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कविता: कुल्हड़ म चाय

जबले फैसन के जमाना के धुंध लगिस हे
कसम से चाय के सुवारद ह बिगडिस हे
अब डिजिटल होगे रे जमाना
चिट्ठी के पढोईया नंदागे
गांव ह घलो बिगड़ गे
जेती देखबे ओती डिस्पोजल ह छागे
कुनहुन गोरस के पियैया
“साहिल” घलो दारू म भुलागे
आम अमचूर बोरे बासी ह नंदागे
तीज तिहार म अब फैसन ह आगे
पड़ोसी ह घलो डीजे म मोहागे
का कहिबे मन के बात ल
अब अपन संगवारी ह घलो मीठ लबरा होगे
जेती देखबे ओती
मोबाईल ह छागे
घर म खुसर फुसुर
अउ खोल म खुलखुल हे
जबले डिपोजल आये हे
कुल्हड़ म चाय गिंगियावत हे
गांव म घलो
फैसन ह रंग जमावत हे
पड़ोसी बिहिनिया ले
मोबाईल म खुस फुसावत हे
घेरी बेरी अपन फोटो ल अपनेच ह
खींच खींच के मुस्कुरावत हे

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
कोसीर सारंगढ जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़

जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर

जिनगी अबिरथा होगे रे संगवारी
सुना घर – अंगना
भात के अंधना सुखागे
जबले तै छोड़े मोर घर -अंगना
छेरी – पठरू ,घर कुरिया
खेती – खार
खोल – दुवार
कछु नई सुहावे
तोर बोली ,भाखा गुनासी आथे
का मोर ले होगे गलती
कैसे मुरछ देहे मया ल
सात भाँवर मड़वा किंजरेंन
मया के गठरी म बंध गेन
नान – नान, नोनी – बाबू
मया चोहना ल कैसे भुलागे
जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर …..
काबर तै मोला भुलागे
जिनगी ल अबिरथा बनादे
लहुट आ
अब मोर जिनगी म
काबर मया ल भुलागे
जिनगी ल मोर मया म फसा के
जिनगी अबिरथा होंगे रे संगवारी
सुना घर – अंगना

लक्ष्मी नारायण लहरे ” साहिल “
कोसीर सारंगढ ,जिला रायगढ़
09752319395

बंदत्त हंव तोर चरन ल

गांव के मोर कुशलाई दाई
बिनती करत हंव मैं दाई
सुन ले लेते मोरो गुहार ओ
दुखिया मन के दुख ल हर लेथे
बिपति म तै खड़ा रहिथे
अंगना म तै बैठे रहिथे
जिनगी सफल हो जाथिस
सुघ्घर रहथिस मोरो परिवार ओ
तोरे चरन के गुन गांवों ओ
ये मोर मैय्या सुन लेथे मोरो अरजी
सुना हे मोरो अंगना
भर देथे किलकारी ओ
जनम के हं मैं ह दुखिया
नइये मोरो कोनो सुनैया
मया के दे आसीस तै मोर मैय्या
नव रात म तोर गुन ल गांहंव ओ
दे दे तै मोला आसीस
बंदत्त हंव तोर चरन ल
बिनती करत हंव मैं दाई
सुन लेते मोरो गुहार ओ
मांदर -झांझ बाजत हे
सजे हे तोर दुवार ओ
अंचरा म दुखिया मन
लेके आये हे फूल पान ओ
दे दे आसीस मैय्या
अब झन कर तै बिचार ओ
सुमत के दे तै आसिरवाद ओ
तोरे चरन के पैयां लागांव ओ
सुने ले लेते मोरो गुहार ओ
गांव के मोर कुशलाई दाई
बिनती करत हंव मैं दाई
कोसीर के कुशलाई दाई
देदे आसीस माई
जग म होही तोर बड़ाई
सब के हस तै माई
सुन ले लेते मोरो गुहार ओ ….

