Tag: Gokul Ram Sahu

तीजा तिहार

रद्दा जोहत हे बहिनी मन,
हमरो लेवइया आवत होही।
मोटरा मा धरके ठेठरी खुरमी,
तीजा के रोटी लावत होही।।

भाई आही तीजा लेगे बर,
पारा भर मा रोटी बाँटबोन।
सब ला बताबो आरा पारा,
हम तो अब तीजा जाबोन।।

घुम-घुम के पारा परोस में,
करू भात ला खाबोन।
उपास रहिबो पति उमर बर,
सुग्घर आसिस पाबोन।।

फरहार करबो ठेठरी खुरमी,
कतरा पकवान बनाके।।
मया के गोठियाबोन गोठ,
जम्मों बहिनी जुरियाके।

रंग बिरंगी तीजा के लुगरा,
भाई मन कर लेवाबोन।
अइसन सुग्घर ढ़ंग ले संगी,
तीजा तिहार ला मनाबोन।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

हरेली तिहार आवत हे

हरियर-हरियर खेत खार,
सुग्घर अब लहरावत हे।
किसान के मन मा खुशी छागे,
अब हरेली तिहार आवत हे।।

खेत खार हा झुमत गावत,
सुग्घर पुरवाही चलावत हे।
छलकत हावे तरीया डबरी,
नदिया नरवा कलकलावत हे।।

रंग बिरंग के फूल फुलवारी,
अब सुग्घर डुहूँरु सजावत हे।
कोइली पँड़की सुवा परेवना,
प्रेम संदेशा सुनावत हे।।

नर-नारी अउ जम्मो किसान,
किसानी के औजार ला धोवत हे।
किसानी के काम पुरा होगे,
अब चिला चघाय बर जोहत हे।।

लइका मन भारी उत्साह,
बाँस के गेड़ी बनवावत हे।
चउँर के चिला सुग्घर खाबो,
अब हरेली तिहार आवत हे।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम (घटारानी)
जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

अकती बिहाव

मड़वा गड़ाबो अँगना मा,
सुग्घर छाबो हरियर डारा।
नेवता देबो बिहाव के,
गाँव सहर आरा पारा।।

सुग्घर लगन हावे अकती के,
चलो चुलमाटी जाबो।
शीतला दाई के अँगना ले,
सुग्घर चुलमाटी लाबो।।

सात तेल चघाके सुग्घर,
मायन माँदी खवाबो।
सुग्घर सजाबो दूल्हा राजा,
बाजा सँग बराती जाबो।।

कोनो नाचही बनके अप्सरा,
कोनो घोड़ा नचाही।
सुग्घर बजाके मोहरी बाजा,
सुग्घर बराती परघाही।।

पंडित करही मंत्र उच्चारण,
मंगल बिहाव रचाही।
सात बचन ला निभाहू कहिके,
सातो वचन सुनाही।।

धरम टिकावन होही सुग्घर,
पियँर चउँर रंगाय।
दाई टिकत हे अचहर-पचहर,
ददा टिके धेनू गाय।।

रोवत-रोवत दुलही बिचारी,
दाई-ददा ले आसिस पाही।
डोली मा होके सवार सुग्घर,
अपन पती के संग जाही।।

नवा बहुरिया ला घर मे लानत,
सुग्घर आरती सजाय हे।
मई पिला आनंद मुसकावत,
सउँहत लक्ष्मी आय हे।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

नंदावत हे अकती तिहार

अकती तिहार हमर छत्तीसगढ़ अँचल के बहुँत बढ़िया प्रसिद्ध परंपरा आय। ये तिहार ला छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव मे बड़ा हर्सोल्लास के संग मनाय जाथे। बैशाख महीना के अँजोरी पाख के तीसरा दिन मा मनाय जाथे।आज के जुग मा नवा-नवा मनखे अउ नवा-नवा जमाना के आय ले अउ हमर जुन्ना सियान मन के नंदाय ले हमर अतेक सुग्घर तिहार हा घलो नंदावत हे। पहेली के सियान मन अकती तिहार के पहेली ले जोरा करत राहय।अकती तिहार आही ता गाँव के डिही डोंगर ठाकुर दिया में अउ शीतला दाई में दोना में धान चइघाके किसानी काम के सुरू करबो कहिके। अउ अकती के दिन ले किसानी काम ला सुरू करय। अउ आज के जुग मा कतको जघा सुने मा मिलथे के ये दोना चघाय के परंपरा हा घलो नंदावत हे।

