Chhattisgarhi

हरेली के गीत

तेजनाथ पिपरिया, कवर्धाहरेली निराली झूमत-नाचत आय हरियालीलाए संग म ये खुशहाली, आए हे गेड़ी म चढ़केदिखे देवी-देवता मन सरग के।धरे ठेठरी, खुरमी भरे थाली।झम-झम फूल बरसाए बादलसंभर गे जम्मो मोटियारी, मुसकुरावय गरीब किसाननागर बैला के करत सम्मान रंधनी ले मुसकावय … आघू पढ़व

फिलिम बनाबो फिलीम बनाबो

फिल्मी गोठ : चम्पेश्वर गोस्वामीये फिलिम वाले मन के चरित्तर हा अब तो छत्तीसगढ़िया मन के समझ ले बाहिर हे। काबर कि जउन फिलिम उद्योग म तरी ऊपर फिलिम ह बनत हे तउन ला देखे के बाद आम दरसक माने … आघू पढ़व

बेलपत्ता

बेलपत्ता नई होवय सिरिफ तीन कोनियापन्ना।बेलपत्ता-होथे भोले नाथ के,परम, दिव्य सिंगारव्यंजन अउ अलंकारसुहागिन के सेंदूर कस।बेलपत्ता-होथे भगवान शिव के,त्रिनेत्र के त्रिशूल केसमान्तर चिन्हा।बेलपत्ता म, समाए हे, तीनों लोक, तीनों देव, तीनों गुन।बेलपत्ता- चढ़ाना होथेतीनों देव के प्रसन्नता खातिर,तीनों गुन सम्पन्न,तीनों … आघू पढ़व

मया के तिहार

टीप-टीप तरिया डबरीनरवा नदिया कछार।आगे हरेली, राखीतीजा-पोरा मया के तिहार॥माते हे रोपा-बियासीखेती-किसानी, जिनगी हमार।हरियर दाई के कोराधरती माई करत हे सिंगार॥टीप-टीप…कमरा-खुमरी ओढ़े नगरिहाधरे तुतारी बईला नागर।जबर छाती हावय रे भईयातोर कमईया जांगर॥टीप-टीप…रच-रच, मच-मच गेड़ी बाजेजाता-पोरा नांदिया बईला साजेभोजली, जेवारा, दौनापान … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़ फिलिम के दर्सक ग्रामीण

छत्तीसगढ़ी फिलिम पीटावत काबर हे? ये सवाल खड़े हावय- काय निर्माता निर्देशक मन स्तर के फिलिम नई बनावत हे? हमर निर्माता निर्देशक मन बहुत बढ़िया गीत, संगीत, कथा, पटकथा, हास्य, रचनावत हे। उच्च तकनिक के उपयोग होवत हे। कोरी-कोरी कलाकार … आघू पढ़व

लिंग परिक्छन के परिनाम

”आज जम्मो समाज म लड़की मन पढ़ लिख गिन अऊ लड़का मन ले दूचार करे बर तियान हे। आज हम दूतीन बछर थे देखत आत हम। जेखर घर लड़की हे ओ बाप ह छाती फुलाय अऊ मेछा अटियाय घुमत हे। … आघू पढ़व

छत्तीसगढ़िया भाव जगाए मं, काबर लजाथन?

भारत ल मदर इंडिया कइथन, भारत माता मं काबर लजाथन?छत्तीसगढ़ मं हमन रइथन, छत्तीसगढ़-महतारी कहे मं काबर लजाथन?छत्तीसगढ़ के अनाज सबे खाथन, जय छत्तीसगढ़ कहे मं काबर लजाथन?दूसर ल सनमान सबे करथन, दाई-ददा के पांव छुए म काबर लजाथन?दाई ल … आघू पढ़व

कहिनी : आरो

‘भइया’ आखर ह अघ्घन ल हलोर देथे। ओखर हिरदे के तार झनझना जाथे। ये मनखे मोला का जान-सुन के चेता के गईस हे? का मैं ह चोर नो हँव। ओखर अंतस ले आरो आथे… नइ तैं ह चोर नइ अस। … आघू पढ़व

कबिता : नवा तरक्की कब आवे हमर दुवारी

अरे गरीब के घपटे अंधियारगांव ले कब तक जाबे,जम्मो सुख ला चगल-चगल केरूपिया तैं कब तक पगुराबे?हमर जवानी के ताकत लाबेकारी तैं कब तक खाबे?ये सुराज के नवा तरक्कीहमर दुवारी कब तक आबे?हमर कमाए खड़े फसल लगरकट्टा मन कब तक … आघू पढ़व

समय मांगथे सुधार,छत्तीसगढ़ी वर्णमाला एक बहस

एक डहर हम चाहथन के छत्तीसगढ़ी ल चारों मुड़ा विस्तार मिलय, अउ दूसर डहर लकीर के फकीर बने रहना चाहथन। कुआं के मेचका बने रहना चाहथन, त बात कइसे बनही? आज ले सौ-पचास साल पहिली हमर पुरखा मन नानकुन पटका … आघू पढ़व

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