[bscolumns class=”one_half”] चारो मुड़ा गियान के उजियार हो जाए अगियान के अंधियारी घलो मिट जाए, दिया जले मया-पिरीत के सबो अंगना अऊ दुवारी म, कुछु अइसन हो जाए ऐसो के देवारी म। समारू के बेटा घलो नवा कपड़ा पहिर सके, मंगलू के नोनी सुरसुरी जलाके फटाका फोर सके, दिखे बबा अऊ डोकरी दाई के चेहरा म खुसी के चिन्हारी न, कुछु अइसन हो जाए ऐसो के देवारी म। घमघम ले बाली के मारे धान के पउधा ह लहस जाए, डोली म फसल ह सोना-चांदी बरोबर चमक जाए, गुलाब अऊ गोंदा…
Read MoreYear: 2014
देवारी तिहार के बधई
[bscolumns class=”one_half”] अँधियारी हारय सदा , राज करय उजियार देवारी मा तयँ दिया, मया-पिरित के बार || नान नान नोनी मनन, तरि नरि नाना गायँ सुआ-गीत मा नाच के, सबके मन हरसायँ || जुगुर-बुगुर दियना जरिस,सुटुर-सुटुर दिन रेंग जग्गू घर-मा फड़ जमिस, आज जुआ के नेंग || अरुण कुमार निगम http://mitanigoth.blogspot.in [/bscolumns][bscolumns class=”one_half_last_clear”](देवारी=दीवाली,तयँ=तुम,पिरित=प्रीत,नान नान=छोटी छोटी,नोनी=लड़कियाँ, “तरि नरि नाना”- छत्तीसगढ़ी के पारम्परिक सुआ गीत की प्रमुख पंक्तियाँ, जुगुर-बुगुर=जगमग जगमग,दियना=दिया/दीपक,जरिस=जले, सुटुर-सुटुर=जाने की एक अदा,दिन रेंग=चल दिए,फड़ जमिस=जुआ खेलने के लिए बैठक लगना,नेंग=रिवाज)देवारी (सं० दावाग्नि) कछारों में दिखाई देनेवाला लुक। छलावा। उदा०: जानहुँ…
Read Moreकवित्त छंद
ऐती तेती चारो कोती, इहरू बिछरू बन, देश के बैरी दुश्मन, घुसरे हे देश मा । चोट्टा बैरी लुका चोरी, हमरे बन हमी ला, गोली-गोला मारत हे, आनी बानी बेश मा ।। देश के माटी रो-रो के, तोला गोहरावत हे, कइसन सुते हस, कब आबे होश मा । मुड़ म पागा बांध के, हाथ धर तेंदु लाठी, जमा तो कनपट्टी ला, तै अपन जोश मा ।। 2-. फेशन के चक्कर मा, दूसर के टक्कर मा, लाज ला भुलावत हे, गांव के टूरा टूरी । हाथ धरे मोबाईल, फोकट करे स्माईल,…
Read Moreनान्हे कहिनी : अच्छा दिन आगे
‘हलो! हलो!! ….. नेता जी, राम राम! मय समे बोलत हंव. हमर त अच्छा दिन आगे नेता जी, नाली साफ करत हन!’ सुन के नेता जी तम तमा के किहीस- ‘तोर आगू के नाली ल तेंह साफ नई करबे त काय मंय करहूं रे? नाली म कचरा तुमन डारत हव त तुही मन साफ करव. अउ सुन रे समें…’ समें ह नेता जी के बात ला काट के फोन ल अंजोरी ला देवत कहिस- ‘येदे अंजोरी घला बोलहूं कहत हे नेता जी’ ‘राम राम नेता जी’ अंजोरी बोले लागिस. ‘..…
Read Moreकविता : जोंधरा
भुईया वाले रे होगे बसुन्दरा । परोसी झोलत हावय जोंधरा ।। लोटा धर आईन मीठ-मीठ गोठियाईन हमरे पीड़हा पानी हमरे ला खाईन कर दीन पतरी मा भोंगरा । घर गय दुवार गय, गय रे खेती खार हमन बनिहार होगेन, उन सेठ साहूकार बांचीस नहीं रे हमर चेंदरा । सुते झन राहव रे अब त जागव चलव संगी जुरमिल हक ला मांगव खेदव रे तपत हॉंवय हुड़का बेंदरा । -राजकमल सिंह राजपूत दर्री – थान खम्हरिया मो. 9981311462
