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कविता

गांव के पीरा

गांव ह गंवागे हमर शहर के अबड़ देखाई मा।
मया अउ पीरा गंवागे सवारथ के सधाई मा।।
सोनहा हमर भुइयां गवांगे कारखाना के लगाई मा।
दुबराज धान के महक गंवागे यूरिया के छिंचाई मा।
ममा मामी कका काकी गंवागे
अंकल आंटी कहाई मा
सुआ नाच के गीत गंवागे
डी जे के नचाई मा।।
बिसाहू भाई के चौपाल गंवागे
टी वी के चलाईं मा।
किसान मन के ददरिया गंवागे
चाइना मोबाइल धरई मा।
पहुना मन के मान गंवागे
राम रहीम के गोठ गंवागे
आपस के लड़ाई मा,
सुघ्घर हमर संस्कार गंवागे
दारू गांजा के पियाई मा।।
गियाँ अउ मितान गंवागे
सवारथ के खाई म
मया के हमर बंधना गंवागे
एक दूसर जे अनदेखाई मा।

अविनाश तिवारी

अमोरा जांजगीर चाम्पा

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