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कविता

अईसने चुनई आथे का

अईसने चुनई आथे का
नकटा ह नाचथे,
अऊ बेशरम ताल मिलाथे।
लाज नीं लागय कोनों ल,
कूटहा ल संगे संग घुमाथे।
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

मद अऊ मऊहा के हिसाब,
करमछड़हा मन बईठ जमाथे।
कुकरी बोकरा के रार मचाथे,
उछरत बोकरत मनखे चिल्लाथे।
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

गाड़ी मोटर फटफटी,
जो गांवें गाँव दऊड़ाथे।
धरम के ठेकेदार मन घलो,
घरों घर खुसर आरों लगाथेI
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

मीठ मीठ गोठिया के कीथे,
बासी बड़ सुहाथे ।
वादा उपर वादा करके,
दिन में चंदा देखाथे ।
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

फाफा, बतरकीरी कस,
हपटत गिरत जगा जगा झपाथे ।
पाख जरगेहे तभो ले,
घोलन घोलन के मनखे ल मनाथे ।
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का !

गाँव गाँव में गदर मचाथे,
दारु ले सस्ता खून बोहाथे ।
दूध दही ल कोनों नीं पूछे,
सत ईमान ल अंधरौटी छाथे ।
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

येकर दांव ओकर पेंच,
जेकरे लाठी ओकरे भईस।
लेड़गा के दिन बिसरथे,
कोंदा तको चिल्लाय बर धरथेI
देख तो संगी अईसने चुनई आथे का!

भाई भाई लड़थे बईरी बन,
चुनई के चक्कर में निकलथ हे दम।
डोकरी काहते हे डोकरा ले,
चंदोर चुनई आय हे तबले,
रात दिन मरत हन हम।

विजेंद्र वर्मा अनजान
नगरगांव(धरसीवां)

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