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तीजा – पोरा के तिहार

छत्तीसगढिया सब ले बढ़िया । ये कहावत ह सिरतोन मा सोला आना सहीं हे । इंहा के मनखे मन ह बहुत सीधा साधा अउ सरल विचार के हवे। हमेशा एक दूसर के सहयोग करथे अउ मिलजुल के रहिथे । कुछु भी तिहार बार होय इंहा के मनखे मन मिलजुल के एके संग मनाथे ।

छत्तीसगढ़ ह मुख्य रुप ले कृषि प्रधान राज्य हरे । इंहा के मनखे मन खेती किसानी के उपर जादा निर्भर हे । समय – समय मा किसान मन ह अपन खुशी ल जाहिर करे बर बहुत अकन तीज – तिहार मनावत रहिथे ।
खेती किसानी के तिहार ह अकती के दिन ले शुरू हो जाथे । अकती के बाद में हरेली तिहार मनाथे । फेर ओकर बाद पोरा तिहार मनाय जाथे ।

पोरा तिहार  – पोरा पिठोरा ये तिहार ह घलो खेती किसानी से जुड़े तिहार हरे ।येला भादो महीना के अंधियारी पाँख ( कृष्ण पक्ष) के अमावस्या के दिन मनाय जाथे । ये तिहार ल विशेष कर छत्तीसगढ़,  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र अउ कर्नाटक मा जादा मनाय जाथे ।

पोरा काबर मनाय जाथे –  पोरा तिहार मनाय के पाछु एक कहावत ये भी हावय के भादो माह (अगस्त)  में खेती किसानी के काम ह लगभग पूरा हो जाय रहिथे । धान के पौधा ह बाढ़ जाय रहिथे । धान ह निकल के ओमे दूध भराय के शुरु हो जाथे । या हम येला कहि सकथन के अन्न माता ह गर्भ धारण करथे । इही खुशी मा किसान मन ह पोरा के तिहार ल धूमधाम से मनाथे ।

बइला के पूजा  –  खेती किसानी बर सब ले उपयोगी पशु बइला हरे । बइला के बिना खेती के काम अधुरा हे । ये पाय के किसान मन ह आज के दिन बइला ल बढ़िया तरिया नदियाँ मा  नउहा के साफ सुथरा करथे अउ ओकर पूजा करथे ।
ये दिन बइला ल बहुत सुघ्घर ढंग ले सजाय जाथे । ओकर सींग मा पालिस लगाय जाथे । घेंच मा घाँघरा पहिनाय जाथे अउ किसम – किसम के फूल माला पहिना के सजाय जाथे ।

प्रतियोगिता के आयोजन  –  पोरा तिहार के दिन गाँव अउ शहर सबो जगा किसम – किसम के प्रतियोगिता भी रखे जाथे । कोनों जगा बइला दौड़ के प्रतियोगिता त कोनों जगा बइला सजाय के प्रतियोगिता रखे जाथे । गाँव के मन ह एकर खूब आनंद उठाथे ।

माटी के बइला –  ये दिन घरो घर मा लइका मन बर माटी या कठवा के बइला बजार ले खरीद के लाय जाथे । पहिली येकर घर मा विधि विधान से पूजा करे जाथे । ताहन लइका मन ये बइला ल खूब खेलथे । लइका मन भी एकर प्रतियोगिता रखथे अउ मजा लेथे ।

चुकी पोरा –  टूरा (लड़का)  मन ह माटी के बइला ल खेलथे त  टूरी (लड़की ) मन ह चुकी पोरा खेलथे ।
चुकी पोरा मा खाना बनाय के जम्मो समान ह रहिथे ।
जइसे  – चुल्हा , कराही,कलछुल,तोपना,तावा,चिमटा,जांता अउ सबो प्रकार बरतन रहिथे । येला लड़की मन ह मन लगा के खेलथे ।

बेटी-  बेटा बर पूजा –  पोरा तिहार के दिन सबोझन अपन – अपन घर मा चौसठ योगिनी अउ पशुधन के पूजा करथे । जेमे अपन संतान के लंबा उमर के कामना करे जाथे ।

आनी बानी के पकवान – आज के दिन घर -घर मा आनी- बानी के पकवान बनाये जाथे । छत्तीसगढ़ मा चीला, चौसेला, ठेठरी, खुरमी, गुझिया, बरा, सोंहारी, खीर -पुरी, गुलगुला भजिया अइसे किसम – किसम के पकवान बनाय जाथे अउ मिल बाँट के खाय जाथे ।