अउ हमर छत्तीसगढ़ में अकती तिहार के बहुँत सुग्घर विशेषता घलो हावय। अकती के दिन गाँव मा काम बुता ला बन्द करके एक जघा सब जुरयाथे।अउ माटी के पुतरी-पुतरा के बिहाव घलो करे जाथे। बड़ खुशी के संग बिहाव करे जाथे पुतरी-पुतरा के। एक घर पुतरी ला रखथे अउ एक घर में पुतरा ला अउ बिधि बिधान से बिहाव रचाथे। पुतरा वाला मन पुतरी के घर मा बाजा-गाजा के संग बरात (बिहाय ला) जाथे। अउ पुतरी पक्ष के मन घलो सुग्घर बिधि बिधान से पुतरा पक्ष के मन ला परघाके लाथे।अउ पंडित बलाके पूजा पाठ कराथे।अउ सुग्घर धरम टिकान घलो करथे। अउ सुग्घर गीत घलो गाथे…

कोने तोरे टिकय नोनी,
अचहर पचहर ओ
अचहर पचहर ओ।
कोने तोरे टिकय धेनू गाय,
ये ओ बेटी मोर…
कोने तोरे टिकय धेनू गाय।।

अइसन सुग्घर टिकावन गीत गाथे अउ सुग्घर टिकावन टिकथे। अउ टिकावन के बाद मा सुग्घर सिरतोन के बेटी बरोबर पुतरी के बिदा करथे। अइसन सुग्घर पुतरी-पुतरा के बिहाव करथे। अउ आज के मनखे मन अइसन सुग्घर हमर छत्तीसगढ़ के परंपरा ला भुलावत हे। आज घलो ये परंपरा हा कोनो-कोनो मेर जियँत हे। आप सब से निवेदन करत हँव हमर छत्तीसगढ़ के अइसन सुग्घर रीती रीवाज हमर परंपरा ला जियाँय के प्रयास करव।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

धुरसा-मुरमुरा के झरझरा दाई

जिला मुख्यालय गरियाबंद से लगभग 60-65 किलोमीटर के दुरिहा में बसे नानकुन गाँव धुरसा-मुरमुरा,ये गाँव जंगल के तीर मा बसे हे।अउ इही गाँव के डोंगरी में दाई झरझरा अपन सुग्घर रूप ला साज के डोंगरी भीतर डेरा लगाके बइठे हे।जेनला लोगन मन दाई झरझरा रानी के नाव से मानथे।अउ डोंगरी के तीर मा बसे जम्मों गाँव के मनखे मन जुरीया के दाई के पुजा पाठ करथे।अउ लोगन मन के मानना हे की ये दाई झरझरा रानी हा दाई जतमाई के परथम रूप आय।ये क्षेत्र के लोगन मन मानथे की दाई जतमाई हा सबले पहेली इही डोंगरी मा बिराजे रीहीन।ओखर बाद ये जघा ला छोंड़ के दाई जतमाई हाँ कुसुम पानी-गायडबरी मा जाके बिराजे हे।
तब ले लोगन मन ये जघा ला दाई झरझरा डोंगरी के नाव ले जानथे।




अउ ये जघा हा हरियर-हरियर रुख राई जंगल झाड़ी ले सजे हे।जिहाँ बरो महिना जुड़ पुरवइया चलत रथे।अउ लोगन मन ये जघा मा पिकनिक पारटी मा जाके सुग्घर आनंद लेथे। चइत अउ कुँवार के नवरात परब मा सैंकड़ों भक्त मन अपन मनोकामना पुरा करे बर सैकड़ों जोत जलाथे।अउ बताय जाथे की दाई के दुवारी ले कोनो भगत खाली हाँथ नइ लहुटे।दाई के दुवारी में सब अपन मनोकामना पाथे। दाई के महीमा बहुँत निराली हे। अउ झरझरा समिति के डाहर ले दोनों नवरात परब मा नव दिन ले भण्डार घलो रथे जेकर ले अवइया जवइया भक्तन मन माता के परसाद पाके अपन घर जाथे,अउ सुख शांति पाथे।



