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छत्तीसगढ़ी संस्कृति म गोदना

छत्तीसगढ़ी लोकाचार परंपरा म गोदना के अब्बड़ महत्म हे, येला छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी संस्कृति सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक सब्बो म बढ़ ख्याति मिले हे, अउ ये पीरा देवइया परंपरा ल सब्बो छत्तीसगढ़िया आदिवासी मनखे मन आजो बड़ खुशी अउ जिम्मेदारी ले निभात आत हे, काबर की गोदना गोदवाना कोनो आसान बात नोहे, गोदना गोदाये के सौउख कराईया मनखे मन ल अब्बड़ पीरा सहेन करे ल लागथे। काबर के गोदना ल गोदे बर देवारिन दाई मन सूजी ल कोचक के मास म होब के गोदना ल गोदथे, जेकर से मनखे के मरत तक ओखर देह म चिनहा बने रहिथे। देंह म अतना सुजी होबो ले खून धलोक निकल जाथे, तेखर सेती गोदना गोदवाना हिम्मत के बुता हवय जेमा अब्बड़ पीरा सहे ल लगथे।
वइसे तो गोदना ल सब्बो मनखे मन गोदवाथें फेर ये ल मनखे ले जादा माई लोगिन मन पसंद करथे। गोदमा म अपन अंग म आनी-बानी के छाप आकृति गोदवाथें। जइसे गाल, गला, ठोड़ी, हाथ, गोड़ अउ सब्बो अंग म गोदना गोदवाथें, येमा चिरइ-चुरगुन, जानवर मन के छाप, देवता-धामी के छापा अब्बड़ महत्व रकथे।


सियान मन बताथें के हमर ये गोदना के परंपरा ह छत्तीसगढ़ के संस्कृति म अब्बड़ जुन्ना हे जेला आजो के बेरा म गांव-गांव म रहइया आदिवासी समाज के मनखे मन निभावत आत हें। वइसे गोदना के परम्‍परा आन जाति मन म घलाव प्रचलित हे फेर ये ह गोड़ जनजाति के मनखे मन के धरोहर ये। येही मन अपन गोदना के परंपरा ल बचा के राखे हे।
गोदना के पौराणिक महत्म धलोक हे सियान मन कहिथे के गोदना के निशान ह मरे के बाद हाड़ा म घलोक पर जाथे, जेन ह परलोज जाये के बाद मनखे के जियत भर के करनी ल जागरित करथे। गोदना ह परलोक म मनखे के हिसाब किताब बताथे। गोदना ल माई लोगिन मन के गहना घलोक कइथे, जेला कभू कोनो चोरा नइ सके ना ही बेचे जा सकय जे ह जियत ले मरत तक संग म रहिथे।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर, बिलासपुर
मो.न- 7722906664

कविता – महतारी भाखा

छत्तीसगढ़िया अब सब्बो झन आघु अवव,
महतारी भाखा ल जगाये बर जाबो।

गांव-गांव म किंजर के छत्तीसगढ़ के गोठ-गोठियाबो,
सब्बो के करेजा म छत्तीसगढ़ी भाखा ल जगाबो।

छत्तीसगढ़ महतारी के मया ल सब्बो कोती बगराबो,
संगी -संगवारी संग छत्तीसगढ़ी म गोठियाबो।

महतारी के अब करजा ल चुकाबो,
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी भाखा म गोठियाबो।

छत्तीसगढ़ी भाखा-बोली के मीठ मया,
सब्बो छत्तीसगढ़िया अउ परदेसिया मनखे ल बताबो।

महतारी भाखा ल जगाबो संगी,
अवव हमर महतारी भाखा ल जगाबो।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर
छत्तीसगढ़
मो.न:- 7722906664