तीजा के तिहार –  भादो महीना मा अंजोरी पाँख (शुक्ल पक्ष) के तीसरा दिन तीजा के तिहार मनाय जाथे । छत्तीसगढ़ मा तीजा के तिहार ल माइलोगिन (औरत) मन बहुत ही धूमधाम से मनाथे । ये समय सबो दीदी बहिनी मन मइके मा आय रहिथे अउ अपन पति के लंबा उमर बर उपास रहिथे ।
दूसर दिन किसम – किसम के पकवान फल फूल अउ कतरा खा के फरहार करथे । तीजा के दिन सबो महिला मन नवा – नवा लुगरा पहिनथे अउ खेलकूद भी करथे ।

ये प्रकार से तीजा – पोरा के तिहार ल बहुत ही धूमधाम अउ उत्साह के मनाय जाथे । येकर से गाँव मा एक दूसर से मेलजोल बढथे अउ भाईचारा के भावना प्रगट होथे ।

महेन्द्र देवांगन माटी 
पंडरिया  (कवर्धा)
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

शिव शंकर

शिव शंकर ला मान लव , महिमा एकर जान लव ।
सबके दुख ला टार थे , जेहा येला मान थे ।।

काँवर धर के जाव जी  , बम बम बोल लगाव जी ।
किरपा ओकर पाव जी  , पानी खूब चढ़ाव जी ।।

तिरशुल धर थे हाथ में  , चंदा चमके माथ में ।
श्रद्धा रखथे नाथ में  , गौरी ओकर साथ में ।।

सावन महिना खास हे , भोले के उपवास हे ।
जेहर जाथे द्वार जी  , होथे बेड़ा पार जी ।।

महेन्द्र देवांगन “माटी”  (शिक्षक)
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

खेती किसानी

बादर गरजे बिजली चमके , गिरय झमाझम पानी ।
सबके मन हा हुलसत हावय , करबो खेती किसानी ।।
खातू कचरा फेंकय सबझन , नाँगर ला सिरजाये ।
काँटा खूँटी साफ करय सब , मेड़ पार बनवाये ।।
चूहत रहिथे परछी अब्बड़ , छावय खपरा छानी ।
सबके मन हा हुलसत हावय , करबो खेती किसानी ।।

बड़े बिहनिया बासी धर के , चैतु खेत मा जाथे ।
मिहनत करथे सबो परानी , तब बासी ला खाथे ।।
मिहनत के फल मिलथे संगी , हावय बादर दानी ।
सबके मन हा हुलसत हावय , करबो खेती किसानी ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़

कहानी : लालू अऊ कालू

लाल कुकुर ह बर पेड़ के छांव में बइठे राहे।ओतके बेरा एक ठन करिया कुकुर ह लुडुंग – लाडंग पुछी ल हलावत आवत रिहिस। ओला देख के लाल कुकुर ह आवाज दिस। ऐ कालू कहां जाथस ? आ थोकिन बइठ ले ताहन जाबे। ओकर आवाज ल सुन के कालू ह तीर में आइस अऊ कहिथे — काये यार लालू काबर बलाथस।
लालू ह कहिथे – आ थोकिन बइठ ले कहिथों यार। कहां लकर – धकर जात हस। कोनो पारटी – वारटी हे का ?
कालू ह कहिथे – कहां के पारटी – वारटी यार आजकाल कोनो पूछत नइहे। जिंहा जाबे तिंहा साले मन धुरिया ले भगा देथे। ते बता तोर का हाल – चाल हे। तेहा तो बने चिक्कन – चिक्कन दिखत हस।
लालू कहिथे – मेंहा तो बने हँव , फेर तोला देखथों दिनो दिन कइसे सुखावत जात हस। बने खात – पियत नइ हस का यार। का चिंता धर लेहे तोला। फोकट में चांउर दार मिलत तभो ले संसो करत हस। डपट के खा अऊ गोल्लर बरोबर घूम साले ल।
त कालू कहिथे – अरे यार कहां ले फोकट के चांउर दार मिलत हे। मोर तो साले ल राशन कारड नइ बने हे। लालू कहिथे – त राशन कारड काबर नइ बनवाय हस रे लेडगा।
कालू – अरे यार मेंहा सरपंच अऊ सचिव के कई घंऊ चक्कर लगा डारेंव। फेर बनाबे नइ करत हे। कहिथे – तोर नाम ह मतदाता सूची में नइहे अऊ तेंहा गरीब नइ हस। तेकर सेती तोर कारड ह नइ बनय ।

