सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे करबे करम तो कमाये देबे,बारी म बीहन जगाए देबे।बदरी ले पानी उतर आही,जंगल म बंसी बजाए देबे।गंगा जल गांव म छींच देबे,दुखला रमायन सुनाये देबे।धुंधरा म हपट उपट जाही,सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे। शायरे शहर यादव ‘विकास’ ब्रम्हपथ, अम्बिकापुर, छ.ग. मर जवान, मर किसान ए देस के बिधान अलग हे, अतकेच ल जान गा।चोरहा ल चोरहा झन कहिबे, कहिना ल मोर मान गा।चाकू – छुरा के अनठी धरे, लईका मन बाढ़त हवे।का अचरज करथन संगी, लेवत हे जौन प्राण गा।रोजेच सुनथन रेडुआ मं, लोकतंत्र के…
Read MoreYear: 2011
सच्चा चेला
सुन्दरपुर म एक झन बहुत बढ़िया साधु रहय। जेन हर रोज भगवान भक्ति म लीन रहय। येकर कुटिया म बहुत झन चेला रहय जेन मन अपन गुरुजी के बताय मार्ग, रस्ता म रेंगय। इही म एक झन किरपाल नाम के चेला रहीस। तेन हर अपन गुरुजी के संझा बिहनिया पांव परय अउ हर कहना ल मानय। एक दिन गुरुजी हर अपन सब चेला ल उंकर-उंकर लईक काम बताईस। सब चेला अपन-अपन काम म चल दीन। बाच गीस किरपाल हर तेन ल गुरुजी हर कइथे- बेटा किरपाल तैं आज सुख्खा-सुख्खा लकड़ी…
Read Moreटेंशन वाली केंवटिंन दाई 1
केंवटिन धमतरी राजिम के गाड़ी तीर धमतरी टेसन म चना मुर्रा बेचय। पचास साल ले टेशन मास्टर रहे बंगाली बाबू एक दिन अइस अऊ केंवटिन ल रयपुर घुमाय बर गाड़ी म बइठार के लान लिस। केंवटिन के पहिली बेर गाड़ी म बइठे अउ घूमेके अनुभव ले पढ़व।‘ए दाई भालो आहे।’‘अरे बंगाली बाबू, भालो हे, सुग्घर हे। रिटायर होएके बड़ दिन बाद बाबू तोला इंहा के सुरता आइस। तोर बाल, बच्चा मन कहां रथें, अउ तैं कहां रथस।’ छोटे रउल लाइन के धमतरी टेसन म चना मुर्रा, लाड़ू बेचवइया केंवटिन दाई…
Read Moreबांझ के पीरा-बांझ के सुख
लघुकथा‘तें मोला टूरा-टूरी नइ देस ना सुन्दरी, मे दूसर बिहाव करहूं तें मोला दोसदार मत कबे, काबर नी देत हस मोला तेंहा टूरा-टूरी। दू बच्छर ले जादा होगे फेर तोर पांव भारी नी होवत हे।’ भुलऊ ह अपन सुन्दरी नाम के गोसइन ल धमका के काहत राहय।‘मोर किस्मते मा नइ हे तेला का करहूं, तोला भारी पांव वाली गोसइन लाना हे ते ले आ, मोला कुछु नी कहना हे।’ सुन्दरी ताना ल सुन के फैसला सुना दीस।‘भुलऊ ल मौउका मिलिस। तहां ले राम्हीन ला बना के ले अइस जेन साल…
Read Moreउदेराम के सपना-2
(एखर पहिली के अंक में आपमन उदेराम के सपना के आधा (भाग एक) ल पढ़ेव। जेमा उदेराम ह अपना दाई-ददा मेर लबारी मार के गांव वापिस आ जाथे अउ मछरी मारथे। पढ़िस-लिखिस नहीं तेकर सेती अपन अवइया पीढ़ी के लइका मन ल पढ़ाहूं-लिखाहूं अउ बने कमइया बनाहू कहिके सपना देखे रहीसे। ओकर सपना ह कइसे पूरा होइस। अब पढ़व ‘उदेराम के सपना’ के भाग दू जेमा कइसे ओकर लइका मन पढ़-लिख के आगू बढ़िन) ”दु:ख होइस चाहे सुख होईस अपन गोसइया ल देवता मान के ओकर भक्ति करीस। सब दुख…
