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	<title>Chhattisgarhi</title>
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		<title>सोन चिरई</title>
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		<pubDate>Sun, 06 May 2012 07:51:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कहिनी]]></category>
		<category><![CDATA[दुरगाप्रसाद पारकर]]></category>

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		<description><![CDATA[ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला ह हरियाथे। हरियाही काबर नहीं, काबर कि इही ओन्हारी-सियारी के बदौलत तो जिनगी ल संवारना रहिथे। बने सुकाल होगे त सोचे बिचारे काम बूता ल निपटाथें। कहुं दुकाल परगे त दुब्बर बर दु असाढ़ हो जथे। दुरदेसी कका ह बेलौदी गांव के उन्नत किसान आय। छपराही के <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%88/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"> <a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/05/Balikavadhu.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F05%2FBalikavadhu.jpg','Balikavadhu')"><img class="alignleft size-medium wp-image-888" title="Balikavadhu" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/05/Balikavadhu-300x198.jpg" alt="" width="300" height="198" /></a>ओन्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला ह हरियाथे। हरियाही काबर नहीं, काबर कि इही ओन्हारी-सियारी के बदौलत तो जिनगी ल संवारना रहिथे। बने सुकाल होगे त सोचे बिचारे काम बूता ल निपटाथें। कहुं दुकाल परगे त दुब्बर बर दु असाढ़ हो जथे।<br />
दुरदेसी कका ह बेलौदी गांव के उन्नत किसान आय। छपराही के ऊपर म ओकर पांच एकड़ जमीन हे। भगवान के दे सुन्दर मोटर पंप घलो हे। धान ल लुथे ताहन अपन बारी म रमकेलिया, चुरचुटिया ल उपजा के कांदा-भाजी कस अपन जिनगी ल हरियाथे। एसो तो कका ह आधा एकड़ के रमकेलिया म बने कमाए रीहिसे। जेब डोभरा गे रीहिसे।<br />
फागुन के महिना म कका-काकी के दुलौरिन बेटी सोनचिरई ह आठवीं के परीक्षा देवाय बर बखरी ले निकलिस त सोनचिई नइ जानत रीहिसे के मोर जिनगी के घलो परीक्छा होवइया हे। सोनचिरई ह कका के अंगोछ म रीहिसे। तेरा-चउदा साल के उमर म सोला कस दिखथ रीहिसे। डंग-डंग ले बाढ़ गे रीहिसे। संडुवा कांड़ी कस।<br />
कका-काकी सुख-दुख ल गोठियावत रमकलिया ल टोरत गोठियावत रीहिन हे। यहू मन नइ जानत रीहिन हे कि रमकलिया ल का टोरत हन हमन बेटी के जिनगी ल टोरत हन।<br />
कका कथे- सुन वो सोनचिरई के दाई, एसो धान-पान ओन्हारी-सियारी बने होय हे अउ रमकलिया म घलो बने भाव पाय हन। खाय बर धान हो जही अउ खरचा बर रमकलिया के पइसा ह। ओतना म काकी कथे- त का सोचत हव? कका कथे- मेंहा सोचत हवं, सगा आतिस ते एसो सोनचिरई के हाथ ल पिंवरा देतेन&#8230;। काकी कथे- महुं ह पहाती कन सपना देखत रेहेंव के दुनो जुग-जोड़ी गांठ जोड़े सोनचिरई अउ दमांद के टिकावन टिकत हन। टिकावन के बेरा म सगा मन गावत हें:-<br />
इही धरम ले धरम हे वो<br />
अ वो मोर दाई फेर धरम नइ तो पाबे वो&#8230;<br />
इही धरम ले धरम हे ग<br />
अ गा मोर ददा फेर धरम नइ तो पाबे ग&#8230;<br />
ठउंका ओतने बेर सोनचिरई ल देखे बर बेटा वाले मन सोमनाथ ल धर के पहुंच गे। चाहा-पानी के पीयत ले सोनचिरई ह परीक्छा देवा के आगे। सोमनाथ ह सगा मन अंखियाथे- इही नोनी आय कहिके&#8230;। सगा मन एके घांव म मन कर लिस। लड़का घलो आय रीहिसे। ओकरो नजर म सोनचिरई ह झूलगे। सोमनाथ ह कथे- बोटी, सगा मन के पलागी कर ले। सोनचिरई ह सगा मन के टुप-टुप पांव परीस अउ सगा मन सोनचिरई ल पइसा धरावत गीन। सोनचिरई नइ जानत रीहिसे। के ये ह पइसा नोहे बल्कि बंधना ये बंधना। बिल्लस अउ फुगड़ी ल बिसरे के बंधन आय, मइके ल छोड़के ससुरार जाय के बंधन आय।<br />
रिस्ता पक्का होय के बाद मातारानी हमर मनोकामना ल पूरा कर दिस कहि के जंवारा घलो बो डरिन। एकर बाद तो पूरा परिवार जंवारा के सेवा म बिधुन होगे।<br />
जगमग जगमग हो<br />
जग जोत जंवारा जगमग हो&#8230;<br />
जगमग जगमग हा<br />
जम जोत जंवारा जगमग जगमग हो।<br />
रामनवमी के बाद सगई के तिथि ह तय होइस सरपंच के घर हा खइरखा डाढ़ करा दमदम ले खड़े हे। उही मेर स्कूल सांस्कृतिक भवन, बोरिंग अउ पंचायत भवन। पंचायत ल आदर्श पंचायत बनाय के सपना सरपंच के। सरपंच ह इही बात ल गुनत-गुनत बाजवट म चाहा पीयत रीहिसे। ओतके बेरा दुरदेसी कका ह सोनचिरई के सगई के नेवता दे बर पहुंचथे। दुरदेसी ह सरपंच के पांव परथे। सरपंच ह असीस दे के बाद किथे- बइठ दुरदेसी, बइठ। दुरदेसी कथे- आज नइ बइठंव सरपंच जी, आन दिन बइठहूं। आज थोकिन जल्दी म हवं।<br />
सरपंच कथे- कहां जाथस तेमा, जल्दी म हस?<br />
दुरदेसी कथे- परन दिन मोर सोनचिरई के सगई के ओकरे नेवता दे बर निकले हवं। आपो मन ल, सगई के नेवता हे। अतका ल सुन के सरपंच कथे- अब तो तोला चाहा पियाय बिना बिदा नइ करवं। दुरदेसी ह सरपंच के बात ल टार नइ सकिस अउ कलेचुप हामी भर के बइठ गे। चाहा के बनत ले दुनो झन गोठ बात म लगगें।<br />