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
युवा साहित्यकार पत्रकार
कोसीर सारंगढ़

बसंत रितु आगे

बसंत रितु आगे मन म पियार जगागे
हलु – हलु फागुन महीना ह आगे
सरसों , अरसी के फूल महमहावत हे
देख तो संगवारी कैसे बर – पीपर ह फुनगियागे
हलु – हलु फागुन महीना ह आगे
पिंयर – पिंयर सरसों खेत म लहकत हे
भदरी म परसा ह कैसे चमकत हे
अमली ह गेदरागे
बोइर ह पकपकागे
आमा मउर ह महमहावत हे
नीम ह फुनगियावत हे
रितु राज बसंत आगे
हलु – हलु फागुन महीना ह आगे
कोयली ह कुहकत हे
मीठ बोली बोलत हे
सखी ! रे देख तो सुरुज ह चमकत हे
सुरु – सुरु पवन ह पुरवाही भरत हे
बसंत रितु आगे
भौंरा ह गुनगुनावत हे
पिंजरा ले मैना बोलत हे
हलु – हलु फागुन महीना ह आगे
नगर म ढोल – नगारा बाजत हे
देख तो सवरेंगी रंग – गुलाल उड़ावत हे
संगी – संगवारी संग बेलबेलावत हे
बसंत रितु आगे मन म पियार जगागे
हलु – हलु फागुन महीना ह आगे

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
डॉक्टर अम्बेडकर चौक कोसीर
सारंगढ़ रायगढ़, छत्तीसगढ़

दादा मुन्ना दास समाज ल दिखाईस नावा रसदा

रायगढ़ जिला के सारंगढ़ विकास खंड के पश्चिम दिसा म सारंगढ़ ल 16 किलोमीटर धुरिया म गांव कोसीर बसे आय। जिन्हा मां कुशलाई दाई के पुरखा के मंदिर हावे अंचल म ग्राम्य देवी के रूप म पूजे जाथे। इंहा के जतको गुन गान करी कम आय। समाज म अलग अलग धरम जाति पांति के लोगन मन के निवास होथे अउ अपन अपन धरम करम ले पहिचाने जाथे फेर कोनो महान हो जाथे त कोनो ग्यानी – धयानि अउ दानी इसनेहे एक नाम कोसीर गांव के हावय जेखर नाम ल आज भी लोगन मन याद रखे हें जेन हर अपन जीवन म समाज ल बहुत कुछ दिस अउ ओखर नाम ल नावा पीढ़ी ल बताना जरूरी हावे।



पुरखा के बात नाईते भुला जाथें मुन्ना दास पुरखा मन बर तो नया नाम नोहे फेर नावा पीढ़ी बर नावा जरूर लागहि काबर हमन अपन पुराना रिति रिवाज अउ पुरखा ल भूलत हन तेखरे सेती मुन्ना दास जी के बारे म चरचा करना जरूरी हे। जेनहर समाज ल नावा रसदा दिखाईस अउ नावा पीढ़ी ल कछु करे के सपना दिखाईस। रायगढ़ जिला के कोसीर गांव के किसान परिवार म पंचम दास के घर म 25 फरवरी1926 के दादा मुन्ना दास लहरे जनम लिस पंचम दास गांव के बड़े किसान रहिस कम पढ़े लिखे अउ संत बाबा गुरुघासी दास जी के अनुयायी रहिस। तेखर सेती संत बाबा गुरुघासी दास जी के संदेस उपदेस के पालन घर म होवत रहिस। मुन्ना दास अपन पिता पंचम दास के एकठन औलाद रहिस अबड़ दुलार म रहिस। पहली स्कूल म लईका के भरती होवय त अपन कान ल छू दारे त भरती ले लेवै 1933 म मुन्ना दास ल बालक शाला म भरती करिन स्कूल के स्थापना ह 1908 म होय रहिस फेर अबड़ दुलार के कारन स्कूल जाए बर कोतहा रहिस अउ पहली कक्षा ल घलो नी पढ़ पाइस कोसीर बड़े गांव रहिस इहाँ धुरिया धुरिया ले पढ़े बर आय। अपन पिता संग खेत खार के काम बचपन ल ही सिख गे अउ 19 बछर के आस पास म दूसर पाठोनी घलो हो गिस मुन्ना दास जी के विवाह श्रीमती राम बाई के साथ होय रहिस राम बाई सरल घरेलू महिला रहिस। मुन्ना दास जी के 2 पुत्र अउ 3 पुत्री होइस अपन मंझला बेटा त्रिलोचन ह बड़े होइस त घर परिवार ल उही ह सम्हालीस। मुन्ना दास अपन खेती किसानी के संगे संग सामाजिक काम काज म घलो हाथ बाटावय।




