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	<title>Chhattisgarhi</title>
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		<title>गीत : मोर गाँव म  संगी</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Feb 2012 13:13:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[गीत]]></category>
		<category><![CDATA[शकुन्तला तरार]]></category>

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		<description><![CDATA[मोर गाँव म संगी बसंत हा आगे हे , मोर गाँव म !! पाना पिंवरा ला धरती दाई अपन कोरा म झोंकय नावा पाना लहर &#8211; लहर के खांदा म मेछरावय एखर छाँव म संगी मति छरिया गे हे मोर गाँव म!! फागुन म मौहा के फूल हा गोरी ला रिझावय चिकन-चाकन लुगरा पोलका सजधज <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b5-%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Shakuntala-tarar1.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FShakuntala-tarar1.jpg','Shakuntala-tarar')"><img class="alignleft  wp-image-805" title="Shakuntala-tarar" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Shakuntala-tarar1.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FShakuntala-tarar1.jpg','Shakuntala-tarar')" alt="" width="174" height="161" /></a>मोर गाँव म संगी बसंत हा आगे हे , मोर गाँव म !!</p>
<p>पाना पिंवरा ला धरती दाई अपन कोरा म झोंकय<br />
नावा पाना लहर &#8211; लहर के खांदा म मेछरावय<br />
एखर छाँव म संगी मति छरिया गे हे मोर गाँव म!!</p>
<p>फागुन म मौहा के फूल हा गोरी ला रिझावय<br />
चिकन-चाकन लुगरा पोलका सजधज के सिंगारय<br />
गवां पठौनी के बेर आगे मन म कुलकावय मोर गाँव म!!</p>
<p><strong>शकुंतला तरार</strong></p>
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		<title>मया के डोर बाँध ले न जी</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Feb 2012 12:15:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[आदित्‍य सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[गीत]]></category>

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		<description><![CDATA[छिन भर मा संग छूट जाही. मया के डोर बाँध ले न जी तोर हमर मया रही जाही, मया के डोर बाँध ले न जी मया के डोर बाँध ले न संगी मया के डोर बाँध ले न जी. छिन भर&#8230; चाँउर के चीला अऊ सिथा के अंगाकर जी चुनी के अंगाकर। बाँटा के झगरा <a href="http://gurturgoth.com/aditya-singh/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/aaditya-singh.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2Faaditya-singh.jpg','aaditya+singh')"><img class="alignleft  wp-image-723" title="aaditya singh" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/aaditya-singh-239x300.jpg" alt="" width="153" height="192" /></a>छिन भर मा संग छूट जाही. मया के डोर बाँध ले न जी<br />
तोर हमर मया रही जाही, मया के डोर बाँध ले न जी<br />
मया के डोर बाँध ले न संगी मया के डोर बाँध ले न जी. छिन भर&#8230;</p>
<p>चाँउर के चीला अऊ सिथा के अंगाकर जी चुनी के अंगाकर।<br />
बाँटा के झगरा परेम मन के आगर, परेम मन के आगर।<br />
लइका पन के सुरता लहुट आही&#8230; मया के डोर बाँध ले न जी।1।</p>
<p>गिल्ली डंडा. भौँरा बाँटी,डंडा पचरंगा जी डंडा पचरंगा।<br />
तरी के पतोही चिरहा, कुरता भरभंगा जी कुरता भरभंगा।<br />
किस्मत ह कतेक दिन रिसाही&#8230;मया के डोर बाँध ले न जी।2।</p>
<p>सावन के कमरा खुमरी. अर ततत बोली जी अर ततत बोली।<br />
तैहा के गोठ होगे भौजी के ठिठोली जी भजी के ठिठोली।<br />
चकमक म चोँगी के सिपचाई&#8230;मया के डोर बाँध ले न जी।3।</p>
<p>छिन भर के मया पीरा. छिन भर के गारी जी छिन भर के गारी।<br />
छिन भर अँजोरी के फेर अंधियारी जी फेर अंधियारी।4।<br />
छिन भर म बेरा पंग पंगाही&#8230; मया के डोर बाँध ले न जी&#8230;.</p>
<p><strong>आदित्‍य सिंह </strong><br />
महासमुंद<br />
aditya.singh1064@gmail.com</p>
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		<item>
		<title>अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति</title>
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		<pubDate>Thu, 09 Feb 2012 15:31:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[सुशील भोले]]></category>