Read Moreकवित्त
हमरेच खेत के वो चना ला उखनवाके हमरेच छानी-मा जी होरा भुँजवात हे अपन महल-मा वो बैठे-बैठे पगुरावै देखो घर-कुरिया हमर गुंगवात हे. जांगर अउ नांगर ला जाने नइ जिनगी-मा सफरी ला छीये नइ दूबराज खात हे असली सुराज के तो मँजा इहि मन पावैं सपना सुराज के हमन ला देखात हे.. अरुण कुमार निगम आदित्य नगर, दुर्ग [छत्तीसगढ़]
Read Moreसरद्धा
बिहिनिया -बिहिनिया जुन्ना पेपर ला लहुटा – पहटा के चांटत – बांचत बिसाल खुरसी म बइठे हे। आजे काल साहर ले आहे गांव म। ज्यादा खेती खार तो नइहे फेर अतेक मरहा तको नइहे। ददा साहर में नौकरी करत रहिस हे। अपनो ह पढ़ई करत -करत इस्कूल म साहेब होगे हे। आना जाना लगे रहीथे। “जय शंकर भोले।” बिसाल दुवारी कोती ला मुड़ के देखथे। चुकचुक ले गोरिया, उंचपुर, छरहरा बदन के मनखे दुवारी म ठाढ़े हे। चक्क सुफेद धोती झकझक ले झोलझोलहा कुरता, देखे म मलमल अस कोवंर। टोटा…
Read Moreमाटी पुत्र या माटी के पुतला?
हमर इहां कोनो भी मनखे ल मूल निवासी के रूप म चिन्हारी कराए खातिर एक सहज शब्द के उपयोग करे जाथे- ‘माटी पुत्र” खास कर के राजनीति म। चाहे कोनो पार्टी के मनखे होय, कोनो पद म बइठे नेता होय सबके एके चिन्हारी- ‘माटी पुत्र”। फेर मोला लगथे के ‘माटी पुत्र” कहाए के अधिकार हर कोई ल नइ मिलना चाही, भलुक वोकर ‘माटी” खातिर ‘मया” अउ वोकरो ले बढ़ के माटी के पहचान जेला हमन भाखा, संस्कृति या अस्मिता के रूप म चिन्हारी करथन, एमा वोकर कतका अकन योगदान हे,…
Read Moreघुरवा के दिन घलो बहुरथे
दू तीन दिन होगे बहिनी ,बहिरी वाली ह नई आवत हे का ?बहिरी ह खियागे हे ,नवा बहिरी लेतेव।,तीहार ह घलो नजदीक हे। वा ! कहाँ ले बहिरी वाली आही। नई जानस का परंदिन बजार में अड़बड़ ,बहिरी बेचाइस,बहिरी के शार्टेज होगे रहीस ,ओखर डिमांड भारी बाड़गे रहीस। ब्लेक में घलो खोजे नई मिलत रहिस हे। हमर प्रधानमंत्री के प्रताप ले बहरी के भाग जाग गे हे।ओखर पांखी आगे हे। घर के कोनो कोंटा में लुकाय कलेचुप रहय ,तेन बहरी संग फोटू खिचीय बर होड़ मचे हे ,का मंत्री, विधायक,…
Read Moreश्रीशमि गणेश मंदिर नवागढ
बेमेतरा जिला के नगर नवागढ के हिरदय स्थल मा भगवान गणेश के एक ठन अब्बड़ जून्ना मंदिर हे एइसे माने जाथे के ये मंदिर के निर्माण इहां के राजा रहिस श्री नरवर शाह खुसरो हा संवत 646 मा तांत्रिक तरीका ले करईस । 6 फूट के एके ठन पथरा मा भगवान गणेश के पदमासन मुद्रा उकेरे गे हे । मंदिर के तीरे मा तब ले अब तक एक ठन शमी के पेड़ हवय, जेखर सेती ऐला ‘श्री शमी गणेश‘ के नाम ले जाने जाथे । गणेश के मंदिर अऊ ओखर…
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