मोबाइल के बड़े-बड़े गुन

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के इंजीनियर प्रोफेसर के दिमाग म बात अइस। सोचीस, सहर-गांव सबो जगा मोबाइल के अड़बड़ चलन होगे हे, गांव मन म रोग के जांच कर इलाज करइया (क्लिनिक लैब्स) साधन घलो नइये। अइसे म, एक ठी पोर्टेबल माइक्रोस्कोप बनाके वोला मोबाइल ले जोड़ दे जाय। इंजीनियर प्रोफेसर मन अइसे सोचे बात ल कर घलो डरीन अउ सेल स्कोप बना घलो डरे हे। ये उपकरण (मसीन) (मोबाइल) हा मलेरिया अउ टीबी (क्षय रोग) फैलइया कीरा (जीवाणु) के कोटोला उतारही अउ नेटवर्क ले दुनिया भर म कहूं भेज सकत…

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राजा – नान्हे कहिनी

देवकी अपन बैसाखी ल देख के सोचे का होगे ए टूरा मन ल घेरी-बेरी आ-आ के बिहाव के विचार रखंय। आज सब्बो झन मन मुंहु फेर के भागत हाबे। ओतकी बेर अरविंद अइस, जेन ल देख के देवकी ह थर्रागे, काबर कि करिया कुकुर संग कोन बिहाव करही कहिके वोखर खूब हंसी उड़ाय रीहिस। अरविंद कीहिस- मेहा बैसाखी के सहारा ले चलत देखे बर आय हंव। अऊ चलत देख के बड़ खुस हांवव, अब कोनों फिकर नई हे। आराम से चलत फिरत अपन नौकरी कर सकत हव, कोनों सहारा के…

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घाम घरी आगे – कबिता

घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे। तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे॥का बतावंव संगी,घाम के कहर।गांव-गांव, शहर-शहरहोवत हे हाहाकार॥भूख-पियास म मनखे के मुंहु चोपियागे।घाम घरी आगे, रूख-राई अइलागे।धू-धू जरत हवय,धरती दाई के कोरा।आगी अंगरा बरोबर घाम बरसावत हवय बेरा॥कोन जनि काबर इंद्र देवता रिसागे।घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे॥सब जीव-जन्तु,हवय बड़ परसान रे।अपन परान ल हम,कइसे? बचान रे॥पानी-पानी सब गोहराथें, बइसन बिपत आगे?घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे।तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे। शेरसिंह गोडियामुकाम- कोलियारी, पो.-गैंदाटोलातह. छुरिया, जिला-राजनांदगांव

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चटनी आमा के – कबिता

नंगत के बइहाये मऊर, ए दे पर बर लटलट ले फरगे।देस के भुइंया ला अमरे बर, आमा के डारा निहरगे॥ मंदरस किरवा कस लइकन, झूमगे, देख आमा के कचरी।जमदूत कस मुछर्रा रखवार, हावय ननमुन के बयरी॥ कीरा परय ये आमा ल, दुब्बर ल दू असाढ़ सही भाव।कब खाबोन एला ते, वोदे कऊंवा करत हे कांव-कांव॥ छक्कत ले खाये रेहेन, वहा पईंत वो आमा चौंसा।बिहाव के झरती म, सुरता हावय, वो घर आवय मौसा॥ गंज गुरतुर टेटकू घर के आमा, हावय नानुक गोही।अड़बड़ अम्मट ठाकुर घर के, जिहां धराय हे बटलोही॥…

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मन लागा मेरो यार फकीरी में – अनुपम सिंह के गोठ

कबीर के संवेदना ल फकीरी अउ सुफियाना सइली के अपन गीत मं प्रस्तुत करइया भारती बंधु मन कोनो परिचय के मोहताज नई हवय। भारती बंधु कला के क्षेत्र म छत्तीसगढ़ के पहिचान के रूप म जाने जाथे। डा. नामवर सिंह एक पइत भारती बंधु ल संगीत के नवा खोज कहे रहिन। भारती बंधु दल के स्वामी जीडीसी भारती के मानना हे के कबीर ल जिए बिना कबीर ल नई गाए जा सकय। स्वामीजी तिर अनुपम सिंह के गोठ: आपके जन्म कहां होइस, पढ़ाई-लिखाई कहां होय हवय? मोर दादाजी दच्छिन भारत…

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गॉंव कहॉं सोरियाव हे : गॉंव रहे ले दुनिया रइही – डॉ. चितरंजन कर

पहली संस्करन : 2010 मूल्य : एक सौ रुपए कृति स्वामी : बुधराम यादव प्रकाशक : छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति, जिला शाखा, बिलासपुर (छ.ग.) आखर संयोजन : योगेन्द्र कुमार यादव छापाखाना : योगी प्रिन्टर्स, डी-1, सुपरमार्केट, अग्रसेन चौक, बिलासपुर (छ.ग.) मोबाइल : 094252 22806 सम्पर्क : बुधराम यादव `मनोरथ’, एमआईजी-ए/8, चंदेला नगर रिंग रोड नं.2, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) मोबाइल : 097551 41676 गॉंव रहे ले दुनिया रइही   माँ अउ मातृभूमि ल सरग ले घलव महान कहे गये हे । मैं ह एम मातृभाषा ल घलव जोड़िहौं, काबर के हमन जइसन अउ…

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ढ़पोरशंख के किस्‍सा : भावना श्रीवास, तखतपुर

एक झन बावहन अऊ बम्हनीन रहिस उमन अड़बड़ गरीब रहीन। एक दिन बम्हनीन ह बावहन ल कहिथे कि तुमन कुछु अइसे उपाय करा जेखर ले हमर गरीबी ह दूर हो जाय। दूसर दिन बावहन हर जंगल म तपस्या करे बर चल दिस। ओकर तपस्या ले प्रसन्न हो के भगवान विस्नु ह दरसन दिहिस अऊ वरदान मांगे बर कहिथे त बावहन हर कथे महराज मै बड़ गरीब हव, मोर गरीबी ल दूर कर देवा। भगवान ओला एक ठन सिद्ध संख दिहिस अऊ कहिस ए संख लंग तंय जेन मांगबे- तऊन तोला…

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आह! घनचकरूं वाह!!

आह! घनचकरूं वाह!! रामकुमार धीवर, सीपत नेता नाव दलबदलू, खुरसी लोभी आप। कभू पंजा, कभू कमल, कभू कटोरा छाप।। कभू कटोरा-छाप, चुनाव बर भीखमंगा। पल-पल धोखा करय, जनता के बनाय नंगा।। आह! घनचकरुं वाह!! सुवारथी देसमेढ़ा। सरम-धरम खूंटी म, ओही ह असली नेता।। पूज ले अपन डउकी क, फूल नरियर चढ़ाव। मेड़वा डउका बनके, तरइ तोड़ लाव।। तरइ तोड़ लाव, पाबे चंदरमा दरसन। करबा- चउथ व्रत रख, डउकी ह होही परसन। आह! घनचकऊं, वाह!! मुड़वा ठकुराइ मूंछा। कलजुगी जमाना म, कर चार डउकी पूजा।। टोपी पहिर खादी के, नेता रूप…

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इस अंक में खने ला न कोड़े ला, धरे ल खबोसा मंगल कामना के दिन आय अक्ती काहनी : फंदी बेंदरा मानवता के पुजारी सत्य साईं बाबा हमर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी राजभासा कामकाज के भासा कब बनही जरूरत हावय रामराज के किरकेट के महाकुंभ मइया पांचो रंगा सुधा वर्मा

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