हमर गरीब के कोनो पूछइया नइहे गा। हमर नाम ल गरीबी रेखा में जोड़ें नइहे अऊ बड़े – बड़े मंडल मन के नाम ह गरीबी रेखा में हाबे । ओमन फोकट के चाऊंर पात हे अऊ मरत ले खात हे। कतको झन मन ह तो चांऊर ल बेचके दारू पीयत हे अऊ गली में घोण्डे रहिथे। हमरो ले गय गुजरे हे साले मन ह।
अइसे कालू ह अपन भड़ास ल निकालत राहें।
लालू कहिथे – सही बात बोलेस कालू तोर बात ह सोला आना सच हे।
कालू ह फेर आगे बोलथे – आज महंगाई ह कतका बाढ गेहे। डउकी – लइका ल पोंसे बर मुसकिल होवत हे।
पहिली आदमी मन ह रोटी – पीठा बनाय त एक भाग ल हमर मन बर निकाले। अब तो ओकरे मन के मारे नइ बाचे साले ल।
लालू कहिथे – हां यार कालू सहींच बात ए। एकात कनी बाच जाय ओला कम से कम हमन ल दे देवत रिहिसे।
अब तो आदमी मन ह विदेशी कुकुर पोंसे ल धर लेहे। कोई बनबिलवा मुंहु के, त कोई छुछु मुंहु के।
कोनो झबला त कोनो भोभला। समझ में नइ
आय भाई। एकर मन के आय ले हमर मन के कोनो पूछइया नइहे।
एमन ल घर भीतरी गद्दा में सुताथे। अऊ नावा – नावा मोटर , कार में घुमाथे। हमन गली – गली में घूमत हन । अऊ रेहे के ठऊर ठिकाना तक नइहे। विदेशी कुकुर मन ह आके इंहा धाक जमावत हे ।
कालू कहिथे – अइसे में काम नइ चलय संगवारी । हमन ल एक ठन संगठन बनाना परही अऊ एकर खिलाफ आवाज उठाय ल परही । तभे हमर मन के मरजाद बचही। नइ
ते हमन घर के रहिबो न घाट के।
लालू कहिथे – मेंहा सुने हों यार एक ठन छ. ग. क्रांति सेना बनाय हे । जेहा अइसने परदेशिया मन ल भगाय बर अवाज उठावत हे ।
जेमे – बहुत झन मनखे मन जुड़े हे ।
उही मन ल बताय ल परही । ये मन ओकर मजा ल बताही ।

अइसे दूनो झन गोठियात रिहिसे ओतकी बेरा एक ठन झबला असन कुतननीन ह आइस। वोहा चकचक ले हिरोइन बरोबर सादा सादा दिखत रिहिसे । ओला देखके कालू ह लालू ल बोलथे – जा के देखतो यार पटा साले ल ।
त कालू ह धीरे – धीरे ओकर तीर में जाथे अऊ अंखियाय बरोबर करथे । त ओ कुतननीन ह भड़क जथे अऊ बोलथे – अपन सकल ल कभू दरपन में देखे हस रे रोगहा, मोला अँखियाथस । चल भाग ओती, चिपराहा गतर के । जा पहिली मुंहू ल धोके आ रे भड़वा । तुमन कभू नइ सुधरव , कुकुर के कुकुर रहू । अइसे अड़बड़ गारी दे लागिस । ओतकी बेरा ओकर मालिक ह आगे अऊ पथरा में फेंक के मारीस । लालू अऊ कालू दूनो झन जी परान देके भागीस ते आबे नइ करीस ।

महेंद्र देवांगन “माटी”
पंडरिया (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
मो नं – 8602407353
Email – mahendradewanganmati@gmail.com

आमा के चटनी

आमा के चटनी ह अब्बड़ मिठाथे,
दू कंऊरा भात ह जादा खवाथे ।

काँचा काँचा आमा ल लोढहा म कुचरथे,
लसुन धनिया डार के मिरचा ल बुरकथे।

चटनी ल देख के लार ह चुचवाथे,
आमा के चटनी ह अब्बड़ मिठाथे ।

बोरे बासी संग में चाट चाट के खाथे,
बासी ल खा के हिरदय ह जुड़ाथे ,

खाथे जे बासी चटनी अब्बड़ मजा पाथे ,
आमा के चटनी ह अब्बड़ मिठाथे ।

बगीचा में फरे हे लट लट ले आमा ,
टूरा मन देखत हे धरों कामा कामा ।

छुप छुप के चोराय बर बगीचा में जाथे
आमा के चटनी ह अब्बड़ मिठाथे ।

दाई ह हमर संगी चटनी सुघ्घर बनाथे,
ओकर हाथ के बनाय ह गजब मिठाथे ।

कुर संग मा भात ह उत्ता धुर्रा खवाथे
आमा के चटनी ह अब्बड़ मिठाथे ।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353