सरपंच पूछथे- त कहां के सगा आय? दुरदेसी बताथे-झेंझरी पथरिया के। सरपंच पूछथे- लड़का का करथे? दुरदेसी कथे- कुछु नहीं। सरपंच पूछथे- का पढ़े हे लइका ह? दुरदेसी कथे- कुछु नहीं। अतना म सरपंच ह कथे- लड़का ह पढ़े ये न लिखे हे। कमाय न धमाय अइसन म हमर सोनचिरई बेटी ल कइसे पोंसही? जवाब म दुरदेसी कथे- ये तो सब भगवान के लिखाय आय सरपंच जी। ब्रह्मा ह जिंहे बेटी के भाग लिखे हे उहें जाही। सुन के सरपंच कथे- अरे, परलोखिया कहिंके बेटी-बेटा के ब्रह्मा तो दाई-ददा आय। जइसन लिखबे उंकर भाग ह ओइसन लिखाही अउ सुन तो सोनचिरई का पढ़त हे? दुरदेसी कथे- आठवीं। सरपंच पूछथे- के साल के होय होही? दुरदेसी हा बताथे- सोनचिरई ह अभी तेरा-चउदा साल के होय हे। अतका ल सुन के सरपंच द दुरदेसी ल समझाथे- ये उमर ये कोनो बर बिहाव के। सोनचिरई अभी नबालिग हे ओला पढ़न-लिखन दे, खेलन-कूदन दे। ओकर बिहाव अभी झन कर। अतेक गरू होगे हे सोनचिरई ह ते मोला दे दे। मेंहा पढ़ा-लिखा के नौकरी लगा के ओकर बिहाव करहूं। फेर दुरदेसी कहां ले मानय। ढीठ किसम के ताय दुरदेसी ह। ओहा तो सोचत रीहिसे कि अपन बड़े भाई के बेटी के बिहाव के संगे-संग सोनचिरई के बिहाव घलो एके मड़वा म निपट जातिस ते खरचा ले बांच जातेन।<br />
टिकली, फुंदरी के जोरा करत देख के सोनचिरई ह अपन दाई ल कथे- अभी मोर सगई झनकर दाई अभी में ह पढ़हू-लिखहूं॥ दाई ह ओला समझाती कथे-ले ना बेटी सगई भर ल होवन दे ताहन बिहाव ल कभू करत रहिबोन। फेर ये सगा ल नइ छोड़न। बने आठ-दस एकड़ के जोतन दार हे अउ फेर न देरान न जेठान राज करबे राज। तभो ले दाई अभी मोर सगई झन करव। अतका काहत दुरदेसी ह सुन डरिस। सोनचिरई ल खिसियावत कथे- नहीं त समधी के आगू म मोर नाक कटवाबे। सुन के सोनचिरई ह चुप रहिगे। जानो-मानो नारी पारनी चुप रेहे बर जनम धरे हे।<br />
सगई म अक्ती भांवर ले बर दूनो पक्ष ह राजी होगे। फेर सोनचरिई ह उदास राहय। सोनचिरई के उदासी ल देख के ओकर दाई ह कथे- काबर उदास हस बेटी? नहीं दाई अभी मेंहा बिहाव नइ करवं। ओकर दाई ह कथे- लेना बेटी अभी तो बिहाबे भर करबोन गवना थोरे देबोन। फेर एक घांव महतारी के ममता के फांदा म अरहज गे।<br />
बिहाव के नेवता बंटा गे। सब सगा सोदर मन नेवतागें। सगा मन सेकलागें। घर गंजमींज-गंजमींज लागे ल धरलीस। सगा मन तो खुस होके नेंग जोग ला निभावथे फेर सोनचिरई के उड़े के दिन म पांख कटावथे। गुन-गुन के सोनचिरई उदास रहे।<br />
सोनचिरई ला उदास देख के सोनबती भउजी केहे ल धरलीस कइसे तो सोनचिरई ह उदास-उदास रहिथे। लगथे दमांद ल मन नइ करत होही। ओतना म सुकवारो कथे- नहीं&#8230; या ओइसन नइ होही। मोला अइसे लागथे कि सोनचिरई के काकरो सन चक्कर होही। इंकर गोठ बात ल सुनके ढेड़हीन ह काकी ल बताथे- देख ना सोनबती अउ सुकवारो ह अइसन-अइसन काहत रीहिसे कहिके। अतना म काकी कथे- काहन देना कहवइया ल। हड़ियां होतिस ते मुहड़ा ल परई म तोप देतेन फेर काकरो मुंह ल कामे तोपबो।<br />
तेलमाटी, चुरमाटी होइस। ताहन अक्ती के दिन बरात अइस। पोंगा ह बिहाव गीद झोरत रीहिसे। एती सरी मंझनिया बरात परघाय के तइयारी होइस। सामाजिक बाजा वाले मन परघौनी पार बजावत हे। पर्रा म दु:खी, चाउर ल पिंवरा के हुम, अगरबत्ती अउ नरियर धर के परघाय बर गीन। घराती माइलोगन मन बराती मन ल झूल-झूल के भड़त हें:-<br />
करर करर तोर मेछा ए सगा<br />
करर करर तोर मेछा&#8230;<br />
अइंठी मुरेरी तोर मेछा, ए सगा<br />
करर करर तोर मेछा&#8230;।<br />
परघौनी होय के बाद गोधुलि बेला म टिकावन के सुरुआत सोनचिरई के दाई-ददा ले होइस। दुरदेसी कका अउ काकी टिकावन टिकत-टिकत बोम फार के रो डरिन। आंसू के चित्रकूट ह रूके ल नइ धरय। महतारी बेटी के रोवई ल देख के मड़वा म बइठे सबो झन के आंखी ह डबडबा गे। एक झन दुलौरिन बर भारी रोइन कका-काकी मन।<br />
आज ले हमर बर बेटी सगा होगेस बेटी ए&#8230;हें&#8230;हें।<br />
काकी ल टिकावन टिके के बेरा मने मन लागत रीहिसे के पहाती कन जऊन सपना देखे रेहेंव वो हा आज सच होगे। सरपंच ह दुरदेसी ल समझइस-चुप राह दुरदेसी तैं तो कन्यादान करेके जल्दी बड़े जन पुन्न कमा डरेस काबर के कन्या दान ले बड़े दान कोनो नइ होवय।<br />
दुरदेसी ह आंसू ल पोंछिस। ताहन सगा मन के बेवस्था म लगगे। टिकावन के बाद पंगत परीस। अधरतिया बराती मन के बिदा होइस। बेटी बिहाव बने-बने निपटगे। बेटी ल लेवाय बर चउंथिया गीन। लहुटे के बखत समधी महाराज कहि दिस-एसो हमन बहू हाथ के पानी पीबोन कहिके। आठ दिन बाद तुंहर दमांद ल गवना लेवाय बर पठोहूं।<br />
एती गवना के तइयारी म काकी लगगे। फूल वाले सन्दुक,टिकली, माहुर, साबुन-सोडा तेल-फूल, फूल्ली खिनवा।<br />
महतारी अपन बेटी बर जतना जादा हो सके ओतना जोरा म लगगे। जोरा ल देख के सोनचिरई कथे- काकर बर अतेक समान बिसावत हस दाई। काकी कथे- अउ काकर बर? तोर बर। अवइया हफ्ता तोर गवना कराय बर दमांद ह अवइया हे बेटी। सोनचिरई कथे- मेहा ससुरार नइ जांवव दाई। ओकर दाई ह मया के लेवना चुपरत कथे- लेना बेटी आठ पंदरा दिन के तो बात आय ताहन तोर ददा ह लेवाय बर आ जही। सोनचिरई ह जिद्द करथे- नहीं दाई मेंहा ससुरार नइ जांव। सोनचिरई के गोठ ल सुन के ओकर ददा ह कान म बगई खुसरे कस बगियागे। ससुरार नइ जाबे तो मोर मुंहु ल करिया करवाबे। सोनचिरई के जी ह रोनहुत होगे। सुसक-सुसकत कीहिस-तोर मुंहु ल करिया नइ करवावं ददा फेर मेहा ससुरार नइ जावंव। चाहे कुछु हो जाय। बाप-बेटी के तनातनी ल सुन के महतारी ह सोनचिरई ल ढाढस बंधाथे- राह बेटी, मेंहा तोर ददा ल समझावत हंव। अतका सुन के दुरदेसी बिफर गे। जानो मानो लाल लुगरा ल देख के गोल्लर बिफरथे तइसे। मोला समझाबे तुम दुनो समझिक समझा होवव। अउ सुन कहुं ये टूरी ह ससुरार नइ जाही त मेंहा फांसी अरो लेहूं फांसी।<br />
