नंदावत चीला फरा,अउ नंदाय जांता । झांपी चरिहा झउहा,नंदावत हे बांगा। नंदावत हे बांगा,पानी कामे भरबो। जांता बीना हमन,दार कामे दरबो कहत “नुकीला” राम,नवा जबाना हे आवत। गाड़ा दौरी नांगर,सब जावत हे नंदावत। आगी छेना बारि के,सब झन जाड़ बुताय। गोरसी आगु बैठि के,लफ लफर गोठियाय। लफ लफर गोठियाय,काम करे न धाम करे। चारी चुगली करत,जिनगी ल अंधियार करे। कहत “नुकीला” राम, सुनव रे म मोरे रागी। गिस मांगे ल आगी, अउ लगादिस घर आगी। नोख सिंह चंद्राकर “नुकीला” पता :- गाँव – लोहारसी पोष्ट – तर्रा तह.-पाटन जिला –…
Read MoreYear: 2014
स्वच्छ भारत के मुनादी
स्वच्छ भारत के मुनादी २ अक्टूबर के होईस अउ ‘स्वच्छ भारत’ के सपना ल पूरा करे बर सब सफाई करे म जुटगें। ‘जुटगें’ शब्द ह सही हावय काबर के ये दिन अइसना रहिस हे के प्रधानमंत्री ले लेके एक सामान्य मनखे तक सफाई के काम करिन। ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर, अनिल अम्बानी अउ सोनी सब चैनल के ‘तारक मेहता’ धारावाहिक मन ये अभियान म जुरगें। देश के जम्मो मनखे मन एक दिन सफाई करिन। फेर ‘प्रधानमंत्री’ के ‘स्वच्छ भारत’ के मुनादी होते रहिस अउ ये काम अभी तक चलत हावय।…
Read Moreनदिया के धार बहिस
नदिया के धार बहिस छुनुन—छुनुन छन कहिस. चउमासी कचरा मन धारोधार बोहागे, मटियाहा पानी मन सुग्घर अब छनागे. पी लौ ससन भर सब, गुरतुर कछार कहिस. .. नदिया के धार बहिस अब नइ बोहाव ग डुबकव हरहिन्छा, फरी—फरी पानी हे तउंरव छुरछिंदा. देखव दरपन कस अउ, मुॅंह ल निहार कहिस. .. नदिया के धार बहिस उजरा लौ तन ल अउ फरिहा लौ मन ल, सुस्ता लौ सुरता म खोजव लरकन ल. जॉंगर ह थक गे हे, गोड़ ल दव डार कहिस. .. नदिया के धार बहिस पयरी ला मांजथे, चूंदी…
Read Moreबुढ़वा कोकड़ा : हरप्रसाद ‘निडर’
हरप्रसाद ‘निडर’ जी के 42 कहानी मन के किताब ‘बुढ़वा कोकड़ा’
Read Moreसच बोले के काम सिरिफ सरकारी हे
सच बोले के काम सिरिफ सरकारी हे बाकी सब मुंहदेखी बात लबारी हे … ऐसे समे म चुप रहना सबसे बढ़े समझदारी हे – काबर के महिमा मंड़ित सिरिफ निंदाचारी हे सरकार अउ बयपारी जउन कहत हे वोला टी.वी. रेडियो गजट बगरात हे मनखे के सुख-दुख म भला कोन आंसू बरसात हे सच्छात धरम राज उतर के कहूं जनता के दुख गोहरही वोकर बात के कोनो असर नइ होय वो जतके लकठाही वोतके दुरियाही रेडियो टी.वी. गजट ल का फायदा सरकार समरथ हे वोकर जवाब के का फायदा सुराज राज…
Read Moreआके हमर गांव…