मजदूर

जांगर टोर मेहनत करथे, माथ पसीना ओगराथे ।
मेहनत ले जे डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे ।
बड़े बिहनिया सुत उठके, बासी धर के जाथे ।
दिन भर बुता काम करके, संझा बेरा घर आथे ।
बड़े बड़े वो महल अटारी, दूसर बर बनाथे ।
खुद के घर टूटे फूटे हे , झोपड़ी मा समय बिताथे ।
रात दिन जब एक करथे, तब रोजी वो पाथे ।
मेहनत ले जा डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे ।
पानी बरसा घाम पियास, बारो महीना कमाथे ।
धरती दाई के सेवा करके, सुघ्घर हरियर बनाथे ।
पहाड़ पर्वत काट काट के, पथरा मा पानी ओगराथे ।
पानी पसीया पीके संगी, माटी के गुन गाथे ।
मेहनत ले जे डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे ।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
8602407353

अक्षय तृतीया विशेष : पुतरी पुतरा के बिहाव

हिन्दू धर्म में बहुत अकन तिहार मनाये जाथे । ये तिहार हा मनखे मे नवा जोश अउ उमंग पैदा करथे । आदमी तो रोज काम बुता करत रहिथे फेर काम ह कभू नइ सिराय । येकर सेती हमर पूर्वज मन ह कुछ विशेष तिथि ल तिहार के रुप में मनाय के संदेश दे हे ।
वइसने एक तिहार अक्छय तृतीया के भी मनाय जाथे ।

छत्तीसगढ़ में अकती या अक्छय तृतीया तिहार के बहुत महत्व हे । ये दिन ल बहुत ही शुभ दिन माने गेहे। ये दिन कोई भी काम करबे ओकर बहुत जादा लाभ या पुण्य मिलथे। अइसे वेद पुरान में बताय गेहे।

कब मनाथे – अकती के तिहार ल बैसाख महीना के अंजोरी पाख के तीसरा दिन मनाय जाथे। एला अक्छय तृतीया या अक्खा तीज कहे जाथे। अक्छय के मतलब ही होथे जेकर कभू नाश नइ होये । माने जो भी शुभ काम करबे ओकर कभू क्षय नइ होये। एकरे सेती एला अक्छय तृतीया कहे जाथे।

अक्छय तृतीया के महत्व – अक्छय तृतीया ल स्वयं सिद्ध मुहूर्त माने गे हे । ये दिन कोनों भी काम करे बर मुहूर्त देखे के जरुरत नइ परे ।
जइसे — बिहाव करना , नवा घर में पूजा पाठ करके प्रवेश करना , जमीन जायदाद खरीदना , सोना चाँदी गहना खरीदना । ये सब काम करना आज के दिन बहुत शुभ माने गे हे ।

परशुराम अवतार – परशुराम के अवतार भी इही दिन होय रिहिसे। ओकरे पाय आज के दिन ल परशुराम जयंती के रुप में भी मनाय जाथे।
आज के दिन भगवान विष्णु अऊ लछमी के भी पूजा करे जाथे। एकर पूजा करे से बिसेस लाभ मिलथे।

द्वापर युग के समापन – पौरानिक कथा के अनुसार आज के दिन ही महाभारत युद्ध के अंत होइसे अऊ दुवापर युग के समापन भी होइसे।
ये सब कारण से अकती के बहुत महत्व हे।

खेती किसानी के शुरुवात – छत्तीसगढ़ ह कृषि प्रधान राज हरे। इंहा के जीविको पारजन ह खेती किसानी से चलथे। अकती के दिन किसान मन ह ठाकुर देव के पूजा पाठ करथे अऊ धान के बोवाई ल भी एक प्रतीक के रुप में करथे। सब किसान मन ह ठाकुर देव के पूजा पाठ करके खेती किसानी के फसल ह बढ़िया होय कहिके आशीर्वाद लेथे।

पुतरा पुतरी के बिहाव – अकती के दिन नान नान लइका मन बहुत खुश रहिथे। आज के दिन सब नोनी बाबू मन मिलके पुतरा पुतरी के खेल खेलथे। माटी से बने पुतरा पुतरी के बिहाव करथे। जइसे सहींच के बिहाव होथे ओइसनेच मड़वा छाथे, बाजा बजाथे, तेल हरदी चढ़हाथे, बरात जाथे, नाचथे गाथे अऊ टीकावन घलो टीकथे। टीकावन टीके बर पारा परोस के सब घर नेवता भी देथे। ए प्रकार से पुतरा पुतरी के बिहाव ल बड़े धूमधाम से करथे। एक प्रकार से नवा जीवन के शुरुवात अकती के दिन से शुरू हो जाथे।