सोनचिरई अपन ददा के मउत के डर ले रोवत-रोवत कहि दिस जाहूं ददा, जाहूं मेंहा ससुरार। ले दाई मोर पठौनी के तइयारी कर। आठ दिन बाद दमांद अइस अउ सोनचिरई ल उड़ा के लेगे। गांव भर के मन अपन दुलौरिन ल रुपिया दू रुपिया धरावत बिदा कर दिन।<br />
असाढ़ म पानी पाय के बाद दुरदेसी ह अपन बेटी ल लेवा के लानिस। महतारी बेटी के सुख-दुख गोठियई म रात पहागे। बिहनिया काकी ह कका ल कथे- अब तेंहा आजा बबा बनइया हस, आजा बबा। जल्दी नाती खेलाबे। भगवान ह हमर बेटी ल जल्दी चिन्ह दिस। तीजा-पोरा मनाय के बाद बेटी ल दुरदेसी ह ओकर ससुरार पहुंचा दिस।<br />
अइसे-तइसे अगोरा के दिन पुरगे अउ सोनचिरई ल पीरा जनाय ल धरलीस। धकर-लकर ओला दुरुग के सरकारी अस्पताल म भरती करइन। सोनचिरई ह पीरा म तालाबेली होवत राहय। जचकी निपटाय म भारी तकलीफ होवत रीहिसे। डॉक्टरीन ह पछीना -पछीना होगे रीहिसे। डॉक्टर मन घलो घबरागे। डॉक्टरीन कहिस आपरेसन के जरूरत पर सकथे। जल्दी से मुरली ले साइन करवा के डॉक्टरीन ह लेबर रूम म पहुंचीस। भारी मेहनत के बाद घलो डॉक्टरीन मन सोनचिरई अउ ओखर लइका ल नइ बचा सकिस। देखते-देखत पिंजरा ले सोनचिरई उड़ागे। डॉक्टर ह लेबर रूप ले बाहिर निकल के इंकर रोवई-धोवई ल देखके कथे- अब रोय ले कोई फायदा नइहे। नबालिग उमर म बिहाव करे ले अइसने होथे, जच्चा अउ बच्चा के मउत। लड़की के बिहाव कम से कम अठारह साल के बाद होना चाही। काबर की बालिग होय ले तन मन अउ कोख के विकास ह पूरा हो जथे।<br />
डॉक्टरीन के बात ल सुनके सरपंच ह कथे- इही बात ल मेहा दुरदेसी ल पहिली ले समझाय रेहेंव, फेर नइ मानिस भकला।</span><br />
<span style="font-family: 'Arial Unicode MS', sans-serif; font-size: 13pt; line-height: 115%;" lang="HI"><br />
<strong>दुरगाप्रसाद पारकर</strong><br />
केंवट कुंदरा, भिलाई</span></p>
]]></content:encoded>
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		<title>मई दिवस</title>
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		<pubDate>Tue, 01 May 2012 07:00:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[गीत]]></category>
		<category><![CDATA[सुशील भोले]]></category>

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		<description><![CDATA[अइसन होथे काबर&#8230;.. अइसन होथे काबर संसार म मेहनत करइया जीथे उधार म&#8230;. हटर-हटर बुता करथे जांगर पेराथे घाम-पानी चिन्हय नहीं लहू अंटाथे तभो लांघन मरते हंडिय़ा वोकरे तिहार म&#8230;&#8230;&#8230; लागा-बोड़ी करके गजब कपसा उपजाथे कपड़ा बनाथे अउ मरजाद ल बचाथे कइसे वोकरे लाज लुटाथे भरे बजार म&#8230;&#8230;&#8230;. कुंवां खोद पानी ओगराथे बंजर-पहार म गंगा <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%ae%e0%a4%88-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Labour.gif" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FLabour.gif','Labour')"><img class="aligncenter size-full wp-image-828" title="Labour" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Labour.gif" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FLabour.gif','Labour')" alt="" width="250" height="195" /></a>अइसन होथे काबर&#8230;..</p>
<p style="text-align: center;">अइसन होथे काबर संसार म<br />
मेहनत करइया जीथे उधार म&#8230;.</p>
<p style="text-align: center;">हटर-हटर बुता करथे जांगर पेराथे<br />
घाम-पानी चिन्हय नहीं लहू अंटाथे<br />
तभो लांघन मरते हंडिय़ा वोकरे तिहार म&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p style="text-align: center;">लागा-बोड़ी करके गजब कपसा उपजाथे<br />
कपड़ा बनाथे अउ मरजाद ल बचाथे<br />
कइसे वोकरे लाज लुटाथे भरे बजार म&#8230;&#8230;&#8230;.</p>
<p style="text-align: center;">कुंवां खोद पानी ओगराथे बंजर-पहार म<br />
गंगा ल परघा के लाथे जे मन चतवार म<br />
कइसे मीठ पानी रिसाय रथे वोकरे दुवार म&#8230;&#8230;.</p>
<p style="text-align: center;">कोइला कोड़ के बड़े-बड़े भट्ठी सिपचाथें<br />
गडिय़ा के खंभा चारों खुंट बिजली बगराथें<br />
फेर कइसे रहिथे वोकरे घर भंइसा अंधियार म&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p style="text-align: center;">बड़े-बड़े कारखाना म लोहा जेन गलाथें<br />
सबके रेहे खातिर महल-अटारी टेकाथें<br />
तभो वोकरे परिवार बसथे निच्चट उजार म&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p style="text-align: center;"><strong>सुशील भोले<br />
</strong>संपर्क : 41-191, डॉ. बघेल गली,<br />
संजय नगर (टि·रापारा) रायपुर (छ.ग.)<br />
