नँदिया तरिया बावली, भुँइयाँ जग रखवार। माटी फुतका संग मा, धरती जगत अधार।। जल जमीन जंगल जतन, जुग-जुग जय जोहार। मनमानी अब झन करव, सुन भुँइयाँ गोहार।। पायलगी हे धरती मँइयाँ, अँचरा तोरे पबरित भुँइयाँ। संझा बिहना माथ नवावँव, जिनगी तोरे संग बितावँव।~1 छाहित ममता छलकै आगर, सिरतों तैं सम्मत सुख सागर। जीव जगत जन सबो सुहाथे, धरती मँइयाँ मया लुटाथे।~2 फुलुवा फर सब दाना पानी, बेवहार बढ़िया बरदानी। तभे कहाथे धरती दाई, करते रहिथे सदा भलाई।~3 देथे सबला सुख मा बाँटा, चिरई चिरगुन चाँटी चाँटा। मनखे बर तो खूब…
Read MoreMonth: April 2018
किसानी के पीरा
खेत पार मा कुंदरा, चैतू रखे बनाय । चौबीसो घंटा अपन, वो हर इहें खपाय ।। हरियर हरियर चना ह गहिदे । जेमा गाँव के गरूवा पइधे हट-हट हइरे-हइरे हाँके । दउड़-दउड़ के चैतू बाँके गरूवा हाकत लहुटत देखय । दल के दल बेंदरा सरेखय आनी-बानी गारी देवय । अपने मुँह के लाहो लेवय हाँफत-हाँफत चैतू बइठे । अपने अपन गजब के अइठे बड़बड़ाय वो बइहा जइसे । रोक-छेक अब होही कइसे दू इक्कड़ के खेती हमरे । कइसे के अब जावय समरे कोनो बांधय न गाय-गरूवा । सबके होगे…
Read Moreपंडित शुकलाल पाण्डेय : छत्तीसगढ़ गौरव
हमर देस ये हमर देस छत्तीसगढ़ आगू रहिस जगत सिरमौर। दक्खिन कौसल नांव रहिस है मुलुक मुलुक मां सोर। रामचंद सीता अउ लछिमन, पिता हुकुम से बिहरिन बन बन। हमर देस मां आ तीनों झन, रतनपुर के रामटेकरी मां करे रहिन है ठौर।। घुमिन इहां औ ऐती ओती, फैलिय पद रज चारो कोती। यही हमर बढ़िया है बपौती, आ देवता इहां औ रज ला आंजे नैन निटोर।। राम के महतारी कौसिल्या, इहें के राजा के है बिटिया। हमर भाग कैसन है बढ़िया, इहें हमर भगवान राम के कभू रहिस ममिओर।।…
Read Moreअकती के तिहार आगे
अकती के तिहार आगे। लगन धर के बिहाव आगे। मड़वा गड़गे हरियर-हरियर पुतरा-पुतरी दिखता हे सुग्घर। मनटोरा के पुतरी, जसोदा के पुतरा तेल हरदी चघ गे, दाई दे दे अचरा। जसोदा के पुतरा के बरात आगे बरा सोहारी बराती मन खावथे। तिहारू ह मांदर मंजीरा बजावतथे। मनटोरा के पुतरी के होवथे बिदई कलप-कलप के रोवत हे दाई। नवा बहुरिया संग उछाह आगे अकती के तिहार आगे घर-घर लगन माड़गे। – डॉ.शैल चंद्रा रावणभाठा, नगरी, जिला धमतरी
Read Moreअकती के तिहार
छत्तीसगढ़ में अकती या अक्छय तृतीया तिहार के बहुत महत्व हे । ये दिन ल बहुत ही सुभ दिन माने गेहे। ये दिन कोई भी काम करबे ओकर बहुत ही लाभ या पून्य मिलथे। अइसे वेद पुरान में बताय गेहे। कब मनाथे – अकती के तिहार ल बैसाख महीना के अंजोरी पाख के तीसरा दिन मनाय जाथे। एला अक्छय तृतीया या अक्खा तीज कहे जाथे। अक्छय के मतलब ही होथे कि जो भी सुभ काम करबे ओकर कभू छय नइ होये। एकरे सेती एला अक्छय तृतीया कहे जाथे। परसुराम अवतार…
Read Moreअकती तिहार