गढ़बो नवा छत्तीसगढ़

हमर छत्तीसगढ़ ल बने अठारह बछर पुर गे अउ अब उन्नीसवाँ बछर घलोक लगने वाला हे, अउ येही नवा बछर म हमर छत्तीसगढ़ राज म नवा सरकार के गठन घलोक होये हे येही नवा सरकार बने ले सब्बो छत्तीसगढ़िया मन के आस ह नवा सरकार ले बाढ़ गे हे की नवा सरकार ह छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मन बर कुछु नवा करही जइसे नवा सरकार के परमुख गोठ हे “गढ़बो नवा छत्तसीगढ़” येही गोठ ल धर के सरकार ह छत्तीसगढ़ अउ छत्तीगढिया बर काम बुता करहि त सब्बो छत्तीसगढ़िया मनखे के आस ह पूरा हो जाही, सबले जादा जरूरत हे हमर महतारी भाखा ल छत्तीसगढ़ राज म जगाये के जेखर ले सब्बो छत्तीसगढ़िया के मान सम्मान ह अउ बढ़त जाये, अतना बछर होंगे हे छत्तीसगढ़ राज ल बने अउ छत्तीसगढ़ राज भाखा आयोग ल बने फेर अभी ले छत्तीसगढ़ महतारी के भाखा छत्तीसगढ़ी ल जन-जन के भाखा न हमर जुन्ना सरकार बना सकीस अउ न जुन्ना राज भाखा आयोग के अधिकारी मन जेखर ले हमर छत्तीसगढ़िया भाई-बहनी मन अउ जतना भी छत्तीगढि भाखा के मयारू मनखे हे सब्बो के मन म आक्रोश ह भर गे हे, अब येही आक्रोश के कारण सरकार घलोक बदल गिस, अउ ये बेरा के बदलइया हमर नवा सरकार ल घलोक चाही के छत्तीसगढ़ म छत्तीगढिया अउ छत्तीसगढ़ी भाखा ल आघु बढ़ाये बर अपन निरंतर प्रयास करे, अउ छत्तीसगढ़ राज भाखा आयोग म घलोक अइसे मनखे ल अधिकारी बना के बइठाये जेन ह छत्तीगढिया होये के संगे-संगे महतारी भाखा के मयारू घलोक होवय अउ कोनो भी मनखे के चापलूस झन होये, जेखर ले छत्तीगढिया मनखे सियान संगवारी कवि साहित्यकार मन घलोक मिल जुल के छत्तीसगढ़ महतारी के सेवा कर सके, अउ छत्तीसगढ़ के विकास म सरकार के संगे-संग महतारी भाखा ल आघु बढ़ाये बर अपन पूरा सहयोग दे सके। येही गोठ ल अब हमर आये नवा सरकार ल बने ले समझे लगही, तभे छत्तीसगढ़ म नवा सरकार ह छत्तीगढिया मनखे मन के मया ल बटोर पाहि, नइ ते पिछलैया सरकार आसन येहू ह आघु के बेरा म बोहा जही।

जय जोहार जय छत्तीसगढ़ महतारी

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर
छत्तीसगढ़

मोर दाई छत्तीसगढ़

मैं तोर दुःख ल काला बताओ ओ
मोर दाई छत्तीसगढ़
तोर माटी के पीरा ल
कति पटक के आओ मोर दाई छत्तीसगढ़।

कइसन कलपत हे छत्तीसगढ़ीया मन,
अपन भाखा ल बगराये बर
सुते मनखे ल कइसे मैं
नींद ले जगाओ ओ मोर दाई छत्तीसगढ़।

मोर भुइँया म नवा अंजोर के आस हे
तभो ले छत्तीसगढ़ी भाखा के हाल ह बढ़ बेहाल हे।
कई ठन बोली भाखा इहा करत राज हे,
छत्तीसगढ़ी भाखा के बने जीके जंजाल हे।

छत्तीसगढ़िया अपना महतारी भाखा बर,
करत कतका परयास हे,
तभो ले समझे नइ अउ मनखे मन
कोन जानी का इखर विचार हे।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर
छत्तीसगढ़
मो न.- 7722 906664

तभे होही छत्तीसगढ़ी भाखा के विकास

छत्तीसगढ़िया मन ल पहली अपन भाखा ल अपनाये ल लगही तभे होही छत्तीसगढ़ी भाखा के विकास

छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी भाखा बर राज भाखा आयोग त बना डारे हे फेर भाखा के विकास बर कुछु काम नइ होइस, अठरा बछर होगे छत्तीसगढ़ राज ल बने तभो ले इहा के छत्तीसगढ़ी भाखा ह जन-जन के भाखा नइ बन सकिस, कतको परयास करत हे जन मानुष मन अपन भाखा ल जगाये के, तभो ले अतना पिछड़े त कोनो भाखा नइ होही जतन छत्तीसगढ़ी भाखा हे, काबर के छत्तीसगढ़ी भाखा ल जतका खतरा परदेशिया मन ले हे जेन मन इहा आ के अपन भाखा के विकास करत हे, ओखर ले जादा खतरा अइसे छत्तीसगढ़िया मनखे ले हे जेन ह डिंग मारे बर अपन भाखा ल छोड़ के दूसर भाखा म गोठियाथे, फेर ये कभु नइ सिख पावत हे के दूसर भाषी मनखे मन जब इहा आ के अपन भाखा म गोठियाये बर नइ भुलाये, अपन भाखा कोखरो भी आधु म बोले म कोनो संसो नइ करय, तभो ले येला देख के छत्तीसगढ़िया मन कुछु नइ सीखत हे, येखर बर मोर कहना हे कि परदेशिया मन ले छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ी भाखा ल खतरा नो हे खतरा त अपन राज के अइसने मनखे ले हे जेन ह जानबूझ के छत्तीसगढ़ी भाखा बोले गोठियाय म संसो करथे अउ अपन भाखा ल बने ले गोठियाय नइ, अउ तभो ल जतन छत्तीसगढ़िया मनखे हे उमन ठान लेवय की आघु ले जोन भी मनखे कने मिलही चाहे ओ हा छत्तीसगढ़िया होवय या चाहे परदेशिया सब्बो ले छत्तीसगढ़ी भाखा म गोठियाही त हमर भाखा ल कोन परदेशिया कोनो दूसर मनखे ले खतरा नइ रही, अउ येही ल देख के जो बाहरी मनखे हमर छत्तीसगढ़ राज म अही त मजबूरी म छत्तीसगढ़ी भाखा ल शिख के आये ल लगही, त सब्बो ले छत्तीसगढ़ी भाखा म गोठियावव चाहे कोनो भी मनखे होवय, फेर हमर छत्तीसगढ़ी राज अउ इहा के भाखा के विकास होये ले कोनो नइ रोक सकय।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो न- 7722906664

चुनाव के चिल्लाई म मतदान करना जरूरी हे

हमर समाज म कुछु के महत्व होवय चाहे झन होवय, तभोले चुनाव के बढ़ महत्व होथे, चुनाव अइसे चीज हे जेखर ले हमन ह कुछु भी अपन मन-पसंद चीज ल चुने के मौका मिलथे, जेखर सब ले बड़े फायदा होथे हमर समाज अउ विकास बर, नेता चुने के अधिकार हमन ल हे, त हमर इहा के नेता मन घलोक कम नइ हे जइसे चुनाव के बेरा तीर म आथे त ओहु मन मनखे के तीर तखार म मंडराए ल चालू कर देथे, जइसने पानी गिरथे त मेढ़क मन नरियात-नरियात नदिया नरवा ले बाहिर निकलथे, वइसने चुनाव आये के बेरा म बड़का-छोटे सब्बो नेता मन अपन घर-दुवारी ले बाहिर निकल के गली-गली घूम के धुर्रा घलोक ल मजा ले चाटथे। अउ जनता ल नरिया-नरिया के हलाकान कर देथे, तहले चुनाव जीते के बाद वही
नेता मन दुरिहा- दुरिहा तक दिखाइ नइ देवय।
त येही बेरा रहिथे जेमा हमन ल अपन अधिकार के बारे म जाने ल अउ समझे ल लगही, अउ चुनाव म अपन अधिकार के उपयोग कर के मतदान करे ल चाही, तभे हमन अपन विकास ल बने ले कर सकथन, अउ अपन देश समाज ल बने नेता के हाथ म शोप सकथन, कही हमन अपन अधिकार के उपयोग नइ कर के मतदान नइ देबो अउ मतदान के दिन ले हमन ल का करना हे कइ के सुते रहिबो त जेन नेता ह दूसर के मतदान ले चुन के हमर बीच म अहि त ओहा पूरा साल भर सुते रही अउ तुहर जिनगी ल घलोक नरक बना डारही, येखरे बर अपन अधिकार अपन मत के उपयोग करके खुसी के संग चुनाव म सामिल होहु। अउ मतदान करहु अपन मत अपन अधिकार के उपयोग करे के बेरा आगे हे।
जय जोहार जय छत्तीसगढ़,
मोर वोट मोर राज के विकास।
मोर अधिकार हे, मतदान करना ये बार हे।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर।

सावन आगे

सावन आगे संगी मन भावन आगे।
मन ल रिझाये बर फेर सावन आगे।
चारो मुड़ा फेर करिया बदरा ह छा गे,
हरियर-हरियर लुगरा म भुईया ह रंगा गे।
सावन आगे संगी, फेर सावन आगे।
रिमझिम-रिमझिम बरसत हे बादर ,
सब्बो मनखे के जीव ह जुड़ा गे।