मोबा. नं. 98269 92811</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>आईपीएल के बुखार</title>
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		<pubDate>Mon, 30 Apr 2012 15:17:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कबिता]]></category>
		<category><![CDATA[युवराज दुबे]]></category>

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		<description><![CDATA[स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार हे. चारो मुडा चघे हाबय, आईपीएल के बुखार हे. जुआरी सटोरिया लगावत हाबय, रोजे लाख हजार हे कोनो जीतय कोनो हारय, अपन कमई सार हे धोनी वीरू दादा तेन्दुलकर, सबके अलग बजार हे कोनो मुम्बई, कोनो चेन्नई, अउ कोनो दिल्ली के सरकार हे आतंकवाद अउ भ्रष्टाचार म, <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%b0/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Yuvraj.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2FYuvraj.jpg','Yuvraj')"><img class="alignleft  wp-image-881" title="Yuvraj" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Yuvraj.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2FYuvraj.jpg','Yuvraj')" alt="" width="155" height="154" /></a>स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार हे.<br />
चारो मुडा चघे हाबय, आईपीएल के बुखार हे.<br />
जुआरी सटोरिया लगावत हाबय, रोजे लाख हजार हे<br />
कोनो जीतय कोनो हारय, अपन कमई सार हे<br />
धोनी वीरू दादा तेन्दुलकर, सबके अलग बजार हे<br />
कोनो मुम्बई, कोनो चेन्नई, अउ कोनो दिल्ली के सरकार हे<br />
आतंकवाद अउ भ्रष्टाचार म, जम्मो देश बीमार हे<br />
लोकपाल ह पास नइ होवय, काबर पीएम घलो लाचार हे<br />
जोर जंगार के सरकार बनाय हे, झगरा झंझट के आसार हे<br />
ऐती ओती देख झन संगी, दुनिया अब्ब‍ड बेकार हे<br />
चरित्त हनन के बड खतरा हे, इही जिनगी के सार हे<br />
स्कूल कॉलेज के छुटृटी हाबय, गरमी परत अपार हे<br />
चारो मुडा चघे हाबय, आईपीएल के बुखार हे&#8230;</p>
<p><strong>युवराज दुबे</strong><br />
रायपुर छ.ग.</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>ग्राम सुराज</title>
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		<pubDate>Tue, 17 Apr 2012 12:18:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कबिता]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ.संजय दानी]]></category>

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		<description><![CDATA[फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम सुराज, फ़ेर तेल चुपर के गांव वाले मन के गोड़ के होही मसाज। चाउंर अउ चना हा सिरा गेहे बांट बांट के तेने पाय अब, ए बछर गर्मी म सब ला बांटही मुरइ भाझी अउ प्याज, जेन गांव के खेतखार फ़ेक्टरी लगाय बर छीना गेहे गा, उहां <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Gram-Suraj.png" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2FGram-Suraj.png','Gram+Suraj')"><img class="alignleft  wp-image-856" title="Gram Suraj" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Gram-Suraj-240x300.png" alt="" width="144" height="180" /></a>फ़ेर सुरू होवत हवय हमर छत्तीसगढ म ग्राम सुराज,<br />
फ़ेर तेल चुपर के गांव वाले मन के गोड़ के होही मसाज।</p>
<p>चाउंर अउ चना हा सिरा गेहे बांट बांट के तेने पाय अब,<br />
ए बछर गर्मी म सब ला बांटही मुरइ भाझी अउ प्याज,</p>
<p>जेन गांव के खेतखार फ़ेक्टरी लगाय बर छीना गेहे गा,<br />
उहां मरिया के जम्मो खर्चा उढाय के घोसना होही आज,</p>
<p>जेन गांव म एक ठोक भी नदिया नरवा नइ हे गा भांटो,<br />
उहां परबुधिया सरकार हा कही इहां हम बनाइंगे बराज।</p>
<p>दु बछर पहली के घोसना जिहां पूरा नइ होय हे उहों जाही<br />
राजनीति करय्या मन ला काहे के शरम अउ काहे के लाज।</p>
<p>अउ बिपक्षी मन वादा निभाओ वाले मेडिकल कैंप लगाही,<br />
हालाकि उमन अपने मनखे मन के नइ कर सकत हे इलाज।</p>
<p>पटेल ला मे केहेवं घर म कसरत करे से सरीर भर हा बनथे<br />
पहलवान बने बर हे तो तेल चुपर के मैदान म लौड़ी भांज।</p>
<p>अब दस दिन कोनो सहर म काहीं सरकारी काम नइ होवय,<br />
कलेक्टरेट म कुकुर मन के घलो सुने बर नइ मिलही आवाज।</p>
<p><strong>डॉ.संजय दानी</strong></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ लोकगीद पंथी</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Apr 2012 16:16:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अनिल जांगड़े गौतरिहा]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8221;पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप सुने बर मिलथे। गीद गुरूघासीदास महिमा के संगे संग मइनखे मन के बीच म पनपे धार्मिक आडम्बर, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीति, नसाखोरी, जुआ, छुआछूत, चरित्र पतन दूर करे के भाव ल लेके पंथी गीद गाये जाथे। पंथी ह सारवी अउ गुरू बंदना के संग सुरू होथे।&#8221; &#8221;छत्तीसगढ़ <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%89/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="attachment_852" class="wp-caption alignleft" style="width: 310px"><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/panthi.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2Fpanthi.jpg','panthi')"><img class="size-medium wp-image-852" title="panthi" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/panthi-300x224.jpg" alt="" width="300" height="224" /></a><p class="wp-caption-text">फोटो साभार - देशज</p></div>
