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गोठ बात

जियत ले मारिस डंडा , मरिस त लेगिस गंगा

तइहा तइहा के बात आय। पैरी नदी के खंड़ म राजिम नाव के गांव रहय। राजिम म खालहे डहर महानदी अऊ पैरी नदी के संगम घला रहय। असाढ़ सावन म महानदी के पानी सिद्धा राजिम के गली म खुसर जाये तेकर सेती राजिम के घर दुवार म पानी भर जाय। बरसात के चार महिना म उहां के लोगन के जीना हराम रहय। राजिम के मनखे मन बहुतेच मेहनती रहय। रात दिन हकर हकर खेत खार म कमा कमाके अपन जान दे देवय। उंकर तिर पइसा के दुकाल नी रहय। राजिम के रहवइया ला सिरीफ एके ठिन परेसानी इही रहय के इलाज के सुबिधा अऊ पढ़हे लिखे के साधन सुबिधा अऊ बियापर के जगा नी रहय तेकर सेती बात बात बर रइपुर जाये बर परय। बरसात के दिन म रइपुर जाये बर घूम के बड़ दुरिहा रेंगे बर परय। पहिली पैरी नदी ला पार करय तहन महानदी ला पार करय। छोटे रसता म संगम परय फेर संगम के जगा अतेक गहेरी रहय के ओला पार करना असान नी रहय। पुरा पानी के दिन म संगम नहाके बर बड़ तकलीप होवय। संगम पार करे बर एक ठिन बड़े जिनीस डोंगा चलय। उहू तब चलय जब केंवट हा खेती खार के बूता काम ले निबरित होके अपन घर आके थिरा जाये अऊ पानी के धार देखके राजी हो जाये। डोंगा के किराया अतेक रहय के नानमुन मनखे मन डोंगा म नी चइघ सकय।

राजिम म सिरीफ अमीरेच मनखे नी रहय बलकी कुछ अइसे गरीब मन घला रहय जेकर मन तिर खुद के काम धनधा कुछु नी रहय। येमन खेत खार के दिन म खेत बनिहार बन जाये। बाचे दिन म काकरो घर बनाय। कभू छानी टपरई के बूता काम करय। अइसन बूता करइया कुछ मनखे मन अपन लोग लइका ला आगू बढ़हाये बर राजिम ला छोंड़े के फइसला करिस। येमन अपन घर दुवार ला बेंचके रइपुर के रसता धर लिस। फेर रईपुर के महंगई हा अस जियानिस के येमन ला अपन गांव वापिस होय बर मजबूर होय ला परगे। अइसन मनला राजिम म रेहे के जगा नी मिलीस तब येमन संगम के दूसर खंड़ म अपन नानुक बसती बसा डरिस जेकर नाव नवापारा धर दिस। बहुत बछर बाद नवापारा हा पारा ले गांव बनगे।

एक झिन कोसटा हा नवापारा गांव म महानदी खंड़ म झोफड़ी बनाके रेहे लागिस। ओहा रईपुर ले कपड़ा के काम धनधा सीख के आये रहय। जात के कोसटा रहय तेकर सेती ओला कपड़ा के समझ बहुत रिहीस। मांगा मंगठा के बूता बनेच जानय। ओहा नवापारा म कपड़ा के बेवसाय सुरू करिस। गांव गांव बजार बजार जाके दिन भर कपड़ा बेंचय। परिवार के गाड़ी जइसे तइसे खिंचा जाय। ओकर एक झिन ईसवर नाव के बेटा रिहीस। साधन सुबिधा के अभाव म पढ़हे लिखे नी पइस फेर अपन ददा के कपड़ा धंधा ला ननपन ले सीख गिस। ननपन ले गांव गांव बजार जाना करय। छेत्र म जान पहिचान घला बाढ़गे। तब तक नवापारा गांव हा सहराती रूप धरे लागिस। रईपुर ले नवापारा तक रेल चलगे। ईसवर बहुत मेहनती रिहीस। ओकर धनधा चल निकलिस। इही बीच ईसवर के बिहाव होगे। परिवार म दू बेटा एक बेटी के आगमन होके सनखिया बाढ़गे। ईसवर हा अपन मेहनत के बलबूता म नवापारा म दुकान बना डरिस। नवापारा हा बेवसाय के बड़का केंद्र बन चुके रिहीस। ईसवर के कायकल्प होगे। अभू ईसवर हा ईसवर सेठ बनगे। पइसा कमाके बड़का मनखे बन जाये के धुन म ईसवर हा अपन दई ददा उपर धियान नी दिस। सुख पाये के दिन म ओकर दई ददा ला भगवान लेगे। कुछ बछर म बेटी बेटा मन सग्यान होगे। बेटी के बिहाव बहुतेच सुघ्घर घर घराना देखके कर दिस। बेटा मन के बिहाव होगे अऊ वहू मन लोग लइका वाला होगे। बेटा बहू मन पढ़हे लिखे रिहीन। ओमन ईसवर के धंन्धा ला अऊ चमका दिन।

