केसरिया रंग मत मारो कान्हा

छत्तीसगढ़ के प्रयागधाम राजिम म भगवान राजीवलोचन संग होली खेले के जुन्ना परम्परा हे। घुलैण्डी के दिन जब राजीवलोचन के पट खुलथे तब रूप रंग अलगेच नजर आथे। श्रध्दालु बिहंचे ले मंदिर परिसर में नंगाड़ा बाजा में बिधुन होके नाचथें। दू बजे के बाद भोग प्रसादी लगाथें। ऐ बेरा देस परदेस के जम्मो भगत मन भगवान राजीव लोचन संग होली खेले बर पहुंचथे। हमर संस्कृति म होली तिहार ल बढ़ सुग्घर ढंग ले मनाय के परम्परा हाबे। चारों डाहन बगरे मया सकलाय असन दिखथे। बैरी के बैर भुला जथे त…

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कान्हा के होली ( छत्‍तीसगढ़ी फाग गीत )

रंग बगरे हे बिरिज धाम मा कान्हा  खेले रे होली  वृन्दावन ले आये हवे  गोली ग्वाल के टोली  कनिहा में खोचे बंसी  मोर मुकुट लगाये  यही यशोदा मैया के  किशन कन्हैया आए आघू आघू कान्हा रेंगे  पाछु ग्वाल गोपाल  हाथ में धरे पिचकारी  फेके रंग गुलाल  रंग बगरे हे ……………. दूध दही के मटकी मा  घोरे रहे भांग बिरिया पान सजाये के  खोचे रहे लवांग ढोल नंगाडा बाजे रे  फागुन के मस्ती होगे रंगा-रंग सबो  गाँव गली बस्ती   रंग बगरे हे …… गोपी ग्वाल सब नाचे रे  गावन लगे फाग  जोरा…

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जयंत साहू के कहिनी : मनटोरा

चइत बइसाख के महिना तो बर बिहाव के सिजन आय। जेती देखबे तेती गढ़वा बाजा ह बाजत रइथे। किथे न मांग फागुन मे मंगनी जचनीए चइत बइसाख म बर बिहाव अउ काम बुत न उरका के सगा घर लाड़ू बरा बर रतियाव। चडती मंझनीया के बेरा आमा बगइचा के तिरे तिर दु तिन ठन बइला गाड़ी आवत रिहीस। गाड़ी ह गजब सजे धजे रिहीस। बइला के सिंग म चकमकी रंग लगायए पीठ म मखमल के लादना लदाय अउ टोटा म कांसा के बड़े बड़े घांघड़ा पहिराय। टोटा के घांघड़ा अउ…

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होली गीत

होगे फ़ागुन हा सर पे सवार ‘ जोहार ले जोहार ले जोहार। नरवा खलखल हांसत हे, नवा नवा फ़ूटत हे धार।(जोहार ले – – –  – बरदी के सुत गे गोसैया, सन्सो में हवय खेत खार।  जोहार ले – – – –  दिल ह चना के जवान हे, अउ राहेर लगत हे कचनार। जोहार ले- – – –  धान के कोनो पुछैया  नही, अउ खड़े हे चना के खरीदार। जोहार ले – – –  अमली के साड़ी हा सरकत  हे, अउ लहकत हे आमा के डार। जोहार ले – – –…

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माटी के कुरिया

सुख कब पाहू दु घड़ी –दू मंजिला महल भीतर म।थीरा लवं का दाई थोकुन,माटी के कुरिया अउ खदर म।। जाड़ म कपासी मरथवं,घाम म पछनाय परथवं।भिंसरहा के भटकत संझौती आवं,रतिहा चंदैनी के अंजोरी नई पावं।कोनजनी कब का हो जही –निंद गवायेवं इही डर म।थीरा लवं का दाई थोकुन,माटी के कुरिया अउ खदर म।। तेलई म घर के लासा डबकगे,रंग के पोतई तिजौरी खसकगे।सिड़ीया चड़ई म सियनहा बरसगे,गरवा परसार म मेछराय ल तरसगे।काकर बुध म गांव छोड़ी –लघियात आ बसेवं सहर म।थीरा लवं का दाई थोकुन,माटी के कुरिया अउ खदर म।।…

