Tag: Sonu Netam

तीजा लेवाय बर आही

एसो आषाढ़ के पहिली तीजा
लेवाय बर तोर भाई आही
दाई के मया ददा के दया
सुरता के सुध लमाही

मोटर फटफटी म चघाके
तोर लेनहार तोला लेजाही
जोर के जोरन कपड़ा लत्ता
मोटरा खसखस ले भराही




तीजा मानके तुरते आबे
घर दुवार सुन्ना पर जाही
आरो खबर लेवत रहिबे “माया”
तोर सुरता अब्बड़ सताही

तोर बिना घर सुन्ना रहि
मैंय कईसे दिन ल पहाहुं
नयना तरसहि तोला देखे बर
हिरदय ल अपन मनाहुं!!

सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव धमतरी

सोनू नेताम के कविता

स्वतंत्रता दिवस अमर रहे

१५अगस्त तिहार आगे
तिरंगा झंड़ा ल लहराबो
नवा नवा युनीफाम पहिर
दउंड़ के हम ईस्कुल जाबो

आजादी दिन ल सुरता करके
स्वतंत्रता दिबस मनाबो
सत्य अहिंसा मार्गदरसक
महात्मा गांधी ल सोरियाबो

राष्ट्रगीत अउ राष्ट्रगान
झँड़ा लहराके गाबो
महात्मा सुभास जवाहर
भारत माता के जय बोलाबो

गीत कविता अउ भाषण
मचंस्थ सभा म सुनाबो
नन्हे मन्ने हम बीर सिपाही
नाटक के नकल देखाबो

बिहानिया ले आरा पारा मोहल्ला
प्रभात फेरी जुलुस निकालबो
झंड़ा उंचा रहय हमारा
नारा लगावत जाबो

गुरु गुरुजन अउ परमुख सियान
एक जगा सब जुरियाबो
राष्ट्र ध्वजा ल फहराके
राष्ट्रगान ल हम गाबो!!

सुरता आथे

रात दिन मैंय गुंनत रहिथो
आँसु के धार मोला रोवाथे
तोर बिन मन नई लागे गोई
घेरी बेरी तोर सपना आथे

मिले बर परियास बहुत करेवं
सुरता तोर अब्बड़ सताथे
लिख लिख पतिया तोर बर लिखवं
धर धर आंसु के धार बोहाथे

मया के गोठ मैंय का लिखवं
सोचत सोचत दिन पहाथे
मोर जिनगि के मयारु संगी
रहि रहि तोर सुरता आथे!!

संगवारी तिहार

संग म खेलन संग कुदन
नानपन के दिन ल कभु नि भुलन
मया पिरित के खेल खेलवारी
कदम के रुख म झुलना झुलन

मोर नानपन के संग संगवारी
जिनगि जिए के दिन आय हे
हमर दोसदारी के रिस्ता नाता
मितान बनके जिए ल सिखाय हे

दुरिहाय हन सब एक दुसर ले
किश्मत म मिलना लिखाय हे
जिनगि भरके संग संगवारी
संग रेंगे के रद्दा देखाय हे

बड़ मुसकुल हे ए जिनगि के सफर
दोसदारी ने बहुत कुछ सिखाय हे
मरते दम तक संग साथ रहि
जियत भरके किरिया खवाय हे!!

दारु के निसा

अगोरा करथे बारह बज्जी के
मंदिर कस भीड़ सकलाय रहिथे
गांव गांव के दारूभट्ठी म
दारु बर लाईन लगाय रहिथे

सियान जवान निसा म मोहाय
चेपटी पउंव्वा चघाय रहिथे
कोट कोट ले पीके दारू
मंद मताउंना म पगलाय रहिथे

कोनो चिखला अउ कोनो डबरा म
टुन्न ले पीके परे रहिथे
अपन तन के हियाव नईहे
उपराहा अउ धरे रहिथे

पीए बर पईसा मांग-मांगके
घर दुवार ल गिरवी धरत हे
खाय बर चाउंर दाना नईहे
धान चाउंर बेचके पीयत हे

कतरो मनखे दवा टानिक सरि
एकरे भरोसा म जीयत हे
नसा शरीर के नाश ए
धीरे धीर जींव ल लीलत हे!!

सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव धमतरी



रुद्री के रुद्रेश्वरधाम

धमतरी जिला ले ६किलोमीटर गंगरेल रोड रक्छेल दिसा रोडेच तिर म लगे रुद्री गांव हे
रुद्री बस्ती म गांव वाले अउ सरकारी कालोनी म सरकारी करमचारी अधिकारी लोगन मन निवासरत हे
गांव अउ कालोनी दुनो मिलाके ईहां के जनसंख्या २०००-२५०० के लगभग हे
रुद्री म सरकारी विभाग के कलेक्ट्रेट,एसपी आफिस, जिला पंचायत,जनपद पंचायत,जल संसाधन, पुलिस लाइन,पुलिस थाना,अउ अन्य विभाग के कारयालय ईहे हे
महानदी के खड़ म बसे रुद्री गांव जिहां के रुद्रेश्वरघाट अउ रुद्री बांध जलाशय खुबचंद बघेल के नांव बड़ बिख्यात हे जेन इतिहास के पन्ना म उल्लेख हे
जेन ल रुद्रीबांध अउ रुद्रेश्वर महादेव के नांव ले जाने जाथे
रुद्री के रुद्रेश्वरधाम मंदिर म रूद्रेश्वर महादेव, शिवलिंग नंदीराज, हनुमान, विष्णु, कृष्ण,सीतला दाई के मु्रति बिराजमान हे
ईहां केंवट,यादव,आदिवासी,साहु, सबो समाज के समुदायिक भवन बनाय हे
सावन महिना म बोल बम कांवरिया मनके टोली सावन सोम्मारी के दिन बिहानिया ले शिवलिंग म जल,फुल-पत्री,दूध, चढ़ाय बर आथे, अउ बाजा गाजा के संग झुम झुमके नाचथे गाथे
रुद्रेश्वर धाम म माघी पुन्नी के दिन मेला भराथे, कतको दुरिहा दुरिहा ले लोगन मन दरस अउ असनान करे बर नहाथे अउ डुबकी लगाथे
आस परोस गांव के मनखे मन साईकिल मोटर फटफटी टेक्टर बईलागाड़ी म चढ़के मेला घुमे ल आथे, ढ़ेलवा राईचुली मेवा मिठई के मजा पाथे
रुद्री के रुद्रेश्वरधाम रुद्रेश्वरमहादेव मंदिर ट्रस्ट बनाय ले धमतरी जिला म बड़ बिख्यात होगे हे!

सोनु नेताम”माया”
रुद्री नवागांव धमतरी



सावन के बरखा

झिमिर झिमिर बरसत हे
सावन झड़ी के फुहार
ओईरछा छानी चुहन लागे
रेला बोहागे धारे धार

झुमरत हे रुख पाना डारा
उबुक चुबुक होगे खेत खार
बईला संग बियासी फंदाय
लेंजहा चालय बनिहार




मघन होके मंजुर नाचय
छांए करिया बादर
गरर गरर बिजुरी चमके
किसनहा जोतय नांगर

बेंगवा नरियाय टरर टरर
बरखा गीत गावयं
कमरा खुमरी मोरा ओड़े
खेत नींदे ल जावयं

सावन के बरखा बरसत हे
बनिहारिन के पैईरी सुनावयं
सनन सनन पुरवाई चलय
करमा ददरिया गावयं!!

मयारुक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव “धमतरी

दारु के निसा

अगोरा करथे बारह बज्जी के
मंदिर कस भीड़ सकलाय रहिथे
गांव गांव के दारूभट्ठी म
दारु बर लाईन लगाय रहिथे

सियान जवान निसा म मोहाय
चेपटी पउंव्वा चघाय रहिथे
कोट कोट ले पीके दारू
मंद मताउंना म पगलाय रहिथे




कोनो चिखला अउ कोनो डबरा म
टुन्न ले पीके परे रहिथे
अपन तन के हियाव नईहे
उपराहा अउ धरे रहिथे

पीए बर पईसा मांग-मांगके
घर दुवार ल गिरवी धरत हे
खाय बर चाउंर दाना नईहे
धान चाउंर बेचके पीयत हे

कतरो मनखे दवा टानिक सरि
एकरे भरोसा म जीयत हे
नसा शरीर के नाश ए
धीरे धीर जींव ल लीलत हे!!

