दुसर के दुख ला देख : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा ! दुसर के दुख ला देख रे! फेर संगवारी हो हमन उॅखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। काबर उमन कहय के दुसर Read More

आगे चुनई तिहार

तैं मोला वोट भर दे दे, मैं तोला सब देहुँ.. एक माँगबे, चार देहुँ, साल में बहत्तर हजार देहुँ, खाये बर चाउर देहु, पिये बर दारू देहुँ, चौबीस घंटा बिजली देहुँ, फूल माँगबे तितली देहुँ तैं मोला वोट भर दे दे, मैं Read More

नवा चाउर के चीला अउ पताल के चटनी

सियान मन के सीख सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। तइहा के सियान मन कहय-बेटा ? नवा चाउर के चीला अउ पताल के चटनी अबड़ मिठाथे रे। फेर हमन नई मानन। संगवारी हो हमर छत्तीसगढ़ राज ला बने Read More

सियान मन के सीख : ए जिनगी के का भरोसा

सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। तइहा के सियान मन कहय-बेटा! ए जिनगी के का भरोसा रे। फेर संगवारी हो हमन उॅखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। लइकई उमर से ले के सियानी अवस्था तक Read More

दुसरो के बाढ़ ला देखना चाही : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने मा ही भलाई हे।संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा! परेवा कस केवल अपनेच बाढ़ ला नई देखना चाही रे दुसरो के बाढ़ ला देख के खुश होना चाही। फेर हमन उॅखर बात ला बने ढंग Read More

सियान मन के सीख: कथा आवय ना कंथली

सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन अपन घर अउ पारा परोस के जम्मों लइकन मन ला एक जघा सकेल लेवय अउ जहॉ संझा होवय तहॉ कथा कहानी के दौर शुरू हो जावत Read More

रमजान अउ पुरूषोत्तम के महीना : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा ! अधिक मास के हमर जिनगी म भारी महत्तम हावय रे ! फेर संगवारी हो हमन उॅखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। Read More

नंदावत हे रूख-राई : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने मा ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन बने-बने स्वादिश्ट फल के बीजा ला जतन के धरे राहय। उॅखर पेटी या संदूक ला खोले ले रिकिम-रिकिम के बीजा मिल जावत रहिस हे। जब हमन Read More

किताब कोठी : सियान मन के सीख

भूमिका रश्मि रामेश्वर गुप्ता के “सियान मन के सीख” म हमर लोकज्ञान संघराए हे। ऋषि-मुनि के परंपरा वेद आए अउ ओखर पहिली अउ संगे-संग चलइया ग्यान के गोठ-बात सियान मन के सीख आए। हमर लोकसाहित्य अउ लोकसंस्कृति म ए गोठ समाए हे। कबीरदास जी Read More

छत्तीसगढ़ी भाषा : समस्या अउ संभावना

छत्तीसगढ़ी भाषा के अपन अलग महत्तम हवय जइसे कि हर भाषा के होथे। छत्तीसगढ़ी भाषा में गोठियाय ले हमन ला अड़बड़ आनंद के अनुभव होथे काबर कि ये हर हमर माई भाखा आय। जब ले जनमें हावन ये भाखा हर तब ले Read More