सुक्खा के अब दिन पहागे,
सब्बो जगहा करिया बादर छा गे।
सावन आगे संगी सुग्घर सावन आगे,
मन ल मोहाय बर, अब सावन आगे।
फुहर-फुहर बरसत हे बदरा,
फेर सब के मन ल भिगोत हे।
सावन के संग अब,
मनखे के मन ल मोह थे,
सावन आगे संगी, फेर सावन आगे,।

अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर।
मो- 7722906664

छत्तीसगढ़िया कहाबो, छत्तीसगढ़ी बोलबो अउ चल संगी पढ़े ला

छत्तीसगढ़िया कहाबो

अपन महतारी भाखा ल गोठियाबो,
छत्तीसगढ़िया कहाबो,संगी छत्तीसगढ़िया कहाबो।

लहू म भर के भाखा के आगी,छत्तीसगढ़ी ल गोठियाबो।
छत्तीसगढ़िया अब हम कहाबो, छत्तीसगढ़िया कहाबो।

अमर शहीद पुरखा के आंधी ल, अपन करेजा म जराबो।
बलदानी वीरनारायण जइसे, छत्तीसगढ़ के लईका कहाबो।

अपन माटी अपन मया ल, छत्तीसगढ़ महतारी बर लुटाबो।
छत्तीसगढ़िया कहाबो भईया, छत्तीसगढ़िया कहाबो।

बघवा असन दहाड़ के,छत्तीसगढ़ी भाखा गोठियाबो।
अपन महतारी भाखा ल जगाबो। महतारी भाखा ल जगाबो।

छत्तीसगढ़ के माटी के, करजा ल अब छुटाबो।
छत्तीसगढ़िया कहबो संगी छत्तीसगढ़िया कहाबो।

छत्तीसगढ़ महतारी के पीरा, ल अब दुरिहा भगाबो।
छत्तीसगढ़ी भाखा ल गोठियाबो, छत्तीसगढ़िया कहाबो।




छत्तीसगढ़ी बोलबो

मया के मीठ मधुरस, करेजा म घोलबो,
गुरतुर बोली हमर, छत्तीसगढ़ी बोलबो

बोली हे मोर, बढ़ सुघ्घर भाखा हे,
गोठियाये के मन म, बड़ अभिलासा हे।

सारी जगहा अपन, बोली-भाखा ल बगराबो
छत्तीसगढ़ी भाखा ल जगाबो, छत्तीसगढ़ी भाखा ल जगाबो।

छत्तीसगढ़ के जुन्ना-नवा परंपरा ल अपनाबो,
छत्तीसगढ़ी संस्कृरिति ल सब्बो झन ल जनाबो।

संगी-जहुरिया संग, छत्तीसगढ़ी म गोठियाबो।
अपन बोली-भाखा ल अपनाबो,अपन भाखा ल अपनाबो।

जोहार छत्तीसगढ़ के नारा,सब्बो जगहा लगाबो,
छत्तीसगढ़ी गोठियाबो,संगी, छत्तीसगढ़ी गोठियाबो।




चल संगी पढ़े ला

चल-चलबो संगी-पढ़े ला,
अपन जिनगी ला गढ़े ला
पढ़बे नई तो कइसे करबे,
जिनगी ला कइसे गढ़बे।
छत्तीसगढ़ ला आघु बढाना हे,
अपन भाखा ल जगाना हे।
कब तक दुसर के पाछु पड़े रहिबे,
कोकरो कहे-धरे म जुरीयात रहिबे।
सियान के गियान ल माथा म धरबे,
बिग्यान के संग म आघु-आघु बढ़ बे।
लइका-सियान सबो ल आपस म संगरबे,
अपन दाई-ददा के सम्मान बर तो लड़बे।

-अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़।
प्रशिक्षण अधिकारी आई टी आई मगरलोड धमतारी।
मो.न.-7722906664,7987766416
ईमेल:- anilpali635@gmail.com