सोनु नेताम”माया”
रूद्री नवागांव धमतरी

आगे हरेली तिहार

आगे हरियर हरेली तिहार
उल्हा उल्हा पाना हरियाथे
राउत खोचय लीम डारा
डेराउठी मुहाटी म खोचाथे

राउतईन दाई ह सुग्हर हथना
माईकोठी कुरिया म बनाथे
सुपा-सुपा सेर चाउंर धान
सिधो सिधो ठाकुराइन देवाथे

गहुं पिसान के गोल-गोल
गाय गरुंवा बर लोंदी सानथे
कांदा कुसा अउ जड़ी बूटी
बरदिहा मन करले लानथे




अंडा पान के लगाके
पशुधन गरूंवा ल खवाथे
कभु बिमारी झन आवय
देवी देवता ल मनाथे

नांगर कोप्पर गैती रापा
हंसिया बसला सबो धोवाथे
रंग-रंगोली तुलसी चउंरा ल
चउंर पिसान के पुर पुराथे

ओईरसा अंगना के तिरे तिर
भांठा माटी मुरुम पटकाथे
आगे रें भैया हरेली तिहार
गोबर पानी म दुवार लिपाथे

चाउंर पिसान के गुरहा चिला
भोग लगाय बर बनाथे
फुल पान गुलाल बंदन
नरियर भेला परसाद चघाथे

बांस के मच मच गेंड़ी
लईका मन बर सम्हाराथे
अईसन हे हरियर हरेली
गांव गांव म तिहार मनाथे!!

मयारूक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम माया
रूद्री नवागांव धमतरी

मया करबे त करले अउ आन कविता : सोनु नेताम “माया”

अजब गजब के अब्बड़ नखरा
तैंय ह झन देखा न वो
अंतस भितर म तोर का हे
ओला तैय बने बता न वो

काबर तैंय मुहुं फुलाथस
तोर बिचार ल सुना न वो
रहि रहि के भरमात रथस
अपन संग मोला रेंगा न वो

मया करे बर कुछु सोचत होबे
पांव म पांव मिलाके चल न वो
दुसर के देखा देखी म आके तैंय
छल कपट झन करे कर न वो

झगरा लड़ई म काहि नईहे
मया पिरित ह टुटथे वो
बईरी जईसन मन ह
अईसन बेरा म दिखत रहिथे वो

मोला कोनो अखरय नहि
मया करबे त करले वो
पहिली तोर हिरदय म
मया पिरित के नाता भर ले वो!!!

छत्तीसगढ़ के तिज तिहार

छत्तीसगढ़ के तिज तिहार
हरियर हरेली तिहार मनागे
आरी पारी सबहो परंपरा
जम्मो तिहार अब आगे
हरेली के बाद राखी तिहार
बहिनी मन म खुशी छागे
भाई बहिनी के मया पिरित
रक्षाबंधन डोरी सुंत बंधागे
राखी तिहार बाद कमरछठ
लईका बर उपास राखथे
जन्माष्टमी के दिन दही लुट
आठे गोकुल तिहार मनाथे
तीजा-पोरा बर बहिनी ल
लेनहार तीजा लेवाय ल जाथे
दाई ददा अउ भाई भउंजाई
मईके के सुरता सुध लमाथे
तीजा पोरा के बिहान दिन
गणेश भगवान ल मढ़ाथे
गियारा दिन ले पुजा पाठ
तरिया म बिसरजन कराथे
सरग सिधार पुरखा ल
पीतर पाख म बलाथे
बरा सोंहारी अउ दुधभात
तोरई पान म भोग लगाथे
कुंवार नवराति मंदिर देवाला
नवदिन तक जोत जलाथे
मेला भराथे नवदिन ले
लोगन दरस बर जाथे
दसमुड़ी रावण ल मारके
विजयदशमी तिहार मनाथे
देवी देवता के पुजा पाठ
नवा चाउंर के नवाखाई खाथे
कातिक महीना सुरहुती दीया
घरो घर म दीया जलाथे
गोबरधन पुजा देवारी के दिन
गौमाता ल खिचड़ी खवाथे
अग्हन म धान मिंजई कुंटई
गंवई गांव म गांव बनाथे
पुस माघ म मेला मडंई
गांव-गांव म भराथे
मया पिरित के होली तिहार
फागुन के रंग-गुलाल लगाथे
अईसन हे हमर तीज तिहार
जूर मिलके सबो मनाथे??

