बदलत हे मोर राज भइया बदलत हे मोर गांव जी बदलत हे लइका सियान अऊ बदलत हे मोर मितान जी शहर के जम्मों जिनिस बदलत हे बदलत हे रोज राह जी चऊंक अऊ कचहरी बदलत हे नई हे बईमानी के थाह जी शहर के अऊ का बात बतावंव गंाव डहर मय जांव जी पंच-सरपंच अऊ नियाव बदलत हे बदलत हे गांव के नाव जी कोन अंव भइया कहां ले आयेंव अब कोन ला मैं बतांव जी कोनों ला थोरको फुरसत नइहे काखर कर दुखड़ा सुनांव जी थके रहेंव तरिया कर…
Read MoreYear: 2014
बिखरत हे मोर परिवार
ददा ला कहिबे, त दाई ला कहिथे दाई ला कहिबे, त कका ला कहिथे कका ला कहिबे, त काकी ला कहिथे अब नई होवत हे निस्तार। बिखरत हे मोर परिवार।। गांव के जम्मां चऊंक चऊंक मा चारी चुगली गोठियावत हे देख ले दाई, देख ले ददा कहिके जम्मों करा बतावत हे सब्बों देखत हे संसार। बिखरत हे मोर परिवार।। एकठन चुल्हा रिहिस, एक ढन हड़िया साग ऐके मा चुरत रहय नई रिहिस काखरो संग झगड़ा ये झगड़ा मा कोन बयरी के नजर लगिस भरमार। बिखरत हे मोर परिवार।। …
Read Moreसत के रद्दा
कोना रूपया लाख कुढ़ोवे कोनो बल मा तोला दबावे झन तय कोना ला डरबे सत् के रद्दा मा चलबे मेकरा लार मा जाला ला बनाथे दू-चार दिन रहीे जिनगी बिताथे मोह मा पर के वो मेकरा हा भईया अपनेच जाला मा फंस मर जाथे झन तय अइसन गढ़बे सत् के रद्दा मा चलबे ये जिनगी तोर हे भंवरा बरोबर सुख सुरूज दुख चंदा बरोबर मीठ के लालच मा पर के गा भईया अपन डेरा मा उड़े ला भुलाथे झन तय लालच करबे सत् के रद्दा मा चलबे जादा कुढ़ेना मा…
Read Moreचुनई के बेरा
चुनई के जब बेरा आय बिपक्षी मन के खामी आ जाय पांच बछर जब राज करिस तब काबर नई सुरता देवाय चुनई के बेरा खामी बताय राजनीति के खेल ये भइया सब्बो संग मिलके गोठियाय वोट मांगे बर सब्बो घर पांइलाग सबके दुख बिसराय चार लंगुरूवा ला संग लेेके अपन नाम के छापा देखाय वोट छापा मा डारहू कहिके चंऊक मा भाषण सुनाय जम्मों कर अपील कहिके अपील मा मन ला मोहाय कुरता गहना सोना-चांदी दरूहा ला दारू पिलाय बड-बड़े पाम्पलेट छपवा के घर-घर मा बांटत जाय बनगे नेता त…
Read Moreसुरता लंव का दाई तोर गांव मा
सुरता लंव दाई का तोर गांव मा सुग्घर खदर छानी छांव मा जाना हे दूर कहिके खायेंव सटर-पटर गांव हावय दुरिहा रेंगेव झटर-पटर लागे हे भूख दाई खालंव का बासी पसिया मोर ले नई सहावय जियादा तपसिया सुरता लंव दाई का तोर गांव मा सुग्घर खदर छानी छांव मा बिहीनिया ले रेंगे रहेंव धरके मोटरी मोटरी मा हावय खुरमी-ठेठरी थकगे जांगर मोरे रेंगे नई जावय लागाथे भूख फेर नई खवावय सुरता लंव दाई का तोर गांव मा सुग्घर खदर-छानी गांव मा जरत हे भोंभरा तिपे हे भुंईया होगे सिरतोन घाम…
Read Moreतय जवान कहाबे
