मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मेर उंखर जनम दिन म राज्य के वरिष्ठ साहित्यकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अउ रायपुर के पूर्व लोकसभा सांसद श्री केयूर भूषण ह सौजन्य मुलाकात करिन। श्री केयूर भूषण ह मुख्यमंत्री ल अपन पुस्तक ‘पथ’ भेंट कर जनम दिन के बधाई अउ शुभकामनाएं दीन। डॉ. रमन सिंह ह फूलमाला ले श्री केयूर भूषण के स्वागत करत उंखर आशीर्वाद लिहिन। अप मन जानत होहू के मुख्यमंत्री ह 15 अक्टूबर के दिन अपना जनम दिन अपन निवास परिसर म आम जनता के संग मनाइस।
Read MoreYear: 2016
पर्यटन गतिविधियों ल बढ़ावा देहे प्रदेश म लउहे उदीम करे जाही
ट्रायबल टूरिज्म सर्किट बर अंताजन सौ करोड़ पास छत्तीसगढ़ राज्य म सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धार्मिक अउ प्राकृतिक विविधता ले सम्पन्न हे। प्रदेश म पर्यटन के अपार संभावना हे। पर्यटन गतिविधियों ल बढ़ावा देहे खातिर प्रदेश अउ प्रदेश के बाहर ले अवइया पर्यटक मन ल जरूरी सुविधा देहे खातिर पर्यटन योजना मन उपर अउहे उदीम करे जात हे। प्रदेश के आदिवासी संस्कृति ले पर्यटक मन ल परिचित कराये बर ट्रायबल टूरिज्म सर्किट के विकास बर भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय ले 2015-16 म 99 करोड़ 94 लाख रूपया पास कराये गए हे। ये…
Read Moreलोक कथा : कोपरी के महल
एक राज में एक राजा राज करय। राजा के छै झन रानी रहय फेर एको झन के लइका नइ रहय। एक झन संतान के बिना राजा ला राजपाट, धन-दोगानी, महल-अटारी सब बिरथा लागे। रातदिन राजा ह संसो में पडे रहय कि मोर बाद ये राजपाट के काय होही। संसो के सेती राजा के मुँहु करियावत रहय अउ काया ह लकड़ी कस सुखावत रहय। राजा के अइसन दसा ला देख के एक दिन मरदनिया ह किहिस-‘‘राजा साहेब! जादा संसो झन करव। एक बिहाव अउ कर लेव, हो सकथे करम में कहूँ…
Read Moreपर्यटन ल बढ़ावा देहे बर जबर उदीम करबो : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ह जगदलपुर के पुरातत्व संग्रहालय के करिस अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ह कहिस के बस्तर संभाग म पर्यटन ल बढ़ावा देहे बर राज्य सरकार हरसंभव उदीम करत हे। उमन कहिन के जगदलपुर के जिला पुरातत्व संग्रहालय म आकर्षक ढंग ले प्रदर्शित जुन्ना जिनिस मन ले दर्शक मन ल अउ पर्यटक मन ल बस्तर के ऐतिहासिक अउ सांस्कृतिक महत्व ल जाने अउ समझे के अवसर मिलहि। मुख्यमंत्री ह आज संभागीय मुख्यालय जगदलपुर म स्थित बस्तर जिला पुरातत्व संग्रहालय के अवलोकन के समय अईसन विचार व्यक्त करिन। उमन बस्तर के…
Read Moreतडफ़त छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढिय़ा
कौशिल्या दाई अउ सृंगी रिसि के पौरानिक भुंइया अउ सिरीराम के करमभुंइया रेहे छत्तीसगढ़ ह अपन बहिनी राज मध्यप्रदेस संग चौवालीस बछर संग रेहे के बाद एक नवम्बर सन् 2000 के देस के छब्बीसवां राज के रूप म अलग होइस। देस के खनिज के 38 प्रतिसत भाग, 4.14 प्रतिसत भुंइया अउ जंगल, नदिया, प्राकृतिक सम्पदा लेके धन, कला-संस्कीरति, धरम जम्मो म समृध हमर छत्तीसगढ़ ह जब अलग राज बनिस त छत्तीसगढिय़ा मन ल अड़बड़ आस रहीस। सबो आंखी म हजारों ठन सपना रहीस। नान-नान काम बर अब भोपाल के मुंह…
