Tag: Dharmendra Daharwal

पीपर तरी फुगड़ी फू

समारू बबा ल लोकवा मारे तीन बछर होगे रिहिस, तीन बछर बाद जब समारू बबा ल हस्पताल ले गांव लानीस त बस्ती भीतर चउक में ठाड़े पीपर रुख के ठुड़गा ल कटवत देख के, सत्तर बछर के समारू के आँखी कोती ले आँसू ढरक गे। बबा के आँखी में आँसू देख के पूछेंव कइसे बबा का बात आय जी, त बबा ह भरे टोंटा ले बताइस, कथे सुन रे धरमेंद तैं जेन ये पीपर रूख ल देखत हस जेन ल सुखाय के बाद काटत हवे तेन ल हमर बबा के बबा ह लगाय रिहिस, नानपन ले हमन एकर छइंहा में खेल कूद के बाड़े हन, ये रूख ह अपन हरियरपन में आठ कोरी सावन देखे हवे। ये रुख ल आज कटावत देख के नानपन के जम्मो सुरता ह हरिया गे, कहिथे न कि सियानापन के नानपन के लहुटती होथे। बबा ह आगू बतावत किहिस की मैं नानपन में खेल कूद में अब्बड़ माहिर रहे हंव, नानपन के जम्मो खेल गिल्ली डंडा, भौरा बाँटी के, अटकन भटकन, खोखो कबड्डी के तो बाते अलग रिहिस, अउ इही पीपर के डारा ले तो मंगलू के टूरा बिसेसर ह डंडा पिचरंगा खेलत खानी गिरे रिहिस। अब ये जम्मो खेल ह खेले के तो बहुत दुरिहा के बात आय अब तो येकर नाम सुने बर घलो नइ मिले। पहिली पारा भर के जम्मो लइका मन इही पीपर तरी एक जघा सकलाक़े किसम किसम के खेल खेलत रेहेंन। अउ एक जघा सकलाक़े खेले ले तो एक दूसर से मया पिरीत अउ चीन पहिचान बड़थे। फेर अबके लइका मन ह तो खेले के नाम में घर ले बाहिर निकलबे नइ करय। अउ बिचारा मन ल तो खेले कूदे के बेरा बखत कहाँ मिलथे, बिहनिया ले तो अपन बजन ले जादा गरु बेग ल खांद में लाद के इसकुल गे रहिथे तेन ह संझउती कण लहुटथे।
एकात कन सुरताय के बेरा मिलथे तेन ल मोबाइल में बीडीओ गेम खेल के पहा देथे। हमर जमाना में कहां इसकुल राहय, फेर हमन ल डाई ददा अउ छोटे बड़े के मान गउन आदर सत्कार सीखोवय जेन आज कतको किताब रटे रटे मन में चीटिको देखे बर नइ मिलय। दिन भर कमावन, डपट के खावन अउ संझा कन कुदरावन। खेले खुदे ले हाँथ गोड़ के बियाम घलो हो जाय। अब तो लइका मन ह मोबाइल में भुलाय रहिथे, जेकर फायदा कतको झन अतलंगहा मन ह उठाथे अउ ब्लू वेल जइसन जानलेवा खेल ह। आगू आथे, अउ दिन भर मोबाइल में गड़े रहे ले आँखी घलो पतरा जाथे। बतावत बतावत बबा हाँस डरिस, मैं पूछेंव का होगे बबा, त बबा ह बताइस की ओमन नानपन में इही पीपर तरी फुगड़ी खेलत टुरी मन संग अब्बड़ इतरावय, बबा कहिथे की तोर डोकरी दाई ह ओकरे तो नतीजा आय। अब तो न फुगड़ी बाँचीस न तो ज्यादा पेड़, सब पेड़ मन कटावत जात हवे, जेकर ले अंकाल दुकाल परत हवे। फुगड़ी ह तो कब के फू होगेहे, धीरे धीरे पेड़ मन घलो फू होवत जावत हवे। अतका कहिके बबा ह घरघराय टोंटा ले किहिस चल रे बेटा मोला मोर घर अमरा दे, अउ मैं बबा संग ओकर घर कोती चल देंव।