बिहाव के शुभ मुहुरुत – अकती के दिन ल बिहाव के सुभ मुहुरुत माने गेहे। आज के दिन पंचांग देखे के जरुरत नइ परे।
अकती के दिन जेकर बिहाव होथे ओकर जनम जनम तक साथ नइ छूटे अइसे कहे जाथे।

दान पून – आज के दिन दान पून के बिसेस महत्व हे। आज के दिन दान पून करे से बहुत बड़े पुन्य मिलथे। एकरे पाय सब आदमी ल अपन सक्ती के अनुसार दान पून करना चाही।

गरीब मनखे ल भोजन करवाना चाहिए अऊ कपड़ा आदि भी देना चाहिए। गौ माता ल घास खवाना चाहिए। पशुपक्षी मन ल भी भोजन करवाना चाहिए। आज के दिन दान करथे वो कभू छय नइ होय । हमेशा अमर रहिथे ।

  • कुछ अऊ महत्वपूर्ण जानकारी
  • माता अन्नपूर्णा के जनम ह आज के दिन होइस हे ।
  • द्रोपदी के चीरहरन से भगवान किशन ह आज के दिन ही बचाय रिहिसे।
  • कुबेर ल आज के दिन ही खजाना मिले रिहिसे।
  • सतयुग अऊ त्रेतायुग के शुरुवात आज के दिन होय रिहिसे।
  • भगवान बद्रीनारायण जी के कपाट ल आज के दिन ही खोले जाथे।
  • अक्छय तृतीया अपन आप में स्वयं सिद्ध मुहुरुत हरे। कोनों भी शुभ काम के शुरुवात करे जा सकथे।

ये प्रकार से अकती के तिहार ह हमर समाज में बहुत महत्व रखथे। एकर से गांव में एकता अऊ भाईचारा के भी संदेश मिलथे।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
8602407353

माता ला परघाबो

आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।
नाचत गावत झूमत संगी, आसन मा बइठाबो ।।
लकलक लकलक रूप दिखत हे, बघवा चढ़ के आये ।
लाली चुनरी ओढे मइया, मुचुर मुचुर मुस्काये ।।
ढोल नँगाड़ा ताशा माँदर, सबझन आज बजाबो ।
आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।।

नव दिन बर आये हे माता, सेवा गजब बजाबो ।
खुश होही माता हमरो बर, आशीष ओकर पाबो ।।
नव दिन मा नव रुप देखाही, श्रद्धा सुमन चढाबो ।
आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।।

सुघ्घर चँऊक पुराके संगी, तोरन द्वार सजाबो।
ध्वजा नरियर पान सुपारी, वोला भेंट चढ़ाबो ।।
गलती झन होवय काँही अब, मिलके सबो मनाबो ।
आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

लघुकथा – नौकरी के आस

राजेश अऊ मनोज दूनों पक्का दोस्त रिहिसे। दूनों कोई पहिली कक्षा से बारहवीं कक्षा तक एके साथ पढ़ीस लिखीस अऊ बड़े बाढ़हीस। दूनों झन के दोस्ती ह गांव भर में परसिद्ध रिहिसे। कहुंचो भी आना जाना राहे दूनों कोई एक दूसर के बिना नइ जावय।
राजेश ह गरीब राहय त कई बार मनोज ह ओकर सहायता करे। पुस्तक कापी तक ले के दे देवत राहय ।
बारहवीं पढ़हे के बाद राजेश ह गरीबी के कारन आगे नइ पढ़ीस अऊ अपन घर के काम बूता में हाथ बंटाय लागीस। वोहा बैंक ले करजा लेके छोटे से किराना दुकान खोल लीस। बिहना ले मन लगाके दुकान में बइठे अऊ धीरे धीरे बैंक के करजा ल तक छूट डरीस।
एती मनोज ह कालेज पढ़हे बर शहर चल दीस । कभू कभू गांव में आये त राजेश अऊ मनोज अइसे मिले जइसे राम-भरत के मिलाप होथे।
पांच साल में मनोज ह एम ए ल पूरा कर डरीस। माने पढ़ लिख के तैयार होगे। अब ओहा बड़े नौकरी के तलाश में लग गे। जेन भी सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकले सबमें ओहा फारम भरे। एको ठन ल नइ छोड़त रिहिसे। फारम भरई में कतको पइसा बरबाद होगे, फेर नौकरी नइ मिलत राहय ।
एक दिन जब मनोज गांव में आइस त ओकर दोस्त राजेश ह सलाह दीस के भाई तोला नौकरी जब मिलही तब मिलही, अभी कम से कम एकात ठन धंधा पानी करले। धंधा में भी बहुत फायदा हे अऊ कोनों नौकरी से कम नइहे । मोला देख आज धंधा के बदौलत मोर घर के हालत सुधरगे।
मनोज ह ओकर बात ल हाँस के टाल दीस, अऊ बोलथे— मोला धंधा करे बर रहितिस त अतका काबर पढ़तेंव। अतेक खरचा करके पढ़हे हों त ओकर हिसाब से नौकरी भी करहूं। नहीं ते मोर का इज्जत रही। राजेश ह ओला जादा नइ समझा सकीस। बस अतके बोलीस के ते पढ़े लिखे जादा समझदार हस, में तो जादा नइ पढ़हे हों। जतका मोर कर बुद्धि हे ततके सलाह दे हँव ।
मनोज ह जी परान देके नौकरी खोजत रहय । कभू नेता मनकर त कभू मंत्री मन करा चक्कर लगात राहय । अइसने अइसने लाखों रुपिया ल बरबाद कर डारीस। घर के मन ला तक चिंता छागे के ये लइका के जिनगी कब बनही। धीरे धीरे उमर ह तक बाढ़त जावत हे, अऊ अब तो नौकरी लगे के आखिरी उमर ह बीतत हे। फेर नौकरी के आस लगाये अभी तक बेरोजगार बइठे हे ।