Read Moreखुमान लाल साव ल मिलिस संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के युगपुरुष अउ लोकमंच के सबले जादा सफलतम प्रस्तुति मन मे ले एक चन्दैनी गोंदा के संचालक श्री खुमानलाल साव ल 04 अक्टूबर 2016 म राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणव मुखर्जी ह प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ले सम्मानित करिन। राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली के दरबार हाल म आयोजित एक बड़का अउ मानकड़ी समारोह म राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ह श्री खुमानलाल साव समेत कला के क्षेत्र म उल्लेखनीय योगदान देवईया देश के चुनिंदा 43 कलाकार मन ल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ले सम्मानित करिन। ये समे म गुरतुर गोठ…
Read Moreअभिनय के भूख कभी नइ मिटय : हेमलाल
हास्य अभिनेता हेमलाल अउ विजय मिश्रा के गोठबात ‘भोजन आधा पेट कर दोगुन पानी पीवा, तिगुन श्रम, चौगुन हंसी, वर्ष सवा सौ जीवा।’ हंसना उत्तम स्वास्थ्य अउ लम्बा जीवन खातिर एक अरथ म बहुत बड़े ओखद आय। कवि काका हाथरसी के लिखे कविता के ए लाईन मन हर बतावत हावंय। हंसी हर बिना दुख तकलीफ के कसरत तको आय। तभो ले आज के जमाना म लोगन कहिथें कि जउन हँसही तउन फंसही- अइसन गलत विचार ल बदल के जउन हँसही तउन बसही। ल जन-जन म फैलाय खातिर भिड़े दुर्ग म…
Read Moreगुरतुर गोठ के आठ बरिस
2 अक्टूबर 2008, आजे के दिन, आठ बरिस पहिली हम छत्तीसगढ़ी साहित्य ल मेकराजाला म लाये के बाना चढ़ावत, गुरतुर गोठ नाव के ब्लॉग ले रेंगना सुरू करे रहेंन. बाद म हम येला बेब-पोर्टल के रूप देहेन, अउ नाना प्रकार के परेसाानी अउ झंझट के बाद घलो येला सरलग आज तक चलावत हन। आठ बछर पहिली उही ब्लॉग म हमर वरिष्ठ संपादक आदरणीय सुकवि बुधराम यादव जी के संपादकीय प्रकाशित होए रहिसे तेला आज फेर प्रकाशित करत हन- दू आखर : सम्पादकीय साहित्य कउनो भाखा , कउनो बोली अउ कउनो…
Read Moreलोक कथा : जलदेवती मैया के वरदान
एक गाँव में एक साहूकार रहय। साहूकार के सोला साल के सज्ञान बेटी रहय। साहूकार के पूरा परिवार र्धािर्मक रहय। साहूकार के दुवारी में आय कोन्हों मंगन जोगी कभुदुच्छा हाथ नइ जावय। भूखन ला भोजन देना, पियासे ला पानी पिलाना अउ भटके ला रद्दा बताना साहूकार के परिवार ह सबले बड़े धरम समझे। साहूकार के बेटी निसदिन अपन कुल देवता के पूजा पाठ करके दान-पुण्य करय। कुछ दिन के बाद लड़की के बिहाव दूसर राज के साहूकार के बेटा संग होगे। ससुरार जाय के पहिली लड़की ह बने मन लगा…
Read Moreपितर पाख म साहित्यिक पुरखा के सुरता – विद्या भूषण मिश्र
बगुला के पांख कस पुन्नी के रात, गोरस मं भुइंया हर हावय नहात ल बुढवा के चुंदी कस कांसी के फूल, आंखी दुधरू दुधरु खोखमा के फूल। लेवना कस सुग्घर अंजोरी सुहाय, नदिया के उज्जर देंहे गुरगुराय। गोकुल के गोरी गोपी अइसन् रात, तारा के सुग्घर फूले हे फिलवारी। रतिहा के हाँथ मं चांदी के थारी, पंडरा पंडरा लागै खेत अउ खार नवा लागय जइसे गोरस के धार, घेरी बेरी दिया झांकै लजात आमा के छईहाँ संग उज्जर उज्जर अंजोरी, दुःख सुख जइसे बने जांवर जोरी। कई दिन के गर्मी…
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