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		<description><![CDATA[आजकाल ‘अस्मिता’ शब्द के चलन ह भारी बाढग़े हवय। हर कहूँ मेर एकर उच्चारन होवत रहिथे, तभो ले कतकों मनखे अभी घलोक एकर अरथ ल समझ नइ पाए हे, एकरे सेती उन अस्मिता के अन्ते-तन्ते अरथ निकालत रहिथें, लोगन ल बतावत रहिथें। अस्मिता असल म संस्कृत भाषा के शब्द आय, जेहा ‘अस्मि’ ले बने हे। <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignleft" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/01/Sushil-227x300.jpg" alt="" width="227" height="300" />आजकाल ‘अस्मिता’ शब्द के चलन ह भारी बाढग़े हवय। हर कहूँ मेर एकर उच्चारन होवत रहिथे, तभो ले कतकों मनखे अभी घलोक एकर अरथ ल समझ नइ पाए हे, एकरे सेती उन अस्मिता के अन्ते-तन्ते अरथ निकालत रहिथें, लोगन ल बतावत रहिथें। अस्मिता असल म संस्कृत भाषा के शब्द आय, जेहा ‘अस्मि’ ले बने हे। अस्मि के अर्थ होथे ‘हूँ’। अउ जब अस्मि म ‘ता’ जुड़ जाथे त हो जाथे ‘अस्मिता’ अउ ये दूनों जुड़े शब्द के अरथ होथे- ‘मैं कोन आँव?’, मैं कौन हूँ?, मेरी पहचान क्या है?, मोर चिन्हारी का आय? अब ये बात ल तो सबो जानथें के हर मनखे के या क्षेत्र के चिन्हारी वोकर संस्कृति होथे। एकरे सेती हमन कहिथन के जे मन छत्तीसगढ़ के संस्कृति ल जीथे वोमन छत्तीसगढिय़ा। अइसने जम्मो क्षेत्र के लोगन के निर्धारण वोकर संस्कृति संग होथे।</p>
<p style="text-align: justify;">एक बात इहाँ ध्यान दे के लाइक हे के भाषा ह संस्कृति के संवाहक होथे, वोकर प्रवक्ता होथे, एकरे सेती कोनो क्षेत्र विशेष के भाषा भर ल बोले म कोनो मनखे ल वो क्षेत्र के मूल निवासी नइ माने जा सकय। अब हमन छत्तीसगढ़ के संदर्भ म देखन। इहाँ के मातृभाषा छत्तीसगढ़ी ल आज इहाँ के मूल निवासी मन के संगे-संग बाहिर ले आके रहत लगभग अउ जम्मो लोगन थोक-बहुत बोलबेच करथें, तभो ले उनला हम छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नइ मानन, काबर उन आजो इहाँ रहि के घलोक अपन मूल प्रदेश के संस्कृति ल जीथें। पंजाब ले आये मनखे पंजाब के संस्कृति ल जीथे, बंगाल ले आये मनखे बंगाल के संस्कृति ल जीथे, अउ अइसने आने लोगन घलो अपन-अपन मूल प्रदेश के संस्कृति ल ही जीथें, उही संस्कृति के अंतर्गत इहाँ कतकों किसम के आयोजन घलोक करत रहिथें। ए ह ए बात के चिन्हारी आय के वो ह आज घलोक छत्तीसगढ़ के ‘चिन्हारी’ ल अपन ‘चिन्हारी’ नइ बना पाए हे, इहाँ के अस्मिता ल आत्मसात नइ कर पाए हे। अउ जब तक वो ह इहाँ के अस्मिता ल आत्मसात नइ कर लेही तब तक वोला छत्तीसगढिय़ा नइ माने जा सकय।</p>
<p style="text-align: justify;">हम ए उदाहरण म भारत ले जा के विदेश म बसे लोगन मनला घलोक शामिल कर सकथन। आज घलो अइसन लोगन ल हम भारतीय मूल के लोगन कहिथन, भारतीय संस्कृति ल विदेश म बगराने वाला कहिथन काबर ते उन आने देश म रहि के घलोक भारत के संस्कृति ल जीथें, भारत के तिहार-बार ल मनाथें। जबकि उहाँ बसे अइसे कतकों लोगन हें, जे मन भारत के भाषा ल भुलागे हवंय, फेर संस्कृति ल आजो धरे बइठे हावंय। क्रिकेट खेले बर इहाँ वेस्ट इंडीज के जेन टीम आथे, वोमा अइसन कतकों झन रहिथें, जे मन भारतीय मूल के होथें, उंकर मनके नाम घलोक शिवराम चंद्रपाल जइसन भारतीय किसम के होथे, फेर उन इहाँ के भाषा ल नइ बोले सकयं। भाषा उहें के बोलथें जिहाँ अब रहिथें, तभो ले उनला भारतीय मूल के कहे जाथे, काबर ते वोकर पहिचान के या कहिन के चिन्हारी के मानक संस्कृति होथे।</p>
<p style="text-align: justify;">अब हम छत्तीसगढ़ के संस्कृति के बात करन या कहिन के अस्मिता के बात करन। त सबले पहिली ए बात उठथे के छत्तीसगढ़ के संस्कृति का देश के आने भाग म पाए जाने वाला संस्कृति ले अलग हे? त एकर जवाब हे- हाँ बहुत अकन परब-तिहार अउ रिति-रिवाज अलग हे, अउ उही अलगे मनके सेती हम छत्तीसगढ़ ल एक अलग साँस्कृतिक इकाई मानथन, जेकर सेती ए क्षेत्र ल एक अलग राज के रूप म मान्यता दे गे हवय। वइसे कुछ अइसे घलोक तिहार-बार हे, जेला पूरा देश के संगे-संग छत्तीसगढ़ म घलोक मनाए जाथे, फेर जब अलग चिन्हारी के बात आथे त अइसन मनला अलगिया दिए जाथे। अब प्रश्न ये उठथे के अइसन का अलग हे जेन संस्कृति ल आने प्रदेश म नइ जिए जाय? त ए बात ल सब जानथें के मैं ह इहाँ के मूल संस्कृति ऊपर पहिली घलोक अड़बड़ लिखे हौं, अउ बेरा-बेरा म एकर ऊपर चरचा-भासन घलोक दिए हौं, तभो ले कुछ रोटहा बात ल थोक-मोक फेर करत हावंव।</p>
<p style="text-align: justify;">सबले पहिली छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति का आय, तेला फोरिया लेथन। काबर ते आज इहां के संस्कृति के जेन रूप देखाए जावत हे, वोकर मानकीकरण ल गलत करे जावत हे। असल म कोनो भी क्षेत्र या प्रदेश के संस्कृति के मानक उहाँ के मूल निवासी मन के संस्कृति होथे, बाहिर ले आके इहाँ बस गे लोगन मन के संस्कृति ह नइ होवय, फेर कोन जनी इहाँ के तथाकथित विद्वान मनला का मनसा भरम धर लिए हे, ते उन इहाँ के मूल निवासी मनके संस्कृति ल एक डहर तिरिया दिए हें, अउ बाहिर ले आए लोगन मन के संस्कृति ल छत्तीसगढ़ के संस्कृति के रूप म लिखत-पढ़त हें। ये ह असल म इतिहास लेखन संग दोगलागिरी करना आय, तभो ले कुछ लोगन ए दोगलागिरी ल पूरा बेसरमी के साथ करत हें। एमा वो लोगन मन के संख्या जादा हे, जे मन उत्तर भारत ले आ के इहाँ बसे हवंय, एकरे सेती उन अस्मिता के आत्मा के रूप म संस्कृति ल छोड़ के भाषा ल बतावत रहिथें। काबर ते उन ए बात ल अच्छा से जानथें के जब इहाँ के मूल संस्कृति के बात करबो तब तो हमूँ मन गैर छत्तीसगढिय़ा हो जाबो, बाहिरी हो जाबो, काबर ते छत्तीसगढ़ के संस्कृति ल तो उहू मन नइ जीययं।</p>