Read Moreउदेराम के सपना
‘चुनाव के करजा ल छूटे बर बबा ह कभू-कभू खिसिया के काहय- ए टूरा ह हम्मन ल सड़क म लाय बर किरिया खा हे तइसे लागत हे। उदेराम ह गांव ले सहर तक करजा म बिल्लाय राहे। दुरूग म पांच कण्डिल करा एक झन सेठ ह कथे- कस उदेराम तोर मुड़ म अतेक-अतेक करजा हे अउ तैंहा जीयत कइसे होबे। उदेराम कथे- अरे भई तैं रूपियच तो लेबे ना जान थोर लेबे। वाह रे हिम्मत कतको बरोड़ा अइस फेर उदेराम ला कोनो नइ हला पइस। करजा म लदाय राहे।’दुदुरूग ले…
Read Moreमोर पहिली हवाई यात्रा
घूमें फिरे के सऊख कोन ल नी राहय? फेर मोर सऊख ल झन पूछ। फटफटी, मोटर, कार, रेलगाड़ी मोटरबोट पानी जिहाज, सब म कई पईत घूम डरे हौं। बस हवाई जिहाज भर बांचे रिहिस। दसों साल ने योजना बनावंव फेर समजोगे नइ बइठय। केहे गे हे न बिन समजोग के कांही कारज सिध्द नइ होय अउ ओखर उप्पर वाला के मरजी बिगन एक ठी पत्ता नइ डोलय। हर बखत हवाई यात्रा के योजना फैल खा जाय। सबले बड़े अड़ंगा तो माहंगी टिकस के आय। दूसर अड़ंगा राहय जानकारी के कमी।…
Read Moreसोनचिरई
इंकर रोवई-धोवई ल देखके कथे- अब रोय ले कोई फायदा नइहे। नबालिग उमर म बिहाव करे ले अइसने होथे- जच्चा अउ बच्चा के मउत। ओ न्हारी सियारी सेकलाथे ताहन किसान मन के चोला ह हरियाथे। हरियाही काबर नहीं, काबर कि इही ओन्हारी-सियारी के बदौलत तो जिनगी ल संवारना रहिथे। बने सुकाल होगे त सोचे बिचारे काम बूता ल निपटाथें। कहुं दुकाल परगे त दुब्बर बर दु असाढ़ हो जथे। दुरदेसी कका ह बेलौदी गांव के उन्नत किसान आय। छपराही के ऊपर म ओकर पांच एकड़ जमीन हे। भगवान के दे…
Read Moreखने ला न कोड़े ला, धरे ल खबोसा
हाना म कहिनी एक साहार म एक झन आदमी राहाय। ओ कहिथे- भगवान हा सब झन ल अमीर बनाए हे, भला मुहीच ल काबर गरीब बनईस होही? मैं ये बात के निरने कराहूं तभे बनहीं। अइसे कहिके ओ हा भगवान ला खोजत-खोजत ऐती-ओती, जंगल-झाड़ी डाहार ले जावत रहिथे। रसता म ओला एक ठक गाहबर (हुंडरा) भेंटथे। हुड़रा ह पुछथे- तैं लकर-लकर काहां जात हस जी कहिके। त ओ हा अपन सबो हाल ल बताथे। त हुंड़रा कहिथे- अरे, अइसने मोरो एक ठन बात हे गा, तैं जावत हस त मोरो…
Read Moreमंगल कामना के दिन आय अक्ती
ठाकुर देवता के देरौठी म तो धान बोय के पूरा प्रक्रिया चलथे। ये दिन परसा पाना के महत्व बाढ़ जथे। परसा पाना के दोना बना के वोमा माई कोठी के धान ल ठाकुर देव म चढ़ाय जाथे। संग म मऊहा ल घला समर्पित करथें। धान छितथे अउ दू झन मनखे ल बइला बना के नागर बख्खर चलाय जाथे। नवा करसा कलौरी ले तरिया के पानी लान के देवता म चढ़ाथें।छत्तीसगढ़ तिहार के गढ़ आय। इहां अब्बड अकन परब तिहार अउ संस्कार म मनखे मन अइसे सना जथे जइसे भगवान के…
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