अउ आठ दिन नवरात ले माता रानी के दुवरीया मा दिन अउ रात ले माता के जस सेवा गुंजत रथे अउ मांदर के थाप में सब भक्त मन माता के सेवा बजाथे। अउ ये झरझरा दाई के दुवारी मा बहुँत सुंंदर झरना घलो चलथे लगभग 10-12 फीट के उँचाई ले झरना गिरथे जेमा क्षेत्र के लोगन मन असाढ़ महिना ले लेके कुँवार कातिक महिना तक झरना के आनंद लेथे। अउ झरना के खालहे मा एक अचरित शिलालेख हावे जेन ला आज तक होगे बड़े से विद्वान मन आगे हे ओला पढ़े बर फेर कोनो नइ बता सकिन शिलालेख में का लिखाय हे,लोगन मन येला दाई झरझरा रानी के देन चिन्हा मानथे। अउ शिलालेख के थोकिन अउ खालहे कोती पथरा के बीचों-बीच एक ठिन गड्ढा हे जेमा बताय जाथे बारो महिना पानी रेहे रथे जेमा जंगल के अवइया जवइया मनखे अउ जंगली परानी मन अपन पियास ला बुझाथे।अउ दाई झरझरा के दुवारी मा बइठ के सुरताथे।



अउ दाई झरझरा के दुवारी मा बघुवा भालु मन के बसेरा हे,जेनला लोगन मन माता के रखवार कथे माता के संगवारी बताथे। अइसन सुग्घर कहिनी हे दाई झरझरा रानी के।अउ दाई कर जतेक मनोकामना माँगथे सब के मनोकामना ला दाई झरझरा रानी हा पुरा करथे।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम (घटारानी)
जिला गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

आगे परब नवरात के

आगे परब नवरात के,
मंदिर देवाला सजाबो।
सुग्घर लीप पोत के,
कलशा मा दियना जलाबो।।

ढ़ोल नंगाड़ा बजा के सुग्घर,
माता रानी ला परघाबो।
मंगल आरती गा के सुग्घर,
माता ला आसन बइठाबो।।

संझा बिहनिया करके आरती,
दाई ला भोग लगाबो।
दाई के चरण मा माँथ नवाके,
आसीस सुग्घर पाबो।।

आठ दिन अउ नवरात ले,
दाई के सेवा बजाबो।
किसम-किसम के माता सिंगारी,
पंचमी के दिन चघाबो।।

आठवाँ दिन मा हवन पूजन,
मन ला शांत कराबो।
नववाँ दिन नवकन्या भोजन,
दसवाँ दिन मा आँसू बोहाबो।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

छत्तीसगढ़ के माटी

मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।
हीरा मोती सोना चाँदी…2
छत्तीसगढ़ के माटी…
मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।

इही भुइयाँ मा महाप्रभु जी,
लिये हावे अँवतारे हे…2
इही भुइयाँ मा लोमश रिसी,
आसन अपन लगाये हे…2
बड़े-बड़े हे गियानी धियानी…2
छत्तीसगढ़ के माटी…
मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।

इही भुइयाँ मा राजीव लोचन,
सउँहत इहाँ बिराजे हे…2
बीच नदिया मा कुलेश्वर बइठे,
आसिस अपन बगराये हे…2
जघा जघा बिराजे देंवता धामी…2
छत्तीसगढ़ के माटी…
मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।

अरपा पइरी अउ महानदी,
सुग्घर पखारे पाँवे हे…2
करिया पिंउरा माटी सुग्घर,
महर-महर महमाये हे…2
बड़े-बड़े हे परवत घाटी…2
छत्तीसगढ़ के माटी…
मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।