जा मोर बेटा तय जवान कहाबे, माता के रक्षा बर जान गंवाबे जा मोर बेटा तय जवान कहाबे। दुनिया मा किसम-किसम, के मनखे भरे हे कानो हे गरीबहा त, कानो धन ला धरे हे, अइसन के बीच रही, जिछुटठा झन कहाबे जा मोर बेटा तय जवान कहाबे। मालिक ला गुण नई लागयए जबरन खिसियाही गा थोरेक जादा कमाबे त, दुनिया सिसियाही गा अइसन अनदेखना के, तीर झन ओधियाबे जा मोर बेटा तय जवान कहाबे। पइसा के राहत ले जी, तीर मा ओधियाही गा हो जाबे गरीबहा त, मुंहू ला टेंडवाही…
Read Moreपुस्तक समीक्षा : माटी की महक और भाषा की मिठास से संयुक्त काब्य सग्रंह- ‘जय हो छत्तीसगढ़’
राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा को समुचित मान-सम्मान मिलने लगा है और यहां के निवासियों के मन में से अपनी भाषा के प्रति जो हीनता का भाव था वह भी समाप्त होने लगा है। इसलिए आजकल साहित्य की सभी विधाओं में छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रचुर मात्रा में लेखन हो रहा है। भाषा की समृद्धि और विकास के लिए यह सुखद और सकारात्मक संदेश है। यदि हम आज से तीस चालिस साल पहले की कल्पना करें जब छत्तीसगढी को देहातियों की भाशा कहकर तिरश्कृत किया जाता था और छत्तीसगढ़ी भाषी…
Read Moreभोजली गीत
रिमझिम रिमझिम सावन के फुहारे । चंदन छिटा देवंव दाई जम्मो अंग तुहारे ।। तरिया भरे पानी धनहा बाढ़े धाने । जल्दी जल्दी सिरजव दाई राखव हमरे माने ।। नान्हे नान्हे लइका करत हन तोर सेवा । तोरे संग मा दाई आय हे भोले देवा ।। फूल चढ़े पान चढ़े चढ़े नरियर भेला । गोहरावत हन दाई मेटव हमर झमेला ।। रमेश कुमार सिंह चौहान सुरता : छत्तीसगढ़ी भाषा अऊ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित छत्तीसगढ़ी काव्यांजली
Read Moreव्यंग्य : नवा सड़क के नवा बात
गरमी के दिन में बने नवा चमचमाती सड़क ह बरसात के पहिलीच पानी में हिरोइन के मेक-अप असन धोवागे अउ रेती, सिरमिट, डामर अउ बजरी गिट्टी मन भिंगे उड़िद दार के फोकला कस उफलगे। सड़क ह चुहके आमा के फोकला कस खोचका-डबरा होगे। जी पराण देके जनता के सेवा करइय्या भैय्या जी किसम के मनखे मन तुरते ये बात के शिकायत, सड़क बनवइय्या बड़े साहब मेरन जा के करिन। पत्रकार मन घला साहब मेरन पहुँचे रिहिन। पत्रकार मन साहब ला पुछिन-’’कस साहब! आजकल लाखों-करोड़ों रूपिया के बने पुल-पुलिया अउ चमचमाती…
Read Moreछत्तीसगढ़ के चिन्हारी आय- सुवा नृत्य
सुवा गीत नारी जीवन के दरपन आय। ये दरपन म वियोग, सिंगार, हास्य, कृषि, प्रकृति प्रेम, ऐतिहासिक, पौराणिक, लोककथा के संगे संग पारिवारिक सुख-दु:ख के चित्रण देखे बर मिलथे। पंजाब के लोक नृत्य भांगड़ा, असम के लोक नृत्य बिहू अउ गुजरात के लोकनृत्य गरबा कस छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य सुवा नृत्य के देस-विदेस म चिन्हारी कराये के उदीम आय। दुरूग के राय स्तरीय सुवा महोत्सव हा। सुवा नृत्य गौरी-गौरा के विवाह संस्कार ले जुडे हे अइसे लोक मान्यता हे। फेर सुवा के सुरुवात ले बिसरजन तक चिंतन करे के जरूरत हे।…
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