<p>&#8221;पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप सुने बर मिलथे। गीद गुरूघासीदास महिमा के संगे संग मइनखे मन के बीच म पनपे धार्मिक आडम्बर, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीति, नसाखोरी, जुआ, छुआछूत, चरित्र पतन दूर करे के भाव ल लेके पंथी गीद गाये जाथे। पंथी ह सारवी अउ गुरू बंदना के संग सुरू होथे।&#8221;</p>
<p>&#8221;छत्तीसगढ़ के लोक गाथा अउ<br />
संस्कृति हे बड़ महान<br />
जरूरत हवे त हमला अतके<br />
करे ल परही येकर पहिचान&#8221;<br />
लोक गीत अउ संस्कृति मं छत्तीसगढ़ के अपन अलग पहिचान हे। इहां के रीति-रिवाज, भेस-भूसा, बोली बत्तर, खानपान, तीज तिहार, मया, पिरित, मीत मितान, हंसि ठिठोली, मड़ई, मातर के संगे संग किसिम-किसिम के लोक गीद, लोक नृत्य, मनभावन भेसभूसा मं देखे ल मिलथे। जइसे पंडवानी, सुआ, करमा, भोजली, ददरिया, भरथरी, आलहा, नाचा, लोरिक चंदा, जवांरा, फाग गीद, बांसगीद, गौरा-गौरी गीद, बिहाव गीद, जसगीद, राउत नाचा, हल्बी, सरगुजिहा, अउ बस्तरिहा। सबके अलग-अलग महत्तम हे। छत्तीसगढ़ भुंइया मं जतेक खनिज सम्पदा के भंडार हे उही किसम ले लोकगीद अउ लोकनृत्य के कमी नईये।<br />
&#8221;खेत खार खलिहान मं गाथयं<br />
सुआ, करमा अउ ददरिया<br />
देस बिदेस मं अलख जगावय<br />
पंडवानी, पंथी अउ बस्तरिहा&#8221;<br />
इही कड़ी मं छत्तीसगढ़ के लोकगाथा अउ लोकनृत्य मं पंथी आथे। पंथी गीद म संत गुरूघासीदास बाबा जी के जीवन लीला परमुख रूप से गाये जाथे। पंथी गीद अउ पंथी नाच मं सतनामी समाज के लोगन मन के जादा भूमिका रहिथे। सतनाम पंथ के मान्यता के मुताबिक बिलासपुर के आगू ग्राम पोड़ी में दलहा पहाड़ के बीच मं एक बड़का तलाब हे। तलाब के सुक्खा रहे से गांव के लोगन ल निस्तारी बर अब्बड़ दु:ख होवय तब गांव के संत रतिदास ह गुरूबाबा घासीदास के जगा मे समस्या के निदान बर बिनय करथे, तब गुरूघासीदास बाबा ह तलाब मे जाथे चरणामृत बनाके चारो कोती सींच देथे। देखथे देखत तलाब मं पानी ओगर के भर जाथे। ये घटना ल देखके बाबा जी के जय-जयकार बोलत गांव के मनखे मन मगन होके नाचथे-गाथे<br />
&#8221;जय हो जय हो गुरू हो घासीदास<br />
चरन मं साहेब गंगा बहे&#8221;<br />
इही घटना ले पंथी गीद अउ पंथी नाच उदगरे हे अइसन माने जाथे। पंथी ह पुरुष परधान आय। पुरुष मन जादा पंथी नाच मं परमुख अगुवा रहिथे। आजकल माई लोगन मन घलो आगु आवत हावयं। पंथी ल देस-बिदेस अउ जनमानस के बीच पहिचान देवइया कलाकार म स्व. देवदास बंजारे के नाम सरद्धा के साथ लिए जाथे, संगे-संग मिलाप दास बंजारे, पुनरनिक लाल चेलक के नाम ल घलु नई भुलाय जाय सकय। पंथी म दस से पंद्रह सदस्य मनखे के जोथ्था रहिथे। गोलाकार घेरा बनाके नाच प्रस्तुत करथे। गोला के बीच मं परमुख गीद गायक रहिथे। गीद गायक ह गीद गाथे अउ संगी कलाकर मन ह झोकये। नचइया के अगुवा जगा सीटी बजइया रहिथे, मांदर के ताल अउ लय ल आरो लेवत बीच-बीच म सीटी बजाके नचकाहर संगी मन ल नाच के भाव बदले के आरो देत रथे। नाच ह धिरगहा सुरू होके असासून चढ़ मं बंद होथे। सिख मनके भांगड़ा नाच ले जादा रप्तार म नाचे जाथे। पंथी नाच के संग मं मनमाहेक कला परदरसन घला देखाते जे हा अखाड़ा के रूप मं जाने जाथे। पंथी मं परमुख वाद्य, मांदर, झांझ, झुमका, हारमुनियम, तबला, बेंजो, घुंघरू के परयोग होथे। पंथी गीद म लोक कल्याणकारी नीति, संदेस के रूप सुने बर मिलथे। गीद गुरूघासीदास महिमा के संगे संग मइनखे मन के बीच म पनपे धार्मिक आडम्बर, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीति, नसाखोरी, जुआ, छुआछूत, चरित्र पतन दूर करे के भाव ल लेके पंथी गीद गाये जाथे। पंथी ह साखी अउ गुरू बंदना के संग सुरू होथे। साखी-<br />
&#8221;सत म धरती खड़े सत म खडे अगास<br />
सत के पवन अउ पानी, चंदा सुरूज परकास<br />
सत म सिष्ट्री उपजे, कह गये घासीदास।&#8221;<br />
पंथी गीद मं गुरूवंदना-<br />
&#8221;सतनाम, सतनाम, सतनाम सार<br />
गुरू महिमा अपार<br />
अमरित धार बोहाइदे<br />
होई जाही बेड़ा पार<br />
सतगुरू नाम लखाइदे।&#8221;<br />
गुरू घासीदास बाबा जी के पूरा जीवन लीला पंथी गीद म सुने ल मिलथे, जब माता अमरौतिन गरब वास म रहिथे उही समे मं माता जी के कान मं पहाती रथिया जउन मांदर अउ संख के सोर सुनाथे। उही बात ल मांहगूदास ल बताथे। येहा पंथी के माध्यम ले सुने ल मिलथे-<br />
&#8221;संख घुमर बाजे, मृदंग धुनि बाजे<br />
देखव तो जोड़ी अंगना ल हो<br />
देखव तो धनी अंगना ल हो।&#8221;<br />