ईसवर तिर पइसा तो बहुत रिहीस फेर ओला कन्हो जानय निही। सधारन जान पहिचान तो बहुत रिहीस फेर ओकर नाव के कन्हो न सोर न पुछंता। जब पइसा हकन के कमा डरिस तब ओला नाव कमाये के भूत सवार होगे। ओहा नाव कमाये बर समाज म आना जाना अऊ समाजिक गतिबिधी म सामिल होय लगिस। धीरे धीरे समाज म ओकर जान पहिचान अऊ पकड़ बने लगिस। समाज म पदाधिकारी बन गिस। समाज सुधार के रंग रंग के ताना बुनत भासन देवय फेर ओकर बात के असर समाज म कन्हो ला नी परय। ओहा अपन बेटा बेटी मनले बिचार बिमर्स करिस तब ओला समझ अइस के महज भासन दे ले कुछ नी होवय बलकी करके देखाये बर परथे। करके देखइया के बात के असर समाज म परथे। जिनगी भर पाई पाई जोड़ के कन्हो मरहा खुरहा निचट गरीब तको ला एक पइसा के मदत नी करइया ईसवर ला काकरो मदत करे बर अपन खींसा ले एको पइसा खरचा करना बड़ भारी लगत रहय। नाव कमाये बर यहू कर लेहूं सोंचत रहय ईसवर हा।

एक दिन ईसवर ला पता चलिस के ओकर सास बिमार परगे। ओकर सास बपरी हा रांड़ी अनाथिन रहय। ओहा अपन मइके म रहय। ईसवर जानत रहय के ओकर सास तिर बहुत अकन खेत खार हाबे अऊ ओकर खवइया बेटा निये बलकी सिरीफ तीन झिन बेटी मन आय। ईसवर के दिमाग हा जिनगी भर हाय पइसा हाय पइसा सोंच सोंच के बिकरित हो चुके रिहीस। ओहा सास ला अपन घर लानके सेवा करे के बहाना ओकर खेत खार म हांथ मारे के सोंचिस। ओहा सोंचत रहय के सास डोकरी कतेक दिन जीही जइसे मरही तइसे ओकर खेत खार ला अपन बई के नाव करवाके कबजिया लेहूं अऊ अपन सास के बड़ सेवा करिस कहिके समाज म नाव घला कमा लेहूं। ओहा सास के लकवा मारे के खबर सुन अपन सास ला अपन घर लाने बर चल दिस। सास के मइके के मन ईसवर के कपटी दिमाग के आकलन नी कर पइस। बलकी घोर कलजुग म जिंहा कन्हो मनखे महतारी बाप के सेवा नी करय तिंहा सास के सेवा करे के बाना उठइया ईसवर ला अबड़ आसीरबाद घला दिन।