<p style="text-align: justify;">अब कुछ मूल संस्कृति के बात। त सबले पहिली वो चातुर्मास के बात जेला चारोंखुंट मनाथें, फेर जे छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति म लागू नइ होय। अइसे कहिथें के चातुर्मास के चार महीना म देंवता मन बिसराम करथें या कहिन के सूत जाथें, एकरे सेती ए चार महीना (सावन, भादो, कुंवार अउ कातिक) म कोनो भी किसम के शुभ कारज (माँगलिक कार्य, जइसे- बर-बिहाव आदि) नइ करे जाय। अब हम छत्तीसगढ़ के परब-तिहार के बात करन त देखथन के इहाँ भगवान शंकर अउ देवी पार्वती के बिहाव के परब ल ‘गौरा पूजा’ या ‘गौरी-गौरा’ के रूप म इही चातुर्मास के भीतर माने कातिक महीना के अमावस्या तिथि म मनाए जाथे। अब प्रश्न उठथे, के जब भगवान के बिहाव ह देवउठनी माने चातुर्मास सिराये के पहिली हो जाथे, त ए चातुर्मास के रिवाज ह हमर छत्तीसगढ़ के संस्कृति म कहाँ लागू होइस?</p>
<p style="text-align: justify;">मोर तो ए कहना हे के छत्तीसगढ़ के संस्कृति म चातुर्मास के इही चारों महीना ल सबले जादा शुभ अउ पवित्र माने जाथे, काबर ते इही चारों महीना- सावन, भादो, कुंवार, कातिक म ही छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति के जम्मो बडक़ा परब मन आथें, जेमा हरेली ले लेके कातिक पुन्नी ले चालू होवइया मेला-मड़ई परब ह आथे।</p>
<p style="text-align: justify;">अब एक अइसे बडक़ा तिहार के चरचा जेला पूरा देश म मनाए जाथे, फेर वोकर कारण अउ स्वरूप म बाहिर म अउ छत्तीसगढ़ म थोर-बहुत फरक होथे, वो तिहार आय होली। होली के बारे ए बात ल जानना जरूरी हे के छत्तीसगढ़ म एला ‘काम दहन’ के रूप म मनाए जाथे, जबकि देश के आने भाग म ‘होलिका दहन’ के सेती। होलिका दहन ल सिरिफ पाँच दिन के मनाए जाथे, जे ह फागुन पुन्नी ले लेके रंग पंचमी (चइत महीना के अंधियारी पाख के पंचमी) तक चलथे। छत्तीसगढ़ म जेन ‘काम दहन’ मनाए जाथे वोला चालीस दिन के मनाए जाथे- बसंत पंचमी (माघ महीना अंजोरी पाख के पंचमी) ले लेके फागुन पुन्नी तक।</p>
<p style="text-align: justify;">बिल्कुल अइसने दसरहा के बारे म जानना घलोक जरूरी हे। काबर के इहू परब ल छत्तीसगढ़ म अउ देश के आने भाग म अलग-अलग कारण के सेती मनाए जाथे। जिहाँ देश के आने भाग म एला ‘रावण वध’ के सेती मनाए जाथे, उहें छत्तीसगढ़ म ‘विष हरण’ माने ‘दंस हरन’ के रूप म मनाए जाथे। हमर बस्तर म जेन रथ यात्रा के परब मनाए जाथे वो असल म मंदराचल पर्वत के मंथन अउ वोकर बाद निकले विष के हरण के परब आय। बस्तर के दसरहा अउ कल्लू (मनाली) के दसरहा, ए दूनो ह एके आय।</p>
<p style="text-align: justify;">अस्मिता के जब बात होथे त भाषा अउ इतिहास के बात घलोक होथे। काबर ते इहू मन अस्मिता माने ‘चिन्हारी’ के अंग आयं। जिहाँ तक भाषा के बात हे त हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा सन् 1885 म लिखे छत्तीसगढ़ी भाखा के व्याकरण संग एकर प्रकाशित रूप हमर आगू म हवय, जेला अब इहाँ के राज सरकार ह प्रदेश म ‘राजभासा’ के दरजा दे दिए हवय, फेर केन्द्र सरकार के माध्यम ले संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल करे के बुता ह अभी घलोक बाँचे हवय।</p>
<p style="text-align: justify;">आज छत्तीसगढ़ी भाखा म हर विधा के अंतर्गत रचना करे जावत हे, अउ अच्छा रचना करे जावत हे, जेला राष्ट्रीय स्तर के आने भाखा के साहित्य मन संग तुलना करे जा सकथे। नवा पीढ़ी के रचनाकार मन म अच्छा उत्साह देखे जावत हे, जे मन ल इहां के पत्र-पत्रिका मन म प्रकाशन के अवसर घलोक अच्छा मिलत हे। सबले बढिय़ा बात ये हे के इंटरनेट के आधुनिक तकनीक के प्रयोग घलोक ह छत्तीसगढ़ी भाखा ल देश-दुनिया के चारों खुंट म पहुंचावत हे। ए सबला देख के लागथे के छत्तीसगढ़ी के आने वाला बेरा ह चमकदार रइही।</p>
<p style="text-align: justify;">आखिरी म इतिहास के घलोक खोंची भर बात हो जाय। काबर ते इहाँ जेन किसम के इतिहास लेखन होवत हे वोकर ले मैं भारी नराज हावंव। ए देखे म आवत हे के अधकचरा जानकारी रखने वाले मन इहां इतिहासकार अउ गुन्निक बनके सबला चौपट करत हवयं। संग म इहू देखे म आवत हवय के कुछ वर्ग विशेष के मनखे मन जानबूझ के आने वर्ग के लोगन मन के बड़े-बड़े कारज मन के घलोक उपेक्षा करत हें। एमा विश्वविद्यालय मनके भूमिका घलोक ह बने नइ लागत हे। भलुक ए कहना जादा ठीक होही के आँखी मूंद के पीएचडी के डिगरी ल बांटे जावत हे। ए सब दुखद हे। भरोसा हे के ईमानदार आँखी के माध्यम ले ये सबला नवा सिरा से देखे जाही।</p>
<p><strong>सुशील भोले</strong><br />
संपर्क : 41-191, डॉ. बघेल गली,<br />
संजय नगर (टिकरापारा), रायपुर (छ.ग.)<br />
मोबा. नं. 098269 92811</p>
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		<title>छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 04:36:07 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शकुन्तला तरार]]></category>