माता के कोख ल जनम के कुछ महिना बाद जब घासीदास बाबा बाल अवस्था मं घर के अंगना म मड़ियावत, घसलत, खेलत रहिथे ओ समे के बाबा जी के हंसि, किलकारी, ल पंथी गीद मं गाके बताथे-<br />
&#8221;सन्ना ना नन्ना, नन्ना हो लल्लना<br />
खेले बर आये हे खेलाये बर आये हे<br />
हंसे बर आथे हे, हंसाये बर आये हे&#8221;<br />
जोगी के रूप मं गिरौदपुरी, सोनाखान के जंगल मं गुरूघासीदास जी ह सत्य के खोज मं भटकत रहिथे, कभू धुनी रमाथे, जींहा खाय पीये के ठीकाना नहीं, आनी पानी के ठीकाना नही तब पान (पेड़ के पत्ते) के दनोरा बनाके शिष्य मनके भेंट करे सुख्खा चांउर, दाल ल मिलाके बिना आगी पानी के जीवन बनाये के महिमा पंथी गीद मं सुने बर मिलथे।<br />
&#8221;तयं तो रांधी डरे जेवन हो<br />
पानी के बिना<br />
पानी के बिना साहेब आगी के बिना।&#8221;<br />
पंथी गीद मं निरगुन भक्ति सुने ल मिलथे। मनखे के अग्यानता, नासमझी ल देखके देबी देवता अउ धरम के आड़ मं पंडा पुरोहित मन के लुट खसोट, मंदिर के भीतर अधरम के काम करइया ढोंगी, साहू, सन्यासी के रूप ल पंथी गीद मं परगट करथे-<br />
&#8221;रंगाये साधू तन ल मन नइ रंगाये<br />
मन नइ रंगाये साधू, मन नइ रंगाये<br />
देखाये खातीर राखे पथरा के मुरति<br />
सत म कभू लगाये नहीं सूरति।&#8221;<br />
भारत भर म जउन समे अंधविश्वास, छुआछूत, रूढ़ीवादी, मूरति पूजा, अउ बलि परथा जइसन कुरीति समाज म बगरे रहिय। देबी देवता के नाव म जीव जंतु मन के बलि होवय। जीव उपर अत्याचार होवय। मंदिर के पुजारी मनखे ल भरम म डार के दान दक्छिना के नाम में चढ़हउरी के नाम मं लुटे म लगे रहिन, किरनी कस गरीब मन के लहू ल चुहकत रहिन। दलित समाज के गइया गति होवै, पखरा, ढेला म मारखावय। चारो कोती सोसन अउ अपमान ल देखके गुरूघासीदास बाबा जी लोगन म जागरिति लाय बर, मूरति पूजा के विरोध करीस, मनखे मन ल उपदेस देवत कहिच, पथरा के देवी देवता म बलि चढ़ाना, जीव हत्या करना, पाप आय पूजा करना अग्यानता ये। येकर से मुक्ति के मारग नइ मिलय जउन घट (शरीर) हम पाये हन इही हर देवता ये येला चिन्हव, जानव अउ मानव, भइगे मन के मइल ल धोके फरी करे ल परही, तहां मुक्ति के मारग आंखी मं टकटक ल दिखही। काया ल मंदिर अउ आत्मा ल देवता माने गेहे पंथी म जइसन गाये जाथे-<br />
&#8221;मंदिरवा म का करे जइबे</p>
<p>अपन घर के ही देवा ल मइनबे<br />
पथरा के देवताघलय नहीं डोलय हो<br />
बोले म अनबोलना कछु नई बतावय हो।&#8221;<br />
गुरू बर अथाह सरद्धा रखत पंथी गीद मं ये जगत ल माया, मोह प्रंपच, बताये जाथे। माया, मोह लोभ, लालच मं फंसके मनखे मन अपन सुवारथ खातीर सत के मारग ले भटक जाथे। जब गलती ह जनाथे तब माया के तियाग अउ हंसा के मुक्ति बर छट पटाथे। गुरू के चरन म रहिके ही हंसा के मुक्ति पाय के बात कहिथे।<br />
&#8221;चलौ-चलौ संतो अमर लोक जइबो<br />
इहां हमर संगी कोनो नइये हो<br />
हंसा के मुक्ति गुरू चरन म पइबो&#8221;<br />
पंथी गीद मं गुरू महिमा के बरनन के संगे संग छत्तीसगढ़ के दरसन होथे अउ जन मानस म जन जागरण लाये के परयास करे जाथे। छत्तीसगढ़ के कला अउ संस्कृति के रूप मं पंथी के अलग पहिचान बने हे। सादगी सुग्घर भेस-भूसा मं पंथी के कलाकार मन मंच मं परगट होथे, अपन कला ल देखाके दरसक मन ल घलु झुमरा देथे। पंथी म तड़क भड़क के कोनो जगा नइये। बिसेस रूप ले गुरू पर्व, चौका, मेला मड़ई छट्ठी, देवारी, लोकोत्सव मं पंथी के परदरसन करे जाथे। अब तो देस-बिदेश मं पंथी के सोर उड़त हे। छत्तीसगढ़ के लोकगीद अउ लोक नृत्य के रूप में अपन पहिचान बनावत सरग अमरे ल धर ले हे।</p>
<p><strong>अनिल जांगडे-ग़ौतरिहा</strong><br />
ग्राम कुकुरदी<br />
पो. बलौदाबाजार तहसील</p>
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		<title>छत्तीसगढ़ी कव्वाली-  भरमाहा होगे नर तन</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Apr 2012 06:53:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[गीत]]></category>
		<category><![CDATA[जयंत साहू]]></category>

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		<description><![CDATA[भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे। नता रिस्ता के भरोसा, दाग लगते म दफन हो जाथे।। नियाव म नित नइये, नर से होय त भोरहा कहाथे। नारी आय त पापिन, कुटुम बर कुलछनीन हो जाथे।। भरमाहा होगे नर तन&#8230;. परके नियत झांक, खरबइता अपने नियत डोलाथे। अपन चरितर ढांक, पर बर <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>भरमाहा होगे नर तन, चिटिक बात म अगन हो जाथे।<br />
नता रिस्ता के भरोसा, दाग लगते म दफन हो जाथे।।</p>
<p>नियाव म नित नइये, नर से होय त भोरहा कहाथे।<br />
नारी आय त पापिन, कुटुम बर कुलछनीन हो जाथे।।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p>परके नियत झांक, खरबइता अपने नियत डोलाथे।<br />
अपन चरितर ढांक, पर बर दांत खिसोरन हो जाथे।।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p>बेटी बहिनी महतारी, मानत काबर जियान पर जाथे।<br />
देहे देंह रूप चरित्तर, माया बर काया हरन हो जाथे।।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p>तिरिया मांस देखे, ऊंचहा नाक घलो कटा जाथे।<br />