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अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया कि सुनव सासे बिनती हमार मोला आज्ञा देतेव सास कि जातेंव सगरी नहाय घर हिन कुंवना घर हिन बावली कि घर हिन करौ असनाद, अहिमन झन जा सगरी नहाय, बेटा जान सुन पाहय त पुरजा में खाल निकाल दे है तभो ले सास के भाखा नई मानिस कि अपन संगी बलाय कुम्‍हरा के बोलेंव भईया कुम्‍हरा मोरे कि चउदा ठन घईला गढ दे सोनरा के बोलेंव सुनरा मोर भईया कि घईला मोर बर गढ दे सात चेरिया आगू अउ सात चेरिया पाछू कि मांझ में…

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लहुटती बसंत म खिलिस गुलमोहर : कहिनी

स्वाति ह मां ल पोटार के रोय लगिस। थोरिक बेरा म अलग होके कथे। मां मेंहा तोर दुख ल नइ देख सकंव। मेंहा तोर बेटा अंव। तोर पीरा तोर दुख अउ पहार कस बिपत ल समझथंव। बाबूजी ह अब कभू नइ लहुटय। ये जिनगी ह सिरिफ सुरता म नइ कटय ओ अम्मा। जिनगी म सबो ल हर उमर म कोनो साथी के सहारा के जरूरत परथे। जिनगी के एक-एक छन सहारा ह भगवान के दे हुए वरदान ये। ये ल हांसे जिए बर चाही। तैंहा परकास अंकल ल अपन साथी…

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नारायण लाल परमार के कबिता

मन के धन ला छीन पराईस टूटिस पलक के सीप उझर गे पसरा ओखर बांचे हे दू चार कि अखिंयन मोती ले लो । आस बंता गे आज दिया सपना दिखता हे सुन्ना परगे राज जीव अंगरा सेंकत हे सुख के ननपन में समान दुख पाने हावै चारो खुंट अधियार के निंदिया जागे हावै काजर कंगलू हर करियायिस जम चौदस के रात बारिस इरखा आगी में बेंचै राख सिगार सहज सुरहोती ले लो । कि अंखिंयन मोती ले लो । नारायण लाल परमार

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गीत : सारी

मोर सारी परम पियारी गा र‍इपुरहिन अलग चिन्हारी गा कातिक मा ज‍इसे सियारी गा फ़ागुन मा ज‍इसे ओन्हारी गा हाँसय त झर-झर फ़ुल झरय रोवय त मोती लबारी गा ॥ एक सरीं देह अब्बड दुब्बर झेलनाही सोंहारी जस पातर मछरी जस घात बिछ्लहिन हे हंसा साही उज्जर पाँखर चर चर ल‍इका के महतारी फ़ेर दिखथय जनम कुँवारी गा ॥ लेवना साँही चिक्कन दिखथे कोयली साँही गुरतुर कहिथे न जुड सहय न घाम सहय एयर कन्डीसन म र‍इथे सरदी म गोंदा फ़ुल झँकय गरमी म भाजी अमारी गा ॥ आँखी म…

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पं.द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ के गीत

तोला देखे रेहेंव गा, तोला देखे रेहेंव गा । धमनी के घाट मा बोईर तरी रे ।। लकर धकर आये जोही, आंखी ला मटकाये गा, कईसे जादू करे मोला, सुख्खा म रिझाये गा । चूंदी मा तैं चोंगी खोचे, झूलूप ला बगराये गा, चकमक अउ सोन मा, तैं चोंगी ला सपचाये गा । चोंगी पीये बइठे बइठे, माडी ला लमाये गा, घेरी बेरी देखे मोला, हांसी मा लोभये गा । जातभर ले देखेंव तोला, आंखी ला गडियायेंव गा, भूले भटके तउने दिन ले, हाट म नई आये गा । पं.द्वारिका…

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