कबिता : चोरी ऊपर ले सीना जोरी
मध्यान्ह भोजन के टेम रीहिसखाना पकईया ह मोलासरकारी परसाद ल दे के कहिसथोर कीन चीख तो गुरूजीचीखत-चीखत मे हअतका खा गेंवकि ऊही करा कुरसी मासुत गेंव।अचानक बीईओ साहब हस्कूल आईसमोला पढाये के बदला मा सूते पाईसओकर गुस्सा ह पांवतरी ल छोड़ माथा मा चढ़गीसमोला झंझकोर के जगाईस अऊ कहीसकक्छा मा तोलाथोरको सरम नई आईसमें ह थोरकिन उसनींदा रहेंवतभो ले साहब ल कहेंवसाहब तें ह मोला गलत झन समझमें ह लइका मन लासमझावत रेहें हवकुंभकरणी नींद कईसे होथेकुंभकरणी नींद मा आदमीमोरे कस सोथे! हरखराम पेंदरिया ‘देहाती’ श्रीराम मंदिर रोड, महासमुन्द


