अरुण कुमार निगम के गीत : नइ भूलय मिट्ठू तपत कुरु ….

आई लव यू………आई लव यू….तयं बोल रे मिट्ठू , आई लव यू….तपत कुरु के गये जमानाबोल रे मिट्ठू – आई लव यू….. राम-राम के बेरा -मा, भेंट होही तो गुड मार्निंग कहिबेए जी,ओ जी झन कहिबे,कहिबे तो हाय डार्लिंग कहिबेसबो पढ़त हे इंग्लिश मीडियमतयं काबर रहिबे पाछू …..आई लव यू………आई लव यू….तयं बोल रे मिट्ठू , आई लव यू…. हाट – बजार के नाम न ले , तयं मार्केटिंग बर जाये करकोन्हों क्लब के मेंबर बन के ,रोज स्वीमिंग बर जाये करसमझ न आये इंग्लिश पेपरतभो मंगाए कर बाबू…..आई लव…

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सुधा वर्मा के गोठ बात : नवरात म सक्ति के संचार

नवरात्र के शुरूवात घट इसथापना ले होथे घट म पानी भर के आमा पत्ता ले सजा के ऊपर म अनाज रखे जाथे। प्रकृति ले जुरे तिहार प्रकृति के पूजा करथे। पानी घट म रखना ‘जल ह जीवन आय’ के बोध कराथे। जेन कलस के हम पूजा करथन तेन म जल हावय। आज ये जल के काय हालत होगे हावय सोचे के विसय आय। आमापान, केलापान प्रकृति के हरियाली जेन हमन ल जीवन देथे तेखर पूजा करना। पूजा के संग-संग पूजा स्थान म जगह देना। जीवनदायनी ऑक्सीजन हमला इही पत्तामन ले…

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श्रीमती सपना निगम के कबिता : कुकरी महारानी

कइसने नरी – ला टेड़वायगजब पाँखी फड़फड़ाययेती कुकरी कोरकोरायवोती कुकरा नरियायकूद- फांद के चढ़े खपरा- छानीएला हकालौ हो ननदी- देवरानी . कोड़ा देवय ,नइ मानयगजब कचरा बगरायकहूँ गेंगरवा सपरायएके सांहस – मा खायदिन- भर किन्जरे बर जायसँझा कुरिया- मा ओयलायकोन्हों करे नइ इंकरे निगरानीएला हकालौ हो ननदी – देवरानी . रुखराई – मा चढ़ जायकुकरुस – कू नरियायकहूँ घुरवा देखे पायभात – बासी बिन के खायजेखर खिरपा नइ देवायवोखर घर -मा खुसर जायहवय कुकरी के कोन्हों लागमानीएला हकालौ हो ननदी – देवरानी . सूपा के कनकी – लासरी बीन के…

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तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु बोल रे मिट्ठु तपत कुरु बडे बिहनिया तपत कुरु सरी मँझनिया तपत कुरु फ़ुले-फ़ुले चना सिरागे बाँचे हावय ढुरु-ढुरु ॥ चुरी बाजय खनन-खनन झुमका बाजय झनन-झनन गजब कमैलिन छोटे पटेलीन भाजी टोरय सनन-सनन केंवची-केंवची पाँव मा टोंडा पहिरे हावय गरु-गरु ॥ बरदि रेंगीस खार मा महानदी के पार म चारा चरथय पानी पीथँय घर लहुँटय मुँदिहार म भ‍इया बर भ‍उजी करेला राँधे हावय करु-करु ॥ पानी गिरथय झिपिर-झिपिर परछी चुहथय टिपिर-टिपिर गुरमटिया सँग बुढिया बाँको खेत मा बोलय लिबिर-लिबिर ल‍इका मन सब पल्ला भागँय डोकरी…

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परंपरा के रक्‍छा करत हावय ‘मड़ई’ : डॉ.कालीचरण यादव संग गोठ-बात