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		<description><![CDATA[एकक दाना बर किसान लुलवात रहिथे रे ओखर मिहनत मा आने मेछरात रहिथे रे !! हरर-हरर नांगर बईला धरे मुंधरहा जाय ओखर माथ मा पछीना चुचावत रहिथे रे !! संसो रिथे सुक्खा नईते पनिया दुकाल के एती ओती लईका मन छुछवात रहिथे रे !! झिमिर-झिमिर बरखा संग मा जुड़जुड़हा सिपा बैरी चूल्हा के आगी गुंगवात <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Shakuntala-tarar.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FShakuntala-tarar.jpg','Shakuntala+tarar')"><img class="alignleft size-full wp-image-582" title="Shakuntala tarar" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Shakuntala-tarar.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FShakuntala-tarar.jpg','Shakuntala+tarar')" alt="" width="220" height="204" /></a></strong><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"> एकक दाना बर किसान लुलवात रहिथे रे<br />
ओखर मिहनत मा आने मेछरात रहिथे रे !!</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
हरर-हरर नांगर बईला धरे मुंधरहा जाय<br />
ओखर माथ मा पछीना चुचावत रहिथे रे !!</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
संसो रिथे सुक्खा नईते पनिया दुकाल के<br />
एती ओती लईका मन छुछवात रहिथे रे !!</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
झिमिर-झिमिर बरखा संग मा जुड़जुड़हा सिपा<br />
बैरी चूल्हा के आगी गुंगवात रहिथे रे !!</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
हरियर-हरियर पाना मा सोन सही बाली<br />
&#8216;शकुन&#8217; आँखी मा सपना भुलवात रहिथे रे !!</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
<strong>शकुन्तला तरार</strong></span></p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>&#8220;चुपरनहा साबुन&#8221; (ललित निबंध)</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 14:36:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अविनाश 'बाबु']]></category>
		<category><![CDATA[ललित निबंध]]></category>

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		<description><![CDATA[येदे अहि नाहकिस हे तउने देवारी फर्रा के गोठ आए बड़ दिन म अपन गाँव गए रहेंव, जम्मे जुन्ना संगवारी मन सो भेंट होए रहिस, गोठ बात म कतका बेर रात पहागे जाने नई पायेन. बिहनिया होईस तंहा सोंचेंव चला तरिया जाबो बड़ दिन हो गए तरिया म नहाय नई हन कहिके. जमे संगवारी मन <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Avinash.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FAvinash.jpg','Avinash')"><img class="alignleft  wp-image-578" title="Avinash" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Avinash-229x300.jpg" alt="" width="137" height="180" /></a>येदे अहि नाहकिस हे तउने देवारी फर्रा के गोठ आए बड़ दिन म अपन गाँव गए रहेंव, जम्मे जुन्ना संगवारी मन सो भेंट होए रहिस, गोठ बात म कतका बेर रात पहागे जाने नई पायेन. बिहनिया होईस तंहा सोंचेंव चला तरिया जाबो बड़ दिन हो गए तरिया म नहाय नई हन कहिके. जमे संगवारी मन ला उनकर घर ले चला न कतका बेरा जाहा ग संझकेरहा जाहा तभे त घटौन्धा म बैइठे पाहा कहिके सकेलेंव. तभे टेटका ह घर के भीतरी ले चिचिया के कहिथे &#8216;तैं चल ना मै ह गरुआ ल ठोकान म अमरा के उही डहर ले तरिया म आवथंव, तूं मन रद्दा म कल्लू के दुकान परही तिहॉं ले एक ठन चुपरनहा साबुन धर लेहा.&#8217; महू हा &#8216;हव!&#8217; कहिके मुड ला डोलायेंव अउ संगी मन संग तरिया ठहर चल देहेंव.</p>
<p style="text-align: justify;">कल्लू के दुकान ले नाहकत रहेंव तभे मन्नू ह कहिथे &#8216;टेटका हा चुपरनहा साबुन बिसा लेहा कहिसे जी, धर लेवव गुसियाही, अउ महू हा बने दिन होगे साबुन चुपर के नई नहाये हवंव. तें हा झट के रूपया ला हेर, अउ तू मन चलौ मै साबुन ले के आथो!&#8217; मै हा ओला एक ठन दस के नोट ल हेर के देहेंव अउ कहेंव &#8216;जा एक ठन साबुन धर ले, नहीं ता उहू हा कहि, साबुन लेहे बर कहेंव तेनो ला नई लेहे सकिस.&#8217; गोठियात जमे संगी झन तरिया के घठौंधा म पहुंच गएन. अपन अपन पटकू ला पठेरा म धर के रवनिया लेहे बर घठौंधा के ऊपर बने चौरा म बइठ गएन. सुख दुःख गोठियाय म मगन रहेंन, तभे कका ह नहाये आइस, अउ आते आत कहत हे &#8216;क़स रे बाबु ये साबुन तोरे आये का रे!&#8217; मै कहेंव &#8216;हव कका.&#8217; &#8216;हहो रे मै तो आघू ले जान डारे रहेंव तोरे होही, ये मन ला तो एक महिना ले जादा होगे माटी चुपर के नहात साबुन कंहा ले पाहि.&#8217; साबुन ला पईस तहां कका ह बने लगर लगर के दू बेर नहा डारिस अउ अपन पटकू ओनहा सब ला उही साबुन म धो डारिस.</p>