मरहा खुरहा बुढ़वा, मौका पाके दुसासन हो जाथे।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p>कइसे बचाववं मान, सरी भसम कर जाए के मन करथे।<br />
मैं तो जननी आवं, इही सोच के सराप बरदान हो जाथे।।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p>लहू के कतरा जमोय, कोख म नौ महिना जतनथे।<br />
जीव होम बियाथे, पीरा सोच जयंत नमन हो जाथे।।<br />
भरमाहा होगे नर तन&#8230;.</p>
<p><strong><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Jayant-Sahu.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FJayant-Sahu.jpg','Jayant+Sahu')"><img class="alignleft size-full wp-image-814" title="Jayant Sahu" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Jayant-Sahu.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FJayant-Sahu.jpg','Jayant+Sahu')" alt="" width="180" height="231" /></a></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जयंत साहू</strong><br />
ग्राम डुण्डा,सेजबाहर, रायपुर<br />
<a title="चारी चुगली" href="charichugli.blogspot.in" target="_blank"> charichugli.blogspot.in</a></p>
]]></content:encoded>
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		<title>&#8221;अमरइया म ना&#8221;</title>
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		<pubDate>Sun, 08 Apr 2012 14:52:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[आदित्‍य सिंह]]></category>

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		<description><![CDATA[चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल अमरइया म ना। सरसोँ फुलगे अरसी फुलगे गेहू के झूमय बाल संगी गेहू के झूमय बाल। कुचिया गेहे मउहा सेम्हरा परसा लाले- लाल अमरइया म ना। पिँयर-पिँयर आमा मउरे पिँयरी बने हे आज भुइयाँ बनेहे दुलहिन सुघ्घर हरियर लुगरा साज अमरइया म ना। बुढ़वा <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%87%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%be/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Mango.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2FMango.jpg','Mango')"><img class="alignleft  wp-image-848" title="Mango" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/04/Mango.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F04%2FMango.jpg','Mango')" alt="" width="348" height="233" /></a>चल जाबो रे संगी, चल जाबो रे जोही करमा नाचे ल अमरइया म ना।<br />
सरसोँ फुलगे अरसी फुलगे गेहू के झूमय बाल संगी गेहू के झूमय बाल।<br />
कुचिया गेहे मउहा सेम्हरा परसा लाले- लाल अमरइया म ना।<br />
पिँयर-पिँयर आमा मउरे पिँयरी बने हे आज भुइयाँ<br />
बनेहे दुलहिन सुघ्घर हरियर लुगरा साज अमरइया म ना।</p>
<p>बुढ़वा बर अऊ डोकरी पिपर, नोनी अमली करय झपर-झपर।<br />
जामुन अऊ जाम फरे हे आम तैँहा लबेदा मारे काबर।<br />
चिक्कन हे कउहा, वाह रे मउहा, फरे त फरे रे तेन्दू तैँ पाके काबर।<br />
टर्रा लटर्रा अऊ गोल- गोल चार, पाके करौँदा के बनाले अचार ।<br />
छीता बिचारी करय गोहारी.अरे मुरुख मनखे तैँ करे अत्याचार।<br />
काटत हे रुख ल लकर धकर, अऊ देखत हे बिधान ह टकर-टकर।<br />
बुढ़वा बर&#8230;</p>
<p><strong>आदित्य सिंह</strong></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>तोर मेहनत के लागा ल&#8230;..</title>
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		<pubDate>Sat, 24 Mar 2012 13:14:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[गीत]]></category>
		<category><![CDATA[सुशील भोले]]></category>

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		<description><![CDATA[तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल उतार लेतेंव रे, मैं ह अपन दुवार म&#8230;&#8230;&#8230; देखत हावौं खेत-खार म जाथस तैं ह मंझनी-मंझनिया देंह ठठाथस तैं ह जाड़ न घाम चिन्हस, बरखा न बहार देखस ठउका उही बेर तोला पोटार लेतेंव रे, मैं ह अपन&#8230;&#8230;. कहिथें बंजर-भांठा हरियाथे उहें तोर मेहनत के <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b2/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल<br />
उतार लेतेंव रे, मैं ह अपन दुवार म&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>देखत हावौं खेत-खार म जाथस तैं ह<br />
मंझनी-मंझनिया देंह ठठाथस तैं ह<br />
जाड़ न घाम चिन्हस, बरखा न बहार देखस<br />
ठउका उही बेर तोला पोटार लेतेंव रे, मैं ह अपन&#8230;&#8230;.</p>
<p>कहिथें बंजर-भांठा हरियाथे उहें<br />
तोर मेहनत के पछीना बोहाथे जिहें<br />
परबत सिंगार करय, नंदिया दुलार करय<br />
ठउका इही बानी महूं दुलार लेतेंव रे, तोला अपन&#8230;.</p>
<p>तैं तो दानी म बनगे हस औघड़ दानी<br />
भले नइए तोर बर खदर के छानी<br />
सुख ल तिरियाई देथस, दुख ल कबियाई लेथस<br />