धर्मेन्द्र डहरवाल “हरहा”
सोहागपुर, जिला बेमेतरा

सेल्फी ले ले

नवा चलागन चले है संगी,
जेकर चरित्तर काला बतांव,
कोनो बेरा अउ कोनो जघा मैं
सेल्फी ले बर नइ भुलांव।
छानी में बइठे करीया कउवा के संग में,
कचरा फेके के झऊहा के संग में,
दारू भट्ठी में पउवा के संग में,
चाहे कोनो पकड़ के भले ठठाय,
फेर सेल्फी लेय बर नइ भुलाय।

चाहे घुमत राहंव मेहा जंगल झाड़ी,
चाहे गे राहंव मेहा आंगन बाड़ी,
चाहे चलत राहय रेलगाड़ी,
मैं पटरी में कट के भले मर जांव,
फेर सेल्फी लेय बर नइ भुलांव।

तुरते जन्मे टूरा के संग में,
दाड़ी बनाय के छुरा के संग में,
नदिया नरवा में पूरा के संग में,
चाहे धारे धार भले बोहांव,
मैं सेल्फी लेय बर नइ भुलांव।

धर्मेन्द्र डहरवाल “मितान”
सोहागपुर जिला बेमेतरा



अब्बड़ सुग्घर मोर गांव

जिहाँ पड़की परेवना,
सुवा अउ मैना,
बढ़ नीक लगे,
छत्तीसगढ़ी बोली बैना,
कोयली ह तान छेड़े अमरइया के छांव,
अब्बड़ सुग्घर हमर गंवई गांव

जिहाँ नांगर, बईला संग नंगरिहा,
गवाय करमा ददरिया,
आमा अमली के छईहा,
चटनी संग बासी सुहाथे बढ़िया,
पैरी के रुनझुन संवरेगी के पांव,
अब्बड़ सुग्घर हमर गंवई गांव

डोकरी दाई के कहानी,
नरवा नदिया के पानी,
अब्बड़ सुग्घर इहां के जिनगानी,
ठउर ठउर मिलही मितान के मितानी,
कतेक ल मैंहा बतांव,
अब्बड़ सुग्घर हमर गंवई गांव।

– धर्मेन्द्र डहरवाल “मितान”
सोहागपुर जिला बेमेतरा



मोर देश के किसान

नांगर बईला धर निकलगे, बोय बर जी धान,
जय हो, जय हो जी जवान , मोर देश के किसान।

बरसत पानी, घाम पियास में जांगर टोर कमाथस,
धरती के छाती चीर के तैहा, सोना जी उपजाथस,
माटी संग में खेले कूदे, हरस माटी के मितान,
जय हो, जय हो जी जवान, मोर देश के किसान।

सुत उठ के बड़े फजर ले माटी के करथस पूजा,
तोर सही जी ये दुनिया मे नई है कोनो दूजा,
दुनिया भर के पेट ल तारे, तै भुईया के भगवान,
जय हो, जय हो जी जवान, मोर देश के किसान।

बोरे बासी संग पताल चटनी, अब्बड़ के ग सुहाथे,
होरे होरे त – त – त के बोली अब्बड़ मन ल भाथे,
तोर महिमा म
बढ़ भारी हे जग में, कतका करंव मैं तोर बखान,
जय हो, जय हो जी जवान , मोर देश के किसान।

धर्मेन्द्र डहरवाल “मितान”
सोहागपुर जिला बेमेतरा




चित्र: संतोष फरिकार‎

बइरी जमाना के गोठ

काला बताववं संगी मैं बैरी जमाना के गोठ ल,
जेती देखबे तेती सब पूछत रहिथे नोट ल,
कहूँ नई देबे नोट ल, त खाय बर परथे चोट ल,
काला बताववं संगी मैं बैरी जमाना के गोठ ल।