<p style="text-align: justify;">उही मेर ठेठवार हा घलो नहात रहिस तेन हा कहत हे &#8216;क़स कका साबुन ह बहुत महमहात हे!&#8217; त कका कहत हे &#8216;दुरिहा ले काबर सुंघत हवस, लगा के देख, हमर बाबु बेटा के आये कोइलारी म नौकरी करत हवय, बड दिन म कमा के लहूटे हवय ओकर साबुन ल नई लगाये म ओकरो आत्मा ह दुःख झन पावय कहिके लगा लेथन नई तो ऐसनहा सस्ता साबुन म तो हमन गोड घलो ल नई धोवन न रे ठेठवार!&#8217; ठेठवार कहिथे &#8216;हाँ मालिक!&#8217; कका ह नहा धो के रीते के पाछू क़स के चिचियाके कहत हे &#8216;क़स रे बाबु तै पउर साल आये रहे त कहत रहे के मोर परमोशन होए वाले हवय त परमोशन होए म तनखा कम हो जाथे का रे.&#8217; मैं कहेंव &#8216;नहीं कका!&#8217; कका कहिथे &#8216;त तोर कोईलारी के कोइला हा सस्ता बेंचात हे का!&#8217; मैं ह नहीं कका कहिथंव त कका फेर कहिथे &#8216;मोला तो अइसने लागथे नई त शहर कती ले आये हवस त बने महंगी सुन्दर चुपरनहा साबुन लाने रहिते त तहूँ ह कल्लू दुकान के ठेठार्रा साबुन जेला पथरा म घसे घलो म गाजा नइ निकलत हे, ये तोर साबुन ला लगाये के पाछू, देंह ह कटकतावत हावय.</p>
<p style="text-align: justify;">ओतके बेरा टेटका हा आते आत पूछत हे के दुकान ले साबुन धर लेहा कहे रहेंव धरे हव के भुलागेव. मै कुछु कहितेंव तभे मन्नू हा कहथे लाने रहेंन, दो कका अउ दे ठेठवार के मारे बांचे पावय, ओनहा लत्ता सब ला उही साबुन म धो डारिस फेर कहथे के साबुन ह ठेठार्रा रहिसे. अपन कुछु ला कोनो ला नई देवय, पईस फोकट म त जऊन आवथे नहाये बर तेने ला कहत हावय ले महमहाई साबुन आये, थोकन तहू चुपर के देख अउ जम्मे ला सिरवा दिहिस. टेटका कका डहर गुसिया के देख के कहिथे &#8216;हव कका!&#8217; त कका ह कहिथे के &#8216;हव रे बाबु ह तोरे भर संगी नोहय, जब नानकन रहिसे त कनिहा म लादे लादे गाँव भर किन्दारत रहेन त हमर ओतको अधिकार नइ हे, आज भारी ओकर डेना पांखी जाम गे त तुमन संगी जाम गे हव!&#8217; कहत कहत कका ह भाउक होगे. झगरा ला बाढ़त देख के मै ह कका ल कहेंव &#8216;होगे कका तोला तो पूरा अधिकार हवय हमन तोरे लइका आन, ये टेटका! तै एती बर आतो, जा रे मन्नू तें हा कल्लू के दुकान म मोर नांव लेबे अउ एक ठन अउ चुपरनहा साबुन ले आबे.&#8217; त मन्नू हा कथे &#8216;तें न एक ठन कागज म लिख के दे त कल्लू हा देहि नई त सोचही अभी तो बाबु साबुन ले के तरिया कती गिसे, अउ अब मन्नू ह अपन काल बर व्यवस्था बनावथे.&#8217; मैं कहेंव &#8216;लान रे भाई लिख के देवत हंव, फेर जल्दी लानबे बड बेरा होगे हवय भइया ह गुसियाही बिहनिया ले तरिया गे हवय अउ आवत नई हे.&#8217; संगी ह हहो कहिके झट के जा के लानिस त फेर नहा के घर गेन.</p>
<p style="text-align: justify;">बासी-बोरे खायेंन तहॉं झट के लहुते के बेरा आ गे. मोटर के बेरा सबे संगी साथी मन मोटर म चढ़ाये के नाव ले के मोटर स्टेंड म आये रहीन, देखते देखत मोटर ह घलो आगे, अउ मै चढ़ गेंव, फेर कतको कन गोंठ ह पेटे भीतरी रहिगे. मोटर के खिड़की ले झाँकत बेरा मोरो आँखी म आंसू डबडबा गे. मोटर म बइठे बइठे फेर झट के आहूँ सोचते रहेंव तइसनेहे मोटर छूट गे, बने दुरिहा के जात ले लहुट लहुट के संगवारी मन ला देखत रहेंव, अउ संगी मन पीपर के तरी म खड़े होके मोटर कती ला देखत रहिन. मोटर भर्र करत रेंगें लागिस अउ मोर हिरदे म मोर गांव के तरिया, संगी—साथी अउ कका मन जइसे मोर बर मया करइया सियान के सुरता घेरी बेरी आये लागिस. चुपरनहा साबुन के महमहई ला पाछू छोंडत मोटर धुर्रा उडावत सहर डाहर भागे लागिस.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अविनाश &#8216;बाबु&#8217;</strong><br />
बिजुरी</p>
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		<title>ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड सिने एवार्ड 2012</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Feb 2012 03:13:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[छालीवुड सिने एवार्ड 2012 म दुर्ग शहर म बने फिलिम &#8216;मितान 420&#8242; ल पांच इनाम मिलिस। ये इनाम ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड कोती ले रायपुर म होये कार्यक्रम म देहे गीस। ये कार्यक्रम म मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल रहिस। फिलिम के निर्देशक उत्तम तिवारी ह बताइस के हिंदी फिलिम के डायरेक्टर <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%89-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9d%e0%a4%b0-%e0%a4%9b/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Ahafaz-Rashid.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FAhafaz-Rashid.jpg','Ahafaz+Rashid')"><img class="aligncenter  wp-image-563" title="Ahafaz Rashid" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/Ahafaz-Rashid.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2FAhafaz-Rashid.jpg','Ahafaz+Rashid')" alt="" width="576" height="382" /></a></p>