गांव म 5 वीं तक स्कूल रहिस अउ मिडिल स्कूल खुले रहिस फेर भवन के अभाव अउ शिक्षक के घलो जरूरत रहिस ओ समय 1956 म आजादी के 10 बछर होवत रहिस 15 अगस्त के दिन आय स्कुलही लईका मन परभात फेरी म नारा लगावत रहिन स्कूल बचाओ लईका पढ़ाओ ये विसय म गांव के साहित्यकार तीरथ राम चन्द्रा अउ गांव के मन बताथे की 7 वीं कक्षा बर भवन अउ शिक्षक अंग्रेजी मास्टर के जरूरत रहिस त रुपया के जरूरत रहिस जेला लईका मन परभात फेरी म नारा बनाये रहीन ये नारा ल सुन के मुन्ना दास जी हर 10 हजार रुपया अपन खेत ल बेच के दिन तब पढ़ाई आगे बढ़ीस ओखर समाज के परतीं परेम अउ काम के गांव म अबड़ चरचा होइस लोगन मन परसंसा करिन अउ गांव म बड़े बड़े आदमी रहिन फेर मुन्ना दास के साहस के परसंसा होइस 31 बछर के कम उमर म ओखर सूझ बूझ के अबड़ परसंसा करिन। आज भी मुन्ना दास ल ओखर काम से गांव म याद करथे ओखर ल बड़े बड़े ग्यानी अउ दानी रहिन फेर साहस नी रहिस ऐसे गांव के मन कहिथे। मुन्ना दास जी के तबीयत बिगड़ीस फेर सुधार नई हो पाइस अउ 18 अक्टूबर 1987 म निधन हो गिस ओखर निधन ले पूरा गांव म दुख के बादर छागे पूरा गांव सोक म रहिस अउ जेन स्कूल म दान करे रहिन उही दिन स्कूल म दुख के साथ सोक मनाईंन अउ याद करिन आज ओ स्कूल ह हायर सेकंडरी बन गेहे हे। आज विचार के जरूरत हे स्कूल के नाम ल मुन्नादास के नाम से होना चाही ? आज भी मुन्ना दास जी के परसंसा होथे कोसीर अंचल के गौरव आय आज 25 फरवरी के उंखर 93 वीं जनम दिवस आय सादर नमन



लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
कोसीर सारंगढ़
जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़

खिलखिलाती राग वासंती

खिलखिलाक़े लहके
खिलखिलाक़े चहके
खिलखिलाक़े महके
खिलखिलाक़े बहके
खिलखिलाती राग वासंती आगे
खिलखिलाती सरसों
महकती टेसू
मदमस्त भँवरे
सुरीली कोयली
फागुन के महीना
अंगना म पहुना
बर पीपर म मैना बैठे हे
गोरी के गाल
हाथ म रंग गुलाल
पनघट म पनिहारिन
सज – संवर के बेलबेलावत हे
पानी भरे के बहाना म
सखी – संगवारी संग पिया के सुध म सोरियावत हे
मने मन अपन जिनगी के पीरा ल बिसरावत हे
खिलखिलाक़े राग वासंती आगे
पिंजरा ले मैना
आँखी ले काजर
हाथ ले कंगन
मुँह ले मीठ बोली
गावत हे सुघ्घर गीत
आगे संगवारी फागुन के महीना
अमराई म कोयल कुहकत हे रे
फागुन के महीना
मीठ बोली मैना बोलत हावे रे
आगे संगवारी मोरे घर अंगना
सब दुख पीरा
मया म भुलागे रे
आगे नव वासंती
मन रंग वासंती होगे रे
खिलखिलाक़े राग वासंती आगे रे ……

लक्ष्मी नारायण लहरे ” साहिल “
डॉ अम्बेडकर चौक कोसीर
सारंगढ़ जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़