तोर अगोरा म

देखत हाबवं तोर रस्ता,
रुद्री नदिया कछार म!
नदिया तीर मोर डेरा हवय,
आबे वो मयारु मोर सियार म!

मया के गीत गवांहु तोला,
बंबरी तरि सुग्हर छांव म!
आरी पारी झुलना झुलाहुं,
बर पीपर के डार म!

मयारु तोर रेंगना,
चटक मटक तोर चाल वो!
मन ल मोर भरमाथस,
हिरनी असन तोर चाल वो!

तोर कुंवर काया देख,
मन मोर झुमर जथे!
संझा बिहनिया तोला देखे बर,
मोर नैना तरस जथे!

बाल मेला

कका नेहरु के जयंती म
बाल दिवस मनाय हे
नांन्हें नांन्हें लईका मन
बाल मेला सजाय हे

आनी बानी के खई खजाना
लईका मन दुकान बनाय हे
गांव ईसकुल के लईका मन
अपन अपन दुकान लगाय हे

कोनो बेचय चना चटपटी
गरमा गरम खवाय हे
भेल मुर्रा अउ पानी गुपचुप
सुवाद गजब सुहाय हे

मिरचा संग म आलु भजिया
ताते तात बनाय हे
ईसकुल के मेडम सर मन
चिख चिख के सुवाद बताय हे

नड्डा मुरकु लईका मन
अंगरी म खोचके खाय हे
कच्चा पक्का बिही जाम
दस रुपया भाग लगाय हे

कका नेहरु के सुरता म
लईका मन खुशी मनाय हे
नांन्हें नांन्हें लईका मन
बाल मेला सजाय हे !!

✍मयारुक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव धमतरी
९८२७३५६०१२
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ओनहारी-सियारी

हरुना धान लुवागे संगी
अब ओनहारी घलो उतेरबोन
कन्हार माटी चिक्कट चिक्कट
ओनहारी बर बिजहा खोजबोन

लाख लाखड़ी जिल्लो बिजहा
ओनहारी सियारी उपजाबोन
धान-पान घलो लुवा टोरागे
हांक दुन नांगर जोतबोन

पाग आय उतेरा के
हरिया हरिया बोबोन
अरसी मसुर चना बटर
कोढ़ियाके कोढ़ा देबोन

खातु कचरा दवा दवई
बने पेढ़ाय बर छितबोन
कियारी बनाके नाली रेंगाके
नहर पानी ल पलोबोन!!

मयारुक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव धमतरी
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पताल के भाव

हाय रें हाईबिरिड पताल
तोरो अलगेच अलग भाव
बेचावत हे पचास साठ रुपया
मंहगाई बढ़गे कांव-कांव

अमीरहा गरीबहा मनखे बर
सबो बर हे एक भाव
गरीब आदमी कईसे नपाहि
बिसावत हे एक पाव

बड़े आदमी खा खाके
निकालत हे अपन पेट
अंडा मुरगी मांस बरोबर
भोगा गेहे एकर रेट

देसी बिदेसी हाई बिरिड
मंहगाई म घटगे वेट
मंहगाई के मार ल देखेके
सबो के चढ़गेहे चेत!!

मयारुक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम “माया”
रुद्री नवागांव धमतरी
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स्वक्छता अभियान

चल मोर संगी चल मोर साथी
चलवं स्वक्छता अभियान चलाबो
गांव देहात अउ नगर सहर ल
निरमल सुघ्घर गांव बनाबो

धरके निकलबो बाहरी खरेरा
खोर गली ल बाहरत जाबो
ओंटा-कोंटा नाली साफ करत
जुरमिलके नवा बिहान लाबो

साफ सुथरा रखबो गंवई-गांव ल
घुरवा गड्डा खनके पटवाबो
जब्बर सुघ्घर मोर गंवई-गांव
घर के कचरा बाहिर निकलवाबो

कचरा नई करन अलिन गलिन
गांव सहर ल सपथ देवाबो
किरिया खाबो सुघ्घर राखे के
जन जागरुकता गांव सहर फैलाबो!!

✍मयारुक छत्तीसगढ़िया
सोनु नेताम”माया”
रुद्री नवागांव धमतरी
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