जमाना कागज के हे, इहिमा होथे जम्मो काम ग,
कही बनवाय बर गेस अधिकारी मन मेर, त पहिली लेथे नोट के नांव ग,
अलग अलग फारम संगी सबके फिक्स रहिथे दाम ग,
अउ एक बात तो तय हे, जभे देबे नोट तभे होही तोर काम ग,

ऊपर ले नीचे खवाय बर परथे,
लिखरी लिखरी बात बर तो चपरासी ल पटाय बर परथे,
चपरासी मन घलो कम चौतरा नई राहय, कथे
कुछ ले दे के मामला ल निपटाय बर परथे,
साहब ल अपन आदमी हरे कइके बताय बर परथे,

गिधवा बरोबर ताकत रहिथे, भिखमंगा लबरा अधिकारी मन,
कब आवय उंकर मेर, अनपढ़ अज्ञानी, अक्कल बुध के नादानी मन,
गरीब के मेहनत नोच खाथे ये जालिम शिकारी मन,
जतका माँगथे ओतके दे देथे, भोला भाला अनारी मन,

संगी हो अभी बात इहे तक नई रुके हे,
नोट के तो मया में घलो अब्बड़ चर्चा हे,
जघा जघा छपे मिलहि तोला एकर परचा हे,
अउ तोर मयारू तोर संग तभे चलही,
जब तै करबे ओकर ऊपर खर्चा हे।

धर्मेन्द्र डहरवाल (मितान)
सोहगपुर जिला बेमेतरा



जब बेंदरा बिनास होही

वो दिन दुरिहा नई हे,
जब बेंदरा बिनास होही,
एक एक दाना बर तरसही मनखे,
बूंद बूंद पानी बर रोही,

आज जनम देवैया दाई-ददा के
आँखी ले आँसू बोहावत हे,
लछमी दाई कस गउ माता ह, जघा जघा म कटावत हे,
हरहर कटकट आज मनखे,
पाप ल कमावत हे,
नई हे ठिकाना ये कलजुग में, महतारी के अचरा सनावत हे,
मानुष तन में चढ़े पाप के रंग ल,
लहू लहू में धोही,
वो दिन दुरिहा नई हे, जब बेंदरा बिनास होही।

भूकम्प, सुनामी अंकाल,
जम्मो संघरा आवत हे,
आगी बरोबर सुरुज तिपत हे,
तरिया नदिया सुखावत हे,
पाप अति होगे,
पुन के दुर्गति होगे,
कराही में उसनही भजिया बरोबर,
रही रही के तोला खोही,
वो दिन दुरिहा नई हे, जब बेंदरा बिनास होही।

धान लुये कस
मुड़ी ल काटही,
लहू में प्यास बुझाहि,
काल के बेरा आघू में होही,
ओतके बेर सुरता आही,
पाप पुन जम्मो करनी के,
ओतके बेर हिसाब करही,
पापी मन के नास करे बर,
कलयुग में काली अवतरही।
पापी मन ह जीव के भीख बर, लहू के आँसू रोही,
वो दिन दुरिहा नई हे, जब बेंदरा बिनास होही।

धर्मेन्द्र डहरवाल
सोहगपुर जिला बेमेतरा


ससुर के नखरा

बिहाव के सीजन चलत हे,
महु टुरी देखे बर गेंव,
टुरी के ददा ह पूछथे,
तोर में का टैलेंट हे,
मैं केहेंव टैलेंट के बात मत कर,
टैलेंट तो अतका हे,
गाड़ी हला के बता देथव,
टंकी में पेट्रोल कतका हे।
रिस्ता केंसल।

दूसर जघा गेंव,
टुरी के ददा ह कथे का करथस?
मैं केहेंव,
वइसे तो पूरा बेकार हव,
मैं एक साहित्यकार अव,
गांव गली चौराहा में कविता सुनाथव,
मनखे के मन बहलाथव,
समय नई मिलय मोला बईठ के सुरताय बर,
अपने मजाक बना लेथव मनखे ल हसाय बर।

