पारंपरिक लोक गीत : मोर मन के मजूर

मोर मन के मजूर चले आबे नरवा करार म। नईं हे कोनों या मोरों सहारा, संग म जाथे तीर के जंवारा हॉ या तै हा आबे जरुर मोर मन के मजूर। नई सुहावै अन-पानी, कइसे के चलही जिनगानी। हौं या तैं आबे जरूर मोर मन के मंजूर। घरे म बइठ के सोचत रहिथौं, अंचरा म आंसू पोंछत रहिथौं। हॉ या तै आबे जरूर मोर मन के मंजूर। मरकी ल धर के सिरतोन मैं जाहूं, आभा मार के तू हीं ल बलाहूं। हॉ या तै आबे जरूर मोर मन के मंजूर।…

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का आदमी अस

अपन भासा के बोल न जाने, अपन भासा के मोल न जाने। जनम देवईया जग के पहिली, मॉ सबद के तोल न जाने।। पर भासा ल हितु मानथस।। झुंड म चले जिनावर हिरना, कीट पतंगा पंछी परेवना। संग भाई के चले न दु दिन, भूले, न पूछे पियारी बहना।। दाई ददा ल दुर भगाथस।। धरम करले धाम बनाले सत करम कर काम बनाले। धन दौलत कुछु साथ न जावे जिनगी म कुछु नाम कमा ले।। मानुस कस जी मानुस अस।। अपन हक छीने बर जान हितुवा अउ बइरी पहिचान। खाले…

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छत्तीसगढ़ी गजल

दसो गाड़ा धान हा घर मा बोजाय हे जरहा बिड़ी तबले कान म खोंचाय हे. एक झन बिहाती, चुरपहिरी दूसर देवरनिन मा तभो मोहाय हे. हाड़ा हाड़ा दिखत हे गोसाइन के अपन घुस घुस ले मोटाय हे. लगजाय आगी फैसन आजकल के आघू पाछू कुछू तो नइ तोपाय हे. तिनो तिलिक दिखही मरे बेर लहू ला दूसर के जियत ले औंटाय हे. चंदैनी मन रतिहा कुन अगास जइसे खटिया म अदौरी खोंटाय हे. न खाय के सुख कभू न पहिरे के भोकला संग म गॉंठ ह जोराय हे. स्व.बसंत देशमुख…

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अजब-गजब

अजब संसार होगे, चोर भरमार होगे चोरहा के भोरहा म चंउकीदार उपर सक होथे सच बेजबान होगे, झूठ बलवान होगे बईमान बिल्लागे ते, ईमानदार उपर सक होथे मुख बोले राम – राम, पीठ पीछु छुरा थाम बेवफा बिल्लागे ते वफादार उपर सक होथे रखवार देख बाग रोथे, जंगल म काग रोथे वरदी म दाग देख, थानादार उपर सक होथे दूभर ले दू असाड़, जिनगी लगे पहाड़ नैनन सावन-भादो, एला खार-खेती कहिथे पानीदार गुनाह करे, कानून पनिया भरे जनता जयकार करे, एला अंधेरगरदी कहिथे ढेकना कस चूसथे, मुसवा कस ठूंसथे बोहाथे…

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बाढ़ ले आये बढ़वार

असाड़ बुलक गे सावनों निकलइया हे लपरहा बादर हा घुम घुम के भासन दे दे के रहि गे। बिजली घलो दू चार घॅव मटमटाइस । किसान मुहू फारे उप्पर डाहर ल देखत बोमियावत हे – गिर भगवान गिर। उप्पर वाले भगवान ह भुइया के भगवान ल फेर एक घव बेकुफ बना दिस। बेकुफ का बनाए बर लगही किसाने खुद बेकुफ हे। सरकार ह बोर कोड़वाय के मसीन निकाल देहे। मरहा खुरहा किसान के नान मुन डोली डांगर खेत खार ल खनके नाहर बना दे हे त तुम उप्पर वाले ल…