बसंत आगे रे संगवारी

घाम म ह जनावत हे
पुरवाही पवन सुरूर-सुरूर बहत हे
अमराई ह सुघ्घर मह महावत हे
बिहिनिहा के बेरा म चिराई-चुरगुन मन मुचमुचावत हे
बर-पीपर घलो खिलखिलावत हे
महुआ, अउ टेसू म गुमान आगे
बसंत आगे रे संगवारी
कोयली ह कुहकत हे
संरसों ह घलो महकत हे
सुरूर-सुरूर पवन पुरवाही भरत हे
मोर अंगना म संगवारी बसंत आगे
जेती देखव तेति हरिहर लागे
खेत-खार के रुख-राई मन भरमाथे
फागुन बन के आगे पहुना
अंगना म हे उछल मंगल
मड़वा सज के संगवारी के
बसंत आगे अंगना म
रंग-गुलाल खेबोन
बसंत आगे रे संगवारी
अपन राग रंग लेके
कुलकत हे मन सुरता करके
सुघ्घर बसंत आगे

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
डॉ आंबेडकर चौक कोसीर
सारंगढ जिला रायगढ़
छत्तीसगढ़
09752319395

सरसों ह फुल के महकत हे

देख तो संगी खलिहान ल
सरसों ह फुल गे घम घम ल
पियर – पियर दिखत हे
मन ह देख के हरसावत हे
नावा बिहान के सन्देस लेके आये हे
नावा बहुरिया कस घुपघुप ल हे
हवा म लहरत हे
सुघ्घर मजा के दिखत हे
पड़ोसिन ह लुका लुका के भाजी ल तोरत हे
फुल के संग म डोलत हे
अगास ह घलो रंग म रंग गेहे हे
देखैया मन के मन मोहत हे
महर महर महकत हे
रसे रस डोलत हे
देख के मन ह हरसत हे
पियर – पियर दिखत हे
धरती ह सोन बरोबर दिखत हे
हिरदे के तार ल
कुलेचुप छेड़त हे
मने मन म फुलसुन्दरी
अपन पिया ल खोजत हे
सरसों के फूल ल टोर टोर के
मुँह म चुमत हे
घेरी बेरी पीछू ल देखत हे
दोपहरी के बेरा म
सज संवर के मने मन गुनत हे
पिया के सपना सँजोये
घेरी बेरी फूल ल चुमत हे

लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
कोसीर सारंगढ़

मदरस कस मीठ मोर गांव के बोली

संगी – जहुरिया रहिथे मोर गांव म
हरियर – हरियर खेती खार गांव म
उज्जर – उज्जर इहां के मनखे ,मन के आरुग रहिथें गांव म
खोल खार हे सुघ्घर संगी
बर ,पीपर के छांव हे संगी
तरिया – नरवा अऊ कुंआ बारी
गांव के हावे ग चिन्हारी
किसिम – किसिम के इहां हावे मनखे
सुख – दुख के इहां हावे साथी
गांव म दिखथे ग मया – दुलार
दाई – ददा के चोहना बबा के डुलार
तुलसी के चौरा म
मंदिर के दुवार म
दुख पीरा गोहराथन
छोटे बड़े के हावे ग पहचान गांव म
चन्दन बरोबर मोर गांव के धूल
मदरस कस मीठ मोर गांव के बोली
कइसे बताववं का गोठियाववं ग
मोर चिन्हारी मोर गांव के नाम ले हे ग
मदरस कस मीठ मोर गांव के बोली ग

लक्ष्मी नारायण लहरे ” साहिल ”
कोसीर सारंगढ़

अपन भासा अपन परदेस के पहचान

संपादक ये आलेख के लेखक के ‘प्रदेश’ शब्‍द के जघा म ‘परदेस’ शब्‍द के प्रयोग म सहमत नई हे। अइसे हिन्‍दी के अपभ्रंश शब्‍द मन जउन पहिली ले प्रचलित नई ये ओ मन ल बिना कारन के बिगाड़ के लिखई अर्थ के अनर्थ करना हे। ‘परदेस’ से आन देश के भाव आथे..