महेन्द्र देवांगन “माटी”
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छ. ग)
पिन- 491559
मो.- 8602407353
Email -mahendradewanganmati@gmail.com

होली विशेष राशिफल

होली के रंग —– राशिफल के संग

हमर हिन्दू धर्म में पंचांग के बहुत महत्व हे। कोई भी काम करथन त पहिली पंचांग देखथन तब काम के शुरूआत करथन। राशिफल ह हमर जीवन में बहुत महत्व रखथे । एकर से हमला शुभ – अशुभ के जानकारी होथे ।
होली के शुभ अवसर में ज्योतिषाचार्य स्वामी भकानंद महाराज जी के द्वारा भांग के नशा में बनाय गे राशिफल आप मन के सामने प्रस्तुत हे —-




मेष —–( अ,चु, चे, चो, ला, ली,लू,ले, )

ए साल ह मेष राशि वाला मन बर जादा अच्छा नइहे । परिवार में कलह अऊ अशांति रही । व्यापार ह मंदा रही। काबर कि ओकर राशि में अढैया शनि के प्रभाव परत हे। मंगल ह अपन घर ले पाछू डाहर घुंच गे हे। तिहार बार में जादा पीना हानिकारक हे। एक्सीडेंट होय के संभावना हे।

उपाय —- चार ठन नींबू ल ओकर बीच ल चीर के राख ल भर दे अऊ बीच चौक में जाके चारों डाहर एक एक ठन नींबू ल फेंक दे। एकर से किरपा आही ।

वृष — (इ,उ,ए,ओ,वा,वी,वू, वे,वो)

वृष राशि बर ए साल ह थोकिन बढ़िया हे ।बुध अऊ शुक्र ह जादा ताकतवर दिखत हे। गड़े हंडा मिले के संभावना हे।सावधानी भी बरते के जरूरत हे। नहीं ते हंडा के बँटवारा में जेल जा सकत हे। लोग लइका मन ल कष्ट मिल सकत हे। टूरा – टूरी मन अब्बड़ पदोही ।

उपाय —- उल्टा पाँख के कारी कुकरी अउ खैरा बोकरा ला कोठा में पूजवन दे से कुल देवी प्रसन्न होही ।

मिथुन —- (का,की,कु, घ,ड़ ,छ,के,को,हा )

मिथुन राशि वाला मन ल बाई (पत्नी )के बात माने से बड़ फायदा होही । ससुराल डाहर ले बहुत सहयोग मिलही ।कुंवारा टूरा – टूरी मन के जल्दी बिहाव के योग दिखत हे।बिहाव के पहिली टूरा – टूरी मन ल मोबाइल में जादा देर तक गोठियाना नुकसान दायक हे। एकर से मंगनी टूटे के संभावना हे।
फटफटी ल धीरे चलाय अऊ हेलमेट लगाके चलाय।नहीं ते दुर्घटना के संभावना हे।

उपाय — नींबू अऊ मिरचा ल तीन दिन तक अपन घेंच में ओरमा के घुमना हे। एकर से शनि के प्रकोप हट जाही ।