<p style="text-align: justify;">छालीवुड सिने एवार्ड 2012 म दुर्ग शहर म बने फिलिम &#8216;मितान 420&#8242; ल पांच इनाम मिलिस। ये इनाम ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड कोती ले रायपुर म होये कार्यक्रम म देहे गीस। ये कार्यक्रम म मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल रहिस। फिलिम के निर्देशक उत्तम तिवारी ह बताइस के हिंदी फिलिम के डायरेक्टर अनिल शर्मा ह छत्तीसगढ़ होटल रायपुर में होये एक ठन कार्यक्रम म ये &#8216;अवार्ड&#8217; दिहिस। जउन म फिलिम के कलाकार, निदेशक, गायक, लोककलाकार उत्तम तिवारी ल &#8216;सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक&#8217;, कलाकार करण खान ल &#8216;बेस्ट एक्टर&#8217;, लोकेश देवांगन ल &#8216;बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर&#8217;, &#8216;विलास राउत&#8217; ल &#8216;बेस्ट मेकअप&#8217; अउ नौशाद ल &#8216;बेस्ट ग्राफिक्स एवार्ड&#8217; देहे गीस। येखरे संग दुर्ग के सुनील सोनी ल  &#8217;बेस्ट सिंगर&#8217;, माई कलाकार शिवकुमार दीपक ल &#8216;लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड&#8217; देहे गीस।</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/karan-khan.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2Fkaran-khan.jpg','karan+khan')"><img class="aligncenter size-full wp-image-570" title="karan khan" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/02/karan-khan.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F02%2Fkaran-khan.jpg','karan+khan')" alt="" width="418" height="341" /></a>छत्तीसगढी सिनेमा ला आगे बढाये खातिर कलाकार मन के ये सम्मान बर ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड के जम्मो संगी मन ला अउ अपन लगन ले जनता के मनोरंजन करईया इनाम पवईया कलाकार मन ला हमर कोरी कोरी बधई। ये कार्यक्रम ला सुफल बनाये बर भाई अहफाज रशीद के बड जब्बर मिहनत रहिस, भाई अहफाज ला गुरतुर गोठ परिवार कोती ले हिरदे ले बहुत बहुत बधई..</p>
<p style="text-align: justify;">ये कार्यक्रम के जम्मा फोटू आप <a href="https://www.facebook.com/media/set/?set=a.360748403936351.94554.100000035831648&amp;type=3" onclick="return TrackClick('https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fmedia%2Fset%2F%3Fset%3Da.360748403936351.94554.100000035831648%26amp%3Btype%3D3','%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B9%E0%A4%BE')" target="_blank">इंहा</a> देख सकत हावव.</p>
]]></content:encoded>
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		<title>एक डंडिय़ा : माटी के पीरा&#8230;</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Feb 2012 15:45:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[सुशील भोले]]></category>

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		<description><![CDATA[ए माटी के पीरा ल कतेक बतांव, कोनो संगी-संगवारी ल खबर नइए। ए तो लछमी कस गहना म लदे हे तभो, एकर बेटा बर छइहाँ खदर नइए।। कोनो आथे कहूँ ले लाँघन मगर, इहाँ खाथे ससन भर फेर सबर नइए।&#8230; अइसे होना तो चाही विकास गजब, फेर खेती ल उजारे के डगर नइए।&#8230; धन-जोगानी चारों <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a1%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>ए माटी के पीरा ल कतेक बतांव,<br />
कोनो संगी-संगवारी ल खबर नइए।<br />
ए तो लछमी कस गहना म लदे हे तभो,<br />
एकर बेटा बर छइहाँ खदर नइए।।</p>
<p>कोनो आथे कहूँ ले लाँघन मगर,<br />
इहाँ खाथे ससन भर फेर सबर नइए।&#8230;</p>
<p>अइसे होना तो चाही विकास गजब,<br />
फेर खेती ल उजारे के डगर नइए।&#8230;</p>
<p>धन-जोगानी चारों खुँट बगरे हे तभो,<br />
एकर कोरा म खेलइया के कदर नइए।&#8230;</p>
<p>दुख-पीरा के चरचा तो होथे गजब,<br />
फेर सुवारथ के आगू म वो जबर नइए।&#8230;</p>
<p>अइसन मनखे ल मुखिया चुनथन काबर,<br />
जेला गरब-गुमान के बतर नइए।&#8230;</p>
<p>लहू तो बहुतेच उबलथे तभो,<br />
फेर कहूँ मेर कइसे गदर नइए।&#8230;</p>
<p>सुख-शांति के गोठ तो होथे गजब,<br />
फेर पीरा के भोगइया ल असर नइए।&#8230;</p>
<p><strong><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/01/Sushil.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F01%2FSushil.jpg','Sushil')"><img class="alignleft  wp-image-554" title="Sushil" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/01/Sushil-227x300.jpg" alt="" width="136" height="180" /></a></strong></p>
<p><object height="94" width="422"><param value="http://www.divshare.com/flash/audio_embed?data=YTo2OntzOjU6ImFwaUlkIjtzOjE6IjQiO3M6NjoiZmlsZUlkIjtzOjg6IjE2NjcyNjcwIjtzOjQ6ImNvZGUiO3M6MTI6IjE2NjcyNjcwLWMwYiI7czo2OiJ1c2VySWQiO3M6NjoiODU2NzA2IjtzOjEyOiJleHRlcm5hbENhbGwiO2k6MTtzOjQ6InRpbWUiO2k6MTMyNzg1MjE4OTt9&#038;autoplay=default" name="movie"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="allowscriptaccess" value="always"></param><param name="wmode" value="transparent"></param><embed wmode="transparent" height="94" width="422" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" src="http://www.divshare.com/flash/audio_embed?data=YTo2OntzOjU6ImFwaUlkIjtzOjE6IjQiO3M6NjoiZmlsZUlkIjtzOjg6IjE2NjcyNjcwIjtzOjQ6ImNvZGUiO3M6MTI6IjE2NjcyNjcwLWMwYiI7czo2OiJ1c2VySWQiO3M6NjoiODU2NzA2IjtzOjEyOiJleHRlcm5hbENhbGwiO2k6MTtzOjQ6InRpbWUiO2k6MTMyNzg1MjE4OTt9&#038;autoplay=default"></embed></object><br />
