Chhattisgarhi

फागुन के दोहा

कहूं नगाड़ा थाप हे, कहूं फाग संग ताल। मेंहदी रचे हाथ म, अबीर, रंग, गुलाल॥अमरईया कोइली कुहकय, मऊहा टपके बन।पिंयर सरसों गंध होय मतौना मन॥पिचकारी धर के दऊड़य, रंग डारय बिरिजराज।उड़य रंग बौछार, सब भूलिन सरम अऊ लाज॥मोर पिया परदेस … आघू पढ़व

नंदावत हे लोककला, चेत करइया नई हे…

गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा से खास बात ‘देवार डेरा’, ‘चंदैनी गोंदा’, कारी बर लिखे गीत अऊ कवि सम्मेलन मा सोझेच अपन मन के बात कहइया गीतकार कवि लक्ष्मण मस्तुरिहा के कहना हे कि नवा राज बने नौ बछर बीतगे फेर छत्तीसगढ़ … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ी फिलिम अउ संस्कृति

‘हमला अपन आप ला बदले के जरूरत नइए भलूक अपन आप ला चिन्हे के जरूरत हे। छत्तीसगढ़ म जउन छत्तीसगढ़िया फिलिम बनत हे ओमा धियान राखन कि कोनो भी दत्त खिसोर मन आके फिलिम बनाके हमर परम्परा के कबाड़ा झन … आघू पढ़व

घर म नाग देव भिंभोरा पूजे ल जाय : नान्‍हे कहिनी

पीरा म गोहार पारत सुशीला अपन बेटा ल कथे, रूपेश मोला पन्दराही होगे कनिहा पीरा म मरत-मरत। फेर आज उदूक ले जादा बाड़ गे तइसे लागत हे। मोर देह के जम्मो हाड़ा ह एके जगा अरहजगे तइसे लागथे बेटा, बने … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ ‘वर्णमाला अउ नांव’ एक बहस

‘ये पाती कई झन साहित्यकार करा पहुंचे हावय। दिनेश चौहान ह एक विचार सब ला सोचे बर देय हावय। स्वर, व्यंजन के सही उपयोग करना हे, पहिली वर्णमाला तय करव ओखर बाद अक्छर के उपयोग करे जाय। अक्छर अइसना होवय … आघू पढ़व

संस्कार अउ संस्कृति : गोठ बात

जब काकरो सन गुठियावन त हम का बोलतहन तेकर ऊपर धियान रहय वो हमर कर्म बनथे। अपन करनी ल जांचन वो ह हमर आदत बनथे। अपन आदत ल परखना चाही वो हमर चरित्र के निरमान करथे। आज के समे म … आघू पढ़व

जनम भूमि : कहिनी

किसमत कभू धीरे-धीरे बदलथे, कभू उदुपले। ऊंकरों गांव ले लाने मोटरा म सुख के जोरन जोराय लगिस। ऊंकर गुत्तुर-गुत्तुर छत्तीसढ़िया बोली अउ मीठ-मीठ चहा-पानी म अइसन आनंद आय के एक बेर जे पी डरे ते लहुटती म चार गिराहिक अउ … आघू पढ़व

मोर छइंहा भुइहां छत्तीसगढ़ी रंगीन फिलिम के बोहनी

मैं सोचथंव के उनला अपन फिलिम म खराब फूहड़ दिरिस्य अउ गीत के निर्माण करके छत्तीसगढ़िया मन के आदत बिगाड़े के प्रयास करना एक सवाल खड़ा करथे। बने फिलिम अउ गीत हमेशा सफल होय हे। ये बात ल सुरता राखना … आघू पढ़व

धरोहर ले निकले अनमोल रतन छत्तीसगढ़ी वियाकरन

छत्तीसगढ़ राज बनिस, तब बाहिर के मन ‘छत्तीसगढ़ी’ बोली आय के भासा एखर ऊपर प्रस्न खड़ा कर दिन। हल्ला होय ले लगगे के ‘वियाकरन कहां हे?’ कुछ सिक्छाविद् अउ साहित्यकार मन ये बात ल सामने लइन के बियाकरन के रचना … आघू पढ़व

अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया

(बैसाख अंजोरी पाख तीज) भविष्य पुराण म लिखे हे के आज के दिन त्रेतायुग प्रारंभ होय रहिस हे। आजे के दिन भगवान परसुराम के घला अवतार होय रहिस हे। तेखरे सेती अक्ति के दिन ल अबूझ मुहुरत माने गे हे … आघू पढ़व

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