टुरी के ददा कथे, मोर बेटी ल काला खवाबे भूखे मारबे का?
मैं केहेंव,
मैं सुने हव, कोनो कवि महोदय कहे हे,
टुरी मन भाव खावत हे,
टुरा मन धोखा खावत हे,
नेता मन पइसा खावत हे,
किसान मन जहर खावत हे,
जवान मन गोली खावत हे,
कोन ह भूखे मरत हे,
एडजेस्ट करके चला लेबो,
हमू मन कही कुछु खा लेबो।
रिस्ता पेर केंसल।

फेर दूसरा जघा गेंव
डोकरा के सवाल,
मोर बेटी ल खुश राखबे?
मैं केहेंव,

रहे बर शासन दे हे आवास,
खुश रखहुँ तै करले बिस्वास।
दु रुपिया किलो वाले चाऊंर ल खाबो,
अउ
लइका मन ल छेरी पठरु सही कोठा में ओइलाबो।

फेर उहि सवाल का बुता करथस?
मैं सोचेंव अईसे में नई बनय,
केहेंव,
भट्टी में कैशियर हव नौकरी सरकारी हे,
फेर एक ठन समस्या हे,
मोर विभाग आबकारी हे।
तोला जियत भर पियाहूं,
जतका कहिबे दारू देवहुँ,

डोकरा ल दारू संग प्यार होगे,
डोकरा मोला अपन दमाद बनाय बर तैयार होगे,
तभो रिस्ता नई होईस

मोला गोठ सुनके, 104 डिग्री के बुखार होगे,
दु दिन बाद पता चलिस,
टुरी दूसर संग फरार होगे।

धर्मेन्द्र डहरवाल
सोहगपुर जिला बेमेतरा

मोर भारत देश के माटी

चंदन के समान हे,
जेकर पावन कोरा मे जनमे
देवता कस बेटा किसान हे,
इही माटी मे जनम धरेंव
ये बात के मोला अभीमान हे।

कोनो हिन्दु हे कोनो मुस्लिम,
कोनो सिख ईसाई हे,
मया पिरीत के डोरी बंधाहे,
जम्मो झन ह भाई ये,
रमायन, गीता, बाईबल कोनो मेर,
कहुँ गुरू ग्रंथ अऊ कुरान हे,
इही माटी मे जनम धरेंव
ये बात के मोला अभीमान हे।

हर मनखे के नस नस मे,
जिहा दया मया ह बोहाथे,
जिंहा कोयली बरोबर किसम किसम के,
बोली भाखा सुहाथे,
जिहा बखत परे मे बीर जवान,
माटी बर देथे परान हे,
इही माटी मे जनम धरेंव
ये बात के मोला अभीमान हे।

धर्मेंन्द्र डहरवाल
ग्राम सोहागपुर जिला बेमेतरा
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वाह रे रूपया तै महान होगे

जम्मो भागे तोर पाछु मे, सब तोरे गुन ल गावै,
जावस तै जेती जेती, सब तोरे पाछु आवै,
तोर आय ले बने बने सिधवा घलो बईमान होगे,
वाह रे रूपया तै महान होगे.

दुनीया पुजा तोर करे, घर घर मे तोर वास हे,
तोर खातीर जम्मो जियत हे, तोरे भरोसा सांस हे,
सबो जघा तहीं छाय हस अब तही ह भगवान होगे,
वाह रे रूपया तै महान होगे.

तै जदुहा हरस का मोहनी डारे हस,
सरी दुनीया ल मोही डारे, जम्मो झन ल मारे हस,
जब ले आय हस दुनीया मे जम्मो तोर गुलाम होगे,
वाह रे रूपया तै महान होगे.