ठउका अइसनेच म तोला जोहार लेतेंव रे, मैं ह अपन&#8230;.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Sushil-Bhole.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FSushil-Bhole.jpg','Sushil+Bhole')"><img class="alignleft  wp-image-842" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="Sushil Bhole" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Sushil-Bhole.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FSushil-Bhole.jpg','Sushil+Bhole')" alt="" width="82" height="108" /></a></p>
<p><strong>सुशील भोले<br />
</strong>संपर्क : 41-191, डॉ. बघेल गली,<br />
संजय नगर (टि·रापारा) रायपुर (छ.ग.)<br />
मोबा. नं. 98269 92811</p>
]]></content:encoded>
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		<title>माटी के मँदरी</title>
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		<pubDate>Tue, 13 Mar 2012 15:59:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[आदित्‍य सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[गीत]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://gurturgoth.com/?p=837</guid>
		<description><![CDATA[ माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे? झुल-झुल मँदरिहा ताले म मिलावै रे,ताले म मिलावै। खोल फूट जाही का बजाबे रे, माटी के चोला बेरा चूक जाही पछताबे। गा ले हरि नाम घुर जाबे रे माटी के ढेला, बेरा चूक जाही पछताबे। तन के तंबूरा म ताने ल चढ़ाये कइसे? संसा के तारे दुई <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%81%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%80/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft  wp-image-838" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="Aditya Singh" src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Aditya-Singh.jpg" alt="" width="154" height="192" /> माटी के मँदरी ल चामे म छवाए कइसे?<br />
झुल-झुल मँदरिहा ताले म मिलावै रे,ताले म मिलावै।<br />
खोल फूट जाही का बजाबे रे,<br />
माटी के चोला बेरा चूक जाही पछताबे।<br />
गा ले हरि नाम घुर जाबे रे माटी के ढेला,<br />
बेरा चूक जाही पछताबे।<br />
तन के तंबूरा म ताने ल चढ़ाये कइसे?<br />
संसा के तारे दुई उही म लगाये रे, उही म लगाये।<br />
तारे टूट जाही तैं का गाबे रे माटी के चोला,<br />
बेरा चूक जाही पछताबे। गाले हरि नाम&#8230;<br />
सोने के पिंजरा म सुवा ल बसाये कइसे?<br />
रामे नामे गाये नहीं काला तैं पढ़ाये रे ,<br />
काला तैं पढ़ाये। सुवा उड़ जाही का पढ़ाबे रे,<br />
माटी के चोला बेरा चूक जाही पछताबे। गाले हरि नाम&#8230;</p>
<p><strong>आदित्य सिंह</strong></p>
]]></content:encoded>
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		<title>फागुन महराज अब के गए ले कब अईहव</title>
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		<pubDate>Fri, 09 Mar 2012 08:31:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[गीत]]></category>
		<category><![CDATA[शकुन्तला तरार]]></category>

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		<description><![CDATA[फागुन महराज, फागुन महराज अब के गए ले कब अईहव ! अरे अब के गए ले कब अईहव, अरे अब के गए ले कब अईहव अरे अब के गए ले कब अईहव, अब के गए ले कब अईहव !! अरे कउन महिना हरेली होवे , कउने तीजा तिहार कउन महिना दसराहा अऊ कउने दियना जराय <a href="http://gurturgoth.com/%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%85/"><b>... आघू पढ़व </b></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Holi.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FHoli.jpg','Holi')"><img src="http://gurturgoth.com/wp-content/uploads/2012/03/Holi.jpg" onclick="return TrackClick('http%3A%2F%2Fgurturgoth.com%2Fwp-content%2Fuploads%2F2012%2F03%2FHoli.jpg','Holi')" alt="" title="Holi" width="320" height="213" class="alignleft size-full wp-image-834" /></a>फागुन महराज, फागुन महराज अब के गए ले कब अईहव !<br />
अरे अब के गए ले कब अईहव, अरे अब के गए ले कब अईहव<br />
अरे अब के गए ले कब अईहव, अब के गए ले कब अईहव !!</p>
<p>अरे कउन महिना हरेली होवे , कउने तीजा तिहार<br />
कउन महिना दसराहा अऊ कउने दियना जराय !!<br />
अब के गए ले कब अईहव&#8230;&#8230;&#8230;!!</p>
<p>सावन महीना हरेली होवे , भादों तीजा तिहार<br />
कुँवार महीना दसराहा अऊ कातिक दिया जराय !!<br />
अब के गए ले कब अईहव&#8230;&#8230;.!!</p>
<p>कउने महीना बसन्ते आवे कउने होरी जराय<br />
कउन महीना रे फागे उड़थे रंगे गुलाल !!<br />
अब के गए ले कब आबे&#8230;&#8230;.!!</p>
<p>माघे महीना बसन्ते, फागुन होरी जराय<br />
फागुन चैते रे फागे , उड़थे रंग गुलाल !!<br />
अब के गए ले कब अईहव&#8230;&#8230;.!!</p>
<p>ये पारंपरिक होली गीत ला गुरतुर गोठ खातिर हमला पठोए हांवय श्रीमती शकुन्तला तरार जी ह. </p>
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