कर्क — (ही,हू, हे,हो,डा,डी,डू, डे,डो )

ए साल कर्क राशि में मंगल के जगा शनि प्रवेश करत हे। अऊ राहू केतु मन चारो डाहर घूमत हे। एकर से शत्रु पक्ष ले बांच के रहे बर परही । संगवारी मन संग बइठ के जादा खवई पीयई नुकसान दायक हे।
घर में लड़ई झगरा होय के संभावना हे। शारीरिक कष्ट मिल सकत हे। पढ़े लिखे मनखे मन ल नौकरी मिले के संभावना हे।
बाईं ल सोना के मंगलसूत्र पहिनाय से खुश रही । नहीं ते रोज कलर कलर करके झगरा मताही ।

उपाय — होली के दिन भांग के पुडिया ल शंकर भगवान में चढ़ाना हे अऊ दू दम मार के घर में चुपचाप सुतना हे।

सिंह — (मा, मि, मू,मे,मो,टा,टी,टु,टे)

सिंह राशि में कुछ दिन तक अढैया शनि के प्रभाव रहि । एकर से शारीरिक कष्ट बढ़ सकत हे। शारीरिक कष्ट दूर करे बर होली के दिन एक पौवा अमृत रस पी सकत हे। घर परिवार में खुशी के माहोल रही । स्वास्थ्य ह ऊंच नीच होवत रही। मोटर गाड़ी से बांच के रहना हे। कर्मचारी मन ल बिसेस लाभ मिलही । प्रमोशन के चाँस हे ।

उपाय — होली के दिन कुरता अऊ फुलपैंठ ल उल्टा पहिर के घूमना हे । अउ बाई के मुंहू में केरवस ला लगाना हे । एकर से शनि गिरहा टूट जाही ।

कन्या — (टो, पा,पी,पू, ष,ण,ठ, पे,पो )

कन्या राशि में कन्या मन के चंद्रमा ल छोड़ के सबो ग्रह बिगड़ गेहे। सब ऐती तेती हो गेहे।
ए मन ह रात दिन मोबाइल में बूड़े रहि। टूरा टूरी मन के प्रेम रोग बढ़े के संभावना जादा हे।
शनि हा सुख शांति में रुकावट पैदा करही अऊ खरचा ल बढ़ाही ।
व्यापारी वर्ग ल बहुत फायदा होही, इन्कम टेक्स विभाग के छापा पर सकत हे। ऐकर से बांचे बर तिजौरी में जतका रुपिया पइसा रखे होही अड़ोस पड़ोस में बांट दे।

उपाय — होली के दिन शुद्ध मउहा के रस ल सात झन ल पीयाय अऊ चखना घलो बांटे एकर से किरपा आही ।

तुला – (रा, री, रू, रे,ये,ता, ती, तू,ते )

तुला राशि वाला मन बर ए साल शुभ रहि । पिछले साल के लगे साढ़े साति शनि ह कुछ दिन में उतर जाही ।
कोट कचहरी के मुकदमा में जीत होही । घर में रखे सोना दान करे के जरूरत हे।
गुप्त बात ल अपन घरवाली ल भी नइ बताना हे। नहीं ते भंडाफोड़ हो जाही । घरवाली अउ बाहर वाली दूनो ल खुश करे बर नौ लखा हार पहिनाय ल परही।
महिला मन ल भी गुप्त बात छुपा के रखे बर परही अऊ सास ससुर के निंदा से बचके रहि,तब चंद्रमा ह मंगल करही। स्कूटी ल मुंहू बांध के नइ चलाना हे। नहीं ते शंका के दायरा में आ सकत हे अऊ कलह बढ़ सकत हे।

उपाय — नींबू अऊ मिरचा ल सात बार उतार के पति – पत्नी दूनो एक दूसर ल खवाना हे।
एकर से किरपा आही ।


बृश्चिक — (तो,ना,नी, नू, ने, नो,या,यी, यू)

बृश्चिक राशि वाला मन के शनि के ढैया शुरू होगे हे। शनि अऊ मंगल ह कुंडली मार के बइठ गेहे ।
एकर से बहुत परेशानी होही ।
लोग लइका मन भी परेशान करही अऊ खरचा ह बाढ़ही ।
बाई के मेकप में भी बहुत खरचा होही। पति देव ल थोथना ओरमा के नइ बइठना हे अऊ बाई ल खुश करके राखना हे।एकर से मया पिरित ह बाढ़ही । धंधा पानी अऊ नौकरी वाला मन के फायदा होही ।
लड़की – लड़का मन के बिहाव के संयोग बनत हे।

