सबद ढाबा : छत्तीसगढ़ी शब्दकोश (छत्तीसगढ़ी : हिन्दी)
अ
अँउठियाना : दीवार के निचले भाग की पुन: पुताई करने की क्रिया
अँउठियवनी : दीवार के निचले भाग की पुन: पुताई करने का खर्च/पारिश्रमिक
अँइठ : एंठने की क्रिया या भाव
अँइठुल : एंठने वाला
अंगठा : अंगूठा
अंगरी/अंगुरी : उंगली
अचोना : खाने के बाद हाथ धोना
अरोना : टांगना
आ
ऑंच : अग्नि की गर्मी/तपिश
ऑंकना : दागना गर्म वस्तु से जलाना/अनुमान लगाना
ऑंखी : ऑंख, नयन
ऑंजना : ऑंख में लगाना
ऑंटना : रस्सी बटना
आही बाहीं : आजू बाजू
आघू : आगे
आरूग : पवित्र/जिसे कोई प्रयोग न किया हो/देव में चडाले लायक
इ
इंकर/इंखर : इनका
इंकरो/इंखरो : इनका भी
इंहिचे/इंहचे : यहीं
इचिद्दे : अभी, इसी समय
इडहर : अरबी के पत्ते पर बेसन लपेटकर तेल में छान कर पकाई गई तरकारी
इमला : बोलकर लिखाना
इही : यही
इतवारी : रवीवारीय
ई
ईंच : खींचने की क्रिया
ईंचइया : खींचने वाला
ईंचउनी : खींचने या खींचवाने की पारिश्रमिक
ईर्खा : ईष्या
ईमान से : सही में, सच्ची में, कसम खाना
ईसर : ईश्वर
ईतरई : शरारत
ईतराना : शरारत करना
उ
उंकर/उंखर : उनका, उसका
उखरू : उकडू बैठना
उखरा : खाली पैर/रस से पगा हुआ
उंटवा : उंट पशु
उकले/उखरे : उधड़ा हुआ
उकलउनी : उधाड़ने की पारिश्रमिक
उखान/उखानना : उखाड़ना
उत्ती : पूर्व
ए
एकर/एखर : इसका
एकरेच/एखरेच : इसी का निश्चयात्मक
एकक : अलग अलग
एकड़ा/अकड़ा : अकेला
एकउहा : एक साथ, बिना विश्राम किये
एके : एक जैसा
एकमई : सम्मिलित
एती : इधर
ओ
ओंगन :बैलगाडी के पहिये की केन्द्र कील में लगाने वाला गाढा तेल
ओकर/ओखर : उसका
ओतहा : आलसी
ओती : उधर
ओदे : वह देखो
ओद्दा : आद्र/गीला
ओधाना : टिकाना/आड करना
ओमेर : उस जगह
औ
औंटाना : द्रव्य को आग में पका कर कम करना
औंतरना : अवतरण/जन्म लेना
औंसा : दही आदि से सडा खाद्य पदार्थ
औना : मिट्टी के बने अनाज भण्डार के निचले हिस्से में अनाज निकानले के लि बनाया गया छेद.
औने पौने : सस्ते में/पानी के मोल
औंहा झौंहा : अंधाधंध
औ/अउ : और
औंरसठ : अड़सठ
पहिली परकासित शब्दकोश मन के सहारा ले अउ कुछ हमर सोंच ले हम इंहा छत्तीसगढ़ी शब्द मन के हिन्दी अरथ देहे के सरलग उदीम करत हावंन, आपों मन ले बिनती हावय के शबद के सही अरथ बर हमला बतावव, अपन टिप्पनी खच्चित देवव.
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बुधराम यादव वरिष्ठ संपादक
संजीव तिवारी संपादक
संपादकीय कार्यालय :
सूर्योदय नगर, खण्डेलवाल कालोनी
दुर्ग, छत्तीसगढ 491001
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हमर उदीम मेकराजाला म छत्तीसगढी भाखा के रचना मन ला धरनहा राख के एके जघा सकेले के हावय. हमर छत्तीसगढ के रहइया मन ला तो हमर भाखा के साहित्य के भंडार ल झांके बर मिल जाथे, फेर इहां ले बाहिर रहइया हमर भाखा के परेमी मन बर अपन महतारी भाखा ला पढे अउ सुने के ये ह सुघ्घर साधन आय. गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम कइसे लागिस हमला बताहू.
तिवारी जी मोला ये पढ के बड खुशी होईश के हमरो भाखा छत्तीसगढी ला हमन अपन ढन ले पढ पाबो अउ लिख घलो लेबो
कोनो कवी हा केहे घलो हे कि
छत्तीसगढ के कन्हार माटी, पिवरा रंग मटासी हे, गुरमतिया के मोटहा चाऊर ,गजब मिठाये बासी हा साग मा जइसे जिमी काँदा अऊ अमसुरहा कड़ही हे वइसने अरबड़ मयारु सँगवारी,मोर ये भाखा छत्तीसगढ़ी हे छत्तीसगढी हे,..,.!!