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सुकवा कहे चंदा ले

सुकवा कहे चंदा ले गांव-गंगा नइ दिखे चोला चिटियाएहे, मन चंगा नइ दिखे खुमरी नंदागे कहॉं, खुरपा नइ दिखे खार सिरागे कहॉ, करपा नइ दिखे बिलासपुर म जइसे अरपा नइ दिखे सुकवा कहे चंदा ले गांव-गंगा नइ दिखे खांसर नंदागे, दमांद आवै दुलरू बईला के गर म बाजे झूल घुंघरू नंदिया तीर बंसी बाजे उही बेरा म राग बखरी ह छेड़े कुऑं – टेड़ा म मुटियारी खोपा म वो दावना नइ दिखे सुकवा कहे चंदा ले गांव-गंगा नइ दिखे कोठार नंदागे, कोठा नइए लछमी अगोरत राहे दूध, दही, कोरनी नांगर…

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जागो हिन्दुस्तान

सुनो रे संगी ! सुनो रे सांथी ! सुनो मोर मितान ! देसी राज म गोहार होवथे, होगे मरे बिहान ! जागो-जागो, गा जवान ! जागो-जागो, गा किसान ! जागो, जम्मों हिन्दुस्तान ! अजादी संगी ! रखैल होगे, ठाट-बाट अउ पोट के अंधरा कानून कोंदा-भैरा, पग-पग म खसोट हे ईमान के इनाम लंगोटी, बईमान बिछौना नोट हे देस-राज बर सहीद होगे, होगे जे बलिदान दाना-दाना बर तरस जथे, तिंकर लइका अउ सियान ! जागो-जागो, …. देंवता कस मान पावथे, खादी म हुंर्रा-गिधवा सुवारथ के सरकार ए, चोर-लुटेरा मितवा जोगनी लुटइया…

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मुसवा के बिहाव

मुसवा गनेश भगवान ल कहिस, महाराज मैं तोला कतेक दिन ले बोहे-बोहे गिंजरत रइहौं पेट पीठ में बुता करत-करत मोर उमर ह पहा जाही। महू ला अपन गिरस्थी बसाना हे। मैं अपन बर जोड़ी पसंद कर डारे हाववं। अब बतावव मोर बिहाव करहू कि नहीं। अगर तुमन मोर बिहाव ल नइ करहू तव में हा कोरट में जाके सरकारी बिहाव कर लुहुं। मामला बड़ गंभीर होगे रिहसि। एकर सेती गनेश भगवान मुसवा ल धर के सीधा कैलास परबत गीस अउ महादेव अउ पारबती माता ल सरी बात ल बतइस। मुसवा…

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नेता मन के जनमदिन के पोस्टर हा साल भर पूरा राईपुर शहर मा चटके रथे

धान कस टुकुर-टुकुर देखत खड़े रहेव बियंग संजीव खुदशाह जब ले मै राईपुर आये रहेउं, नेतामन के जनमदिन के पोस्टर ला देख के मोर मन हा कसमसा के रईगीस। मोला लागीस के मै राईपुर नही कोनो नेता के घर मा पहुचगेव। को रे बाबु हमन ई नेता मन ला बोट देके अतके कन गलती करे हन, कि हमन अपन लईका के जनम दिन ला भुला जाथन। लेकिन ई नेता मन के जनमदिन के पोस्टर हा साल भर पूरा राईपुर शहर मा चटके रथे। ई मन राजयोग ला पाने वाला पूरा…

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छत्तीसगढ़ी 8वीं अनुसूची म कब? : सुधा वर्मा

8वींअनसूची म कोनो भी भासा ल लाय के मापदण्ड काय हावय, ये ह एक प्रस्न आय। 8वीं अनुसूची म कोनो भी भासा ल जाए बर ओखर पोट्ठ होना जरूरी हावय। राज्य के जनसंख्या या फेर भासा के बोलइया मनखे के संख्या ऊपर निरभर रहिथे। छत्तीसगढ़ ले कमती जनसंख्या अउ छेत्र वाला राज मणिपुर म मणिपुर भासा अउ कोकणी भासा सन् 1992 म 8वीं अनुसूची म आगे। सन् 2003 म बोडो अउ मैथिली 8वीं अनुसूची म आगे जबकि येखर अलग राज नइए। फेर छत्तीसगढ़ी काबर नहीं? 8वीं अनुसूची म आये बर…

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