आज हमर छत्तीसगढ़ ल राज बने अठारह बछर होगे फेर मातृभासा म पढ़ाई -लिखाई नई होवत हे। छत्तीसगढ़ के हमर छत्तीसगढ़ी भासा अबड़ मीठ भासा आय जब दू झन अपन भासा म गोठ – बात करत रहिथे त सुनैया ल अबड़ सुख लागथे अउ हमर भासा छत्तीसगढ़ी के मान ह घलो बढ़थे फेर काबर हमर अपन मन के परदेस म अपनेच भासा के चिन्हारी नई हो पावत हे अपन भासा अपन परदेस के पहचान आय।अब देरी करे ले अपन नावा पीढ़ी मन का सोंछी इही बात ल सोंछ के मोला अबड़ गुनासी लागथे जब हमर भासा ह अतेक सुघ्घर अउ मीठ हावे त काबर आठवीं अनुसूची म सामिल नई होवत हे अऊ काबर पढाई – लिखाई म सामिल नई होवत हे ये विसय म सबो ल गुने ल लागहि तभे हमर भासा ह पोठ होही अऊ हमर छत्तीसगढ़ परदेस के मान बढ़ही।
कक्षा पहली से आठवीं म अब बिना देरी करे पाठ्य पुस्तक म सामिल करे के जरूरत हे।जादा सोंचा बिचारी म नावा पीढ़ी ल ऐखर लाभ मिले बर देरी होही।सिक्षा विभाग ल अब बिचार करे के जरूरत हे, एम. ए. छत्तीसगढ़ी ले निकले लइका मन ल काम मिलहि अऊ हमर अपन छत्तीसगढ़ी भासा ह पोठ होही। 28 नवम्बर 2007 म अपन छत्तीसगढ़ी भासा ह राज भासा तो बनीस फेर 10 बछर म आठवीं अनुसूची म नई सामिल हो पाईस ये बात ल दुख लागथे जब राज भासा के दरजा मिल गिस त अऊ का देरी हे अऊ फेर सबो परदेस के तो अपन -अपन भासा हे फेर हमर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ी भासा होना चाहि न ? छत्तीसगढ़ राज भासा आयोग के गठन के बाद जरूर आघु आईस हे हमर भासा ह अऊ पोठ होईस हे फेर अऊ तेजी लाये के जरूरत हावे। 25 नवम्बर के दिन जांजगीर जिला म राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन होईस हावे अउ सम्मेलन म छत्तीसगढ़ के युवा कवि मन सामिल होइन छंद के छ परिवार अऊ शील साहित्य परिषद जांजगीर के संयुक्त तत्वाधान म हमर छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया जी ल काब्याजंली अरपित करिन अऊ छत्तीसगढ़ी भासा ल घलो पोठ करिन। वरिष्ठ साहित्यकार नन्द किशोर शुक्ला जी छत्तीसगढ़ राज भासा मंच के संयोजक अऊ श्रीमती लता राठौर छत्तीसगढ़िया महिला सेना अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी महतारी भासा ल पोठ करे बर छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी पखवाड़ा मनावत हें जेखर सुरुवात बिलासपुर शहर ल करिन हे अऊ जगह – जगह पंहुँच के अपन भासा ल पोठ करत हें अऊ तो अऊ युवा साहित्यकार संजीव तिवारी जी जेन हें “गुरतुर गोठ” बेबसाइट म छत्तीसगढ़ी भासा के अलख जगावत हें अउ पोठ करत हें उहंचे देशबंधु समाचार पत्र ह लगातार मड़ाई अंक म हर रविवार के दिन छत्तीसगढ़ी भासा ल पोठ करे बर कविता, कहनी, लेख ले लोगन मन ल जगावत हे।
जन भासा ले राजभासा बने हमर चिन्हारी हमर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी भासा ल अब समय रहत आठवीं अनुसूची म सामिल करे के जरुरत आय अऊ हमर सबो जिला के जिला अध्यक्ष ,पुलिस अधीक्षक ,सिक्षा विभाग के जिला सिक्षा अधिकारी जी मन ल अब अपन भासा म बोलना चाहि जेखर ल आमजन ल बल मिलहि अऊ हमर भासा ह पोठ होही इही विसवास के साथ।
जय जोहार जय छत्तीसगढ़

लक्ष्मीनारायण लहरे “साहिल ”
कोसीर सारंगढ