोड, महासमुन्द

डॉक्टर अउ कवि

मैं हरखराम पेंदरिया ‘देहाती’ गेयेंव डॉक्टर के पास डाक्टर मोला देख के अड़बड़ परसन्न होगे सोचिस शगुन बढ़िया दिखते हे आज रिटायर्ड हेड मास्टर आय अड़बड़ रुपया-पईसा हे येकर पास। मोला देख के डॉक्टर ह पूछिस- का तकलीफ हे तोला … आघू पढ़व

कबिता: न ते हारे न में जीतेंव

सनीमा वाला बरसात मा ‘आग ही आग’ लगाथे जड़कला मा ‘हिमालय के गोद मा बिठाथे गर्मी मा’ ‘बिन बादल बरसात’ ल कराथे टोकबे त कहिथे ऐमा तोर ददा के का जाथे! स्टेशन मास्टर स्टेशन मा लिखाये रहिथे फलाना गाड़ी कब … आघू पढ़व

मोबाईल हास्य कबिता

एक दिनमे ह लेड़गा भईया ल कहेंवसुन गा भईयामोर घर जामे ह मोबाइल लभूला गें हंवओला घर ले धर के लाऐला सुन केवो ह दौड़त-दौड़तमोर घर गीसघर के मोहाटी मामोर बाई ल बइठे पाईसमोबाईल के बदला मामोर बाई ल धर … आघू पढ़व