तैं झुमर जाबे रे संगी, आके हमर गांव तोला का-का बतांव, तोला का-का बतांव…. उत्ती म कोल्हान के धारा रेंगत हे बोहरही दाई जिहां मया बांटत हे जिहां बिराजे महादेव-ठाकुरदेव के पांव…. चारोंखुंट तरिया अउ डबरी जबड़ हे लोगन के मया पहुना बर अबड़ हे मया-भेंट पाबे अउ अंतस म ठांव… रंग-रंग के भाजी-पाला, आनी-बानी खाई मुसकेनी, अमारी अउ लम्हरी तोराई इढऱ के कढ़ी देख, मन होही खांव-खांव… सुशील भोले म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली, संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.) मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811 ईमेल – sushilbhole2@gmail.com ब्लाग – http://mayarumati.blogspot.in/
Read Moreछत्तीसगढ़ ला जनम दिन के बधई
अपन चुनर म जड़ एक नवा सितारा ले। अउ बछर भर मन भरके तैं इतरा ले।। कतको ऑंखी देख तोला अइसने फूटत हे। बचके रहिबे आतंकी अबके खतरा ले।। नवा नेवरिया के संग सुरू म नीक लागथे। हो घसेलहा गिनहा बने पसरा बगरा ले।। बचपने म पग पग म होवत हे धमाका।। कइसे निपटबो कोन जनी उमर सतरा ले।। बाहिरी बइरी संग लड़त मारत बनथे। उबाए परत हे अपने लइका अब थपरा ,ले।। मोर सोन चिरइया उड़ तैं सुछंद अगास। धान कोठी के ले दाना अउ जग म बगरा ले।।…
Read Moreचांटी मन के कविता
आज मोला एक ठन कविता लिखे के मन करत हे। फेर काकर उपर लिखअव ,कइसे लिखअव बड़ असमंजस में हव जी… मोर मन ह असमंजस में हे, बड़ छटपठात हे ।तभे चांटी मन के नाहावन ल देख परेव अउ कविता ह मन ले बाहिर आइस। चांटी मन माटी डोहारत हे भाई… जीव ले जांगर उठावट हे भाई… महिनत करे ल सिखावत हे भाई… हमन छोटे से परानी हरन, तभो ले हमन थिरावन नहीं आज के काम ल, काली बर हमन घुचावन नहीं। महिनत करना हमर करम हे, फल देवाइया ऊपर…
Read Moreमे हा चालीस बछर से रोज कोरट जावत हवव
आज करिया कोट के महिमा ला बतावत हववं, मे हा चालीस बछर से रोज कोरट जावत हववं, ए दारिक तोर फ़ैसला जरूर करवा दू हूं कहिथे, पर मोर नाम आथे तो रोघहा हा घर मा रहिथे, मोर से हर पेसी मा वो दु सौ रुपया पेसगी लेथे,, अउ कोरट बाबू मन संग सन्झा कुन चेपटी पीथे, बिहनिया उकील हा साहब के कुकुर ला घुमाथे, अउ मंझनिया ओखर डौकी बर साग भाझी लाथे , बिरोधी हा भगा गेहे,रात दिन के पेसी से हार के, तभो ले केस ला धरे हे मोर…
Read Moreसेन्ट्रल वर्सेस स्टेट
का फ़रक हवय सेन्ट्रल अउ रज्य सरकार के नौकरी म, एक आफ़िस महल कस,दुसर चलथे निच्चट झोपड़ी म। सेन्ट्रल वाले मन ला अपन तन्खा उप्पर अभिमान होथे, पर स्टेट वाले मन बर तन्खा केवल एक अनुदान होथे। सेन्ट्रल म काम के समय दस से छय कड़ाई से लागू होथे, स्टेट् कार्यालय म असली काम हा छय के बाद चालू होथे। सेन्ट्रल म बाबू बाबू होथे अउ अधिकारी हा अधिकारी होथे, राज्य सरकार म बाबू मन अधिकारी मन उप्पर भारी होथे। सेन्ट्रल म सीएल लेवब म कर्मचारी के प्राण निकल जाथे,…
Read More