Chhattisgarhi

लीम चउरा के पथरा

लीम चउरा के पथरा बिकट चिक्कनखड़भूसरा रहिस होगे कइसे बड़ चिक्कनओ तो जानत हवय सबके अन्तर मन। पंच-पटइल बइठ नियाव करिससुन्ता सुम्मत के नवा रद्दा गढ़िस। उधो-माधो के भाग ह खुलिससरकारी योजना म साहेब दूनों के नाव लिखिस। मंगलू बुधियारिन … आघू पढ़व

जिनगी कइसे चलही राम

सिरावत हे गांव ले जम्मो बुता काम जिनगी कइसे चल ही राम…नागर नंदागे अउ टेकटर ह आगेहसियां हिरागे अउ हरवेस्टर ह छागेचुटकी म नाहकत हे दाउ के काम…मंडल गउटियां सब सहर धरलिस भइयाबनिहार ल बनी नहीं, नइए पउनी के पोसइयाउजरत … आघू पढ़व

संस्कृति के दरपन म बैर

छत्तीसगढ़ियापन आज के समय के मांग हे, दरसक के मांग ल फिलिम व्यवसाय हा नई स्वीकारही त निश्चित रूप ले फिल्म उद्योग के डूबना तय हे। प्रयोगवादी गीत दरसक के मनोरंजन बर बहुत जरूरी हे। फिलिम म हांसी-ठिठोली अउ उद्देश्य … आघू पढ़व

मंहू पढ़े बर जाहूं : कबिता

ये ददा गा, ये दाई वो, महूं पढ़े बर जाहूं।पढ़-लिख के हुसियार बनहूं, तूंहर मान बढ़ाहूं॥भाई मन ला स्कूल जावत देखथौं,मन मोरो ललचाथे।दिनभर घर के बुता करथौं,रतिहा उंघासी आथे।भाई संग मोला स्कूल भेजव, दुरपुतरी बन जाहूं।ये ददा गा, ये दाई … आघू पढ़व

चरभंठिया को गोठ

‘जब ठाकुर मरीस तहन ठकुरइन ऐके झन होगे दू झन लइका इंकरो मया मोला धर खइस रे। तब ठकुरइन एक दिन मोला किहिस तेहा मोर खेत खार सबो ल सम्हाल मेहा एकर बदला में तोला दू एकड़ खेत दुहु।’ गरमी … आघू पढ़व

चौमास : कबिता

जब करिया बादर बरसे, सब तन मन ह हरषे।चम-चम बिजुरी ह चमके, घड़-घड़ बदरा ह गरजे॥तब आये संगी चौमास रे…1. रुमझूमहा बरसे पानी, चुहे ले परवा छानी।पानी ले हे जिनगानी, हांस रे जम्मो परानी॥जिनगी के इही आस रे…2. गली-गली चिखला … आघू पढ़व

बरसा के बादर आ रे

मयारू आंखी काजर कस छा रे।बरसा के बादर आ रे॥सुक्खा होगे तरिया, नरवा।बिन पानी के कुंआ, डबरा॥बियाकुल होगे जीव-परानी।सबो कहंय-कब बरसही पानी॥मोर मीत के केस छरिया रे।बरसा के बादर आ रे॥पंखा डोलावय हवा सरर-सरर।बरसे पानी झझर-झरर॥मेघ ह गरजय, घुमरय, बरसय।चिरई-चिरगुन, … आघू पढ़व

अबिरथा जनम झन गंवा

अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके।भगवान ल दोस झन दे रे, कुछु नई दे हे कहिके॥भगवान दे हे सुग्घरदु हाथ, दु गोड़।मिहनत ले तंय रे,मुहु झन मोड़।सोन ह कुन्दन बनथे, आगी म तपके।अबिरथा जनम झन गंवा रे, … आघू पढ़व

लोक मंच के चितेरा

दाऊ रामचन्द्र देशमुख हर रामहृदय तिवारी जी के निर्देसन मा बनइस ‘कारी’ जगमग-जगमग बरत छत्तीसगढ़ मूल्य मन के लड़ी अउ सुख:दु:ख के झड़ी ‘कारी’। बिराट लोक नाटय ‘कारी’। ये नाटक हर छत्तीसगढ़ के जनता ला एक घांव फेर भाव के … आघू पढ़व

कबिता : बेटी मन अगुवागे

जमाना बदलगे झन करौ संगीबेटा-बेटी म भेद,बेटी मन अगुवागे चारों खुंटबेटा के रद्दा ल छेंक। पढ़ई-लिखई म अव्वल आथे,बेटा- मस्ती म समै बिताथेबेटी घरो के काम बुता म,सुग्घर दाई के हाथ बंटाथे। तभो ले तुंहर आंखी नइ उघरिस,बेटा के हावेच … आघू पढ़व

Page 4 of 33« First...«23456»...Last »