अनुवाद : बारह आने
(मोरेश्वर तपस्वी ”अथक” द्वारा लिखित ”बारह आने” का अनुदित अंश) वो ह मोर हाथ ल धरलिस अउ एक ठन छोटकन पुड़िया दे के मोर मुठा ल बंद कर दिस अउ कहिस- बाबू जी, आज मोर मंसा ह पूरा होगे। मैं … आघू पढ़व
(मोरेश्वर तपस्वी ”अथक” द्वारा लिखित ”बारह आने” का अनुदित अंश) वो ह मोर हाथ ल धरलिस अउ एक ठन छोटकन पुड़िया दे के मोर मुठा ल बंद कर दिस अउ कहिस- बाबू जी, आज मोर मंसा ह पूरा होगे। मैं … आघू पढ़व
सावन के महिना ह गन-गन-गन अइसअंधियारी पाख के निकलतउगोना ह सट ले निकलतउगोना ह सट ले अइसपरोसिन नोनी हरमोला भइया कहिके चिल्लइसमोला अपनबहिनी के सुरता अइसभादो के महिना मंतीजा ह लकट्ठइससेठ हर मोला आजलुगरा देखात अंखिअइसपोरा के बिहान दिनमोर मन … आघू पढ़व
तीजा जावत अपन बाई ल देख के मोला मनेमन अड़बड़ हाँसी लागेईमान से महापरसाद आज मोला अड़बड़ अलकरहा लागेसुत उठ के तरिया ले साबुन म नहा के आगेमइके जाय के सुध मंसाबुन डब्बा ल भुलागेलाटिया गुर डारे बरा मंगहूं पिसान … आघू पढ़व
बड़ मयारू हच मोर बहिनीतोला तीजा लेहे बर आहू आं,सावन म तोर घर म जाकेराखी मैं बंधवाहूं ओभादो म तिहारिन बहिनीभाई के घर म आबेससरार के जम्मो सुख-दुख लमइके म गोठियाबेदाई के मया के मोटराधर के तोर बर लाहू ओ,बड़ … आघू पढ़व
आरंभ मा पढव : – सृजनगाथा के चौथे आयोजन में ब्लॉगर संजीत त्रिपाठी सम्मानित पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’
लोक कथादाई बपरी करम छड़ही कस औंट के रहिगे। सोचिस बेटा तो मोर केहे के उल्टा करथे, मोला डोंगरी ऊपर अपन माटी गती कराना हे, त नदिया मं पाटे बर केहे लागही। अइसे विचार के चेतईस देख बेटा मरहू ताहन … आघू पढ़व
लोककथासतवंतिन ह, अउ मुड़ म बोहे लकड़ी के बोझा ल धिरलगहा अंगना म मढ़ाइस। एती लकड़ी ह माढ़िस अउ चार ठन बड़े-बड़े गंऊहा डोमी सांप ह मुड़ी उठा के खड़े होगे। डोकरी ह देखके डर्रागे अउ सांप-सांप कहिके गोहार पारिस। … आघू पढ़व
तेजनाथ पिपरिया, कवर्धाहरेली निराली झूमत-नाचत आय हरियालीलाए संग म ये खुशहाली, आए हे गेड़ी म चढ़केदिखे देवी-देवता मन सरग के।धरे ठेठरी, खुरमी भरे थाली।झम-झम फूल बरसाए बादलसंभर गे जम्मो मोटियारी, मुसकुरावय गरीब किसाननागर बैला के करत सम्मान रंधनी ले मुसकावय … आघू पढ़व
फिल्मी गोठ : चम्पेश्वर गोस्वामीये फिलिम वाले मन के चरित्तर हा अब तो छत्तीसगढ़िया मन के समझ ले बाहिर हे। काबर कि जउन फिलिम उद्योग म तरी ऊपर फिलिम ह बनत हे तउन ला देखे के बाद आम दरसक माने … आघू पढ़व
बेलपत्ता नई होवय सिरिफ तीन कोनियापन्ना।बेलपत्ता-होथे भोले नाथ के,परम, दिव्य सिंगारव्यंजन अउ अलंकारसुहागिन के सेंदूर कस।बेलपत्ता-होथे भगवान शिव के,त्रिनेत्र के त्रिशूल केसमान्तर चिन्हा।बेलपत्ता म, समाए हे, तीनों लोक, तीनों देव, तीनों गुन।बेलपत्ता- चढ़ाना होथेतीनों देव के प्रसन्नता खातिर,तीनों गुन सम्पन्न,तीनों … आघू पढ़व