संगी हो जोहार लओ

एक बेर हमर गांव में भागवत होइस,ओ हा कान फूका के गुरु बना डारिस,गुरु मेर गियान पागे,अऊ पुस्तक ला पढ़ के उही गियान ला बनते ला धर डारिस, एखर अतका बड़े परभाव परिस कि ओखर मेर सबो झन के आना बंद होगे,अब काय करथे बिहनिया ले चंदा के रसीद ला धरके घर ले नहा खोर के निकल जथे,अऊ हरिदुवार बर चंदा सकेलथे,फोकट मा गियान बाँटथे,अब अइसे होगे हवय,ओला आवत देखथे त मनखे मन अपन रद्दा ला बदल दे थे अऊ त अउ अपन अपन घर मा सब ला चेता डारे हवय के पटवारी हा आही त कही दुहु सियान हा घर में नई ये,अइसन हाल हो गे,एक बेरा रिहिस के पटवारी ह लोगन मन ला देख के लुकावे,अब लोगन मन हा पटवारी ला देख के लुकाय ला धर लिस,जब कोनो हा ओखर ले बात नई करय त ओला भाषण देय के बीमारी घला धर डारिस जीहाँ भी होय जवनो मेर माइक लगे देख डारिस ते ज्ञान के गोठ चालू हो जथे,रुके घला नई,उत्ता-धुर्रा हांके ला धर लेते,देखत रहिथे कोनो उठ के ता नई भगाथे,जेन हा उठ के भागे के उदिम लगाथे तेखरे नावं ला ले के गोठियाथे त उहू हा बपरा हा बैठ जथे.
एक बेर रात के आइस मोर मेर चल त महाराज वोदे गांव में परवचन देना हे रात के ९ बजे ले चालू हवय आपो ला जायेला लागही,उहाँ के के संगी मन हा आप बर बिसेस निमंत्रण दे हवय,आप चलव,महू हा कहेवं रे भाई गंवई ता अपने हवे जाय मा कोनो अलहन नई ये,कहिके मैं हा घलो चल देंव गा,उहाँ जा के देखेवं ता जौन मंच बनाये रिहिसे तेमे बने जगर-मगर लैट हा बरत हे,माइक लगे हवय,सरोता हा नदारत हे,तीन झन बइठे रहाय,मेहा संसो मा पर गेंव कईसे करही बुजा हा इंहा कोनो नई ये,का बताओं संगी हो माइक ला धरिस अऊ उत्ता धुर्रा फेर चालू हो गे,निति अऊ गियान के गोठ हाँ रात भर चलिस जब सुकवा हा उगिस त मीही हां गेंव, देख महाराज अब परबचन ला बिराम देवो,तीन झन सरोता रिहिस उहू मन सूत गे अऊ चउदा झन कुकुर हवय तहु मन धन्य होगे,अगले जन्म मा मनखे बनही ता आपला धन्यवाद देय बर आही,अईसन हमर गियानिक पुरुष हवय पटवारी भइया हा.
संगी हो अभी पटवारी भईया के कहिनी हा सिराय नई हे थोकिन अगोरा करव मेहा लहुट के ओखर नवा किस्सा धर के आवत हंव.
जोहार लेव संगी हो .
आपके
गंवईहा संगवारी
ललित शर्मा
(कार्टून : त्र्यंबक शर्मा जी से साभार)