छन्द के बारे में जाने के पहिली थोरिक नान-नान बात के जानकारी होना जरूरी है जइसे अक्छर, बरन, यति, गति, मातरा, मातरा गिने के नियम , डाँड़ अउ चरन, सम चरन , बिसम चरन, गन . ये सबके बारे मा जानना घला जरूरी हे. त आवव ये बिसय मा थोरिक चर्चा करे जाये. आपमन जानत हौ कि छत्तीसगढ़ी भाखा हर पूरबी हिन्दी कहे जाथे. हिन्दी के लिपि देवनागरी आय अउ छत्तीसगढ़ी भाखा घला देवनागरी लिपि मा लिखे अउ पढ़े जाथे.जेखर बरनमाला मा स्वर अउ बियंजन रहिथे. ये बरन मन ला…
Read MoreYear: 2016
छन्द के छ : दू आखर
सुग्घर कविता अउ गीत, चाहे हिन्दी के हो, चाहे छत्तीसगढ़ी के, सुन के मन के मँजूर मस्त होके नाचना सुरु कर देथे. इही मस्ती मा महूँ अलवा-जलवा कविता लिखे के उदीम कर डारेंव. नान्हेंपन ले साहित्यिक वातावरन मिलिस. कविता अउ गीत त जइसे जिनगी मा रच-बसगे. बाबूजी के ज्यादातर कविता छन्द मा लिखे गये हें ते पाय के मोरो रुझान छन्द बर होना सुभाविक हे. अलग-अलग छन्द के बारे मा जाने के, सीखे के अउ लिखे के बिचार करके दुरूग, भिलाई, रइपुर, बिलासपुर के किताब दुकान मन ला छान मारेंव…
Read Moreसुजान कवि के सुजानिक छन्द कविता : छन्द के छ
छत्तीसगढ़ी के परथम समरथ कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा के बाद कवि श्री कोदूराम दलित तक छन्द म लिखइया पोठ साधक कवि रहिन. उंकर छन्द म लिखे छत्तीसगढ़ी कविता म जीवन के संदेस समाए हे कवि श्री कपिल नाथ कश्यप जी दोहा चौपाई के भरपूर उपयोग करे हें. दूसर जतका छन्द के समझ वाले छत्तीसगढ़ी कवि हें, वोमन रिसी मुनि के समान हे, वोमन के अपन छन्द विधान हे. कहे हें दोहा, फेर दोहा के कोनो लच्छन नइ दिखे. चौपाई घलो म चलन के भटकाव हे. कहे के माने दू…
Read Moreतेजनाथ के गजल
छोटे छोटे खड़ म तो , दुनिया बट जाही , अउ छोटे छोटे करम ले संगी , दुनिया सज जाही । “अकेल्ला मैं का कर सकथौ” झन सोंच, तोर मुस्कुराये ले सबके खुसी बढ़ जाही । दुख दरिदरी , परसानी पहाड़ जस हे भले, फेर किरचा किरचा म संगी ,पहाड़ टर जाही | तैं नहीं त कोन ,तहीं बता तोर घर के सजईया ? देखा हिजगी म दुनिया , दुख दरिदरी ले अउ पट जाही । खुद ल समझ ले अउ दुसरो ल समझ ले, सुख समरिद्धि ले मनखे मनखे…
Read Moreव्यंग्य : ममा दाई के मुहुं म मोबाइल
रात बेरा के बात आय। रइपुर ले जबलपुर बस म जावत रेहेंव। बारह बजे रहिस होही। बस म बइठे सबो यात्री फोये-फोये नाक बजावत सुतत रहीन। उही बेरा म मोर आघु सीट म बइठे डोकरी दाई के मोबाइल टीरिंग-टीरिंग बाजे लागिस। मोर नींद ह टूट गीस। मे देखेंव डोकरी दाई ह झट ले मुहुं म मोबाइल ल दता के गोठियाय लगीस- ”हां बोल भांची। मेहर ममादाई बोलथो।” ममा दाई अउ भांची के गोठबात हर अबड़ बेर तक चलीस। जेमा एको ठिन जरूरी बात नई रहीस जेला रात के बारह बजे…
Read Moreगुरतुर भाखा : छत्तीसगढ़ी कविता पाठ
कृष्ण कुमार पाटिल के नवा एल्बम- ये एल्बम ल आप येदे कड़ी ले डाउनलोड़ कर सकत हव. लगभग 53 एमबी आरंभ में कृष्ण कुमार पाटिल जी के संबंध में प्रकाशित एक आलेख – भारतीय शास्त्रीय संगीत में छत्तीसगढ़ी बंदिशें
Read Moreचंदैनी गोंदा म संत कवि पवन दीवान के लोकप्रिय गीत
तोर धरती तोर माटी रे भैय्या तोर धरती तोर माटी लड़ई झगड़ा के काहे काम जे ठन बेटा ते ठन नाम हिंदू भाई ल करौ जैराम मुस्लिम भाई ल करौ सलाम धरती बर वो सबे बरोबर का हाथी का चांटी रे भैय्या झम-झम बरसे सावन के बादर घम-घम चले बियासी के नागर बेरा टिहिरीयावत हे मुड़ी के ऊपर खाले संगी तंय दू कौरा आगर झुमर-झुमर के बादर बरसही चुचवाही गली मोहाटी रे भइया फूले तोरई के सुंदर फुंदरा जिनगी बचाये रे टूटहा कुंदरा हमन अपन घर में जी संगी देखो…
Read Moreनंदावत जांता : वीडियो
जांंता पुरखा के हमर, कनकी पिसे पिसान। रोटी लागय बड़ गुतुर, खाके देख मितान।। नंदावत जांता ल, हेमलाल साहू के बनाये वीडियो म देखव-
Read Moreछत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण – 2016
आज संस्कृति विभाग के सभागार म संस्कृति अउ पर्यटन मंत्री दयाल दास बघेल ह छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण 2016 के घोषणा करिन। सम्मान पवईया मन ल ये अलंकरण काली राज्योत्सव के समापन के बेरा म देहे जाही। ये बछर के राज्य अलंकरण खाले म देहे अनुसार देहे जाही – आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास विभाग कोती ले आदिवासी अउ पिछड़ा वर्ग बर देहे जाने वाला सम्मान शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान श्री सैन कुमार मण्डावी, ग्राम भानपुरी, धमतरी ल, खेल एवं युवा कल्याण विभाग कोती ले खेल बर देहे जाने वाला…
Read Moreछत्तीसगढ थापना परब अउ बुचुआ के सुरता
सोला साल के राज्य के स्थापना दिवस बर एक जुन्ना कहानी- बुचुआ के गांव म एक अलगे धाक अउ इमेज हे, वो हर सन 68 के दूसरी कक्षा पढे हे तेखरे सेती पारा मोहल्ला म ओखर डंका बाजथे । गांव के दाउ मन अउ नवां नवां पढईया लईका मन संग बराबर के गोठ बात करईया बुचुआ के बतउती वो हर सन 77 ले छत्तीसगढ राज के सपना संजोवत हे तउन ह जाके 2000 म पूरा होये हे । सन 1977 म मनतरी धरमपाल गुप्ता के झोला मोटरा ल धरईया बुचुआ…
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