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गोठ बात

नवरात मा दस दोहा

1~भक्ति भाव भक्कम भरे, बंदन बदन बुकाय।
राम-राम बड़ जीभ रटे, छूरी पीठ लुकाय।

2~ चंदन चोवा चुपर के, सादा भेस बनाय।
रंगरेलिहा मन हवै, अंतस जबर खखाय।

3~जप-तप पूजा पाठ ले, नइ छूटय जी पाप।
मन बैरागी जे करय, वोला का संताप।

4~ माया मोय मा मन रमे,भगवन मंदिर खोज।
अंतस अपने झाँक ले, प्रभू दरस हे रोज।

5~ नौ दिन देवी देहरी, भंडारा दिनरात।
लांघन महतारी मरे, कइसे बनही बात।

6 ~देवी सेवा जस करे, करथे कैना भोज।
महतारी के कोख मा, बेटी हतिया रोज।

7~तन ला तपसी तैं करे, मन मा महुरा खोट।
देवी दरशन दोगला , नारी तन मा चोट।

8~कर्मकाण्ड सब अबिरथा, कतको करले जाप।
असल करम जब बिगड़हा, बढ़ते जाही पाप।

9~पहिरे कंठी मुंदरी, माला बड़ ढरकाय।
गंगा जमुना के बुड़े, मन नइ तो फरियाय।

10~ढोंग ढंचरा ढोंगिया, छोड़ सुवारथ काम।
आनी-जानी हे जगत, परहित करले नाम।

कन्हैया साहू “अमित”
भाटापारा
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