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गोठ बात

चौसठ यांत्रिक कला के माहिर विश्वकर्मा

हमर देश मा आदिकाल से नवा नवा जिनिस के निर्माण अउ सिरजन चले आवत हे। शास्त्र मा अस्त्र शस्त्र से ले के नगर बसाय के गुण वाले देव धामी मन के जनम धरे के जानकारी हावय ।एमा निर्माण अउ सिरजन के देवता माने आज के शबद में आर्किटेक्ट , इंजीनियर , मिस्री के रुप विश्वकर्मा भगवान ला जाने जाथे।

माघे शुक्ले त्रयोदश्यां दिवापुष्पै पुनर्वसौ।
अष्टार्विंशति में जातो विश्वकर्मा भवनि च।।

विश्वकर्मा के जनम बर पुराण अउ शास्त्र मा अलग अलग कल्प मा अवतरण के अलग अलग कथा बताय गे हावय। एक जगा विश्वकर्मा के जन्म ला सागर मंथन से बताय गे हावय। अइसने एक जगा ओला ब्रम्हा के बेटा धरम जेकर बेटा वास्तुदेव ओखर बेटा विश्वकर्मा ला बताय गे हावय। एमा कोनोंं किसम के शंका नइ होना चाही।अलग अलग युग अउ कल्प मा अवतरण अलग हो सकत हे।

शास्त्र मा विश्वकर्मा के बनाय अलग अलग जगा के महल, नगर बसाय के किस्सा मिलथे।विचित्र बिचित्र महल, नगर, रथ वाहन, अस्त्र शस्त्र, सिंहासन इन्द्रप्रस्थ, हस्तिनापुर, अलकापुरी, सुदामापुरी, द्वारकापुरी, पांडवपुरी,जगन्नाथपूरी के मंदिर, यमपुरी अउ सोना के लंका बनाय मा विश्वकर्मा के जादू हवय। कहे जाथे कि विष्णु के सुदर्शन चक्र, शिव के त्रिशुल , डमरु, इन्द्र के वज्र, यमराज के कालदण्ड अउ करण के कवच कुण्डल ला विश्वकर्मा हा बनाय रहिस। तीन लोक के विचित्र रथ पुष्पक विमान ला विश्वकर्मा हा बनाय रहिस जौन हा जल ,थल अउ अगास मा चल सकत रहिस।बइठइया के संख्या के अधार ले छोटे बड़े हो सकत रहिस। ओला 64 यांत्रिक कला मा माहिर देवता माने जाथे। जइसे सुनारी,लोहारी,बढ़ई, सुतारी, मिस्त्री, वास्तुकला । एकर सेती जतका निर्माण बूता मा लगे मनखे हे तौन एखर पूजा करथे।

नान्हे से नान्हे अउ बड़े से बड़े कारखाना मा विश्वकर्मा जयंती के दिन पूजा पाठ करे जाथे।ये दिन मालिकमन अपन चाकर मन ला इनाम , बोनस घलाव देथे अइसे मानता हे कि विश्वकर्मा पूजा ले सिरजन बूता मा बढ़त मिलथे। काबर कि सब पूजा पाठ तीज तिहार के पूजा सुख शांति अउ धन संपत्ति बर होथे फेर विश्वकर्मा पूजा काम के बढ़ती बर करे जाथे। एखरे सेती निर्माण बूता मा लगे जम्मो मनखे मन अपन मसीन, छिनी हथौड़ी, के पूजा करथे।निर्माण बूता ले जुड़े मनखे ला विश्वकर्मा कहे जाथे।

विश्वकर्मा के पाँच बेटा होइस मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी अउ दैवज्ञ ।सबोमन अलग अलग कला मा माहिर रहिन। मनु लोहा के कला मा माहिर, मय लकड़ी(काष्ठ) कला में माहिर, त्वष्ठा तांबा कला मा ,शिल्पी ईंटा कला मा अउ दैवज्ञ स्वर्ण कला मा माहिर रहिन। चारो जुग मा विश्वकर्मा के बनाय जिनिस हा आज ले परसिद्ध हावय।

कलजुग के विश्वकर्मा मन के हालत भारत देश मा बनेच खराब हे। कतको इंजीनियर, कर्मचारी ला काम बूता नइ मिलत हे। कतको ला काम बूता ले बइठारत हावय। सम्मान तो दुरिहा सही दाम अउ पगार नइ मिलत हे। एक डहर देश भर विश्वकर्मा के पूजा सरकारी, गैरसरकारी, निजी, समुह रुप मा उछाह मा होवत हे दूसर डाहर मंगल अउ चंदा मा जवइया देश के विश्वकर्मा के दशा बर सोंचइया कोई नइ हे। यक्ष प्रश्न हावय कि सँउहत विश्वकर्मा के पूजा कब होही।

हीरालाल गुरुजी “समय”
छुरा,जिला-गरियाबंद

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