<strong>सुशील भोले</strong></p>
<p>संपर्क : 41-191, डॉ. बघेल गली,<br />
संजय नगर (टिकरापारा), रायपुर (छ.ग.)<br />
मोबा. नं. 098269 92811</p>
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		<title>छत्तीसगढ के फुलबासन अउ शमशाद बेगम ला पद्म श्री</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Feb 2012 11:59:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[बड गरब के बात हावय के भारत सरकार ह गुंडरदेही के शमशाद बेगम अउ राजनांदगांव जिला के ग्राम पंचायत सुकुलदेहान के फुलबासन बाई यादव ल येसो के पद्मश्री सम्मान देहे के हांका देहे हावय. हमर प्रदेश ल मिले ये सम्मान महिला मन के सम्मान आय. इन दूनो मन गांव म महिला सशक्तिकरण बर काम करत <a href="http://gurturgoth.com/chhattisgarh-padmshree-fulbasan/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/01/fulbasan.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F01%2Ffulbasan.jpg','fulbasan')"><img class="alignleft size-full wp-image-463" title="fulbasan" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/01/fulbasan.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F01%2Ffulbasan.jpg','fulbasan')" alt="" width="250" height="250" /></a></p>
<p style="text-align: justify;">बड गरब के बात हावय के भारत सरकार ह गुंडरदेही के शमशाद बेगम अउ राजनांदगांव जिला के ग्राम पंचायत सुकुलदेहान के फुलबासन बाई यादव ल येसो के पद्मश्री सम्मान देहे के हांका देहे हावय. हमर प्रदेश ल मिले ये सम्मान महिला मन के सम्मान आय.</p>
<p style="text-align: justify;">इन दूनो मन गांव म महिला सशक्तिकरण बर काम करत हावंय. महिला स्व सहायता समूह के गठन ले दीदी बैंक के स्थापना, शिक्षा अउ रोजगार म महिला मन ला आत्मनिर्भर बनाये के काम इन दूनो सरलग करत हावंय. राजनांदगांव जिला के ग्राम पंचायत सुकुलदेहान के फुलबासन बाई यादव के नाव अब देस भर म बगर गे हावय. गरीब परिवार म जनमे फुलबासन के लइकइ होटल म कप-पिलेट धोवत बीते हावय. पढ़ाई के संउख रहे के सेती उमन ह साक्षर बनिन. दस साल के उम्मर म उखर बिहाव चंदूलाल यादव संग होइस फेर गरीबी उंखर संग ला नइ छोडिस. गरीबी अउ काम बुता नइ मिले के दुख ले हार खा के फुलबासन अपन गांव के महिला मन ला सकेल के जुर मिल के गरीबी संग लडे ला तियार होके खडा होगे.</p>
<p style="text-align: justify;">पांच दिसंबर 1969 के दिन जनम धरे फुलबासन ह 2001 म शासन के महिला सशक्तिकरण योजना के लाभ लेवत अपन गांव के महिला मन ला सकेल के महिला स्व सहायता समूह बनाईन अउ इंहा ले महिला सशक्तिकरण के काम सुरू करिन. फुलबासन ह छत्तीसगढ़िया महिला मन ल अपन संगें संग आर्थिक बिकास के पाठ पढइस अउ अपन गांव के संगें संग राज्य म 12 हजार ले आगर महिला स्व सहायता समूह मन के गठन म जब्बर काम करिस. उमन कहत हावय के ये सम्मान उखर अकेल्ला के नोहे भलूक उन जम्मो महिला मन के अय जउन मन उंखर संग जुर मिल के काम करत हावय.</p>
<p style="text-align: justify;">इमन मां बम्लेश्वरी स्व सहायता समूह नाव के एक ठन समूह बनाइन अउ महिला मन के शिक्छा अउ स्वरोजगार बर उदीम करे लागिन. इखर उदीम ले तीर—तार के जम्मो गांव मन म अडबड अकन स्व सहायता समूह बनिस अउ धीरे-धीरे इमन ला छोटे-मोटे काम मिले लागिस. काम मिले ले महिला मन के आर्थिक स्थिति बने होवत गइस. एक कोती परिवार अउ दूसर कोती समाज दूनों संग जूझत फुलबासन ह महिला मन ला एक नवा दिशा दीन। 2004 म छत्तीसगढ़ शासन कोती ले फूलबासन ला मिनीमाता पुरस्कार देहे गे हावय, इमन ला जमुनालाल बजाज पुरस्कार घलव मिले रहिस, ये पुरस्कार ले मिले 5 लाख रुपए ले इमन ह महिला मन के कार्यालय भवन अव बाजार बनवाए बर दान दे दीन। 2010 म फुलबासन ला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ह राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान तको देहे गय हावय.</p>
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		<title>नान्हे कहिनी : सात फेरा</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Feb 2012 18:04:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कहिनी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. राघवेन्द्र कुमार 'राज']]></category>