जिनगी के प्रतीक हे भगवान जगरनाथ के रथ यात्रा

भगवान जगरनाथ के रथ यात्रा ल जिनगी जिये के प्रतीक कहे जाथे। जइसने रथ यात्रा के दिन भगवान ह अपन घर ले अपन भाई-बहनी के संग निकलते अउ उखर संगे-संग यात्रा करे बर आघु बड़थे, वइसने मनखे मन के जिनगी म अपन भीतर के विचार अउ गुन ल उमर भर संग ले के रेंगें ल पड़थे, विचार के संगे-संग अपन सगा संबंधी परिवार ल सब्बो ल उमर भर संग म धर के चलना चाहि, जइसे भगवान जगरनाथ ह अपन परिवार अपन भाई-बहनी के संग ल नइ छोडिस वइसने सब्बो मनखे ल भगवान के दिखाये रददा म चलना चाहि, भगवान जगरनाथ के दरसन करे ले ओखर यात्रा म सामिल होये मात्र ले मन ह पवित्र नइ होवय, भगवान के बताए गे रददा म चले ल लागथे, भगवान के गुन न धरे ल लागथे तभे भगवान अउ भकत दुनो के यात्रा ह सफल होथे, भगवान जगरनाथ के रथ यात्रा अउ भगत के जीवन यात्रा जेन सफल होये के बाद सीधा मोकछ के द्वार म ले जाथे, अउ यात्रा सुरु करे म पूरा परिवार अउ भाई-बहनी के बीच म जइसे मया दुलार बने रहिथे वइसे जीवन म अपार शांति अउ सफलता बने रहिथे, येहि सब चीज हे जेन भगवान ह अपन यात्रा ले सब्बो मनखे ल सिखाथे।




भगवान जगरनाथ ले जुड़े एक कहावत घलोक हवय कि एक राजा इन्द्रधुमान अपन सब्बो परिवार के संग नीलाचर सागर के तीर म बसे रहिस हे ओहि सागर म राजा ल लकड़ी के एक गट्ठा मिलथे अउ उहि लकड़ी के गट्ठा ले राजा के कहे म एक सियान मनखे ह भगवान जगरनाथ के मूर्ति बनाथे, वो सियान कोनो मामूली सियान नइ रहय, भगवान जगरनाथ के मूर्ति बनाये बर सियान के रूप धर के आये भगवान विसवकर्म रहिथे, भगवान विसवकर्म राजा संग एक सरत रखथे की जब तक मैं ये मूर्ति ल नइ बनालाव तब तक कोनो मनखे वो कुरिया म झन आहू, तभे मैं ये मूर्ति ल बनाहू, राजा ह भगवान के सरत मान लेथे अउ विसवकर्म भगवान ह मूर्ति बनाये के काम सुरु कर देथे, अब्बड़ दिन बीते के बाद जब राजा ल रहे नइ जाये त राजा ह ओ कुरिया के भीतरी जाये के विचार बनाथे अउ फेर एक दिन ओ कुरिया के भीतरी चल देथे, कुरिया के भीतरी जाये के बाद देखथे की अंदर म कोनो नइ हे, अउ मूर्ति ह आधा अधूरा बने हे येला देख के राजा ह अब्बड़ उदास होथे, अउ अपन गलती बर अपन आप ल कोसथे तभे भगवान जगरनाथ ह राजा के सपना म आके राजा ल कइथे की हमन ह इँहा अइसने रूप म रहना चाहत हन तै उदास झन हो। तै ओहि रूप म हमन ल इँहा बसा दे, फेर राजा ह उहा मूर्ति के स्थापना कर के मंदिर ल बनवाथे, अउ आज तक भगवान जगरनाथ ह ओहि रूप म उहा अपन भई बहनी संग निवास करथे अउ अपन भगत मन के कष्ट ल हरथे।
अइसने मनखे मन के जीवन म भगवान जगरनाथ के मूर्ति बरोबर जइसे हे वइसने रहना चाहिये, जादा पाये के लालच म अपन जिनगी के बने बेरा ल बरबाद नइ करना चाहि। तभे मनखे मन के जिनगी हँसी-ख़ुशी बितहि अउ फेर जिनगी म भगवान के करे करम ले सिख ले के बने-बने चलही।

अनिल कुमार पाली,
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़।
प्रशिक्षण अधिकारी आई टी आई मगरलोड धमतरी।
मो.न.-7722906664,7987766416
ईमेल:- an।lpal।635@gma।l.com