सोनहा उपजे धान सुग्घर,
धान कटोरा कहाये हे…2
मैनपुर मा हीरा उगले,
देस बिदेश नाव बगराये हे…2
हीरा मोती सोना चाँदी…2
छत्तीसगढ़ के माटी…
मोर छत्तीसगढ़ के माटी जी,
मोर छत्तीसगढ़ के माटी।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

नारी सक्ति

सम्मान करव जी नारी मन के,
नारी सक्ति महान हे।
दुरगा,काली,चण्डी नारी,
नारी देवी समान हे।।

किसम-किसम के नता जुँड़े हे,
नारी मन के नाव में।
देंवता धामी सब माँथ नवाँथे,
नारी मन के पाँव में।।

रतिहा बेरा लोरी सुनाथे,
डोकरी दाई कहाथे।
नव महिना ले कोख मा रखके,
महातारी के फरज निभाथे।।

सात फेरा के भाँवर किंजर के,
सुहागिन नाव धराथे।
दाई ददा के सेवा करके,
बेटी ओहा कहाथे।।

भाई मन के कलाई मा सुग्घर,
राखी के धागा सजाथे।
मया दुलार करथे अउ,
बहिनी ओहा कहाथे।।

सम्मान करव जी नारी मन के,
नारी सक्ति महान हे।
दुरगा काली चण्डी नारी,
नारी देवी समान हे।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

कविता- बसंत बहार

बसंत बहार छागे सुग्घर,
कोइली गीत गावत हे।
अमरइया के डारा सुग्घर,
लहर-लहर लहरावत हे।।

चिरइ चिरगुन चींव-चींव करके,
सुग्घर चहकी लगावत हे।
कउँवा करत हे काँव-काँव,
तितुर राग बगरावत हे।।

सरसों के सोनहा फुल फुलगे,
अरसी हा लहलहावत हे।
सुरूज मुखी हा चारो कोती,
सुग्घर अँजोर बगरावत हे।।

फुल बगियाँ मा फुल फुलगे,
सतरंगी रंग बगरावत हे,
मलनियाँ रानी मगन होके,
मने मन मुसकावत हे।।

आमा अमरइया मउँरगे सुग्घर,
डारा पाना हरियावत हे।
रूख राइ हा नाचत सुग्घर,
पुरवइया अँचरा डोलावत हे।।

वीना धरे हे सारदा माई,
सातो सुर लमावत हे।
गियानदायनी माँ बागीश्वरी,
गियान ला बगरावत हे।।

बसंत पंचमी के तिहार सुग्घर,
सबके मन ला भावत हे।
सीत लहर के बेरा मा,
बसंत बहार बगरावत हे।।

बसंत बहार छागे सुग्घर,
कोइली गीत गावत हे।
अमरइया के डारा सुग्घर,
लहर-लहर लहरावत हे।।

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156

सरसती वंदना

वीणा बजईया सरसती मंईयाँ..2
मोला तार लेना ओ…
तोरे चरण मं आऐ हंव दाई
मोला गियान देना ओ…2

कोंदा लेड़गा तोर चरण मं आके,
सुर मं सुर मिलाये ओ
गईया बछरू तोर मयां ला पाके,
मंईयाँ-मंईयाँ रम्भाऐ ओ
:-गीयान देवईया सरसती मंईयाँ..2
मोला उबार लेना ओ…
तोरे चरण मं आऐ हंव दाई
गियान देना ओ…2

चिरई-चिरगुण सातो सुर ला पाके,
मंईयाँ-मंईयाँ गोहराऐ ओ
सुआ पंड़की कोईली परेवना,
महिमा ला तोर बखाने ओ
:-बुद्धि देवईया वीणा बजईया..2
मोला तार लेना ओ…
तोरे चरण मं आऐ हंव दाई,
मोला गियान देना ओ…2

बड़े-बड़े गियानी धियानी ला,
दाई तँय हर तारे ओ
गोकुल ला देदे गियान ओ दाई,
चरण शरण गोहराऐ ओ
:-चरण मं मांथ नवाये हंव मंईयाँ..2
मोला तार लेना ओ…
तोरे चरण मं आऐ हंव दाई
मोला गियान देना ओ…2

गोकुल राम साहू
धुरसा-राजिम(घटारानी)
जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मों.9009047156