Chhattisgarhi

बियंग : टुरी देखइया सगा

हमर गांव-देहात म लुवई-टोरई, मिंजई-कुटई के निपटे ले लोगन के खोड़रा कस मुंह ले मंगनी-बरनी, बर-बिहाव के गोठ ह चिरई चिरगुन कस फुरूर-फुरूर उड़ावत रइथे। कालिच मंगलू हल्बा के नतनीन ल देखे बर डेंगरापार के सगा आय रिहिस। चार झन … आघू पढ़व

(होरी गीत)फागुन फगुनाई

(होरी गीत)फागुन फगुनाई

मन झुमरे लागे संगी मोर, परसाही अमराई म। मऊहा म लगे कोवा के फर, फागुन फगुनाई म।। रूख राई नवा रूप धरे, सुखाय डारा पाना ल झराय। कोंवर पीका फोकियाय परे, ठुढ़गा के दिन बहुराय। कर ले मनभर के सिंगार, … आघू पढ़व

गीत : मोर गाँव म  संगी

गीत : मोर गाँव म संगी

मोर गाँव म संगी बसंत हा आगे हे , मोर गाँव म !! पाना पिंवरा ला धरती दाई अपन कोरा म झोंकय नावा पाना लहर – लहर के खांदा म मेछरावय एखर छाँव म संगी मति छरिया गे हे मोर … आघू पढ़व

मया के डोर बाँध ले न जी

मया के डोर बाँध ले न जी

छिन भर मा संग छूट जाही. मया के डोर बाँध ले न जी तोर हमर मया रही जाही, मया के डोर बाँध ले न जी मया के डोर बाँध ले न संगी मया के डोर बाँध ले न जी. छिन … आघू पढ़व

अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति

आजकाल ‘अस्मिता’ शब्द के चलन ह भारी बाढग़े हवय। हर कहूँ मेर एकर उच्चारन होवत रहिथे, तभो ले कतकों मनखे अभी घलोक एकर अरथ ल समझ नइ पाए हे, एकरे सेती उन अस्मिता के अन्ते-तन्ते अरथ निकालत रहिथें, लोगन ल … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

एकक दाना बर किसान लुलवात रहिथे रे ओखर मिहनत मा आने मेछरात रहिथे रे !! हरर-हरर नांगर बईला धरे मुंधरहा जाय ओखर माथ मा पछीना चुचावत रहिथे रे !! संसो रिथे सुक्खा नईते पनिया दुकाल के एती ओती लईका मन … आघू पढ़व

“चुपरनहा साबुन” (ललित निबंध)

“चुपरनहा साबुन” (ललित निबंध)

येदे अहि नाहकिस हे तउने देवारी फर्रा के गोठ आए बड़ दिन म अपन गाँव गए रहेंव, जम्मे जुन्ना संगवारी मन सो भेंट होए रहिस, गोठ बात म कतका बेर रात पहागे जाने नई पायेन. बिहनिया होईस तंहा सोंचेंव चला … आघू पढ़व

ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड सिने एवार्ड 2012

ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड सिने एवार्ड 2012

छालीवुड सिने एवार्ड 2012 म दुर्ग शहर म बने फिलिम ‘मितान 420′ ल पांच इनाम मिलिस। ये इनाम ग्रेंड यारा अउ रंग झांझर छालीवुड कोती ले रायपुर म होये कार्यक्रम म देहे गीस। ये कार्यक्रम म मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री … आघू पढ़व

एक डंडिय़ा : माटी के पीरा…

एक डंडिय़ा : माटी के पीरा…

ए माटी के पीरा ल कतेक बतांव, कोनो संगी-संगवारी ल खबर नइए। ए तो लछमी कस गहना म लदे हे तभो, एकर बेटा बर छइहाँ खदर नइए।। कोनो आथे कहूँ ले लाँघन मगर, इहाँ खाथे ससन भर फेर सबर नइए।… … आघू पढ़व

छत्तीसगढ के फुलबासन अउ शमशाद बेगम ला पद्म श्री

छत्तीसगढ के फुलबासन अउ शमशाद बेगम ला पद्म श्री

बड गरब के बात हावय के भारत सरकार ह गुंडरदेही के शमशाद बेगम अउ राजनांदगांव जिला के ग्राम पंचायत सुकुलदेहान के फुलबासन बाई यादव ल येसो के पद्मश्री सम्मान देहे के हांका देहे हावय. हमर प्रदेश ल मिले ये सम्मान … आघू पढ़व

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