ईसवर के नाव के सोर उड़े लगिस। येती ईसवर के घर म नावा चरित्तर सुरू होगे। डोकरी के सेवा बहू मन ला जियाने लागिस। घर म कलह सुरू होगे। घर तीन कुटका म बंटागे। दुनों बेटा अपन अपन सुवारी ला धरके ईसवर के बनाये समपति म कबजा करके अलग अलग रेहे लगिस। ईसवर फेर वापिस उही तिर पहुंचगे जिंहां ले सुरुवात करे रिहीस। नानुक खोली म ईसवर ओकर बई अऊ ओकर बिमार सास के गुजारा बड़ मुसकिल होगे। ईसवर हा सास के जीते जियत सरी खेत खार ला बेंच के अपन साढ़हू भाई मन ला फुस्सी चंटा दिस। साढ़ू मन बिरोध नी कर सकिन। सेवा के नाव म लगभग पूरा समपति म हांथ मार दिस ईसवर हा। बड़े जिनीस नावा मकान बना डरिस। मकान के पिछू म नानुक छितका कुरिया म सास डोकरी के बेवस्था कर दिस। न समे म सास ला खाये बर मिलय न पुछनता रहय कन्हो। अतगितान कस परे रहय। ओकर बेटी तको अपन महतारी बर धियान नी देवय। घर के आगू कोती निकलके आके बइठे तक के इजाजत नी रहय बपरी ला। धोखागड़ी म अइच जाय त दमांद बेटी ले गारी बखाना सुनय। बपरी के बांहा ला हेचकार के उठा देवय अऊ ओकर खोली म वापिस पटक देवय। समाज के संगवारी मन सास के सेवा करत हे ईसवर हा कहिके बड़ सराहना करय। पास परोस के मन घला सिरीफ इहीच बात लेके ईसवर के मान सममान करय। परिवार के मन घला ईसवर ला सरवन बेटा कहिके अबड़ अलार दुलार देवय। ओकर सारी अऊ साढ़ू भाई मन असलियत जानय तभो ले ईसवर के बई के चरचरा मुहुं के सेती काकरो तिर बता नी सकय। डोकरी के ना इलाज होवय न जतन भाव। कतेक दिन ले जिही बपरी हा। एक दिन उदुपले डोकरी आंखी मुंद दिस। को जनी रात कुन के मरे परे रहय के सनझाती के ………. कन्हो जानिन निही। बिहिनिया पता चलिस। आनन फानन म मसान घाट लेगे के तियारी होगे। जिनगी भर सेवा करिस अऊ ताते तात लेगे कहिके समाज म चरचा के बिसे बनगे। समाज के मनखे मन जथा नाव तथा गुन कहिके ईसवर के परसंसा करत नी अघावत रहय।

राजिम के संगम जइसे पबरित जगा ला छोंड़के , समाज म नाव कमाये बर अऊ अपन दबदबा देखाये बर डोकरी के हाड़ा सरोये बर गंगा लेगे। बेटा बेटी मन घला समसिया के अंत देख बाप तिर फेर जुरियागे। मईपिल्ला मिलके दस दिन म किरियाकरम अऊ खात खवई के बहुतेच जोरदार बेवस्था करे रिहीन। एक कोती ईसवर के सारी मन मने मन ईसवर ला गारी देवत जियत ले महतारी ला दे दुख ला दबे जुबान से केहे नी सकत रहय। त दूसर कोती समाज के बड़का ले बड़का मनखे मन ओकर किरियाकरम म सामिल होके सास ला गंगा म सरोके मुक्त कर दिस कहिके ईसवर के बड़ गुन गइन। गांव के नऊ हा सांवर बनाये बर हमेसा ईसवर के घर आवय। उही हा ईसवर के जम्मो असलियत ला जानत रहय। किरियाकरम के दिन बाहिर के मनखे मन के मुहुं ले ईसवर के तारीफ सुन सांवर बनावत ओकर मुहुं ले बात निकलगे – जियत ले मारिस डंडा , मरिस त लेगिस गंगा। नऊ अबड़ गोठकार आय कहिके ओकर बात ला न कन्हो धरिन न समझे के परयास करिन। कुछ छोटे मनखे मन समझिन फेर , तइहा तइहा बड़का मनखे मन के बड़ दबदबा रहय तेकर सेती , ईसवर के फरजी बेवहार हा ओ समे चरचा के बिसे नी बनिस। फेर अभू कन्हो बेटा बेटी ला अपन दई ददा के सेवा नी करत देखथे अऊ मरे के पाछू दहाड़ मारके रोके परेम देखाके किरियाकरम म देखावटी मनमाने खरचा करथे तेकर मन बर , नऊ ठाकुर के उही दिन के बात हा हाना अऊ ठेही के रूप म परचलन म दिख जथे के – जियत ले मारिस डंडा , मरिस त लेगिस गंगा ।

हरिशंकर गजानंद देवांगन , छुरा

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