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		<description><![CDATA[नोनी रूखमनी ह अपन परिचय देवत कहिथे आदमी अपन मन ले सुखी अऊ दु:खी होथे। मैं हां तुंहर पांव बनहू। ये चुंदी ल झन कटवाहूं। इही हा साधु सन्यासी के निसानी होथे। तुंहर परिचय इही हे। जिनगी के बड़ गजब किस्सा हे संगवारी हो, गरीब, मजबूरी एकर हिस्सा हे। एक घर के बाह्मन परिवार घला <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div style="text-align: justify;">नोनी रूखमनी ह अपन परिचय देवत कहिथे आदमी अपन मन ले सुखी अऊ दु:खी होथे। मैं हां तुंहर पांव बनहू। ये चुंदी ल झन कटवाहूं। इही हा साधु सन्यासी के निसानी होथे। तुंहर परिचय इही हे।</div>
<div style="text-align: justify;">जिनगी के बड़ गजब किस्सा हे संगवारी हो, गरीब, मजबूरी एकर हिस्सा हे। एक घर के बाह्मन परिवार घला गरीबी म गुरज-बसर करत राहय। फेर धरम अऊ ईमान के रद्दा म रेंग के जीयय। संझौती बेरा म एक दिन ओखर घर गेंव।</div>
<div style="text-align: justify;">महतारी हरदी मिरचा ल पीसत राहय। मैं हा केहेंव का होगे महाराजिन दाई। अपने अपन खिसिया-खिसिया के रांधत हस। महराजिन दाई कहिथे- काबर नई खिसियावंव बेटा, चौथापन म रांधे बर होगे। जाने कब रंधई-खवई हा छूटही। बूड़हा महराज  ल पूजा-पाठ ले फुरसत नइए। बेटा सारदा ल भागवत गीता ले फुरसत नइए। ये घर म मिही हा फुरसत हंव। मैं कहेंव- &#8216;महराजिन दाई तुंहर पुकार ल भगवान एक दिन जरूर सुनही। भगवान के घर देर हे अंधेर नइए। सुग्घर बहू मिलही दाई देखबे।&#8217; अइसने कहेंव अऊ चाहा पानी पीके निकलगेंव सरलग दू दिन रमायेन सम्मिलन म रहेंव ऊहां ले आके पूछथंव- &#8216;कइसे महराज सारदा महाराज बर बहू मिलिस।&#8217; महराज हा हांसत-हांसत कहिथे- &#8216;हां बेटा तुंहर भाखा सही होगे। मोर बेटा सारदा ल बहू मिलगे।&#8217; मैं कहेंव- &#8216;चुपेचाप भजिया भात खा डरेव महाराज, मोला नई पूछेंव।&#8217; महाराज कहिथे- &#8216;बेटा गलती तो होगे, भजिया भात हम्मन &#8216;वेलेन्टाईन डे&#8217; के दिन खा के आए हन।&#8217; मैं ह ठहाका मारके हांसेंव अउ कहेंव- &#8216;वाह! महराज &#8216;वेलेन्टाइन डे&#8217; याने 14 फरवरी के भजियाभात कभू सुरता नई भुलांव। मैं कहेंव थोड़ किन बताना महाराज।&#8217; महाराज कहिथे- &#8216;अंगना भर सगा सोदर जुड़ियाय राहय सब कहिथे दमाद बाबू ल परिचय करावव। सारदा महराज लम्बा-लम्बा चुंदी धोती बंगाली म सन्यासी कस लागत राहय। कहिथे। भइया हो। मैं तो अधूरहा हंव। एक पांव ले कमजोर हंव। फेर तुंहर मन के आसीरवाद मिलही त ए जिनगी हा दऊड़ही।&#8217; नोनी रूखमणी न बलाइस वोहा अपन परिचय देवत कहिथे- &#8216;आदमी अपन मन ले सुखी अऊ दु:खी होथे। मैं हा तुंहर पांव बनहूं। ए चूंदी ल झन कटवाहूं। इही हा साधु सन्यासी के निसानी होथे। तुंहर परिचय इही हे। मोला मोर किरिसना मिलगे। ए बंधना मरत जीयत ले झन टूटय।&#8217; सियान अऊ बरतिया मन सुग्घर मालपुवा, लाड़ू, बरा सोंहारी अऊ किसिम-किसिम के साग उड़ाइस। अऊ जात-जात बूड़हा महराज कहिथे- &#8216;अकती के भांवर लेबो समधी महराज। देखे भगवान हा कइसे सुग्घर जोड़ी जांवर भिड़ाय हे। आधा बिहाव होगे बस सात फेरा बांचे हे। दया मया ल धरे रहू ना। जय जोहार।&#8217;</div>
<div style="text-align: justify;"></div>
<div style="text-align: justify;"><b>डॉ. राघवेन्द्र कुमार &#8216;राज &#8216;</b></div>
<div style="text-align: justify;">जेवरा सिरसा</div>
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		<title>श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल &#8211; का कहिबे?</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Feb 2012 17:19:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[Chhattisgarhi Gazal]]></category>
		<category><![CDATA[गज़ल]]></category>
		<category><![CDATA[लाला जगदलपुरी]]></category>

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		<description><![CDATA[मन रोवत हे मुँह गावत हे का कहिबे गदहा घलो कका लागत हे का कहिबे? अब्बड़ अगियाए लागिस छइहाँ बैरी लहँकत घाम ह सितरावत हे का कहिबे? खोर-खोर म कुकुर भूकिस रे भइया घर म बघवा नरियावत हे का कहिबे? छोंरिस बैरी मया-दया के रद्दा ला सेवा ला पीवत-खावत हे का कहिबे? चर डारे हे <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c-4/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><span lang="HI" style="font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;font-size:13pt;line-height:115%;">मन रोवत हे मुँह गावत हे का कहिबे <br />गदहा घलो कका लागत हे का कहिबे? <br />अब्बड़ अगियाए लागिस छइहाँ बैरी <br />लहँकत घाम ह सितरावत हे का कहिबे? <br />खोर-खोर म कुकुर भूकिस रे भइया <br />घर म बघवा नरियावत हे का कहिबे? <br />छोंरिस बैरी मया-दया के रद्दा ला <br />सेवा ला पीवत-खावत हे का कहिबे? <br />चर डारे हे बखरी भर ईमान ला <br />कतका खातिस पगुरावत हे का कहिबे? <br />सावन-भादों बारों मास गरिबहा के <br />लकड़ी-कस मन गुँगुवावत हे का कहिबे?</p>
<p><b>लाला जगदलपुरी</b><br /> </span></p>
]]></content:encoded>
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