चलव दीदी चलव भईया, अकती तिहार मनबोन ग। पुतरी पुतरा के बिहाव करबो, मड़वा ल गडीयाबोन ग। कोनो लाबो डारा पाना, कोनो तोरन बनाबोन ग। चलव लीपव अंगना परछी, अकती तिहार मनाबोन ग। चलव सजाबो दूल्हा दुल्हीन, सुरघर महेंदी लगाबोन ग। दुदुंग दुदूंग बजही बाजा, दूल्हा दुल्हीन ल नचवाबोन ग। अकती के दिन सबले बढ़िया, चलव सुरघर टिकावन टिकबोन ग। अकती दिन महुरत लगे न सहुरत, चलव बर बिहाव ल करबोन ग। युवराज वर्मा बरगड़ा (साजा) जिला बेमेतरा
Read Moreआज के बड़का दानव
अभिच कुन के गोठ हवै। हमर रयपुर म घाम ह आगी कस बरसत रिहिस, जेखर ले मनखे मन परसान रिहिस। मेहा एक झन संगवारी के रद्दा देखत एक ठन फल-फूल के ठेला के तीर म बैठै रहव। ओ ठेला वाला करा अब्बड झन मनखे मन आतिस, अऊ अपन बड़ महँगा जिनिस लेके चल देवय। आप मन ह सोचत होहू कि फल-फूल वाला करा काय महाँगी समान होही? ओ समान रिहिस गुटका, बीड़ी, माखुर, सिगरेट, जरदा जैसे निशा के समान। असल म वो ठेला वाला मेर फल-फूल, कुरकुरे-पापड़ी के संग म…
Read Moreजब बेंदरा बिनास होही
वो दिन दुरिहा नई हे, जब बेंदरा बिनास होही, एक एक दाना बर तरसही मनखे, बूंद बूंद पानी बर रोही, आज जनम देवैया दाई-ददा के आँखी ले आँसू बोहावत हे, लछमी दाई कस गउ माता ह, जघा जघा म कटावत हे, हरहर कटकट आज मनखे, पाप ल कमावत हे, नई हे ठिकाना ये कलजुग में, महतारी के अचरा सनावत हे, मानुष तन में चढ़े पाप के रंग ल, लहू लहू में धोही, वो दिन दुरिहा नई हे, जब बेंदरा बिनास होही। भूकम्प, सुनामी अंकाल, जम्मो संघरा आवत हे, आगी बरोबर…
Read Moreडॉ.शैल चंद्रा के किताब : गुड़ी ह अब सुन्ना होगे
संगी हो ये किताब ल बने सहिन पीडीएफ बनाए नइ गए हे, तभो ले डॉ.शैल चंद्रा जी के रचना मन के दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से येला ये रूप में हम प्रस्तुत करत हवन। पाछू प्रकाशक या टाईप सेट वाले मेरे ले सहीं पीडीएफ या टैक्स्ट फाईल मिल जाही त वोला प्रकाशित करबोन। 1. सहर के गोठ 14. नंदागे लडकपन 27. भगवान के नांव म 40. आज के सरवन कुमार 2. बैसाखू के पीरा 15. फायदा 28. पढंता बेटा 41. इक्कीसवीं सदी के गंधारी 3. अपन-अपन भाग 16. आज के सीता…
Read Moreछत्तीसगढ़ी बोलबो
मया के मधुरस करेजा म घोलबो, गुरतुर बोली छत्तीसगढ़ी ल बोलबो। भाखा हे मोर बड़ सुघ्घर-सुघ्घर। सारी जिनगी मिल-जुल के लिखबो, बोली हे हमर बढ़िया भाखा हे, गोठियाये के मन म बड़ अभिलासा हे। सारी जगहा अपन बोली-भाखा ल, बगराबो छत्तीसगढ़ी भाखा गोठियाबो। जुन्ना-नवा परंपरा ल अपनाबो, छत्तीसगढ़ी संस्कृरिति ल सब्बो ल जनाबो। संगी-जहुरिया संग छत्तीसगढ़ी गोठियाबो। अपन बोली भाखा ल अपनाबो। जोहार छत्तीसगढ़ के नारा सब्बो जगहा लगाबो, छत्तीसगढ़ी गोठियाबो, छत्तीसगढ़ी गोठियाबो। अनिल कुमार पाली, ‘जुगनी’ तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़। प्रशिक्षण अधिकारी आई टी आई मगरलोड धमतारी मो.न.-7722906664,7987766416 ईमेल:- anilpali635@gmail.com
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