उपाय — शनि देव के मंदिर में तेल चढ़ाना हे अऊ रोज सुन्दर कांड के पाठ करना हे।लफड़ा झपड़ा कांड से बच के रहना हे।

धनु -( ये,यो, भा, भी,भू,धा,फ,ढ़ा,भे)

साढ़े साती शनि लगे के कारण पति पत्नी में अब्बड़ लड़ई झगरा होही।
पति ह रोज पी के आही त पत्नी ल बाहरी के मुठिया में मारे ल परही।
राहू केतु ह बाधा पैदा करही । जुंवा , सट्टा में हारे के संभावना हे।
मोटर गाड़ी देख के चलाना हे, नहीं ते दुर्घटना के संभावना हे।
जेवर गहना ल संभाल के रखना हे । चोरी होय के संभावना हे।

उपाय — होली के दिन खैरा बोकरा ल गाँव के बाहिर में ले जाके संगवारी मन संग पार्टी मनाना हे अउ एक बोतल दारु भैरव बाबा में चढाना हे ।

मकर — ( जो,ज, जी,खी, खू, खे, खो,गा, गी )

मकर राशि वाला मन के शनि ह द्वादश स्थान में हे । कुछ दिन में साढ़े साती शनि शुरू हो जाही । एकर से मानसिक तनाव अऊ घर में लड़ई झगरा शुरू हो जाही । खरचा ह बढ़े के संभावना हे। आगी से बचके रहना हे। घर दुकान में आगी से दुर्घटना हो सकत हे। सावधानी बरते बर ड्रम में पानी भर के रखना जरूरी हे।
संगवारी मन से अनबन होय के संभावना हे। संयम बरते बर परही।

उपाय — ऊपर गोड़ नीचे मुड़ी करके “ऊं शं शनैश्चराय नमः”मंत्र के जाप रोज 108 बार करना हे। एकर से शनि देव के किरपा आही । करिया कुकुर ला रोज रोटी खवाना हे ।

कुंभ — ( गू, गे,गो, सा,सी,से,सो )

ए राशि वाला मन के शनि, राहू , केतु ल छोड़ के सब ग्रह बिगड़े हुए हे। गड़े धन मिले के संभावना हे। नवा मकान अऊ नवा वाहन खरीदे के योग हे। लड़की लड़का मन के बिहाव के योग बनत हे। कोई कोई मन उढ़रिया भी भाग सकत हे। माँ बाप ल बिसेस सावधानी बरतें के जरूरत हे।
टूरी मन ला एंड्राइड फोन देना नुकसान दायक हे ।

उपाय — खैरा कुकरा ल मसान घाट में जाके पूजवन देना हे अऊ रातभर हवन करना हे।
करिया बिलई ला घीव पीयाना हे । सब ग्रह शांत हो जाही ।

मीन— ( दी,दू, थ,झ,भ,दे,दो,चा, ची )

ए राशि वाला मन के मंगल, गुरु अऊ शनि कोनों ग्रह ठीक नइहे । एकर सेती मन अशांत रही अऊ पति पत्नी में रोज झगरा होही ।
पत्नी के बिसेस मांग ल पूरा करे से खुश रही । संतान प्राप्ति के योग बनत हे। जुड़वा लइका हो सकत हे । अचानक धन प्राप्ति हो सकत हे। जुंवा सट्टा में जीते के योग हे। शनि के तिरछी नजर के कारण चोरी होय के प्रबल संभावना हे।
प्रेमी प्रेमिका ल कष्ट मिल सकत हे। परिवार के सहयोग नइ मिले।
टूरा मन ला यू ट्यूब देखे मा भारी नुकसान हे ।

उपाय — होली के दिन अपन पूरा शरीर में अंडी के तेल अऊ राख चुपर के एक गोड़ में खड़ा होके “ऊं क्रा क्री क्रौ क्रौ सः भौमाय नमः के जाप करना हे। एकर से किरपा आही अऊ सब कष्ट दूर हो जाही ।





नोट — ए राशिफल ह हंसी मजाक अऊ शुद्ध मनोरंजन खातिर लिखे गेहे।
जादा जानकारी बर स्वामी भकानंद महाराज जी ला फोन कर सकत हव ।
फोन नंबर — ९१९१९१९१९१
कोई भी प्रकार से मन में शंका कुशंका झन करहूं ।
बुरा ना मानो होली है ।

महेन्द्र देवांगन “माटी” (शिक्षक)
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छ ग )
पिन – 491559
मो नं – 8602407353
Email – mahendradewanganmati@gmail.com