छत्तीसगढ़ के पहली तिहार हे हरेली

छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मन के पहली तिहार हे हरेली जेला पूरा छत्तीसगढ़ म बढ़ धूम-धाम ले मनाथे, हमर छत्तीसगढ़ ह परम्परा अउ संस्करीति के राज आये इँहा थोड़- थोड़ दुरिहा म नवा-नवा संस्करीति अउ परंपरा देखे ल मिल जाथे, जेखर सबले बड़े कारन हे कि हमर छत्तीसगढ़ म तरह- तरह के जाति वाला मनखे मन रहिथे, अउ ये मन अपन सियान मन के दे परंपरा ल आजो देवता धामी असन पूजनीय मानथे, अउ कतको परकार के तिहार ल कतको बछर ले पीढ़ी दर पीढ़ी मनात आत हे येही म परमुख हे हमर छत्तीसगढ़ के हरेली तिहार जेला किसान मन बछर के पहली तिहार मान के मनाथे, बारिश होये के बाद खेती-किसानी के दिन आ जाथे सब्बो किसान मन अपन काम-बुता म लग जाथे येही बीच म धान के बोवई चालू हो जाथे, जेमा सब्बो किसान म हरियर लहरात खेत के आस म रहिथे, हरेली तिहार के बाद छत्तीसगढ़ म लगातार सब्बो तिहार आये ल सुरु हो जाथे, वइसे हरेली तिहार ल किसान के तिहार के नाव ले जादा जानथे, हरेली तिहार के सबले जादा मान-सम्मान किसान मनखे मन करथे, हरेली के दिन खेती किसानी म परयोग होने वाले सब्बो अवजार मन के बढ़िया साफ-सफाई कर के वोला धो-धा के बंदन तिलक करथे, घर के सियान मन घर के दुवारी म सब्बो समान ल रख के बढ़िया बंदन तिलक कर के आगी म हुम देथे अउ नारियल फोड़ के अपन खेत म बढ़िया धान होये के सब्बो काम बुता बढ़िया ले होये कइके मनोकामना मांगते, फेर ओखर बाद वो समान मन ल खेत म उपयोग करथे, किसान के घर म रहिया माई लोगिन मन पूजा म चढ़ाए बर घर म चील रोटी-पीठा बनाथे अउ अपन घर के कुल देवता म चढ़ते।
हरेली के दिन गांव के राउत मन जो गांव के गरुवा ल चराये बर लेगथे तेन मन गांव के घर-घर जा के गरुवा कोठा म निम के डारा ल बांधते जेखर ले घर म दुवारी म कोनो बुरा हानि नई होवय। तेखर सेती हरेली तिहार के अब्बड़ महत्व हे।




किसान मन के संगे-संग पूरा छत्तीसगढ़ म सब्बो छत्तीसगढ़िया मनखे मन हरेली तिहार ल बढ़ खुशी ले मनाथे, जेमा लईका मन गेड़ी बना के गेड़ी नृत्य करथे, गेड़ी ल लकड़ी के दु ठन डंडा के नीचे म छोट-छोट डंडा बांध के बनाथे, अउ ओखर ऊपर चढ़ के पूरा गांव भर किंजर के गेड़ी नृत्य ल करथे, गेड़ी नृत्य छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य हे जोन ह महत्पूर्ण हे अउ पूरा छत्तीसगढ़ म परसीद हे। हरेली तिहार के दिन गेड़ी नृत्य के संगे-संग गांव-गांव म कई परकार के प्रतियोगिता रखे जाथे जेमा गांव के युवा मन ल सामिल होके अपन हुनर दिखाये के अवसर मिलथे,




हरेली तिहार के अउ कइ ठन मानता हे, जइसे सियान मन बताथे तेखर अनुसार हरेली तिहार ल तंत्र-मंत्र कलाजादू बर घलोक बने दीन माने जाथे, जेन मनखे मन तंत्र-मंत्र कलाजादू के विद्या ले रहिथे तेन मन हरेली के दिन सिद्धि कर के अपन विद्या के प्रयोग करथे, अब ये बात ह कतना सही हे येला नइ जान सकन पर छत्तीसगढ़ म संस्करीति अउ परम्परा के भरमार हे जोन ह छत्तीसगढ़ ल अउ राज ले अलग करथे, अउ यही परंपरा संस्करीति के कारन छत्तीसगढ़ ह पूरा देश म परषिद हे।

अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़।
प्रशिक्षण अधिकारी आई टी आई मगरलोड धमतरी।
मो.न.-7722906664,7987766416
ईमेल:- anilpali635@gmail.com ,