चारो मुड़ा तोर चर्चा हे जम्मो तोर दिवाना हे,
पईसा वाले ल जम्मो चीनथे ओकरे जम्मो ठीकाना हे,
तै चाहस त दुनीया बदल दे, तै कलयुग के परमान होगे,
वाह रे रूपया तै महान होगे.

तोर बिना पाना नई डोले, जम्मो रूपया रूपया बोले,
कोनो नई बोले जय बम भोले, तोर नशा में दुनीया डोले,
तही अब अल्लाह अऊ राम होगे,
वाह रे रूपया तै महान होगे।

धर्मेन्द्र डहरवाल मितान
ग्राम सोहागपुर जिला बेमेतरा
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सुन वो नोनी के दाई, आदमी

सुन वो नोनी के दाई,
जाड़ मे होगे बड़ करलाई,
छेना लकड़ ल अब तै सितावन झन दे,
गोरसी के आगी ल बुतावन झन दे,
सिरतोन कहात हस नोनी के ददा,
जाड़ ह होगे बड़े जन सजा,
जाड़ के मारे पोटा ठीठुरगे,
डोकरी डोकरा मन जाड़ मे मरगे,
कथरी चद्दर ल जाड़ मे अब मड़ावन झन दे
गोरसी के आगी ल बुतावन झन दे,
हु-हु करथे दाँत किटकीटागे,
कतको झन के परान उड़ागें,
स्वेटर चद्दर जम्मो ओढ़े,
कमरा कथरी सबो सिरागे,
जाड़ गजब हे, नोनी ल कोनो डाहर जावन झन दे,
गोरसी के आगी ल बुतावन झन दे,
गोरसी, भुर्री के आंच ह जम्मो झन ल सुहाथे,
बईठे के जम्मो चारो मुड़ा, बड़ तापे के मजा उड़ाथे,
आसरा अऊ चिन्हारी हे ये गोरसी ह,
अब येला तै नंदावन झन दे,
गोरसी के आगी ल बुतावन झन दे।

2.
आदमी आज धरती ले आसमान तक विकास करे हे,
धोती बंगाली ल जम्मो भुलागे, अब जींस टी शर्ट ल धरे हे,
ये सब ह इंकर मन के टेसन ये,
एक झन ल पुछेंव त बताइस, ये नवा जमाना के फेसन ये,
आज से 10-20 साल बाद जनमईया लईका मन,
माँ के अचरा बर तरसही,
आज के महतारी तो जींस पहीरथे त अचरा कहाँ ले लाही,
भले जहर खाय बर पईसा मत राहय,
फेर पाछु मे पाकीट दबाय हे,
बैलेंस राहय चाहे मत राहय फेर मोबाईल ल कान में टेकाय हे,
उही मोबाईल मे देखत ताहन, नवा नवा एनीमेशन हे,
उहु ल पुछेंव त बताइस, ये नवा जमाना के फेशन ये,
पहीली के मन आशिर्वाद ले त गोड़ मे गिर के पांव परे,
बड़े मन जेन कहाय तेला अपन फर्ज समझ के करय
आज के मन पांव परे के फार्मेलिटी निभाथे,
एक कन नवही अउ माड़ी तक मे काम चलाथे,
कहाँ नंदागे हमर संस्कृति ये कोन जमाना के जनरेशन ये
कोनो ल पुछबे त ईही बताही,ये नवा जमाना के फेशन ये,
एक दिन मेहा भट्ठी मे चार झन लईका मन ल देखेंव,
चार ठन पउवा मंगाय राहयच, खुर्सी मे बईठे सीकरेट ल जलाय राहय,
मैहा केहेंव मै सुने हंव मनखे ल टैसन रहीथे त पीथे, तुमन ल का बात के टेंसन हे,
त ओमो के एक झन कहीथै,
अतका ल नई जानस ग, ये नवा जमाना के फेसन ये।

धर्मेन्द्र डहरवाल मितान
ग्राम सोहागपुर जिला बेमेतरा
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