परंपरागत रूप म बरसों ले चलत रावत बाजार ल व्यवस्थित करे म डॉ. कालीचरण यादव के योगदान ल सब्‍बो मानथे। सहर के रावत बाजार पूरा देस म अपन अलग पहिचान रखथे। ‘मड़ई’ आज रावत बाजार ले ऊपर सामाजिक गर्व के विसय हो गे हवै। डा. यादव तिर अनुपम सिंह के गोठ. भास्‍कर : मड़ई के बिचार कइसे आइस? डॉ. कालीचरण यादव : रावत नृत्य के बहुत जुन्ना इतिहास हवै। हमर सहर म रावत नाच के समय बाजार बिहाना (बाजार परिक्रमा) के अलग परंपरा रहिस। बाजार के दिन रावत नृत्य दल…

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लाला जगदलपुरी के कबिता

जब ले तैं सपना से आये मोला कुछु सुहावत नइये संगी तैं ह अतेक सुहाये पुन्नी चंदा ल देखेंव तोरे मुह अस गोल गढन हे अंधियारी म तारा देखेंव माला के मोती अस तन हे तोर सुगंध रातरानी हर भेजत रहिथे संग पवन के नींद भरे रहिथे आंखीं में दुख बिसराथंव जनम मरन के । लाला जगदलपुरी

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आवा बचावव लोक कला ल : डॉ. सोमनाथ यादव

बिलासा कला मंच के संस्थापक अउ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्‍मानित डॉ. सोमनाथ यादव कला अउ कलाकार मन ल बढ़ावा देहे बर जाने जाथे। मंच ह कला के संरक्‍छन के दिसा मं काम करे के संग अइसे रचनाकार मन के किताब ल छापे हवै, जउन ल कोनो नई जानयं। उनखर काम ल देख के शासन हं डॉ. यादव ल छत्‍तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बनाए रहिस। डा. यादव तिर अनुपम सिंह के गोठ.  भास्‍कर : बिलासा कला मंच ल बने २२ बरस हो गे हवै। अतेक साल मं छत्तीसगढ़ी…

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काम दहन के आय परब- होली

छत्तीसगढ़ आदिकाल ले बूढ़ादेव के रूप म भगवान शिव अउ वोकर परिवार ले जुड़े संस्कृति ल जीथे, एकरे सेती इहां के जतका मूल परब अउ तिहार हे सबो ह सिव या सिव परिवार ले जुड़े हावय। उही किसम होली जेला इहां के भाखा म होली कहे जाते। इहू हर भगवान भोलेनाथ द्वारा कामदेव ल भसम करे के परब आय। छ त्तीसगढ़ म हमन जेन होली के परब मनाथन वो हर असल म काम दहन के परब आय। बाहिर ले आए मनखे मन इहां के सांस्कृतिक स्वरूप अउ इतिहास ल अब्बड़…

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होले तिहार

होले तिहार बड़ निक लागेसबके मन -मा उमंग जागे.समधिन मारे पिचकारी,समधी ला बड़ सुख-सुख लागे. आमा मऊँरिन,परसा मन, पहिरिन केसरिया हारजाड़-घाम दुन्नो चल देइन अपन-अपन ससुरार.का बस्ती, का वन-उपवन, कण -कण मा खुशिहाली छागे. नंदू नंगत नगाड़ा पीटय, फगुवा गावै फागधन्नू ढोल, मंजीरा मन्नू, झंगलू झोंके राग.सररर सराईस सरवन हर, सब्बो डौकी शरमागे. मंगलू घर के नवा मंडलिन, घिव- मा बरा पकायजी छुट्टा मंगलू मंडल हर, चोरा- चोरा के खाय.जब मंडलिन गुरेरे आँखी, तब बारी कोती भागे. अच्छा मनखे दूध पियें, घिनहा मन मदिरा भंगछेना लकड़ी झटक झटक के, करें…

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कबिता : होरी के बजे नंगारा हे

होरी के फाग म चैतू शूंभयफिरतू के बजे नंगारा हे।भांग-मंद मा मंगलू नाचे-झपयमंगतिन के मया भरे बियारा हे।बुधू ह उड़ावय फुदकी-गुलालअंचरा तोपे बुधनी के गाल होगे लाल।लईका-जुवान टोली म घूमयगली-दुवारी म मस्ती छाए हे।गोंदा-दशमत-परसा के सुग्घर खिले फूलऐसो के फागुन ह, नवा बिहिनिया लाए हे। संदीप साहू ‘प्रणय’68एफ, रिसाली सेक्टरभिलाईनगर, जि. दुर्ग

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